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	<title>TSL Encyclopedia - User contributions [en]</title>
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	<updated>2026-04-10T23:17:50Z</updated>
	<subtitle>User contributions</subtitle>
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		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245743</id>
		<title>Saint Germain/hi</title>
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		<updated>2026-02-20T11:04:42Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0000144 poster-saint-germain-sindelar-1403 600.jpeg|thumb|दिव्य गुरु संत जरमेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संत जरमेन''' सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] हैं। अपनी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ी ]] महिला गुरु [[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टिया]] - जिन्हें न्याय की देवी भी कहते हैं - के साथ, वे [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुंभ युग]] के अधिपति हैं। वे स्वतंत्रता की ज्वाला के प्रायोजक हैं, तथा पोर्टिया न्याय की ज्वाला की। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जरमेन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी लोग जो सातवीं किरण का आह्वान करते हैं उन में ये एक सच्चे राजनीतिज्ञ में पाए जाने वाले सभी ईश्वरीय गुणों जैसे गरिमा, शालीनता, सज्जनता और संतुलन आदि को दर्शाते हैं। ये [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] द्वारा स्थापित [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हाउस]] के सदस्य हैं। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] आजकल इनके ट्रांसिल्वेनिया स्थित भवन में प्रतिष्ठित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''संत जरमेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जरमेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका ध्येय ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक दो हज़ार साल का चक्र सात किरणों में से एक के अंतर्गत आता है। [[Special:MyLanguage/jesus|ईसा मसीह]] छठी किरण के चौहान के रूप में पिछले 2000 वर्षों से युग के धर्मगुरु के पद पर कार्यरत थे। 1 मई, 1954 को संत जर्मेन और पोर्टिया को आने वाले युग (सातवीं किरण का चक्र) का निदेशक नियुक्त किया गया। सातवीं किरण कुम्भ राशि की है, तथा स्वतंत्रता और न्याय कुंभ राशि के स्त्री व पुरुष तत्त्व हैं। दया के साथ मिलकर वे इस [[Special:MyLanguage/dispensation|व्यवस्था]] (dispensation) में ईश्वर के अन्य सभी गुणों को दर्शाने का आधार प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन और पोर्टिया लोगों को सातवें युग और सातवीं किरण की एक नई जीवन तरंग, एक नई सभ्यता और एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। सातवीं किरण को [[Special:MyLanguage/violet ray|वायलेट लौ]] कहते हैं और स्वतंत्रता, न्याय, दया, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यविज्ञान]]और पवित्र अनुष्ठान इसके गुण हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सातवीं किरण के चौहान (स्वामी) के रूप में, संत जर्मेन वायलेट लौ के माध्यम से हमारी आत्माओं को [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] के विज्ञान और अनुष्ठान में दीक्षा देते हैं। रेवेलशन १०.७ में जिनके बारे में भविष्यवाणी की गयी थी ये वही सातवें देवदूत हैं। ये परमेश्वर के रहस्य के बारे में बताने आते हैं,और यही उन्होंने अपने &amp;quot;सेवकों और भविष्यवक्ताओं को बताया है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन कहते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
मैं एक आरोहित जीव हूँ, लेकिन हमेशा से मैं ऐसा नहीं था। एक या दो नहीं, बल्कि मैंने पृथ्वी पर कई जन्म लिए हैं, और मैं इस धरती पर वैसे ही घूमता था जैसे आज आप घूम रहे हैं। मेरा नश्वर शरीर भी भौतिक आयाम की सीमाओं में बंधा था। एक जन्म में मैं [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] पर था और एक अन्य जन्म में [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] पर। मैंने कई सभ्यताओं का विकास और विनाश देखा है। मानवजाति के [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] और आदिम काल तक के चक्र काल के दौरान मैंने चेतना के उतार चढ़ाव को देखा है। मैंने देखा है कि किस तरह अपने गलत चुनावों के कारण मनुष्य ने हज़ारों सालों के वैज्ञानिक विकास और प्राप्त की गयी उस उच्चतम ब्रह्मांडीय चेतना को खो दिया जो आज के युग में सबसे उन्नत धर्म के सदस्यों के पास भी नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ, मेरे पास कई विकल्प थे, और अपने लिए मैंने चुनाव स्वयं किया है। सही चुनाव करके ही स्त्री और पुरुष पदक्रम में अपना स्थान निर्धारित करते हैं। ईश्वर की इच्छानुसार चलने का चुनाव करके हम स्वतंत्र हो जाते हैं, मैं भी जन्म और मृत्यु के चक्र से स्वतंत्र हो गया और फिर इस चक्र के बाहर मुझे एक जीवन मिला। मैंने अपनी स्वतंत्रता लौ से प्राप्त की, कुम्भ युग के मूलस्वर से प्राप्त की जिसे प्राचीन आद्यवैज्ञानिकों ने ढूँढा है,  वही बैंगनी लौ जो संतजनों के पास रहती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आप नश्वर हैं। मैं अमर हूँ। हमारे बीच बस इतना ही अंतर है कि मैंने स्वतंत्रता का चुनाव किया है, और आपको यह चुनाव करना अभी बाकी है। हम दोनों की क्षमताएँ एक समान हैं, संसाधन भी एक समान हैं, और हम दोनों का उस एक (ईश्वर) से जुड़ाव भी समान है। मैंने अपनी ईश्वरीय पहचान बनाने का चुनाव किया है। बहुत समय पहले मेरे अंतर्मन से एक शांत एवं धीमी आवाज़ आयी थी: &amp;quot;ईश्वर की संतानों, अपनी ईश्वरीय पहचान बनाओ&amp;quot;। ऐसा लगा मानों ईश्वर ही कह रहे हों। रात के सन्नाटे में जब मैंने पुकार सुनी तो उत्तर दिया, &amp;quot;अवश्य&amp;quot;। उत्तर में पूरा ब्रह्मांड बोल उठा, &amp;quot;अवश्य&amp;quot; । जब मनुष्य अपनी इच्छा प्राक्जत करता है तो उसके अस्तित्व की असीमित क्षमता दिखती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं संत जर्मेन हूँ, और कुंभ युग की विजय के लिए मैं आपकी आत्मा और हृदय की अग्नि को अपने साथ ले जाने आया हूँ। मैंने आपकी आत्मा को [[Special:MyLanguage/initiation|दीक्षित]] करने का स्वरुप स्थापित कर दिया है... मैं स्वतंत्रता के पथ पर हूँ। आप भी उस पथ पर अपनी यात्रा आरम्भ करो, आप मुझे वहीँ पाओगे। अगर आप चाहोगे तो मैं आपका गुरु होना स्वीकार करूँगा।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;आई हैव चोसन टू बी फ्री,&amp;quot; {{POWref|१८|३०}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Ruler_of_a_golden-age_civilization&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== स्वर्ण युग की सभ्यता का शासक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Golden age in the Sahara Desert|सहारा मरुस्थल में स्वर्ण युग}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पचास हज़ार साल पहले संत जर्मेन उस उपजाऊ क्षेत्र - जहाँ आज सहारा मरुस्थल स्थित है - में स्वर्ण युगीन सभ्यता के शासक थे। एक सम्राट के रूप में, संत जर्मेन प्राचीन ज्ञान और भौतिक वृतों के ज्ञान में निपुण थे। लोग उन्हें अपने उभरते हुए ईश्वरत्व के मानक के रूप में देखते थे। उनका साम्राज्य सौंदर्य, समरूपता और पूर्णता की अद्वितीय ऊँचाई तक पहुँच गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ जैसे-जैसे यहाँ के लोग ईश्वर से विमुख हो अपनी इंद्रियों के सुखों में अधिक रुचि लेने लगे, ब्रह्मांडीय परिषद ने संत जर्मेन को वहां से हटने का निर्देश दिया। परिषद् ने कहा कि लोगों के कर्म ही अब से उनके गुरु होंगे। राजा ने अपने पार्षदों और लोक सेवकों के लिए एक भव्य भोज का आयोजन किया। उनके ५७६ अतिथियों में से प्रत्येक को क्रिस्टल का एक प्याला मिला जिसमें &amp;quot;शुद्ध इलेक्ट्रॉनिक सार&amp;quot; का अमृत भरा हुआ था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह अमृत संत जर्मेन ने उन्हें अपनी आत्मा की रक्षा के लिए उपहार-स्वरूप दिया था, ताकि जब कुंभ के युग में स्वर्ण युगीन सभ्यता को वापस लाने का अवसर आए, तो ये सब लोग अपने 'ईश्वरीय स्वरुप' को पहचान पाएं। और, साथ ही अन्य सभी लोगों को एक संकेत भी मिले कि जब मनुष्य अपने मन, हृदय और अपनी जीवात्मा को ईश्वर की आत्मा के निवास के लिए उपयुक्त बनाता है, तो ईश्वर अवश्य उनके साथ निवास करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भोजन के दौरान एक ब्रह्मांडीय गुरु - जिनकी पहचान उनके माथे पर लिखा शब्द 'विजय' था - ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने लोगों को आनेवाले उस संकट के प्रति आगाह किया जो उन्होंने ईश्वर में अपने अविश्वास के कारण आमंत्रित किया था; उन्होंने लोगों को अपने ईश्वरीय स्वरुप की उपेक्षा करने के लिए डांट लगाई; और यह भविष्यवाणी भी की कि जल्द ही यह साम्राज्य एक ऐसे राजकुमार के अधीन आ जाएगा जो राजा की पुत्री से विवाह करने का इच्छुक होगा। इस घटना के सात दिन बाद राजा ही और उनका परिवार स्वर्ण-युगीन सभ्यता के आकाशीय समकक्ष नगर में चले गए। अगले ही दिन एक राजकुमार वहाँ पहुँचे और उस राज्य का कार्यभार संभाल लिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;High_priest_on_Atlantis&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== अटलांटिस पर उच्च पुजारी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरह हज़ार साल पहले संत जर्मेन [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] के मुख्य भू-भाग पर स्थित वायलेट लौ मंदिर के मुख्य पुजारी थे। उस समय उन्होंने अपने आह्वानों और कारण शरीर द्वारा एक अग्नि स्तंभ - वायलेट लौ का एक फ़व्वारा - स्थापित किया था। यहाँ दूर दूर से लोग अपने शरीर, मस्तिष्क और जीवात्मा की शुद्धि के लिए आते थे। यह वे लोग वायलेट लौ का आह्वाहन तथा सातवीं किरण के अनुष्ठानों द्वारा प्राप्त करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन लोगों ने वायलेट लौ के मंदिर में सेवा की उन्हें [[Special:MyLanguage/Zadkiel|जैडकीयल]] के आकाशीय आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Temple of Purification|टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन]] में [[Special:MyLanguage/Melchizedek|मेलकिडेक समुदाय]] के सार्वभौमिक पुरोहिताई की शिक्षा दी गई। यह आश्रय स्थल उस स्थान पर था जहां आज क्यूबा द्वीप स्थित है। इस पुरोहिताई में धर्म और विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा दी जाती है। इसी स्थान पर संत जर्मेन और [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] दोनों का समुदाय में समावेशन हुआ था। स्वयं जैडकीयल ने कहा था, &amp;quot;आप सदा के लिए मेलकिडेक समुदाय के पुरोहित रहेंगे&amp;quot;। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अटलांटिस के डूबने से पहले जब [[Special:MyLanguage/Noah|नोआह]] अपना जहाज़ बना रहे थे और लोगों को आने वाले [[Special:MyLanguage/The Flood|जल प्रलय]] की चेतावनी दे रहे थे, उस समय महान दिव्य निर्देशक ने संत जर्मेन और कुछ अन्य वफ़ादार पुजारियों को मुक्ति की लौ को टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन से निकाल कर ट्रांसिल्वेनिया के कार्पेथियन तलहटी में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कहा। यहाँ उन्होंने ऐसे समय में भी स्वतंत्रता की अग्नि को प्रज्वलित करने का पवित्र अनुष्ठान जारी रखा जब ईश्वरीय आदेश के तहत मानवजाति को उनके कर्मों का फल मिल रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आने वाले अपने सभी जन्मों में महान दिव्य निर्देशक के मार्गदर्शन में संत जर्मेन और उनके अनुयायियों ने वायलेट लौ को पुनः ढूंढा और मंदिर की रक्षा भी की। इसके बाद महान दिव्य निर्देशक ने अपने शिष्य के साथ मिलकर लौ के स्थान पर एक आश्रय स्थल स्थापित किया और हंगरी के राजघराने राकोज़ी की स्थापना भी की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_prophet_Samuel&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== ईश्वर के दूत सेमुएल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Eli and Samuel.jpg|thumb|upright|''सेमुएल एली के घर पर उन्हें परमेश्वर के न्याय के बारे में बताते हुए'', जॉन सिंगलटन कोपले (१७८०)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Uncion de David por Samuel de Antonio Gonzalez Velazquez.JPG|thumb|एंटोनियो गोंज़ालेज़ वेलाज़क्वेज़ का चित्र जिसमें सैमुअल डेविड का अभिषेक कर रहे हैं]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ग्यारहवीं शताब्दी बी सी  में संत जर्मेन ने सैमुअल के रूप में अवतार लिया था। उस समय जब सभी लोग धर्म-विमुख थे, वे एक उत्तम धार्मिक नेता सिद्ध हुए। उन्होंने इज़राइल के अंतिम न्यायाधीश और प्रथम ईश्वरदूत के रूप में कार्य किया। उन दिनों न्यायाधीश केवल विवादों को नहीं सुलझाते थे वरन  ऐसे नेता माने जाते थे जिनका ईश्वर के साथ सीधा सम्बन्ध होता था और जो अत्याचारियों के विरुद्ध इज़राइल के कबीलों को एकजुट कर सकते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल [[Special:MyLanguage/Abraham|अब्राहम]] के वंश को भ्रष्ट पुरोहितों, एली के पुत्रों, और उन अशिक्षित लोगों (वे लोग जिन्होनें युद्ध में इजराइल के लोगों ली हत्या की थी) की दासता से मुक्त कराने वाले ईश्वर के दूत थे। पारंपरिक रूप से उनके नाम [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] के साथ लिया जाता है। जब राष्ट्र अशिक्षित लोगों से उत्त्पन खतरों का सामना कर रहा था, सैमुएल के बहुत हिम्मत कर के लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर लगाया, उन्होंने लोगों को “अपने पूरे दिल से नकली गुरुओं को छोड़ असली ईश्वर के ओर लौटने का आह्वान दिया &amp;lt;ref&amp;gt;आई सैमुएल ७:३.&amp;lt;/ref&amp;gt; जल्द ही लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पश्चाताप कर सैमुएल से विनती की कि वह उनके बचाव के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। जब सैमुएल प्रार्थना कर रहे थे और अनेक प्रकार के त्याग कर रहे थे तो एक भयंकर आंधी आई जिससे इजराइल के लोगों को अपने शत्रुओं को परास्त करने का मौका मिल गया। सैमुएल के रहते अशिक्षित लोग फिर कभी इस्राएल पर राज्य नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर  दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर &amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:५.&amp;lt;/ref&amp;gt; ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”&amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:७.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने इस्राएलियों को समझाया कि राजा का शासन होने के बाद उन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन लोग फिर भी राजा की माँग पर अटल रहे। तदुपरांत सैमुअल ने शाऊल को उनका नेता नियुक्त किया; उन्होंने उसे तथा लोगों को सदैव ईश्वर के रास्ते पर चलने का निर्देश भी दिया। पर शाऊल एक विश्वासघाती सेवक साबित हुआ इसलिए सैमुअल ने उसे दंड दिया और गुप्त रूप से [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] को राजा नियुक्त किया। सैमुअल की मृत्यु के बाद उन्हें रामाह में दफनाया गया। पूरे इज़राएल ने उनके निधन का शोक मनाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Joseph&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत जोसेफ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Saint Joseph|संत जोसेफ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में संत जोसेफ थे। वे ईसा मसीह के पिता और [[Special:MyLanguage/Mother Mary|मेरी]] के पति थे। न्यू टेस्टामेंट में उनके बारे में कुछ उल्लेख मिलते हैं। बाइबल में उन्हें [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] का वशंज बताया गया है। बाइबल में इस बात का भी वर्णन है कि जब एक देवदूत ने उन्हें स्वप्न में चेतावनी दी कि हेरोड ईसा मसीह को मारने की योजना बना रहा है, तो जोसेफ अपने परिवार-सहित वह स्थान छोड़ मिस्र चले गए। हेरोड की मृत्यु के बाद ही वे वापस लौटे। ऐसी मान्यता है कि जोसेफ एक बढ़ई थे और ईसा मसीह के सार्वजनिक मंत्रालय शुरू करने से पहले ही उनका निधन हो गया था। कैथोलिक परंपरा में संत जोसेफ को विश्वव्यापी चर्च के संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनका पर्व १९ मार्च को मनाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:St Alban Evesham All Saints' church.jpg|thumb|left|upright=0.5|एवेशम में ऑल सेंट्स चर्च में रंगीन कांच की खिड़की में संत एल्बन की तस्वीर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Alban&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत एल्बन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तीसरी शताब्दी के उत्तरार्ध में संत जर्मेन ने संत एल्बन के रूप में जन्म लिया। वे ब्रिटेन के पहले शहीद हुए। एल्बन रोमन सम्राट डायोक्लेटियन के शासनकाल में ईसाइयों पर हो रहे अत्याचारों के दौरान इंग्लैंड में थे। वे एक मूर्तिपूजक थे। उन्होंने रोमन सेना में सेवा भी की थी और बाद में वेरुलामियम नामक शहर में बस गए थे। वेरुलामियम शहर का नाम बाद में बदलकर सेंट एल्बंस कर दिया गया। एल्बन ने एम्फीबालस नामक एक भगोड़े ईसाई पादरी को छुपाया था, जिसने उनका धर्म परिवर्तन करवाया था। जब सैनिक उसे ढूँढ़ने आए तो एल्बन ने पादरी को वहां से भगा दिया और स्वयं पादरी का वेश धारण कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब उनका ये कृत्य उजागर हुआ तो एल्बन को मौत की सजा सुनाई गई; उन्हें कोड़े भी मारे गए। कहा जाता है कि एल्बन की फांसी को देखने के लिए इतनी लोग जमा हो गए कि वे रास्ते में आये एक संकरे पुल पर अटक गए, भीड़ पुल पार नहीं कर पा रही थी। एल्बन ने ईश्वर से प्रार्थना की और नदी का पानी भीड़ को रास्ता देने के लिए दो भागों में बंट गया। यह नज़ारा देखने के बाद जल्लाद स्वतः धर्मान्तरित हो गया, और उसने एल्बन की जगह स्वयं की मृत्यु की भीख माँगी। जल्लाद की प्रार्थना अस्वीकार कर दी गई परन्तु उसे भी एल्बन के साथ फांसी दे दी गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
३०३ ऐ डी  में एल्बन की मृत्यु के बाद से द्वीप के लोग उनकी पूजा करने लगे। श्रद्धेय एल्बन बटलर ने अपनी किताब &amp;quot; लाइविस ऑफ़ फादर्स, मार्टियर्स एंड अदर प्रिंसिपल सेंटस&amp;quot; में लिखा है, &amp;quot;कई युगों तक संत एल्बन हमारे द्वीप के जाने-माने गौरवशाली शहीद और ईश्वर के संरक्षक के रूप में स्थापित रहे। उनके कारण कई बार हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Teacher_of_Proclus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== प्रोक्लस के शिक्षक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने आंतरिक स्तर से नियोप्लैटोनिस्ट्स (वे दार्शनिक जिन्होंने प्लेटोनिक दर्शन का उत्तर-प्राचीन संस्करण विकसित किया था; तीसरी शताब्दी के दार्शनिक प्लोटिनस इसके संस्थापक थे) के पीछे प्रमुख शिक्षक के रूप में कार्य किया। वे यूनानी दार्शनिक प्रोक्लस (४१०–४८५ ऐ डी) के पोरेरणास्रोत थ। प्रोक्लस एथेंस में 'प्लेटो अकादमी' के प्रमुख थे और समाज के एक अत्यंत सम्मानित सदस्य थे। उन्होंने यह भी बताया की प्रोक्लस पूर्व जन्म में पाइथागोरियन दार्शनिक थे। उन्होंने प्रोक्लस को कॉन्स्टेंटाइन के ईसाई धर्म के पाखंडों के बारे में बताया, और साथ ही व्यक्तिवाद (प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में ईश्वर की खोज करे) के मार्ग का महत्व भी समझाया। ईसाई व्यक्तिवाद को &amp;quot;मूर्तिपूजा&amp;quot; कहते थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने गुरु संत जर्मेन के मार्गदर्शन में प्रोक्लस ने अपने दर्शनशास्त्र को इस सिद्धांत पर आधारित किया कि सत्य केवल एक ही है और वह है कि &amp;quot;ईश्वर एक है&amp;quot;। ईश्वर को पाना ही इस जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने कहा, &amp;quot;सभी शरीरों से परे आत्मा है, सभी आत्माओं से परे बौद्धिक अस्तित्व, और सभी बौद्धिक अस्तित्वों से परे एक (ईश्वर) है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;थॉमस व्हिटेकर, ''द नियो-प्लेटोनिस्ट्स: ए स्टडी इन द हिस्ट्री ऑफ़ हेलेनिज़्म'', दूसरा संस्करण (कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, १९२८), पृष्ठ १६५.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने विभिन्न विषयों पर लिखा जैसे दर्शनशास्त्र, खगोल विज्ञान, गणित, व्याकरण इत्यादि। उनका मानना था कि उन्हें यह ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। उन्होंने स्वयं को एक ऐसा माध्यम माना जिससे ईश्वरीय रहस्योद्घाटन मानवजाति तक पहुँचता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। वे स्वयं को 'दिव्य रहस्योद्घाटन' का एक माध्यम मानते थे। उनके शिष्य मारिनस के शब्दों में &amp;quot;वे वाकई दिव्य प्रेरणा से प्रतीत होते थे क्योंकि जब उनके मुख से ज्ञानपूर्ण शब्द निकलते थे उनकी आँखों से एक तेज़ आभा निकलती थी, और उनका पूरा शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगाता था।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;विक्टर कज़िन एंड थॉमस टेलर, अनुवादक, ''ट्रीयटाईसीस  ऑफ प्रोक्लस, द प्लेटोनिक सक्सेसर'' (लंदन: ऍन.पी., १८३३), पी.वी.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Merlin&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== मर्लिन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Merlin|मर्लिन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाँचवीं शताब्दी में संत जर्मेन मर्लिन के रूप में अवतरित हुए। वे [[Special:MyLanguage/King Arthur|राजा आर्थर]] के दरबार में एक रसायनशास्त्री थे, भविष्यवक्ता और सलाहकार के रूप में कार्य करते थे। युद्धरत सामंतों से विखंडित और सैक्सन आक्रमणकारियों से त्रस्त भूमि में मर्लिन ने ब्रिटेन के राज्य को एकजुट करने के लिए बारह युद्धों (जो वास्तव में बारह दीक्षाएँ थीं) में आर्थर का नेतृत्व किया। उन्होंने [[Special:MyLanguage/Round Table|राउंड टेबल]] की पवित्र अध्येतावृत्ति स्थापित करने के लिए राजा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मर्लिन और आर्थर के मार्गदर्शन में कैमलॉट [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्य का एक विद्यालय]] था जहाँ वीर पुरुष और स्त्रियां [[Special:MyLanguage/Holy Grail|होली ग्रेल]] के रहस्यों को जानने के लिए अध्ययन करते थे, और स्वयं का आध्यात्मिक विकास भी करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ परंपराओं में मर्लिन को एक ईश्वरीय ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है जिन्होंने तारों का अध्ययन किया और जिनकी भविष्यवाणियाँ सत्तर सचिवों द्वारा दर्ज की गईं। &amp;quot;द प्रोफेसीस ऑफ मर्लिन&amp;quot;, जो आर्थर के समय से लेकर सुदूर भविष्य तक की घटनाओं का वर्णन करती है, मध्य युग में अत्यंत लोकप्रिय थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Roger-bacon-statue.jpg|thumb|upright|alt=caption|ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में रोजर बेकन की प्रतिमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Roger_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== रोजर बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Roger Bacon|रोजर बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में रोजर बेकन (१२२०-१२९२) थे। बेकन के रूप में वे एक दार्शनिक, फ्रांसिस्कन भिक्षु, शिक्षाविद्, शैक्षिक सुधारक और प्रयोगात्मक वैज्ञानिक थे। वो एक ऐसा युग था जब विज्ञान का मापदंड धर्म और तर्क पर आधारित था, और ऐसे समय में बेकन ने विज्ञान में प्रयोगात्मक पद्धति को बढ़ावा दिया; उन्होंने कहा कि दुनिया गोल है - उन्होंने उस समय के विद्वानों और वैज्ञानिकों की संकीर्ण विचारधारा की निंदा की। उन्होंने कहा कि &amp;quot;सच्चा ज्ञान दूसरों के अधिकार से नहीं उत्पन्न होता और ना ही यह पुरातनपंथी सिद्धांतों के प्रति अंधश्रद्धा से उपजता है।&amp;quot; &amp;lt;ref&amp;gt;हेनरी थॉमस एंड डाना ली थॉमस, ''लिविंग बायोग्राफीज़ ऑफ़ ग्रेट साइंटिस्ट्स'' (गार्डन सिटी, न्यूयॉर्क: नेल्सन डबलडे, १९४१), पृष्ठ १५.&amp;lt;/ref&amp;gt; अंततः बेकन ने पेरिस विश्वविद्यालय में व्याख्याता का पद छोड़ दिया और फ्रांसिस्कन ऑर्डर ऑफ़ फ्रायर्स माइनर में शामिल हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेकन रसायन विद्या, प्रकाशविज्ञान, गणित और विभिन्न भाषाओं पर अपने गहन शोध के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत और आधुनिक तकनीक का भविष्यवक्ता माना जाता है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि आने वाले समय में गर्म हवा के गुब्बारे, उड़ने वाली मशीन, चश्मे, दूरबीन, सूक्ष्मदशंक यंत्र, लिफ्ट और यंत्रचालित जहाज़ और गाड़ियां होंगी - उन्होंने इन सब के बारे में ऐसे लिखा मानो ये उनका प्रत्यक्ष अनुभव हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनके वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण, धर्मशास्त्रियों पर उनके आक्षेपों और रसायन विद्या तथा ज्योतिष शास्त्र के उनके ज्ञान के कारण उन पर &amp;quot;विधर्मी और असमान्य&amp;quot; होने के आरोप लगे। इन सब बातों के लिए उनके साथी फ्रांसिस्कन लोगों ने उन्हें चौदह साल के लिए कारावास में डाल दिया। लेकिन अपने अनुयायियों के लिए बेकन &amp;quot;डॉक्टर मिराबिलिस&amp;quot; (&amp;quot;अद्भुत शिक्षक&amp;quot;) थे - ये एक ऐसी उपाधि है जिससे उन्हें सदियों से जाना जाता रहा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Portrait of a Man, Said to be Christopher Columbus.jpg|thumb|left|alt=caption|सेबेस्टियानो डेल पियोम्बो द्वारा बनाया गया क्रिस्टोफर कोलंबस का उनका मरणोपरांत चित्र (१५१९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Christopher_Columbus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== क्रिस्टोफर कोलंबस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Christopher Columbus|क्रिस्टोफर कोलंबस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि &amp;quot;यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२  की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें &amp;quot;नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। &amp;quot;इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.&amp;lt;/ref&amp;gt; उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, &amp;quot;आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।&amp;quot; कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक &amp;quot;लास प्रोफिसियास (द प्रोफेसीस )&amp;quot;, में लिखा। &amp;quot;द बुक ऑफ़ प्रोफेसीस कंसर्निंग द डिस्कवरी ऑफ़ इंडीज एंड द रिकवरी ऑफ़ जेरुसलम&amp;quot; में इन बातों के बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है। हालाँकि इस बात पर कम ही ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह एक माना हुआ तथ्य है तथा इसके बारे में &amp;quot;एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका&amp;quot; में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि &amp;quot;कोलंबस ने खगोल विज्ञान नहीं वरन भविष्यवाणी का अनुसरण कर अमरीका की खोज की थी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|फ्रांसिस बेकन, विस्काउंट सेंट एल्बन, एक अज्ञात कलाकार द्वारा बनाया चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== फ्रांसिस बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस बेकन (१५६१-१६२६) एक दार्शनिक, राजनेता, निबंधकार और साहित्यकार थे। बेकन को पश्चिम का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञानी और विचारक कहा जाता है। वे विवेचनात्मक तार्किकता (एक तर्क पद्धति है जिसमें विशिष्ट तथ्यों को जोड़कर एक सामान्य निष्कर्ष निकाला जाता है) और वैज्ञानिक पद्धति के जनक माने जाते हैं। वे काफी हद तक इस तकनीकी युग के लिए ज़िम्मेदार हैं जिसमें हम आज जी रहे हैं। वे जानते थे कि केवल व्यावहारिक विज्ञान ही जनसाधारण को मानवीय कष्टों और आम ज़िन्दगी की नीरसता से मुक्ति दिला सकता है और ऐसा होने पर ही मनुष्य आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सकता है, व् उस उत्तम आध्यात्मिकता की पुनः खोज कर सकता है जिसे वह पहले कभी अच्छी तरह से जानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;महान असंतृप्ति&amp;quot; (अर्थात पतन, नाश , गलतियों, और जीर्णावस्था के बाद वृहद् पुनर्स्थापना) &amp;quot;संपूर्ण विश्व&amp;quot; को बदलने का उनका तरीका था। इस बात की अवधारणा पहली बार उन्होंने बचपन में की थी। फिर १६०७, में उन्होंने इसी नाम से अपनी पुस्तक में इसे मूर्त रूप दिया। इसके बाद अंग्रेजी पुनर्जागरण की शुरुआत की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ-साथ बेकन ने अपने आसपास कुछ ऐसे लेखकों को एकत्र किया जो एलिज़ाबेथकालीन साहित्य के लिए ज़िम्मेदार थे। इनमें से कुछ एक &amp;quot;गुप्त संस्था&amp;quot;  - &amp;quot;द नाइट्स ऑफ़ द हेलमेट&amp;quot; के सदस्य थे।  इस संस्था का लक्ष्य अंग्रेजी भाषा का विस्तार करना था और एक ऐसे नए साहित्य की रचना करना था जिसे अंग्रेज लोग समझ पाएं। बेकन ने [[Special:MyLanguage/Bible translations|बाइबल के अनुवाद]] (किंग जेम्स का संस्करण) का भी आयोजन किया - उनका यह दृढ़ निश्चय था कि आम लोगों को भी ईश्वर के कहे शब्दों को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८९० के दशक में शेक्सपियर के नाटकों के मूल मुद्रणों और बेकन तथा अन्य एलिज़ाबेथ काल के लेखकों की कृतियों में लिखे सांकेतिक शब्दों से यह आभास होता है कि बेकन ने शेक्सपियर के नाटक लिखे थे और वे महारानी एलिजाबेथ और लॉर्ड लीसेस्टर के पुत्र थे।&amp;lt;ref&amp;gt;देखें{{TSC}}.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि उनकी माँ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया क्योंकि वह डरती थीं की सत्ता उचित समय से पहले भी उनके हाथ से निकल सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीवन के अंतिम वर्षों में बेकन को बहुत तंग किया गया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा को पहचानने वाला कोई नहीं था। ऐसा कहा जाता है कि उनकी मृत्यु १६२६ में हुई थी, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि उसके बाद भी वे गुप्त रूप से कुछ समय तक यूरोप में रहे। उन्होंने ऐसी कठिन परिस्थितियों का वीरता से सामना किया जो किसी भी सामान्य मनुष्य को नष्ट कर सकती हैं। फिर १ मई, १६८४, को उनकी जीवात्मा [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] के आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] से स्वर्ग सिधार गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Count of St Germain.jpg|thumb|upright|ले कॉम्टे डे संत जर्मेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Rembrandt - De Poolse ruiter, c.1655 (Frick Collection).jpg|thumb|upright=1.2|रेम्ब्रांट द्वारा लगभग १६५५ में बनाया गया चित्र ''द पोलिश राइडर'' जिसमें संत जर्मेन को यूरोप के वंडरमैन के रूप में दर्शाया गया है&amp;lt;ref&amp;gt;मार्क प्रोफेट, २९ दिसंबर, १९६७&amp;lt;/ref&amp;gt;]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_Wonderman_of_Europe&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यूरोप का अजूबा आदमी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Wonderman of Europe|यूरोप का अजूबा आदमी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लोगों को मुक्ति दिलाने की सर्वोपरि इच्छा रखते हुए संत जर्मेन ने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] से भौतिक शरीर में पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मांगी और उन्हें यह अनुमति मिल भी गई। वे &amp;quot;ले कॉम्टे डे सेंट जर्मेन&amp;quot; के रूप में प्रकट हुए - एक &amp;quot;चमत्कारी&amp;quot; सज्जन जिन्होंने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के दौरान यूरोप के दरबारों को चकित कर दिया था। यहीं से उन्हें &amp;quot;द वंडरमैन (एक अजूबा आदमी)&amp;quot; का खिताब मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे एक आद्यवैज्ञानिक, विद्वान, भाषाविद्, कवि, संगीतकार, कलाकार, कथाकार और राजनयिक थे। यूरोप के दरबारों में उनकी काफी प्रशंसा की जाती थी। उन्हें मणियों की पहचान थी, उन्हें हीरे और अन्य रत्नों में दोष निकालने के लिए जाना जाता था। साथ ही उन्हें एक हाथ से पत्र और दूसरे हाथ से कविता लिखने जैसे कार्य के लिए भी जाना जाता था। वोल्टेयर के शब्दों में &amp;quot;वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो कभी नहीं मर सकता, और जो सब कुछ जानता है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;वोल्टेयर, ''ओयूव्रेस'', लेट्रे cxviii, सं. बेउचोट, lviii, पृष्ठ ३६०, इसाबेल कूपर-ओकले, ''द काउंट ऑफ़ सेंट जर्मेन'' (ब्लौवेल्ट, एन.वाई.: रुडोल्फ स्टीनर पब्लिकेशंस, १९७०), पृष्ठ ९६ में उद्धृत।&amp;lt;/ref&amp;gt; उनका उल्लेख फ्रेडरिक द ग्रेट, वोल्टेयर, होरेस वालपोल और कैसानोवा के पत्रों और उस समय के समाचार पत्रों में मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परदे के पीछे से वे यह प्रयास कर रहे थे कि [[Special:MyLanguage/French Revolution|फ्रांसीसी क्रांति]] बिना रक्तपात के हो जाए - राजतंत्र को प्रजातंत्र में आराम से बदल दिया जाए ताकि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की सरकार हो। लेकिन उनकी इस सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यूरोप को एकजुट करने के अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने [[Special:MyLanguage/Napoleon|नेपोलियन]] का समर्थन किया, परन्तु नेपोलियन ने अपने गुरु की शक्तियों का दुरुपयोग किया और मृत्यु को प्राप्त किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन इससे भी पहले संत जर्मेन ने अपना ध्यान एक नई दुनिया की ओर मोड़ लिया था। वे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके [[Special:MyLanguage/George Washington|प्रथम राष्ट्रपति]] के प्रायोजक बने। स्वतंत्रता की घोषणा और संविधान उन्हीं से प्रेरित था। उन्होंने कई ऐसे उपकरणों को बनाने की प्रेरणा भी दी जिनसे शारीरिक श्रम का कम से कम उपयोग हो ताकि मानवजाति कठिन परिश्रम से मुक्त होकर ईश्वर-प्राप्ति के रास्ते पर चल सके। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Chohan_of_the_Seventh_Ray&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== सातवीं किरण के चौहान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, संत जर्मेन ने महिला दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Kuan Yin|कुआन यिन]] से सातवीं किरण चौहान का पद प्राप्त किया। सातवीं किरण दया, क्षमा और पवित्र अनुष्ठान की किरण है। इसके बाद, बीसवीं शताब्दी में, संत जर्मेन एक बार फिर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट व्हाइट ब्रदरहुड) की एक बाहरी गतिविधि को प्रायोजित करने के लिए आगे बढ़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९३० के दशक के आरंभ में उन्होंने अपने &amp;quot;पृथ्वी पर कार्यरत सेनापति&amp;quot; जॉर्ज वाशिंगटन से संपर्क किया, और उन्हें एक [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहक]] के रूप में प्रशिक्षित किया।  वाशिंगटन ने [[Special:MyLanguage/Godfré Ray King|गॉडफ्रे रे किंग]] के उपनाम से, &amp;quot;अनवील्ड मिस्ट्रीज़&amp;quot;, &amp;quot;द मैजिक प्रेज़ेंस&amp;quot; और &amp;quot;द &amp;quot;आई एम&amp;quot; डिस्कोर्सेज़&amp;quot; नामक पुस्तकें लिखीं जिनमें उन्होंने संत जर्मेन द्वारा नए युग के लिए दिए गए निर्देशों के बारे में लिखा। इसी दशक के अंतिम दिनों में न्याय की देवी और अन्य [[Special:MyLanguage/cosmic being|ब्रह्मांडीय प्राणी]] पवित्र अग्नि की शिक्षाओं को मानवजाति तक पहुँचाने और [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] की शुरुआत करने में संत जर्मेन की  सहायता करने पृथ्वी पर अवतरित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९६१ में संत जर्मेन ने पृथ्वी पर अपने प्रतिनिधि, संदेशवाहक [[Special:MyLanguage/Mark L. Prophet|मार्क एल. प्रोफेट]] से संपर्क किया और [[Special:MyLanguage/Ancient of Days|प्राचीन काल]] के स्वामी (सनत कुमार) और उनके प्रथम और दूसरे शिष्य शिष्य [[Special:MyLanguage/Gautama|गौतम]] और [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] की स्मृति में [[Special:MyLanguage/Keepers of the Flame Fraternity|लौ रक्षक बिरादरी]] (कीपर्स ऑफ़ द फ्लेम फ्रैटरनिटी) की स्थापना की। इनका उद्देश्य उन सभी लोगों को पुनर्जागृत करना था जो मूल रूप से [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] के साथ पृथ्वी पर आए थे। ये लोग पृथ्वी पर शिक्षकों के रूप में आये थे और इनका काम लोगों की सेवा करना था परन्तु यहाँ आकर वे सब बातें ये बातें भूल गए थे। संत जर्मेन का कार्य उन सबकी स्मृति को पुनर्स्थापित करना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार संत जर्मेन ने मूल लौ रक्षकों को प्राचीन काल के स्वामी की वाणी को ध्यान से सुनने को कहा। उन्होंने इन सभी लोगों को अपनी आत्मा में जीवन की ज्वाला और स्वतंत्रता की पवित्र अग्नि को पुनः प्रज्वलित करने और अपने जीवन को ईश्वर की सेवा में पुनः समर्पित करने के आह्वान दिया। संत जर्मेन लौ रक्षक बिरादरी के शूरवीर सेनाध्यक्ष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Hierarch_of_the_Aquarian_Age&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कुम्भ युग के अध्यक्ष ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१ मई १९५४ को संत जर्मेन ने सनत कुमार से शक्ति का प्रभुत्व और ईसा मसीह से अगले दो हज़ार वर्ष की अवधि के लिए मानवजाति की चेतना को निर्देशित का अधिकार प्राप्त किया। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईसा मसीह का महत्व कम हो गया है। वे अब उच्च स्तरों पर [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]] के रूप में काम कर रहे हैं, और अपनी चेतना को समस्त मानवजाति के लिए पहले से भी अधिक शक्तिशाली और सर्वव्यापी रूप से दे रहे हैं क्योंकि ईश्वर का स्वभाव निरंतर श्रेष्ठ होना है। हम एक ऐसे ब्रह्मांड में रहते हैं जिसका निरंतर विस्तार होता रहता  है - ब्रह्मांड जो ईश्वर के प्रत्येक पुत्र (सूर्य) के केंद्र से विस्तारित होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दो हजार वर्ष की अवधि के दौरान वायलेट लौ का आह्वान कर के हम स्वयं में ईश्वर की ऊर्जा (जिसे हमने हजारों वर्षों की अपनी गलत आदतों द्वारा अपवित्र किया है) को शुद्ध कर सकते हैं। ऐसा करने से समस्त मानवजाति भय, अभाव, पाप, बीमारी और मृत्यु से मुक्त हो सकती है, और सभी मनुष्य स्वतंत्र रूप से प्रकाश में चल सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/age of Aquarius|कुंभ युग]] की शुरुआत में  संत जर्मेन कर्म के स्वामी के समक्ष गए और उनसे वायलेट लौ को आम इंसानों तक पहुंचाने की आज्ञा मांगी। इसके पहले तक वायलेट लौ का ज्ञान श्वेत महासंघ के आंतरिक आश्रमों और [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालयों]] में ही था। संत जर्मेन हमें वायलेट लौ के आह्वान से होने वाले लाभ के बारे में बताते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
आपमें से कुछ लोगों के अधिकतर कर्म संतुलित हो गए हैं, कुछ के [[Special:MyLanguage/heart chakra|हृदय चक्र]] निर्मल हो गए हैं। जीवन में एक नया प्रेम, नई कोमलता, नई करुणा, जीवन के प्रति एक नई संवेदनशीलता, एक नई स्वतंत्रता और उस स्वतंत्रता की खोज में एक नया आनंद आ गया है। एक नई पवित्रता का उदय भी हुआ है क्योंकि मेरी लौ के माध्यम से आपका मेलकिडेक समुदाय के पुरोहितत्व से संपर्क हुआ है। अज्ञानता और मानसिक जड़ता कुछ सीमा तक समाप्त हुई है, और लोग एक ऐसे रास्ते पर  चल पड़े हैं जो उन्हें ईश्वर तक पहुंचाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ ने पारिवारिक रिश्तों में मदद की है। इसने कुछ लोगों को अपने पुराने कर्मों को संतुलित करने में सहायता की है और वे अपने पुराने दुखों से मुक्त होने लगे हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि वायलेट लौ में ईश्वरीय न्याय की लौ निहित है, और ईश्वरीय न्याय में ईश्वर का मूल्याङ्कन। इसलिए हम ये कह सकते हैं कि वायलेट लौ एक दोधारी [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] के सामान है जो सत्य को असत्य से अलग करती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ के अनेकानेक लाभ हैं पर उन सभी को यहाँ गिनाना संभव नहीं, लेकिन यह अवश्य है इसके प्रयोग से मनुष्य के भीतर एक गहन बदलाव होता है। वायलेट लौ हमारे उन सभी मतभेदों और मनोवैज्ञानिक समस्यायों का समाधान करती है जो बचपन से या फिर उसे से भी पहले पिछले जन्मों से चली आ रही हैं और जिन्होंने हमारी चेतना में इतनी गहरी जड़ें जमा ली हैं कि वे जन्म-जन्मांतर से वहीँ स्थित हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;कीप माई पर्पल हार्ट,&amp;quot; {{POWref|३१|७२}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Alchemy&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आद्यविज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Alchemy|आद्यविज्ञान}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने अपनी पुस्तक &amp;quot;सेंट जर्मेन ऑन अल्केमी&amp;quot; में आद्यविज्ञान की शिक्षा देते हैं। वे [[Special:MyLanguage/Amethyst (gemstone)|एमेथिस्ट (रत्न)]] का उपयोग करते हैं — यह आद्द्यवैज्ञनिकों का रत्न है, कुंभ युग का रत्न है और वायलेट लौ का भी। स्ट्रॉस के वाल्ट्ज़ में वायलेट लौ का स्पंदन है और यह आपको उनके साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है। उन्होंने हमें यह भी बताया है कि [[Special:MyLanguage/Franz Liszt|फ्रांज़ लिज़्ट]] का &amp;quot;राकोज़ी मार्च&amp;quot; उनके हृदय की लौ और वायलेट लौ के सूत्र को धारण करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रयस्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन का ध्यान सहारा रेगिस्तान के ऊपर स्थित स्वर्णिम [[Special:MyLanguage/etheric city|आकाशीय शहर]] में केंद्रित है। वे [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] के साथ-साथ टेबल माउंटेन, व्योमिंग स्थित अपने भौतिक/आकाशीय आश्रय स्थल, [[Special:MyLanguage/Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स]] में भी पढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त वे महान दिव्य निर्देशक के केंद्रों —भारत में [[Special:MyLanguage/Cave of Light|केव ऑफ लाइट]] और ट्रांसिल्वेनिया में [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] में भी कार्य करते हैं, जहाँ वे धर्मगुरु के रूप में विराजमान हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिण अमेरिका में [[Special:MyLanguage/God and Goddess Meru|मेरु देवी और देवता]] के आश्रय स्थल में भी अपना केंद्र स्थापित किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप [[Special:MyLanguage/Maltese cross|माल्टीज़ क्रॉस]] है; उनकी खुशबू, वायलेट फूलों की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टीआ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “Saint Germain.”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/6/hi&amp;diff=245742</id>
		<title>Translations:Saint Germain/6/hi</title>
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		<updated>2026-02-20T11:04:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;प्रत्येक दो हज़ार साल का चक्र सात किरणों में से एक के अंतर्गत आता है। [[Special:MyLanguage/jesus|ईसा मसीह]] छठी किरण के चौहान के रूप में पिछले 2000 वर्षों से युग के धर्मगुरु के पद पर कार्यरत थे। 1 मई, 1954 को संत जर्मेन और पोर्टिया को आने वाले युग (सातवीं किरण का चक्र) का निदेशक नियुक्त किया गया। सातवीं किरण कुम्भ राशि की है, तथा स्वतंत्रता और न्याय कुंभ राशि के स्त्री व पुरुष तत्त्व हैं। दया के साथ मिलकर वे इस [[Special:MyLanguage/dispensation|व्यवस्था]] (dispensation) में ईश्वर के अन्य सभी गुणों को दर्शाने का आधार प्रदान करते हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245741</id>
		<title>Saint Germain/hi</title>
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		<updated>2026-02-20T11:00:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0000144 poster-saint-germain-sindelar-1403 600.jpeg|thumb|दिव्य गुरु संत जरमेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संत जरमेन''' सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] हैं। अपनी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ी ]] महिला गुरु [[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टिया]] - जिन्हें न्याय की देवी भी कहते हैं - के साथ, वे [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुंभ युग]] के अधिपति हैं। वे स्वतंत्रता की ज्वाला के प्रायोजक हैं, तथा पोर्टिया न्याय की ज्वाला की। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जरमेन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी लोग जो सातवीं किरण का आह्वान करते हैं उन में ये एक सच्चे राजनीतिज्ञ में पाए जाने वाले सभी ईश्वरीय गुणों जैसे गरिमा, शालीनता, सज्जनता और संतुलन आदि को दर्शाते हैं। ये [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] द्वारा स्थापित [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हाउस]] के सदस्य हैं। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] आजकल इनके ट्रांसिल्वेनिया स्थित भवन में प्रतिष्ठित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''संत जरमेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जरमेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका ध्येय ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक दो हज़ार साल का चक्र सात किरणों में से एक के अंतर्गत आता है। [[Special:MyLanguage/jesus|ईसा मसीह]] छठी किरण के चौहान के रूप में पिछले 2000 वर्षों से युग के धर्मगुरु के पद पर कार्यरत थे। 1 मई, 1954 को संत जर्मेन और पोर्टिया को आने वाले युग (सातवीं किरण का चक्र) का निदेशक नियुक्त किया गया। सातवीं किरण कुम्भ राशि की है, तथा स्वतंत्रता और न्याय कुंभ राशि के स्त्री व पुरुष तत्त्व हैं। दया के साथ मिलकर वे इस [[Special:MyLanguage/dispensation|व्यवस्था]] में ईश्वर के अन्य सभी गुणों को दर्शाने का आधार प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन और पोर्टिया लोगों को सातवें युग और सातवीं किरण की एक नई जीवन तरंग, एक नई सभ्यता और एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। सातवीं किरण को [[Special:MyLanguage/violet ray|वायलेट लौ]] कहते हैं और स्वतंत्रता, न्याय, दया, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यविज्ञान]]और पवित्र अनुष्ठान इसके गुण हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सातवीं किरण के चौहान (स्वामी) के रूप में, संत जर्मेन वायलेट लौ के माध्यम से हमारी आत्माओं को [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] के विज्ञान और अनुष्ठान में दीक्षा देते हैं। रेवेलशन १०.७ में जिनके बारे में भविष्यवाणी की गयी थी ये वही सातवें देवदूत हैं। ये परमेश्वर के रहस्य के बारे में बताने आते हैं,और यही उन्होंने अपने &amp;quot;सेवकों और भविष्यवक्ताओं को बताया है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन कहते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
मैं एक आरोहित जीव हूँ, लेकिन हमेशा से मैं ऐसा नहीं था। एक या दो नहीं, बल्कि मैंने पृथ्वी पर कई जन्म लिए हैं, और मैं इस धरती पर वैसे ही घूमता था जैसे आज आप घूम रहे हैं। मेरा नश्वर शरीर भी भौतिक आयाम की सीमाओं में बंधा था। एक जन्म में मैं [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] पर था और एक अन्य जन्म में [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] पर। मैंने कई सभ्यताओं का विकास और विनाश देखा है। मानवजाति के [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] और आदिम काल तक के चक्र काल के दौरान मैंने चेतना के उतार चढ़ाव को देखा है। मैंने देखा है कि किस तरह अपने गलत चुनावों के कारण मनुष्य ने हज़ारों सालों के वैज्ञानिक विकास और प्राप्त की गयी उस उच्चतम ब्रह्मांडीय चेतना को खो दिया जो आज के युग में सबसे उन्नत धर्म के सदस्यों के पास भी नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ, मेरे पास कई विकल्प थे, और अपने लिए मैंने चुनाव स्वयं किया है। सही चुनाव करके ही स्त्री और पुरुष पदक्रम में अपना स्थान निर्धारित करते हैं। ईश्वर की इच्छानुसार चलने का चुनाव करके हम स्वतंत्र हो जाते हैं, मैं भी जन्म और मृत्यु के चक्र से स्वतंत्र हो गया और फिर इस चक्र के बाहर मुझे एक जीवन मिला। मैंने अपनी स्वतंत्रता लौ से प्राप्त की, कुम्भ युग के मूलस्वर से प्राप्त की जिसे प्राचीन आद्यवैज्ञानिकों ने ढूँढा है,  वही बैंगनी लौ जो संतजनों के पास रहती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आप नश्वर हैं। मैं अमर हूँ। हमारे बीच बस इतना ही अंतर है कि मैंने स्वतंत्रता का चुनाव किया है, और आपको यह चुनाव करना अभी बाकी है। हम दोनों की क्षमताएँ एक समान हैं, संसाधन भी एक समान हैं, और हम दोनों का उस एक (ईश्वर) से जुड़ाव भी समान है। मैंने अपनी ईश्वरीय पहचान बनाने का चुनाव किया है। बहुत समय पहले मेरे अंतर्मन से एक शांत एवं धीमी आवाज़ आयी थी: &amp;quot;ईश्वर की संतानों, अपनी ईश्वरीय पहचान बनाओ&amp;quot;। ऐसा लगा मानों ईश्वर ही कह रहे हों। रात के सन्नाटे में जब मैंने पुकार सुनी तो उत्तर दिया, &amp;quot;अवश्य&amp;quot;। उत्तर में पूरा ब्रह्मांड बोल उठा, &amp;quot;अवश्य&amp;quot; । जब मनुष्य अपनी इच्छा प्राक्जत करता है तो उसके अस्तित्व की असीमित क्षमता दिखती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं संत जर्मेन हूँ, और कुंभ युग की विजय के लिए मैं आपकी आत्मा और हृदय की अग्नि को अपने साथ ले जाने आया हूँ। मैंने आपकी आत्मा को [[Special:MyLanguage/initiation|दीक्षित]] करने का स्वरुप स्थापित कर दिया है... मैं स्वतंत्रता के पथ पर हूँ। आप भी उस पथ पर अपनी यात्रा आरम्भ करो, आप मुझे वहीँ पाओगे। अगर आप चाहोगे तो मैं आपका गुरु होना स्वीकार करूँगा।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;आई हैव चोसन टू बी फ्री,&amp;quot; {{POWref|१८|३०}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Ruler_of_a_golden-age_civilization&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== स्वर्ण युग की सभ्यता का शासक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Golden age in the Sahara Desert|सहारा मरुस्थल में स्वर्ण युग}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पचास हज़ार साल पहले संत जर्मेन उस उपजाऊ क्षेत्र - जहाँ आज सहारा मरुस्थल स्थित है - में स्वर्ण युगीन सभ्यता के शासक थे। एक सम्राट के रूप में, संत जर्मेन प्राचीन ज्ञान और भौतिक वृतों के ज्ञान में निपुण थे। लोग उन्हें अपने उभरते हुए ईश्वरत्व के मानक के रूप में देखते थे। उनका साम्राज्य सौंदर्य, समरूपता और पूर्णता की अद्वितीय ऊँचाई तक पहुँच गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ जैसे-जैसे यहाँ के लोग ईश्वर से विमुख हो अपनी इंद्रियों के सुखों में अधिक रुचि लेने लगे, ब्रह्मांडीय परिषद ने संत जर्मेन को वहां से हटने का निर्देश दिया। परिषद् ने कहा कि लोगों के कर्म ही अब से उनके गुरु होंगे। राजा ने अपने पार्षदों और लोक सेवकों के लिए एक भव्य भोज का आयोजन किया। उनके ५७६ अतिथियों में से प्रत्येक को क्रिस्टल का एक प्याला मिला जिसमें &amp;quot;शुद्ध इलेक्ट्रॉनिक सार&amp;quot; का अमृत भरा हुआ था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह अमृत संत जर्मेन ने उन्हें अपनी आत्मा की रक्षा के लिए उपहार-स्वरूप दिया था, ताकि जब कुंभ के युग में स्वर्ण युगीन सभ्यता को वापस लाने का अवसर आए, तो ये सब लोग अपने 'ईश्वरीय स्वरुप' को पहचान पाएं। और, साथ ही अन्य सभी लोगों को एक संकेत भी मिले कि जब मनुष्य अपने मन, हृदय और अपनी जीवात्मा को ईश्वर की आत्मा के निवास के लिए उपयुक्त बनाता है, तो ईश्वर अवश्य उनके साथ निवास करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भोजन के दौरान एक ब्रह्मांडीय गुरु - जिनकी पहचान उनके माथे पर लिखा शब्द 'विजय' था - ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने लोगों को आनेवाले उस संकट के प्रति आगाह किया जो उन्होंने ईश्वर में अपने अविश्वास के कारण आमंत्रित किया था; उन्होंने लोगों को अपने ईश्वरीय स्वरुप की उपेक्षा करने के लिए डांट लगाई; और यह भविष्यवाणी भी की कि जल्द ही यह साम्राज्य एक ऐसे राजकुमार के अधीन आ जाएगा जो राजा की पुत्री से विवाह करने का इच्छुक होगा। इस घटना के सात दिन बाद राजा ही और उनका परिवार स्वर्ण-युगीन सभ्यता के आकाशीय समकक्ष नगर में चले गए। अगले ही दिन एक राजकुमार वहाँ पहुँचे और उस राज्य का कार्यभार संभाल लिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;High_priest_on_Atlantis&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== अटलांटिस पर उच्च पुजारी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरह हज़ार साल पहले संत जर्मेन [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] के मुख्य भू-भाग पर स्थित वायलेट लौ मंदिर के मुख्य पुजारी थे। उस समय उन्होंने अपने आह्वानों और कारण शरीर द्वारा एक अग्नि स्तंभ - वायलेट लौ का एक फ़व्वारा - स्थापित किया था। यहाँ दूर दूर से लोग अपने शरीर, मस्तिष्क और जीवात्मा की शुद्धि के लिए आते थे। यह वे लोग वायलेट लौ का आह्वाहन तथा सातवीं किरण के अनुष्ठानों द्वारा प्राप्त करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन लोगों ने वायलेट लौ के मंदिर में सेवा की उन्हें [[Special:MyLanguage/Zadkiel|जैडकीयल]] के आकाशीय आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Temple of Purification|टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन]] में [[Special:MyLanguage/Melchizedek|मेलकिडेक समुदाय]] के सार्वभौमिक पुरोहिताई की शिक्षा दी गई। यह आश्रय स्थल उस स्थान पर था जहां आज क्यूबा द्वीप स्थित है। इस पुरोहिताई में धर्म और विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा दी जाती है। इसी स्थान पर संत जर्मेन और [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] दोनों का समुदाय में समावेशन हुआ था। स्वयं जैडकीयल ने कहा था, &amp;quot;आप सदा के लिए मेलकिडेक समुदाय के पुरोहित रहेंगे&amp;quot;। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अटलांटिस के डूबने से पहले जब [[Special:MyLanguage/Noah|नोआह]] अपना जहाज़ बना रहे थे और लोगों को आने वाले [[Special:MyLanguage/The Flood|जल प्रलय]] की चेतावनी दे रहे थे, उस समय महान दिव्य निर्देशक ने संत जर्मेन और कुछ अन्य वफ़ादार पुजारियों को मुक्ति की लौ को टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन से निकाल कर ट्रांसिल्वेनिया के कार्पेथियन तलहटी में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कहा। यहाँ उन्होंने ऐसे समय में भी स्वतंत्रता की अग्नि को प्रज्वलित करने का पवित्र अनुष्ठान जारी रखा जब ईश्वरीय आदेश के तहत मानवजाति को उनके कर्मों का फल मिल रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आने वाले अपने सभी जन्मों में महान दिव्य निर्देशक के मार्गदर्शन में संत जर्मेन और उनके अनुयायियों ने वायलेट लौ को पुनः ढूंढा और मंदिर की रक्षा भी की। इसके बाद महान दिव्य निर्देशक ने अपने शिष्य के साथ मिलकर लौ के स्थान पर एक आश्रय स्थल स्थापित किया और हंगरी के राजघराने राकोज़ी की स्थापना भी की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_prophet_Samuel&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== ईश्वर के दूत सेमुएल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Eli and Samuel.jpg|thumb|upright|''सेमुएल एली के घर पर उन्हें परमेश्वर के न्याय के बारे में बताते हुए'', जॉन सिंगलटन कोपले (१७८०)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Uncion de David por Samuel de Antonio Gonzalez Velazquez.JPG|thumb|एंटोनियो गोंज़ालेज़ वेलाज़क्वेज़ का चित्र जिसमें सैमुअल डेविड का अभिषेक कर रहे हैं]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ग्यारहवीं शताब्दी बी सी  में संत जर्मेन ने सैमुअल के रूप में अवतार लिया था। उस समय जब सभी लोग धर्म-विमुख थे, वे एक उत्तम धार्मिक नेता सिद्ध हुए। उन्होंने इज़राइल के अंतिम न्यायाधीश और प्रथम ईश्वरदूत के रूप में कार्य किया। उन दिनों न्यायाधीश केवल विवादों को नहीं सुलझाते थे वरन  ऐसे नेता माने जाते थे जिनका ईश्वर के साथ सीधा सम्बन्ध होता था और जो अत्याचारियों के विरुद्ध इज़राइल के कबीलों को एकजुट कर सकते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल [[Special:MyLanguage/Abraham|अब्राहम]] के वंश को भ्रष्ट पुरोहितों, एली के पुत्रों, और उन अशिक्षित लोगों (वे लोग जिन्होनें युद्ध में इजराइल के लोगों ली हत्या की थी) की दासता से मुक्त कराने वाले ईश्वर के दूत थे। पारंपरिक रूप से उनके नाम [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] के साथ लिया जाता है। जब राष्ट्र अशिक्षित लोगों से उत्त्पन खतरों का सामना कर रहा था, सैमुएल के बहुत हिम्मत कर के लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर लगाया, उन्होंने लोगों को “अपने पूरे दिल से नकली गुरुओं को छोड़ असली ईश्वर के ओर लौटने का आह्वान दिया &amp;lt;ref&amp;gt;आई सैमुएल ७:३.&amp;lt;/ref&amp;gt; जल्द ही लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पश्चाताप कर सैमुएल से विनती की कि वह उनके बचाव के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। जब सैमुएल प्रार्थना कर रहे थे और अनेक प्रकार के त्याग कर रहे थे तो एक भयंकर आंधी आई जिससे इजराइल के लोगों को अपने शत्रुओं को परास्त करने का मौका मिल गया। सैमुएल के रहते अशिक्षित लोग फिर कभी इस्राएल पर राज्य नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर  दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर &amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:५.&amp;lt;/ref&amp;gt; ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”&amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:७.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने इस्राएलियों को समझाया कि राजा का शासन होने के बाद उन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन लोग फिर भी राजा की माँग पर अटल रहे। तदुपरांत सैमुअल ने शाऊल को उनका नेता नियुक्त किया; उन्होंने उसे तथा लोगों को सदैव ईश्वर के रास्ते पर चलने का निर्देश भी दिया। पर शाऊल एक विश्वासघाती सेवक साबित हुआ इसलिए सैमुअल ने उसे दंड दिया और गुप्त रूप से [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] को राजा नियुक्त किया। सैमुअल की मृत्यु के बाद उन्हें रामाह में दफनाया गया। पूरे इज़राएल ने उनके निधन का शोक मनाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Joseph&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत जोसेफ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Saint Joseph|संत जोसेफ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में संत जोसेफ थे। वे ईसा मसीह के पिता और [[Special:MyLanguage/Mother Mary|मेरी]] के पति थे। न्यू टेस्टामेंट में उनके बारे में कुछ उल्लेख मिलते हैं। बाइबल में उन्हें [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] का वशंज बताया गया है। बाइबल में इस बात का भी वर्णन है कि जब एक देवदूत ने उन्हें स्वप्न में चेतावनी दी कि हेरोड ईसा मसीह को मारने की योजना बना रहा है, तो जोसेफ अपने परिवार-सहित वह स्थान छोड़ मिस्र चले गए। हेरोड की मृत्यु के बाद ही वे वापस लौटे। ऐसी मान्यता है कि जोसेफ एक बढ़ई थे और ईसा मसीह के सार्वजनिक मंत्रालय शुरू करने से पहले ही उनका निधन हो गया था। कैथोलिक परंपरा में संत जोसेफ को विश्वव्यापी चर्च के संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनका पर्व १९ मार्च को मनाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:St Alban Evesham All Saints' church.jpg|thumb|left|upright=0.5|एवेशम में ऑल सेंट्स चर्च में रंगीन कांच की खिड़की में संत एल्बन की तस्वीर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Alban&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत एल्बन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तीसरी शताब्दी के उत्तरार्ध में संत जर्मेन ने संत एल्बन के रूप में जन्म लिया। वे ब्रिटेन के पहले शहीद हुए। एल्बन रोमन सम्राट डायोक्लेटियन के शासनकाल में ईसाइयों पर हो रहे अत्याचारों के दौरान इंग्लैंड में थे। वे एक मूर्तिपूजक थे। उन्होंने रोमन सेना में सेवा भी की थी और बाद में वेरुलामियम नामक शहर में बस गए थे। वेरुलामियम शहर का नाम बाद में बदलकर सेंट एल्बंस कर दिया गया। एल्बन ने एम्फीबालस नामक एक भगोड़े ईसाई पादरी को छुपाया था, जिसने उनका धर्म परिवर्तन करवाया था। जब सैनिक उसे ढूँढ़ने आए तो एल्बन ने पादरी को वहां से भगा दिया और स्वयं पादरी का वेश धारण कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब उनका ये कृत्य उजागर हुआ तो एल्बन को मौत की सजा सुनाई गई; उन्हें कोड़े भी मारे गए। कहा जाता है कि एल्बन की फांसी को देखने के लिए इतनी लोग जमा हो गए कि वे रास्ते में आये एक संकरे पुल पर अटक गए, भीड़ पुल पार नहीं कर पा रही थी। एल्बन ने ईश्वर से प्रार्थना की और नदी का पानी भीड़ को रास्ता देने के लिए दो भागों में बंट गया। यह नज़ारा देखने के बाद जल्लाद स्वतः धर्मान्तरित हो गया, और उसने एल्बन की जगह स्वयं की मृत्यु की भीख माँगी। जल्लाद की प्रार्थना अस्वीकार कर दी गई परन्तु उसे भी एल्बन के साथ फांसी दे दी गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
३०३ ऐ डी  में एल्बन की मृत्यु के बाद से द्वीप के लोग उनकी पूजा करने लगे। श्रद्धेय एल्बन बटलर ने अपनी किताब &amp;quot; लाइविस ऑफ़ फादर्स, मार्टियर्स एंड अदर प्रिंसिपल सेंटस&amp;quot; में लिखा है, &amp;quot;कई युगों तक संत एल्बन हमारे द्वीप के जाने-माने गौरवशाली शहीद और ईश्वर के संरक्षक के रूप में स्थापित रहे। उनके कारण कई बार हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Teacher_of_Proclus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== प्रोक्लस के शिक्षक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने आंतरिक स्तर से नियोप्लैटोनिस्ट्स (वे दार्शनिक जिन्होंने प्लेटोनिक दर्शन का उत्तर-प्राचीन संस्करण विकसित किया था; तीसरी शताब्दी के दार्शनिक प्लोटिनस इसके संस्थापक थे) के पीछे प्रमुख शिक्षक के रूप में कार्य किया। वे यूनानी दार्शनिक प्रोक्लस (४१०–४८५ ऐ डी) के पोरेरणास्रोत थ। प्रोक्लस एथेंस में 'प्लेटो अकादमी' के प्रमुख थे और समाज के एक अत्यंत सम्मानित सदस्य थे। उन्होंने यह भी बताया की प्रोक्लस पूर्व जन्म में पाइथागोरियन दार्शनिक थे। उन्होंने प्रोक्लस को कॉन्स्टेंटाइन के ईसाई धर्म के पाखंडों के बारे में बताया, और साथ ही व्यक्तिवाद (प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में ईश्वर की खोज करे) के मार्ग का महत्व भी समझाया। ईसाई व्यक्तिवाद को &amp;quot;मूर्तिपूजा&amp;quot; कहते थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने गुरु संत जर्मेन के मार्गदर्शन में प्रोक्लस ने अपने दर्शनशास्त्र को इस सिद्धांत पर आधारित किया कि सत्य केवल एक ही है और वह है कि &amp;quot;ईश्वर एक है&amp;quot;। ईश्वर को पाना ही इस जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने कहा, &amp;quot;सभी शरीरों से परे आत्मा है, सभी आत्माओं से परे बौद्धिक अस्तित्व, और सभी बौद्धिक अस्तित्वों से परे एक (ईश्वर) है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;थॉमस व्हिटेकर, ''द नियो-प्लेटोनिस्ट्स: ए स्टडी इन द हिस्ट्री ऑफ़ हेलेनिज़्म'', दूसरा संस्करण (कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, १९२८), पृष्ठ १६५.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने विभिन्न विषयों पर लिखा जैसे दर्शनशास्त्र, खगोल विज्ञान, गणित, व्याकरण इत्यादि। उनका मानना था कि उन्हें यह ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। उन्होंने स्वयं को एक ऐसा माध्यम माना जिससे ईश्वरीय रहस्योद्घाटन मानवजाति तक पहुँचता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। वे स्वयं को 'दिव्य रहस्योद्घाटन' का एक माध्यम मानते थे। उनके शिष्य मारिनस के शब्दों में &amp;quot;वे वाकई दिव्य प्रेरणा से प्रतीत होते थे क्योंकि जब उनके मुख से ज्ञानपूर्ण शब्द निकलते थे उनकी आँखों से एक तेज़ आभा निकलती थी, और उनका पूरा शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगाता था।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;विक्टर कज़िन एंड थॉमस टेलर, अनुवादक, ''ट्रीयटाईसीस  ऑफ प्रोक्लस, द प्लेटोनिक सक्सेसर'' (लंदन: ऍन.पी., १८३३), पी.वी.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Merlin&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== मर्लिन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Merlin|मर्लिन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाँचवीं शताब्दी में संत जर्मेन मर्लिन के रूप में अवतरित हुए। वे [[Special:MyLanguage/King Arthur|राजा आर्थर]] के दरबार में एक रसायनशास्त्री थे, भविष्यवक्ता और सलाहकार के रूप में कार्य करते थे। युद्धरत सामंतों से विखंडित और सैक्सन आक्रमणकारियों से त्रस्त भूमि में मर्लिन ने ब्रिटेन के राज्य को एकजुट करने के लिए बारह युद्धों (जो वास्तव में बारह दीक्षाएँ थीं) में आर्थर का नेतृत्व किया। उन्होंने [[Special:MyLanguage/Round Table|राउंड टेबल]] की पवित्र अध्येतावृत्ति स्थापित करने के लिए राजा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मर्लिन और आर्थर के मार्गदर्शन में कैमलॉट [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्य का एक विद्यालय]] था जहाँ वीर पुरुष और स्त्रियां [[Special:MyLanguage/Holy Grail|होली ग्रेल]] के रहस्यों को जानने के लिए अध्ययन करते थे, और स्वयं का आध्यात्मिक विकास भी करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ परंपराओं में मर्लिन को एक ईश्वरीय ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है जिन्होंने तारों का अध्ययन किया और जिनकी भविष्यवाणियाँ सत्तर सचिवों द्वारा दर्ज की गईं। &amp;quot;द प्रोफेसीस ऑफ मर्लिन&amp;quot;, जो आर्थर के समय से लेकर सुदूर भविष्य तक की घटनाओं का वर्णन करती है, मध्य युग में अत्यंत लोकप्रिय थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Roger-bacon-statue.jpg|thumb|upright|alt=caption|ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में रोजर बेकन की प्रतिमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Roger_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== रोजर बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Roger Bacon|रोजर बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में रोजर बेकन (१२२०-१२९२) थे। बेकन के रूप में वे एक दार्शनिक, फ्रांसिस्कन भिक्षु, शिक्षाविद्, शैक्षिक सुधारक और प्रयोगात्मक वैज्ञानिक थे। वो एक ऐसा युग था जब विज्ञान का मापदंड धर्म और तर्क पर आधारित था, और ऐसे समय में बेकन ने विज्ञान में प्रयोगात्मक पद्धति को बढ़ावा दिया; उन्होंने कहा कि दुनिया गोल है - उन्होंने उस समय के विद्वानों और वैज्ञानिकों की संकीर्ण विचारधारा की निंदा की। उन्होंने कहा कि &amp;quot;सच्चा ज्ञान दूसरों के अधिकार से नहीं उत्पन्न होता और ना ही यह पुरातनपंथी सिद्धांतों के प्रति अंधश्रद्धा से उपजता है।&amp;quot; &amp;lt;ref&amp;gt;हेनरी थॉमस एंड डाना ली थॉमस, ''लिविंग बायोग्राफीज़ ऑफ़ ग्रेट साइंटिस्ट्स'' (गार्डन सिटी, न्यूयॉर्क: नेल्सन डबलडे, १९४१), पृष्ठ १५.&amp;lt;/ref&amp;gt; अंततः बेकन ने पेरिस विश्वविद्यालय में व्याख्याता का पद छोड़ दिया और फ्रांसिस्कन ऑर्डर ऑफ़ फ्रायर्स माइनर में शामिल हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेकन रसायन विद्या, प्रकाशविज्ञान, गणित और विभिन्न भाषाओं पर अपने गहन शोध के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत और आधुनिक तकनीक का भविष्यवक्ता माना जाता है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि आने वाले समय में गर्म हवा के गुब्बारे, उड़ने वाली मशीन, चश्मे, दूरबीन, सूक्ष्मदशंक यंत्र, लिफ्ट और यंत्रचालित जहाज़ और गाड़ियां होंगी - उन्होंने इन सब के बारे में ऐसे लिखा मानो ये उनका प्रत्यक्ष अनुभव हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनके वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण, धर्मशास्त्रियों पर उनके आक्षेपों और रसायन विद्या तथा ज्योतिष शास्त्र के उनके ज्ञान के कारण उन पर &amp;quot;विधर्मी और असमान्य&amp;quot; होने के आरोप लगे। इन सब बातों के लिए उनके साथी फ्रांसिस्कन लोगों ने उन्हें चौदह साल के लिए कारावास में डाल दिया। लेकिन अपने अनुयायियों के लिए बेकन &amp;quot;डॉक्टर मिराबिलिस&amp;quot; (&amp;quot;अद्भुत शिक्षक&amp;quot;) थे - ये एक ऐसी उपाधि है जिससे उन्हें सदियों से जाना जाता रहा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Portrait of a Man, Said to be Christopher Columbus.jpg|thumb|left|alt=caption|सेबेस्टियानो डेल पियोम्बो द्वारा बनाया गया क्रिस्टोफर कोलंबस का उनका मरणोपरांत चित्र (१५१९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Christopher_Columbus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== क्रिस्टोफर कोलंबस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Christopher Columbus|क्रिस्टोफर कोलंबस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि &amp;quot;यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२  की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें &amp;quot;नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। &amp;quot;इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.&amp;lt;/ref&amp;gt; उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, &amp;quot;आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।&amp;quot; कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक &amp;quot;लास प्रोफिसियास (द प्रोफेसीस )&amp;quot;, में लिखा। &amp;quot;द बुक ऑफ़ प्रोफेसीस कंसर्निंग द डिस्कवरी ऑफ़ इंडीज एंड द रिकवरी ऑफ़ जेरुसलम&amp;quot; में इन बातों के बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है। हालाँकि इस बात पर कम ही ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह एक माना हुआ तथ्य है तथा इसके बारे में &amp;quot;एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका&amp;quot; में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि &amp;quot;कोलंबस ने खगोल विज्ञान नहीं वरन भविष्यवाणी का अनुसरण कर अमरीका की खोज की थी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|फ्रांसिस बेकन, विस्काउंट सेंट एल्बन, एक अज्ञात कलाकार द्वारा बनाया चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== फ्रांसिस बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस बेकन (१५६१-१६२६) एक दार्शनिक, राजनेता, निबंधकार और साहित्यकार थे। बेकन को पश्चिम का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञानी और विचारक कहा जाता है। वे विवेचनात्मक तार्किकता (एक तर्क पद्धति है जिसमें विशिष्ट तथ्यों को जोड़कर एक सामान्य निष्कर्ष निकाला जाता है) और वैज्ञानिक पद्धति के जनक माने जाते हैं। वे काफी हद तक इस तकनीकी युग के लिए ज़िम्मेदार हैं जिसमें हम आज जी रहे हैं। वे जानते थे कि केवल व्यावहारिक विज्ञान ही जनसाधारण को मानवीय कष्टों और आम ज़िन्दगी की नीरसता से मुक्ति दिला सकता है और ऐसा होने पर ही मनुष्य आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सकता है, व् उस उत्तम आध्यात्मिकता की पुनः खोज कर सकता है जिसे वह पहले कभी अच्छी तरह से जानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;महान असंतृप्ति&amp;quot; (अर्थात पतन, नाश , गलतियों, और जीर्णावस्था के बाद वृहद् पुनर्स्थापना) &amp;quot;संपूर्ण विश्व&amp;quot; को बदलने का उनका तरीका था। इस बात की अवधारणा पहली बार उन्होंने बचपन में की थी। फिर १६०७, में उन्होंने इसी नाम से अपनी पुस्तक में इसे मूर्त रूप दिया। इसके बाद अंग्रेजी पुनर्जागरण की शुरुआत की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ-साथ बेकन ने अपने आसपास कुछ ऐसे लेखकों को एकत्र किया जो एलिज़ाबेथकालीन साहित्य के लिए ज़िम्मेदार थे। इनमें से कुछ एक &amp;quot;गुप्त संस्था&amp;quot;  - &amp;quot;द नाइट्स ऑफ़ द हेलमेट&amp;quot; के सदस्य थे।  इस संस्था का लक्ष्य अंग्रेजी भाषा का विस्तार करना था और एक ऐसे नए साहित्य की रचना करना था जिसे अंग्रेज लोग समझ पाएं। बेकन ने [[Special:MyLanguage/Bible translations|बाइबल के अनुवाद]] (किंग जेम्स का संस्करण) का भी आयोजन किया - उनका यह दृढ़ निश्चय था कि आम लोगों को भी ईश्वर के कहे शब्दों को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८९० के दशक में शेक्सपियर के नाटकों के मूल मुद्रणों और बेकन तथा अन्य एलिज़ाबेथ काल के लेखकों की कृतियों में लिखे सांकेतिक शब्दों से यह आभास होता है कि बेकन ने शेक्सपियर के नाटक लिखे थे और वे महारानी एलिजाबेथ और लॉर्ड लीसेस्टर के पुत्र थे।&amp;lt;ref&amp;gt;देखें{{TSC}}.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि उनकी माँ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया क्योंकि वह डरती थीं की सत्ता उचित समय से पहले भी उनके हाथ से निकल सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीवन के अंतिम वर्षों में बेकन को बहुत तंग किया गया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा को पहचानने वाला कोई नहीं था। ऐसा कहा जाता है कि उनकी मृत्यु १६२६ में हुई थी, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि उसके बाद भी वे गुप्त रूप से कुछ समय तक यूरोप में रहे। उन्होंने ऐसी कठिन परिस्थितियों का वीरता से सामना किया जो किसी भी सामान्य मनुष्य को नष्ट कर सकती हैं। फिर १ मई, १६८४, को उनकी जीवात्मा [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] के आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] से स्वर्ग सिधार गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Count of St Germain.jpg|thumb|upright|ले कॉम्टे डे संत जर्मेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Rembrandt - De Poolse ruiter, c.1655 (Frick Collection).jpg|thumb|upright=1.2|रेम्ब्रांट द्वारा लगभग १६५५ में बनाया गया चित्र ''द पोलिश राइडर'' जिसमें संत जर्मेन को यूरोप के वंडरमैन के रूप में दर्शाया गया है&amp;lt;ref&amp;gt;मार्क प्रोफेट, २९ दिसंबर, १९६७&amp;lt;/ref&amp;gt;]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_Wonderman_of_Europe&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यूरोप का अजूबा आदमी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Wonderman of Europe|यूरोप का अजूबा आदमी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लोगों को मुक्ति दिलाने की सर्वोपरि इच्छा रखते हुए संत जर्मेन ने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] से भौतिक शरीर में पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मांगी और उन्हें यह अनुमति मिल भी गई। वे &amp;quot;ले कॉम्टे डे सेंट जर्मेन&amp;quot; के रूप में प्रकट हुए - एक &amp;quot;चमत्कारी&amp;quot; सज्जन जिन्होंने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के दौरान यूरोप के दरबारों को चकित कर दिया था। यहीं से उन्हें &amp;quot;द वंडरमैन (एक अजूबा आदमी)&amp;quot; का खिताब मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे एक आद्यवैज्ञानिक, विद्वान, भाषाविद्, कवि, संगीतकार, कलाकार, कथाकार और राजनयिक थे। यूरोप के दरबारों में उनकी काफी प्रशंसा की जाती थी। उन्हें मणियों की पहचान थी, उन्हें हीरे और अन्य रत्नों में दोष निकालने के लिए जाना जाता था। साथ ही उन्हें एक हाथ से पत्र और दूसरे हाथ से कविता लिखने जैसे कार्य के लिए भी जाना जाता था। वोल्टेयर के शब्दों में &amp;quot;वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो कभी नहीं मर सकता, और जो सब कुछ जानता है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;वोल्टेयर, ''ओयूव्रेस'', लेट्रे cxviii, सं. बेउचोट, lviii, पृष्ठ ३६०, इसाबेल कूपर-ओकले, ''द काउंट ऑफ़ सेंट जर्मेन'' (ब्लौवेल्ट, एन.वाई.: रुडोल्फ स्टीनर पब्लिकेशंस, १९७०), पृष्ठ ९६ में उद्धृत।&amp;lt;/ref&amp;gt; उनका उल्लेख फ्रेडरिक द ग्रेट, वोल्टेयर, होरेस वालपोल और कैसानोवा के पत्रों और उस समय के समाचार पत्रों में मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परदे के पीछे से वे यह प्रयास कर रहे थे कि [[Special:MyLanguage/French Revolution|फ्रांसीसी क्रांति]] बिना रक्तपात के हो जाए - राजतंत्र को प्रजातंत्र में आराम से बदल दिया जाए ताकि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की सरकार हो। लेकिन उनकी इस सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यूरोप को एकजुट करने के अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने [[Special:MyLanguage/Napoleon|नेपोलियन]] का समर्थन किया, परन्तु नेपोलियन ने अपने गुरु की शक्तियों का दुरुपयोग किया और मृत्यु को प्राप्त किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन इससे भी पहले संत जर्मेन ने अपना ध्यान एक नई दुनिया की ओर मोड़ लिया था। वे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके [[Special:MyLanguage/George Washington|प्रथम राष्ट्रपति]] के प्रायोजक बने। स्वतंत्रता की घोषणा और संविधान उन्हीं से प्रेरित था। उन्होंने कई ऐसे उपकरणों को बनाने की प्रेरणा भी दी जिनसे शारीरिक श्रम का कम से कम उपयोग हो ताकि मानवजाति कठिन परिश्रम से मुक्त होकर ईश्वर-प्राप्ति के रास्ते पर चल सके। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Chohan_of_the_Seventh_Ray&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== सातवीं किरण के चौहान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, संत जर्मेन ने महिला दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Kuan Yin|कुआन यिन]] से सातवीं किरण चौहान का पद प्राप्त किया। सातवीं किरण दया, क्षमा और पवित्र अनुष्ठान की किरण है। इसके बाद, बीसवीं शताब्दी में, संत जर्मेन एक बार फिर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट व्हाइट ब्रदरहुड) की एक बाहरी गतिविधि को प्रायोजित करने के लिए आगे बढ़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९३० के दशक के आरंभ में उन्होंने अपने &amp;quot;पृथ्वी पर कार्यरत सेनापति&amp;quot; जॉर्ज वाशिंगटन से संपर्क किया, और उन्हें एक [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहक]] के रूप में प्रशिक्षित किया।  वाशिंगटन ने [[Special:MyLanguage/Godfré Ray King|गॉडफ्रे रे किंग]] के उपनाम से, &amp;quot;अनवील्ड मिस्ट्रीज़&amp;quot;, &amp;quot;द मैजिक प्रेज़ेंस&amp;quot; और &amp;quot;द &amp;quot;आई एम&amp;quot; डिस्कोर्सेज़&amp;quot; नामक पुस्तकें लिखीं जिनमें उन्होंने संत जर्मेन द्वारा नए युग के लिए दिए गए निर्देशों के बारे में लिखा। इसी दशक के अंतिम दिनों में न्याय की देवी और अन्य [[Special:MyLanguage/cosmic being|ब्रह्मांडीय प्राणी]] पवित्र अग्नि की शिक्षाओं को मानवजाति तक पहुँचाने और [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] की शुरुआत करने में संत जर्मेन की  सहायता करने पृथ्वी पर अवतरित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९६१ में संत जर्मेन ने पृथ्वी पर अपने प्रतिनिधि, संदेशवाहक [[Special:MyLanguage/Mark L. Prophet|मार्क एल. प्रोफेट]] से संपर्क किया और [[Special:MyLanguage/Ancient of Days|प्राचीन काल]] के स्वामी (सनत कुमार) और उनके प्रथम और दूसरे शिष्य शिष्य [[Special:MyLanguage/Gautama|गौतम]] और [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] की स्मृति में [[Special:MyLanguage/Keepers of the Flame Fraternity|लौ रक्षक बिरादरी]] (कीपर्स ऑफ़ द फ्लेम फ्रैटरनिटी) की स्थापना की। इनका उद्देश्य उन सभी लोगों को पुनर्जागृत करना था जो मूल रूप से [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] के साथ पृथ्वी पर आए थे। ये लोग पृथ्वी पर शिक्षकों के रूप में आये थे और इनका काम लोगों की सेवा करना था परन्तु यहाँ आकर वे सब बातें ये बातें भूल गए थे। संत जर्मेन का कार्य उन सबकी स्मृति को पुनर्स्थापित करना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार संत जर्मेन ने मूल लौ रक्षकों को प्राचीन काल के स्वामी की वाणी को ध्यान से सुनने को कहा। उन्होंने इन सभी लोगों को अपनी आत्मा में जीवन की ज्वाला और स्वतंत्रता की पवित्र अग्नि को पुनः प्रज्वलित करने और अपने जीवन को ईश्वर की सेवा में पुनः समर्पित करने के आह्वान दिया। संत जर्मेन लौ रक्षक बिरादरी के शूरवीर सेनाध्यक्ष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Hierarch_of_the_Aquarian_Age&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कुम्भ युग के अध्यक्ष ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१ मई १९५४ को संत जर्मेन ने सनत कुमार से शक्ति का प्रभुत्व और ईसा मसीह से अगले दो हज़ार वर्ष की अवधि के लिए मानवजाति की चेतना को निर्देशित का अधिकार प्राप्त किया। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईसा मसीह का महत्व कम हो गया है। वे अब उच्च स्तरों पर [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]] के रूप में काम कर रहे हैं, और अपनी चेतना को समस्त मानवजाति के लिए पहले से भी अधिक शक्तिशाली और सर्वव्यापी रूप से दे रहे हैं क्योंकि ईश्वर का स्वभाव निरंतर श्रेष्ठ होना है। हम एक ऐसे ब्रह्मांड में रहते हैं जिसका निरंतर विस्तार होता रहता  है - ब्रह्मांड जो ईश्वर के प्रत्येक पुत्र (सूर्य) के केंद्र से विस्तारित होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दो हजार वर्ष की अवधि के दौरान वायलेट लौ का आह्वान कर के हम स्वयं में ईश्वर की ऊर्जा (जिसे हमने हजारों वर्षों की अपनी गलत आदतों द्वारा अपवित्र किया है) को शुद्ध कर सकते हैं। ऐसा करने से समस्त मानवजाति भय, अभाव, पाप, बीमारी और मृत्यु से मुक्त हो सकती है, और सभी मनुष्य स्वतंत्र रूप से प्रकाश में चल सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/age of Aquarius|कुंभ युग]] की शुरुआत में  संत जर्मेन कर्म के स्वामी के समक्ष गए और उनसे वायलेट लौ को आम इंसानों तक पहुंचाने की आज्ञा मांगी। इसके पहले तक वायलेट लौ का ज्ञान श्वेत महासंघ के आंतरिक आश्रमों और [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालयों]] में ही था। संत जर्मेन हमें वायलेट लौ के आह्वान से होने वाले लाभ के बारे में बताते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
आपमें से कुछ लोगों के अधिकतर कर्म संतुलित हो गए हैं, कुछ के [[Special:MyLanguage/heart chakra|हृदय चक्र]] निर्मल हो गए हैं। जीवन में एक नया प्रेम, नई कोमलता, नई करुणा, जीवन के प्रति एक नई संवेदनशीलता, एक नई स्वतंत्रता और उस स्वतंत्रता की खोज में एक नया आनंद आ गया है। एक नई पवित्रता का उदय भी हुआ है क्योंकि मेरी लौ के माध्यम से आपका मेलकिडेक समुदाय के पुरोहितत्व से संपर्क हुआ है। अज्ञानता और मानसिक जड़ता कुछ सीमा तक समाप्त हुई है, और लोग एक ऐसे रास्ते पर  चल पड़े हैं जो उन्हें ईश्वर तक पहुंचाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ ने पारिवारिक रिश्तों में मदद की है। इसने कुछ लोगों को अपने पुराने कर्मों को संतुलित करने में सहायता की है और वे अपने पुराने दुखों से मुक्त होने लगे हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि वायलेट लौ में ईश्वरीय न्याय की लौ निहित है, और ईश्वरीय न्याय में ईश्वर का मूल्याङ्कन। इसलिए हम ये कह सकते हैं कि वायलेट लौ एक दोधारी [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] के सामान है जो सत्य को असत्य से अलग करती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ के अनेकानेक लाभ हैं पर उन सभी को यहाँ गिनाना संभव नहीं, लेकिन यह अवश्य है इसके प्रयोग से मनुष्य के भीतर एक गहन बदलाव होता है। वायलेट लौ हमारे उन सभी मतभेदों और मनोवैज्ञानिक समस्यायों का समाधान करती है जो बचपन से या फिर उसे से भी पहले पिछले जन्मों से चली आ रही हैं और जिन्होंने हमारी चेतना में इतनी गहरी जड़ें जमा ली हैं कि वे जन्म-जन्मांतर से वहीँ स्थित हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;कीप माई पर्पल हार्ट,&amp;quot; {{POWref|३१|७२}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Alchemy&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आद्यविज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Alchemy|आद्यविज्ञान}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने अपनी पुस्तक &amp;quot;सेंट जर्मेन ऑन अल्केमी&amp;quot; में आद्यविज्ञान की शिक्षा देते हैं। वे [[Special:MyLanguage/Amethyst (gemstone)|एमेथिस्ट (रत्न)]] का उपयोग करते हैं — यह आद्द्यवैज्ञनिकों का रत्न है, कुंभ युग का रत्न है और वायलेट लौ का भी। स्ट्रॉस के वाल्ट्ज़ में वायलेट लौ का स्पंदन है और यह आपको उनके साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है। उन्होंने हमें यह भी बताया है कि [[Special:MyLanguage/Franz Liszt|फ्रांज़ लिज़्ट]] का &amp;quot;राकोज़ी मार्च&amp;quot; उनके हृदय की लौ और वायलेट लौ के सूत्र को धारण करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रयस्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन का ध्यान सहारा रेगिस्तान के ऊपर स्थित स्वर्णिम [[Special:MyLanguage/etheric city|आकाशीय शहर]] में केंद्रित है। वे [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] के साथ-साथ टेबल माउंटेन, व्योमिंग स्थित अपने भौतिक/आकाशीय आश्रय स्थल, [[Special:MyLanguage/Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स]] में भी पढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त वे महान दिव्य निर्देशक के केंद्रों —भारत में [[Special:MyLanguage/Cave of Light|केव ऑफ लाइट]] और ट्रांसिल्वेनिया में [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] में भी कार्य करते हैं, जहाँ वे धर्मगुरु के रूप में विराजमान हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिण अमेरिका में [[Special:MyLanguage/God and Goddess Meru|मेरु देवी और देवता]] के आश्रय स्थल में भी अपना केंद्र स्थापित किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप [[Special:MyLanguage/Maltese cross|माल्टीज़ क्रॉस]] है; उनकी खुशबू, वायलेट फूलों की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टीआ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “Saint Germain.”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/4/hi&amp;diff=245740</id>
		<title>Translations:Saint Germain/4/hi</title>
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		<updated>2026-02-20T11:00:30Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;''संत जरमेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जरमेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245739</id>
		<title>Saint Germain/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245739"/>
		<updated>2026-02-20T10:59:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0000144 poster-saint-germain-sindelar-1403 600.jpeg|thumb|दिव्य गुरु संत जरमेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संत जरमेन''' सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] हैं। अपनी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ी ]] महिला गुरु [[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टिया]] - जिन्हें न्याय की देवी भी कहते हैं - के साथ, वे [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुंभ युग]] के अधिपति हैं। वे स्वतंत्रता की ज्वाला के प्रायोजक हैं, तथा पोर्टिया न्याय की ज्वाला की। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जरमेन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी लोग जो सातवीं किरण का आह्वान करते हैं उन में ये एक सच्चे राजनीतिज्ञ में पाए जाने वाले सभी ईश्वरीय गुणों जैसे गरिमा, शालीनता, सज्जनता और संतुलन आदि को दर्शाते हैं। ये [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] द्वारा स्थापित [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हाउस]] के सदस्य हैं। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] आजकल इनके ट्रांसिल्वेनिया स्थित भवन में प्रतिष्ठित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''संत जरमेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जर्मेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका ध्येय ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक दो हज़ार साल का चक्र सात किरणों में से एक के अंतर्गत आता है। [[Special:MyLanguage/jesus|ईसा मसीह]] छठी किरण के चौहान के रूप में पिछले 2000 वर्षों से युग के धर्मगुरु के पद पर कार्यरत थे। 1 मई, 1954 को संत जर्मेन और पोर्टिया को आने वाले युग (सातवीं किरण का चक्र) का निदेशक नियुक्त किया गया। सातवीं किरण कुम्भ राशि की है, तथा स्वतंत्रता और न्याय कुंभ राशि के स्त्री व पुरुष तत्त्व हैं। दया के साथ मिलकर वे इस [[Special:MyLanguage/dispensation|व्यवस्था]] में ईश्वर के अन्य सभी गुणों को दर्शाने का आधार प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन और पोर्टिया लोगों को सातवें युग और सातवीं किरण की एक नई जीवन तरंग, एक नई सभ्यता और एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। सातवीं किरण को [[Special:MyLanguage/violet ray|वायलेट लौ]] कहते हैं और स्वतंत्रता, न्याय, दया, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यविज्ञान]]और पवित्र अनुष्ठान इसके गुण हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सातवीं किरण के चौहान (स्वामी) के रूप में, संत जर्मेन वायलेट लौ के माध्यम से हमारी आत्माओं को [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] के विज्ञान और अनुष्ठान में दीक्षा देते हैं। रेवेलशन १०.७ में जिनके बारे में भविष्यवाणी की गयी थी ये वही सातवें देवदूत हैं। ये परमेश्वर के रहस्य के बारे में बताने आते हैं,और यही उन्होंने अपने &amp;quot;सेवकों और भविष्यवक्ताओं को बताया है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन कहते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
मैं एक आरोहित जीव हूँ, लेकिन हमेशा से मैं ऐसा नहीं था। एक या दो नहीं, बल्कि मैंने पृथ्वी पर कई जन्म लिए हैं, और मैं इस धरती पर वैसे ही घूमता था जैसे आज आप घूम रहे हैं। मेरा नश्वर शरीर भी भौतिक आयाम की सीमाओं में बंधा था। एक जन्म में मैं [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] पर था और एक अन्य जन्म में [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] पर। मैंने कई सभ्यताओं का विकास और विनाश देखा है। मानवजाति के [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] और आदिम काल तक के चक्र काल के दौरान मैंने चेतना के उतार चढ़ाव को देखा है। मैंने देखा है कि किस तरह अपने गलत चुनावों के कारण मनुष्य ने हज़ारों सालों के वैज्ञानिक विकास और प्राप्त की गयी उस उच्चतम ब्रह्मांडीय चेतना को खो दिया जो आज के युग में सबसे उन्नत धर्म के सदस्यों के पास भी नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ, मेरे पास कई विकल्प थे, और अपने लिए मैंने चुनाव स्वयं किया है। सही चुनाव करके ही स्त्री और पुरुष पदक्रम में अपना स्थान निर्धारित करते हैं। ईश्वर की इच्छानुसार चलने का चुनाव करके हम स्वतंत्र हो जाते हैं, मैं भी जन्म और मृत्यु के चक्र से स्वतंत्र हो गया और फिर इस चक्र के बाहर मुझे एक जीवन मिला। मैंने अपनी स्वतंत्रता लौ से प्राप्त की, कुम्भ युग के मूलस्वर से प्राप्त की जिसे प्राचीन आद्यवैज्ञानिकों ने ढूँढा है,  वही बैंगनी लौ जो संतजनों के पास रहती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आप नश्वर हैं। मैं अमर हूँ। हमारे बीच बस इतना ही अंतर है कि मैंने स्वतंत्रता का चुनाव किया है, और आपको यह चुनाव करना अभी बाकी है। हम दोनों की क्षमताएँ एक समान हैं, संसाधन भी एक समान हैं, और हम दोनों का उस एक (ईश्वर) से जुड़ाव भी समान है। मैंने अपनी ईश्वरीय पहचान बनाने का चुनाव किया है। बहुत समय पहले मेरे अंतर्मन से एक शांत एवं धीमी आवाज़ आयी थी: &amp;quot;ईश्वर की संतानों, अपनी ईश्वरीय पहचान बनाओ&amp;quot;। ऐसा लगा मानों ईश्वर ही कह रहे हों। रात के सन्नाटे में जब मैंने पुकार सुनी तो उत्तर दिया, &amp;quot;अवश्य&amp;quot;। उत्तर में पूरा ब्रह्मांड बोल उठा, &amp;quot;अवश्य&amp;quot; । जब मनुष्य अपनी इच्छा प्राक्जत करता है तो उसके अस्तित्व की असीमित क्षमता दिखती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं संत जर्मेन हूँ, और कुंभ युग की विजय के लिए मैं आपकी आत्मा और हृदय की अग्नि को अपने साथ ले जाने आया हूँ। मैंने आपकी आत्मा को [[Special:MyLanguage/initiation|दीक्षित]] करने का स्वरुप स्थापित कर दिया है... मैं स्वतंत्रता के पथ पर हूँ। आप भी उस पथ पर अपनी यात्रा आरम्भ करो, आप मुझे वहीँ पाओगे। अगर आप चाहोगे तो मैं आपका गुरु होना स्वीकार करूँगा।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;आई हैव चोसन टू बी फ्री,&amp;quot; {{POWref|१८|३०}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Ruler_of_a_golden-age_civilization&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== स्वर्ण युग की सभ्यता का शासक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Golden age in the Sahara Desert|सहारा मरुस्थल में स्वर्ण युग}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पचास हज़ार साल पहले संत जर्मेन उस उपजाऊ क्षेत्र - जहाँ आज सहारा मरुस्थल स्थित है - में स्वर्ण युगीन सभ्यता के शासक थे। एक सम्राट के रूप में, संत जर्मेन प्राचीन ज्ञान और भौतिक वृतों के ज्ञान में निपुण थे। लोग उन्हें अपने उभरते हुए ईश्वरत्व के मानक के रूप में देखते थे। उनका साम्राज्य सौंदर्य, समरूपता और पूर्णता की अद्वितीय ऊँचाई तक पहुँच गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ जैसे-जैसे यहाँ के लोग ईश्वर से विमुख हो अपनी इंद्रियों के सुखों में अधिक रुचि लेने लगे, ब्रह्मांडीय परिषद ने संत जर्मेन को वहां से हटने का निर्देश दिया। परिषद् ने कहा कि लोगों के कर्म ही अब से उनके गुरु होंगे। राजा ने अपने पार्षदों और लोक सेवकों के लिए एक भव्य भोज का आयोजन किया। उनके ५७६ अतिथियों में से प्रत्येक को क्रिस्टल का एक प्याला मिला जिसमें &amp;quot;शुद्ध इलेक्ट्रॉनिक सार&amp;quot; का अमृत भरा हुआ था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह अमृत संत जर्मेन ने उन्हें अपनी आत्मा की रक्षा के लिए उपहार-स्वरूप दिया था, ताकि जब कुंभ के युग में स्वर्ण युगीन सभ्यता को वापस लाने का अवसर आए, तो ये सब लोग अपने 'ईश्वरीय स्वरुप' को पहचान पाएं। और, साथ ही अन्य सभी लोगों को एक संकेत भी मिले कि जब मनुष्य अपने मन, हृदय और अपनी जीवात्मा को ईश्वर की आत्मा के निवास के लिए उपयुक्त बनाता है, तो ईश्वर अवश्य उनके साथ निवास करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भोजन के दौरान एक ब्रह्मांडीय गुरु - जिनकी पहचान उनके माथे पर लिखा शब्द 'विजय' था - ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने लोगों को आनेवाले उस संकट के प्रति आगाह किया जो उन्होंने ईश्वर में अपने अविश्वास के कारण आमंत्रित किया था; उन्होंने लोगों को अपने ईश्वरीय स्वरुप की उपेक्षा करने के लिए डांट लगाई; और यह भविष्यवाणी भी की कि जल्द ही यह साम्राज्य एक ऐसे राजकुमार के अधीन आ जाएगा जो राजा की पुत्री से विवाह करने का इच्छुक होगा। इस घटना के सात दिन बाद राजा ही और उनका परिवार स्वर्ण-युगीन सभ्यता के आकाशीय समकक्ष नगर में चले गए। अगले ही दिन एक राजकुमार वहाँ पहुँचे और उस राज्य का कार्यभार संभाल लिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;High_priest_on_Atlantis&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== अटलांटिस पर उच्च पुजारी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरह हज़ार साल पहले संत जर्मेन [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] के मुख्य भू-भाग पर स्थित वायलेट लौ मंदिर के मुख्य पुजारी थे। उस समय उन्होंने अपने आह्वानों और कारण शरीर द्वारा एक अग्नि स्तंभ - वायलेट लौ का एक फ़व्वारा - स्थापित किया था। यहाँ दूर दूर से लोग अपने शरीर, मस्तिष्क और जीवात्मा की शुद्धि के लिए आते थे। यह वे लोग वायलेट लौ का आह्वाहन तथा सातवीं किरण के अनुष्ठानों द्वारा प्राप्त करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन लोगों ने वायलेट लौ के मंदिर में सेवा की उन्हें [[Special:MyLanguage/Zadkiel|जैडकीयल]] के आकाशीय आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Temple of Purification|टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन]] में [[Special:MyLanguage/Melchizedek|मेलकिडेक समुदाय]] के सार्वभौमिक पुरोहिताई की शिक्षा दी गई। यह आश्रय स्थल उस स्थान पर था जहां आज क्यूबा द्वीप स्थित है। इस पुरोहिताई में धर्म और विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा दी जाती है। इसी स्थान पर संत जर्मेन और [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] दोनों का समुदाय में समावेशन हुआ था। स्वयं जैडकीयल ने कहा था, &amp;quot;आप सदा के लिए मेलकिडेक समुदाय के पुरोहित रहेंगे&amp;quot;। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अटलांटिस के डूबने से पहले जब [[Special:MyLanguage/Noah|नोआह]] अपना जहाज़ बना रहे थे और लोगों को आने वाले [[Special:MyLanguage/The Flood|जल प्रलय]] की चेतावनी दे रहे थे, उस समय महान दिव्य निर्देशक ने संत जर्मेन और कुछ अन्य वफ़ादार पुजारियों को मुक्ति की लौ को टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन से निकाल कर ट्रांसिल्वेनिया के कार्पेथियन तलहटी में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कहा। यहाँ उन्होंने ऐसे समय में भी स्वतंत्रता की अग्नि को प्रज्वलित करने का पवित्र अनुष्ठान जारी रखा जब ईश्वरीय आदेश के तहत मानवजाति को उनके कर्मों का फल मिल रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आने वाले अपने सभी जन्मों में महान दिव्य निर्देशक के मार्गदर्शन में संत जर्मेन और उनके अनुयायियों ने वायलेट लौ को पुनः ढूंढा और मंदिर की रक्षा भी की। इसके बाद महान दिव्य निर्देशक ने अपने शिष्य के साथ मिलकर लौ के स्थान पर एक आश्रय स्थल स्थापित किया और हंगरी के राजघराने राकोज़ी की स्थापना भी की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_prophet_Samuel&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== ईश्वर के दूत सेमुएल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Eli and Samuel.jpg|thumb|upright|''सेमुएल एली के घर पर उन्हें परमेश्वर के न्याय के बारे में बताते हुए'', जॉन सिंगलटन कोपले (१७८०)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Uncion de David por Samuel de Antonio Gonzalez Velazquez.JPG|thumb|एंटोनियो गोंज़ालेज़ वेलाज़क्वेज़ का चित्र जिसमें सैमुअल डेविड का अभिषेक कर रहे हैं]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ग्यारहवीं शताब्दी बी सी  में संत जर्मेन ने सैमुअल के रूप में अवतार लिया था। उस समय जब सभी लोग धर्म-विमुख थे, वे एक उत्तम धार्मिक नेता सिद्ध हुए। उन्होंने इज़राइल के अंतिम न्यायाधीश और प्रथम ईश्वरदूत के रूप में कार्य किया। उन दिनों न्यायाधीश केवल विवादों को नहीं सुलझाते थे वरन  ऐसे नेता माने जाते थे जिनका ईश्वर के साथ सीधा सम्बन्ध होता था और जो अत्याचारियों के विरुद्ध इज़राइल के कबीलों को एकजुट कर सकते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल [[Special:MyLanguage/Abraham|अब्राहम]] के वंश को भ्रष्ट पुरोहितों, एली के पुत्रों, और उन अशिक्षित लोगों (वे लोग जिन्होनें युद्ध में इजराइल के लोगों ली हत्या की थी) की दासता से मुक्त कराने वाले ईश्वर के दूत थे। पारंपरिक रूप से उनके नाम [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] के साथ लिया जाता है। जब राष्ट्र अशिक्षित लोगों से उत्त्पन खतरों का सामना कर रहा था, सैमुएल के बहुत हिम्मत कर के लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर लगाया, उन्होंने लोगों को “अपने पूरे दिल से नकली गुरुओं को छोड़ असली ईश्वर के ओर लौटने का आह्वान दिया &amp;lt;ref&amp;gt;आई सैमुएल ७:३.&amp;lt;/ref&amp;gt; जल्द ही लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पश्चाताप कर सैमुएल से विनती की कि वह उनके बचाव के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। जब सैमुएल प्रार्थना कर रहे थे और अनेक प्रकार के त्याग कर रहे थे तो एक भयंकर आंधी आई जिससे इजराइल के लोगों को अपने शत्रुओं को परास्त करने का मौका मिल गया। सैमुएल के रहते अशिक्षित लोग फिर कभी इस्राएल पर राज्य नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर  दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर &amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:५.&amp;lt;/ref&amp;gt; ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”&amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:७.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने इस्राएलियों को समझाया कि राजा का शासन होने के बाद उन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन लोग फिर भी राजा की माँग पर अटल रहे। तदुपरांत सैमुअल ने शाऊल को उनका नेता नियुक्त किया; उन्होंने उसे तथा लोगों को सदैव ईश्वर के रास्ते पर चलने का निर्देश भी दिया। पर शाऊल एक विश्वासघाती सेवक साबित हुआ इसलिए सैमुअल ने उसे दंड दिया और गुप्त रूप से [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] को राजा नियुक्त किया। सैमुअल की मृत्यु के बाद उन्हें रामाह में दफनाया गया। पूरे इज़राएल ने उनके निधन का शोक मनाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Joseph&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत जोसेफ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Saint Joseph|संत जोसेफ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में संत जोसेफ थे। वे ईसा मसीह के पिता और [[Special:MyLanguage/Mother Mary|मेरी]] के पति थे। न्यू टेस्टामेंट में उनके बारे में कुछ उल्लेख मिलते हैं। बाइबल में उन्हें [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] का वशंज बताया गया है। बाइबल में इस बात का भी वर्णन है कि जब एक देवदूत ने उन्हें स्वप्न में चेतावनी दी कि हेरोड ईसा मसीह को मारने की योजना बना रहा है, तो जोसेफ अपने परिवार-सहित वह स्थान छोड़ मिस्र चले गए। हेरोड की मृत्यु के बाद ही वे वापस लौटे। ऐसी मान्यता है कि जोसेफ एक बढ़ई थे और ईसा मसीह के सार्वजनिक मंत्रालय शुरू करने से पहले ही उनका निधन हो गया था। कैथोलिक परंपरा में संत जोसेफ को विश्वव्यापी चर्च के संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनका पर्व १९ मार्च को मनाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:St Alban Evesham All Saints' church.jpg|thumb|left|upright=0.5|एवेशम में ऑल सेंट्स चर्च में रंगीन कांच की खिड़की में संत एल्बन की तस्वीर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Alban&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत एल्बन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तीसरी शताब्दी के उत्तरार्ध में संत जर्मेन ने संत एल्बन के रूप में जन्म लिया। वे ब्रिटेन के पहले शहीद हुए। एल्बन रोमन सम्राट डायोक्लेटियन के शासनकाल में ईसाइयों पर हो रहे अत्याचारों के दौरान इंग्लैंड में थे। वे एक मूर्तिपूजक थे। उन्होंने रोमन सेना में सेवा भी की थी और बाद में वेरुलामियम नामक शहर में बस गए थे। वेरुलामियम शहर का नाम बाद में बदलकर सेंट एल्बंस कर दिया गया। एल्बन ने एम्फीबालस नामक एक भगोड़े ईसाई पादरी को छुपाया था, जिसने उनका धर्म परिवर्तन करवाया था। जब सैनिक उसे ढूँढ़ने आए तो एल्बन ने पादरी को वहां से भगा दिया और स्वयं पादरी का वेश धारण कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब उनका ये कृत्य उजागर हुआ तो एल्बन को मौत की सजा सुनाई गई; उन्हें कोड़े भी मारे गए। कहा जाता है कि एल्बन की फांसी को देखने के लिए इतनी लोग जमा हो गए कि वे रास्ते में आये एक संकरे पुल पर अटक गए, भीड़ पुल पार नहीं कर पा रही थी। एल्बन ने ईश्वर से प्रार्थना की और नदी का पानी भीड़ को रास्ता देने के लिए दो भागों में बंट गया। यह नज़ारा देखने के बाद जल्लाद स्वतः धर्मान्तरित हो गया, और उसने एल्बन की जगह स्वयं की मृत्यु की भीख माँगी। जल्लाद की प्रार्थना अस्वीकार कर दी गई परन्तु उसे भी एल्बन के साथ फांसी दे दी गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
३०३ ऐ डी  में एल्बन की मृत्यु के बाद से द्वीप के लोग उनकी पूजा करने लगे। श्रद्धेय एल्बन बटलर ने अपनी किताब &amp;quot; लाइविस ऑफ़ फादर्स, मार्टियर्स एंड अदर प्रिंसिपल सेंटस&amp;quot; में लिखा है, &amp;quot;कई युगों तक संत एल्बन हमारे द्वीप के जाने-माने गौरवशाली शहीद और ईश्वर के संरक्षक के रूप में स्थापित रहे। उनके कारण कई बार हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Teacher_of_Proclus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== प्रोक्लस के शिक्षक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने आंतरिक स्तर से नियोप्लैटोनिस्ट्स (वे दार्शनिक जिन्होंने प्लेटोनिक दर्शन का उत्तर-प्राचीन संस्करण विकसित किया था; तीसरी शताब्दी के दार्शनिक प्लोटिनस इसके संस्थापक थे) के पीछे प्रमुख शिक्षक के रूप में कार्य किया। वे यूनानी दार्शनिक प्रोक्लस (४१०–४८५ ऐ डी) के पोरेरणास्रोत थ। प्रोक्लस एथेंस में 'प्लेटो अकादमी' के प्रमुख थे और समाज के एक अत्यंत सम्मानित सदस्य थे। उन्होंने यह भी बताया की प्रोक्लस पूर्व जन्म में पाइथागोरियन दार्शनिक थे। उन्होंने प्रोक्लस को कॉन्स्टेंटाइन के ईसाई धर्म के पाखंडों के बारे में बताया, और साथ ही व्यक्तिवाद (प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में ईश्वर की खोज करे) के मार्ग का महत्व भी समझाया। ईसाई व्यक्तिवाद को &amp;quot;मूर्तिपूजा&amp;quot; कहते थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने गुरु संत जर्मेन के मार्गदर्शन में प्रोक्लस ने अपने दर्शनशास्त्र को इस सिद्धांत पर आधारित किया कि सत्य केवल एक ही है और वह है कि &amp;quot;ईश्वर एक है&amp;quot;। ईश्वर को पाना ही इस जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने कहा, &amp;quot;सभी शरीरों से परे आत्मा है, सभी आत्माओं से परे बौद्धिक अस्तित्व, और सभी बौद्धिक अस्तित्वों से परे एक (ईश्वर) है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;थॉमस व्हिटेकर, ''द नियो-प्लेटोनिस्ट्स: ए स्टडी इन द हिस्ट्री ऑफ़ हेलेनिज़्म'', दूसरा संस्करण (कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, १९२८), पृष्ठ १६५.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने विभिन्न विषयों पर लिखा जैसे दर्शनशास्त्र, खगोल विज्ञान, गणित, व्याकरण इत्यादि। उनका मानना था कि उन्हें यह ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। उन्होंने स्वयं को एक ऐसा माध्यम माना जिससे ईश्वरीय रहस्योद्घाटन मानवजाति तक पहुँचता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। वे स्वयं को 'दिव्य रहस्योद्घाटन' का एक माध्यम मानते थे। उनके शिष्य मारिनस के शब्दों में &amp;quot;वे वाकई दिव्य प्रेरणा से प्रतीत होते थे क्योंकि जब उनके मुख से ज्ञानपूर्ण शब्द निकलते थे उनकी आँखों से एक तेज़ आभा निकलती थी, और उनका पूरा शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगाता था।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;विक्टर कज़िन एंड थॉमस टेलर, अनुवादक, ''ट्रीयटाईसीस  ऑफ प्रोक्लस, द प्लेटोनिक सक्सेसर'' (लंदन: ऍन.पी., १८३३), पी.वी.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Merlin&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== मर्लिन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Merlin|मर्लिन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाँचवीं शताब्दी में संत जर्मेन मर्लिन के रूप में अवतरित हुए। वे [[Special:MyLanguage/King Arthur|राजा आर्थर]] के दरबार में एक रसायनशास्त्री थे, भविष्यवक्ता और सलाहकार के रूप में कार्य करते थे। युद्धरत सामंतों से विखंडित और सैक्सन आक्रमणकारियों से त्रस्त भूमि में मर्लिन ने ब्रिटेन के राज्य को एकजुट करने के लिए बारह युद्धों (जो वास्तव में बारह दीक्षाएँ थीं) में आर्थर का नेतृत्व किया। उन्होंने [[Special:MyLanguage/Round Table|राउंड टेबल]] की पवित्र अध्येतावृत्ति स्थापित करने के लिए राजा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मर्लिन और आर्थर के मार्गदर्शन में कैमलॉट [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्य का एक विद्यालय]] था जहाँ वीर पुरुष और स्त्रियां [[Special:MyLanguage/Holy Grail|होली ग्रेल]] के रहस्यों को जानने के लिए अध्ययन करते थे, और स्वयं का आध्यात्मिक विकास भी करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ परंपराओं में मर्लिन को एक ईश्वरीय ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है जिन्होंने तारों का अध्ययन किया और जिनकी भविष्यवाणियाँ सत्तर सचिवों द्वारा दर्ज की गईं। &amp;quot;द प्रोफेसीस ऑफ मर्लिन&amp;quot;, जो आर्थर के समय से लेकर सुदूर भविष्य तक की घटनाओं का वर्णन करती है, मध्य युग में अत्यंत लोकप्रिय थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Roger-bacon-statue.jpg|thumb|upright|alt=caption|ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में रोजर बेकन की प्रतिमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Roger_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== रोजर बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Roger Bacon|रोजर बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में रोजर बेकन (१२२०-१२९२) थे। बेकन के रूप में वे एक दार्शनिक, फ्रांसिस्कन भिक्षु, शिक्षाविद्, शैक्षिक सुधारक और प्रयोगात्मक वैज्ञानिक थे। वो एक ऐसा युग था जब विज्ञान का मापदंड धर्म और तर्क पर आधारित था, और ऐसे समय में बेकन ने विज्ञान में प्रयोगात्मक पद्धति को बढ़ावा दिया; उन्होंने कहा कि दुनिया गोल है - उन्होंने उस समय के विद्वानों और वैज्ञानिकों की संकीर्ण विचारधारा की निंदा की। उन्होंने कहा कि &amp;quot;सच्चा ज्ञान दूसरों के अधिकार से नहीं उत्पन्न होता और ना ही यह पुरातनपंथी सिद्धांतों के प्रति अंधश्रद्धा से उपजता है।&amp;quot; &amp;lt;ref&amp;gt;हेनरी थॉमस एंड डाना ली थॉमस, ''लिविंग बायोग्राफीज़ ऑफ़ ग्रेट साइंटिस्ट्स'' (गार्डन सिटी, न्यूयॉर्क: नेल्सन डबलडे, १९४१), पृष्ठ १५.&amp;lt;/ref&amp;gt; अंततः बेकन ने पेरिस विश्वविद्यालय में व्याख्याता का पद छोड़ दिया और फ्रांसिस्कन ऑर्डर ऑफ़ फ्रायर्स माइनर में शामिल हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेकन रसायन विद्या, प्रकाशविज्ञान, गणित और विभिन्न भाषाओं पर अपने गहन शोध के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत और आधुनिक तकनीक का भविष्यवक्ता माना जाता है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि आने वाले समय में गर्म हवा के गुब्बारे, उड़ने वाली मशीन, चश्मे, दूरबीन, सूक्ष्मदशंक यंत्र, लिफ्ट और यंत्रचालित जहाज़ और गाड़ियां होंगी - उन्होंने इन सब के बारे में ऐसे लिखा मानो ये उनका प्रत्यक्ष अनुभव हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनके वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण, धर्मशास्त्रियों पर उनके आक्षेपों और रसायन विद्या तथा ज्योतिष शास्त्र के उनके ज्ञान के कारण उन पर &amp;quot;विधर्मी और असमान्य&amp;quot; होने के आरोप लगे। इन सब बातों के लिए उनके साथी फ्रांसिस्कन लोगों ने उन्हें चौदह साल के लिए कारावास में डाल दिया। लेकिन अपने अनुयायियों के लिए बेकन &amp;quot;डॉक्टर मिराबिलिस&amp;quot; (&amp;quot;अद्भुत शिक्षक&amp;quot;) थे - ये एक ऐसी उपाधि है जिससे उन्हें सदियों से जाना जाता रहा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Portrait of a Man, Said to be Christopher Columbus.jpg|thumb|left|alt=caption|सेबेस्टियानो डेल पियोम्बो द्वारा बनाया गया क्रिस्टोफर कोलंबस का उनका मरणोपरांत चित्र (१५१९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Christopher_Columbus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== क्रिस्टोफर कोलंबस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Christopher Columbus|क्रिस्टोफर कोलंबस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि &amp;quot;यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२  की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें &amp;quot;नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। &amp;quot;इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.&amp;lt;/ref&amp;gt; उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, &amp;quot;आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।&amp;quot; कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक &amp;quot;लास प्रोफिसियास (द प्रोफेसीस )&amp;quot;, में लिखा। &amp;quot;द बुक ऑफ़ प्रोफेसीस कंसर्निंग द डिस्कवरी ऑफ़ इंडीज एंड द रिकवरी ऑफ़ जेरुसलम&amp;quot; में इन बातों के बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है। हालाँकि इस बात पर कम ही ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह एक माना हुआ तथ्य है तथा इसके बारे में &amp;quot;एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका&amp;quot; में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि &amp;quot;कोलंबस ने खगोल विज्ञान नहीं वरन भविष्यवाणी का अनुसरण कर अमरीका की खोज की थी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|फ्रांसिस बेकन, विस्काउंट सेंट एल्बन, एक अज्ञात कलाकार द्वारा बनाया चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== फ्रांसिस बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस बेकन (१५६१-१६२६) एक दार्शनिक, राजनेता, निबंधकार और साहित्यकार थे। बेकन को पश्चिम का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञानी और विचारक कहा जाता है। वे विवेचनात्मक तार्किकता (एक तर्क पद्धति है जिसमें विशिष्ट तथ्यों को जोड़कर एक सामान्य निष्कर्ष निकाला जाता है) और वैज्ञानिक पद्धति के जनक माने जाते हैं। वे काफी हद तक इस तकनीकी युग के लिए ज़िम्मेदार हैं जिसमें हम आज जी रहे हैं। वे जानते थे कि केवल व्यावहारिक विज्ञान ही जनसाधारण को मानवीय कष्टों और आम ज़िन्दगी की नीरसता से मुक्ति दिला सकता है और ऐसा होने पर ही मनुष्य आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सकता है, व् उस उत्तम आध्यात्मिकता की पुनः खोज कर सकता है जिसे वह पहले कभी अच्छी तरह से जानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;महान असंतृप्ति&amp;quot; (अर्थात पतन, नाश , गलतियों, और जीर्णावस्था के बाद वृहद् पुनर्स्थापना) &amp;quot;संपूर्ण विश्व&amp;quot; को बदलने का उनका तरीका था। इस बात की अवधारणा पहली बार उन्होंने बचपन में की थी। फिर १६०७, में उन्होंने इसी नाम से अपनी पुस्तक में इसे मूर्त रूप दिया। इसके बाद अंग्रेजी पुनर्जागरण की शुरुआत की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ-साथ बेकन ने अपने आसपास कुछ ऐसे लेखकों को एकत्र किया जो एलिज़ाबेथकालीन साहित्य के लिए ज़िम्मेदार थे। इनमें से कुछ एक &amp;quot;गुप्त संस्था&amp;quot;  - &amp;quot;द नाइट्स ऑफ़ द हेलमेट&amp;quot; के सदस्य थे।  इस संस्था का लक्ष्य अंग्रेजी भाषा का विस्तार करना था और एक ऐसे नए साहित्य की रचना करना था जिसे अंग्रेज लोग समझ पाएं। बेकन ने [[Special:MyLanguage/Bible translations|बाइबल के अनुवाद]] (किंग जेम्स का संस्करण) का भी आयोजन किया - उनका यह दृढ़ निश्चय था कि आम लोगों को भी ईश्वर के कहे शब्दों को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८९० के दशक में शेक्सपियर के नाटकों के मूल मुद्रणों और बेकन तथा अन्य एलिज़ाबेथ काल के लेखकों की कृतियों में लिखे सांकेतिक शब्दों से यह आभास होता है कि बेकन ने शेक्सपियर के नाटक लिखे थे और वे महारानी एलिजाबेथ और लॉर्ड लीसेस्टर के पुत्र थे।&amp;lt;ref&amp;gt;देखें{{TSC}}.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि उनकी माँ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया क्योंकि वह डरती थीं की सत्ता उचित समय से पहले भी उनके हाथ से निकल सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीवन के अंतिम वर्षों में बेकन को बहुत तंग किया गया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा को पहचानने वाला कोई नहीं था। ऐसा कहा जाता है कि उनकी मृत्यु १६२६ में हुई थी, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि उसके बाद भी वे गुप्त रूप से कुछ समय तक यूरोप में रहे। उन्होंने ऐसी कठिन परिस्थितियों का वीरता से सामना किया जो किसी भी सामान्य मनुष्य को नष्ट कर सकती हैं। फिर १ मई, १६८४, को उनकी जीवात्मा [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] के आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] से स्वर्ग सिधार गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Count of St Germain.jpg|thumb|upright|ले कॉम्टे डे संत जर्मेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Rembrandt - De Poolse ruiter, c.1655 (Frick Collection).jpg|thumb|upright=1.2|रेम्ब्रांट द्वारा लगभग १६५५ में बनाया गया चित्र ''द पोलिश राइडर'' जिसमें संत जर्मेन को यूरोप के वंडरमैन के रूप में दर्शाया गया है&amp;lt;ref&amp;gt;मार्क प्रोफेट, २९ दिसंबर, १९६७&amp;lt;/ref&amp;gt;]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_Wonderman_of_Europe&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यूरोप का अजूबा आदमी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Wonderman of Europe|यूरोप का अजूबा आदमी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लोगों को मुक्ति दिलाने की सर्वोपरि इच्छा रखते हुए संत जर्मेन ने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] से भौतिक शरीर में पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मांगी और उन्हें यह अनुमति मिल भी गई। वे &amp;quot;ले कॉम्टे डे सेंट जर्मेन&amp;quot; के रूप में प्रकट हुए - एक &amp;quot;चमत्कारी&amp;quot; सज्जन जिन्होंने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के दौरान यूरोप के दरबारों को चकित कर दिया था। यहीं से उन्हें &amp;quot;द वंडरमैन (एक अजूबा आदमी)&amp;quot; का खिताब मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे एक आद्यवैज्ञानिक, विद्वान, भाषाविद्, कवि, संगीतकार, कलाकार, कथाकार और राजनयिक थे। यूरोप के दरबारों में उनकी काफी प्रशंसा की जाती थी। उन्हें मणियों की पहचान थी, उन्हें हीरे और अन्य रत्नों में दोष निकालने के लिए जाना जाता था। साथ ही उन्हें एक हाथ से पत्र और दूसरे हाथ से कविता लिखने जैसे कार्य के लिए भी जाना जाता था। वोल्टेयर के शब्दों में &amp;quot;वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो कभी नहीं मर सकता, और जो सब कुछ जानता है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;वोल्टेयर, ''ओयूव्रेस'', लेट्रे cxviii, सं. बेउचोट, lviii, पृष्ठ ३६०, इसाबेल कूपर-ओकले, ''द काउंट ऑफ़ सेंट जर्मेन'' (ब्लौवेल्ट, एन.वाई.: रुडोल्फ स्टीनर पब्लिकेशंस, १९७०), पृष्ठ ९६ में उद्धृत।&amp;lt;/ref&amp;gt; उनका उल्लेख फ्रेडरिक द ग्रेट, वोल्टेयर, होरेस वालपोल और कैसानोवा के पत्रों और उस समय के समाचार पत्रों में मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परदे के पीछे से वे यह प्रयास कर रहे थे कि [[Special:MyLanguage/French Revolution|फ्रांसीसी क्रांति]] बिना रक्तपात के हो जाए - राजतंत्र को प्रजातंत्र में आराम से बदल दिया जाए ताकि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की सरकार हो। लेकिन उनकी इस सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यूरोप को एकजुट करने के अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने [[Special:MyLanguage/Napoleon|नेपोलियन]] का समर्थन किया, परन्तु नेपोलियन ने अपने गुरु की शक्तियों का दुरुपयोग किया और मृत्यु को प्राप्त किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन इससे भी पहले संत जर्मेन ने अपना ध्यान एक नई दुनिया की ओर मोड़ लिया था। वे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके [[Special:MyLanguage/George Washington|प्रथम राष्ट्रपति]] के प्रायोजक बने। स्वतंत्रता की घोषणा और संविधान उन्हीं से प्रेरित था। उन्होंने कई ऐसे उपकरणों को बनाने की प्रेरणा भी दी जिनसे शारीरिक श्रम का कम से कम उपयोग हो ताकि मानवजाति कठिन परिश्रम से मुक्त होकर ईश्वर-प्राप्ति के रास्ते पर चल सके। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Chohan_of_the_Seventh_Ray&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== सातवीं किरण के चौहान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, संत जर्मेन ने महिला दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Kuan Yin|कुआन यिन]] से सातवीं किरण चौहान का पद प्राप्त किया। सातवीं किरण दया, क्षमा और पवित्र अनुष्ठान की किरण है। इसके बाद, बीसवीं शताब्दी में, संत जर्मेन एक बार फिर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट व्हाइट ब्रदरहुड) की एक बाहरी गतिविधि को प्रायोजित करने के लिए आगे बढ़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९३० के दशक के आरंभ में उन्होंने अपने &amp;quot;पृथ्वी पर कार्यरत सेनापति&amp;quot; जॉर्ज वाशिंगटन से संपर्क किया, और उन्हें एक [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहक]] के रूप में प्रशिक्षित किया।  वाशिंगटन ने [[Special:MyLanguage/Godfré Ray King|गॉडफ्रे रे किंग]] के उपनाम से, &amp;quot;अनवील्ड मिस्ट्रीज़&amp;quot;, &amp;quot;द मैजिक प्रेज़ेंस&amp;quot; और &amp;quot;द &amp;quot;आई एम&amp;quot; डिस्कोर्सेज़&amp;quot; नामक पुस्तकें लिखीं जिनमें उन्होंने संत जर्मेन द्वारा नए युग के लिए दिए गए निर्देशों के बारे में लिखा। इसी दशक के अंतिम दिनों में न्याय की देवी और अन्य [[Special:MyLanguage/cosmic being|ब्रह्मांडीय प्राणी]] पवित्र अग्नि की शिक्षाओं को मानवजाति तक पहुँचाने और [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] की शुरुआत करने में संत जर्मेन की  सहायता करने पृथ्वी पर अवतरित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९६१ में संत जर्मेन ने पृथ्वी पर अपने प्रतिनिधि, संदेशवाहक [[Special:MyLanguage/Mark L. Prophet|मार्क एल. प्रोफेट]] से संपर्क किया और [[Special:MyLanguage/Ancient of Days|प्राचीन काल]] के स्वामी (सनत कुमार) और उनके प्रथम और दूसरे शिष्य शिष्य [[Special:MyLanguage/Gautama|गौतम]] और [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] की स्मृति में [[Special:MyLanguage/Keepers of the Flame Fraternity|लौ रक्षक बिरादरी]] (कीपर्स ऑफ़ द फ्लेम फ्रैटरनिटी) की स्थापना की। इनका उद्देश्य उन सभी लोगों को पुनर्जागृत करना था जो मूल रूप से [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] के साथ पृथ्वी पर आए थे। ये लोग पृथ्वी पर शिक्षकों के रूप में आये थे और इनका काम लोगों की सेवा करना था परन्तु यहाँ आकर वे सब बातें ये बातें भूल गए थे। संत जर्मेन का कार्य उन सबकी स्मृति को पुनर्स्थापित करना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार संत जर्मेन ने मूल लौ रक्षकों को प्राचीन काल के स्वामी की वाणी को ध्यान से सुनने को कहा। उन्होंने इन सभी लोगों को अपनी आत्मा में जीवन की ज्वाला और स्वतंत्रता की पवित्र अग्नि को पुनः प्रज्वलित करने और अपने जीवन को ईश्वर की सेवा में पुनः समर्पित करने के आह्वान दिया। संत जर्मेन लौ रक्षक बिरादरी के शूरवीर सेनाध्यक्ष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Hierarch_of_the_Aquarian_Age&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कुम्भ युग के अध्यक्ष ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१ मई १९५४ को संत जर्मेन ने सनत कुमार से शक्ति का प्रभुत्व और ईसा मसीह से अगले दो हज़ार वर्ष की अवधि के लिए मानवजाति की चेतना को निर्देशित का अधिकार प्राप्त किया। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईसा मसीह का महत्व कम हो गया है। वे अब उच्च स्तरों पर [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]] के रूप में काम कर रहे हैं, और अपनी चेतना को समस्त मानवजाति के लिए पहले से भी अधिक शक्तिशाली और सर्वव्यापी रूप से दे रहे हैं क्योंकि ईश्वर का स्वभाव निरंतर श्रेष्ठ होना है। हम एक ऐसे ब्रह्मांड में रहते हैं जिसका निरंतर विस्तार होता रहता  है - ब्रह्मांड जो ईश्वर के प्रत्येक पुत्र (सूर्य) के केंद्र से विस्तारित होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दो हजार वर्ष की अवधि के दौरान वायलेट लौ का आह्वान कर के हम स्वयं में ईश्वर की ऊर्जा (जिसे हमने हजारों वर्षों की अपनी गलत आदतों द्वारा अपवित्र किया है) को शुद्ध कर सकते हैं। ऐसा करने से समस्त मानवजाति भय, अभाव, पाप, बीमारी और मृत्यु से मुक्त हो सकती है, और सभी मनुष्य स्वतंत्र रूप से प्रकाश में चल सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/age of Aquarius|कुंभ युग]] की शुरुआत में  संत जर्मेन कर्म के स्वामी के समक्ष गए और उनसे वायलेट लौ को आम इंसानों तक पहुंचाने की आज्ञा मांगी। इसके पहले तक वायलेट लौ का ज्ञान श्वेत महासंघ के आंतरिक आश्रमों और [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालयों]] में ही था। संत जर्मेन हमें वायलेट लौ के आह्वान से होने वाले लाभ के बारे में बताते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
आपमें से कुछ लोगों के अधिकतर कर्म संतुलित हो गए हैं, कुछ के [[Special:MyLanguage/heart chakra|हृदय चक्र]] निर्मल हो गए हैं। जीवन में एक नया प्रेम, नई कोमलता, नई करुणा, जीवन के प्रति एक नई संवेदनशीलता, एक नई स्वतंत्रता और उस स्वतंत्रता की खोज में एक नया आनंद आ गया है। एक नई पवित्रता का उदय भी हुआ है क्योंकि मेरी लौ के माध्यम से आपका मेलकिडेक समुदाय के पुरोहितत्व से संपर्क हुआ है। अज्ञानता और मानसिक जड़ता कुछ सीमा तक समाप्त हुई है, और लोग एक ऐसे रास्ते पर  चल पड़े हैं जो उन्हें ईश्वर तक पहुंचाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ ने पारिवारिक रिश्तों में मदद की है। इसने कुछ लोगों को अपने पुराने कर्मों को संतुलित करने में सहायता की है और वे अपने पुराने दुखों से मुक्त होने लगे हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि वायलेट लौ में ईश्वरीय न्याय की लौ निहित है, और ईश्वरीय न्याय में ईश्वर का मूल्याङ्कन। इसलिए हम ये कह सकते हैं कि वायलेट लौ एक दोधारी [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] के सामान है जो सत्य को असत्य से अलग करती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ के अनेकानेक लाभ हैं पर उन सभी को यहाँ गिनाना संभव नहीं, लेकिन यह अवश्य है इसके प्रयोग से मनुष्य के भीतर एक गहन बदलाव होता है। वायलेट लौ हमारे उन सभी मतभेदों और मनोवैज्ञानिक समस्यायों का समाधान करती है जो बचपन से या फिर उसे से भी पहले पिछले जन्मों से चली आ रही हैं और जिन्होंने हमारी चेतना में इतनी गहरी जड़ें जमा ली हैं कि वे जन्म-जन्मांतर से वहीँ स्थित हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;कीप माई पर्पल हार्ट,&amp;quot; {{POWref|३१|७२}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Alchemy&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आद्यविज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Alchemy|आद्यविज्ञान}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने अपनी पुस्तक &amp;quot;सेंट जर्मेन ऑन अल्केमी&amp;quot; में आद्यविज्ञान की शिक्षा देते हैं। वे [[Special:MyLanguage/Amethyst (gemstone)|एमेथिस्ट (रत्न)]] का उपयोग करते हैं — यह आद्द्यवैज्ञनिकों का रत्न है, कुंभ युग का रत्न है और वायलेट लौ का भी। स्ट्रॉस के वाल्ट्ज़ में वायलेट लौ का स्पंदन है और यह आपको उनके साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है। उन्होंने हमें यह भी बताया है कि [[Special:MyLanguage/Franz Liszt|फ्रांज़ लिज़्ट]] का &amp;quot;राकोज़ी मार्च&amp;quot; उनके हृदय की लौ और वायलेट लौ के सूत्र को धारण करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रयस्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन का ध्यान सहारा रेगिस्तान के ऊपर स्थित स्वर्णिम [[Special:MyLanguage/etheric city|आकाशीय शहर]] में केंद्रित है। वे [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] के साथ-साथ टेबल माउंटेन, व्योमिंग स्थित अपने भौतिक/आकाशीय आश्रय स्थल, [[Special:MyLanguage/Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स]] में भी पढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त वे महान दिव्य निर्देशक के केंद्रों —भारत में [[Special:MyLanguage/Cave of Light|केव ऑफ लाइट]] और ट्रांसिल्वेनिया में [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] में भी कार्य करते हैं, जहाँ वे धर्मगुरु के रूप में विराजमान हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिण अमेरिका में [[Special:MyLanguage/God and Goddess Meru|मेरु देवी और देवता]] के आश्रय स्थल में भी अपना केंद्र स्थापित किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप [[Special:MyLanguage/Maltese cross|माल्टीज़ क्रॉस]] है; उनकी खुशबू, वायलेट फूलों की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टीआ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “Saint Germain.”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/4/hi&amp;diff=245738</id>
		<title>Translations:Saint Germain/4/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/4/hi&amp;diff=245738"/>
		<updated>2026-02-20T10:59:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;''संत जरमेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जर्मेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245737</id>
		<title>Saint Germain/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245737"/>
		<updated>2026-02-20T10:59:31Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0000144 poster-saint-germain-sindelar-1403 600.jpeg|thumb|दिव्य गुरु संत जरमेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संत जरमेन''' सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] हैं। अपनी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ी ]] महिला गुरु [[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टिया]] - जिन्हें न्याय की देवी भी कहते हैं - के साथ, वे [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुंभ युग]] के अधिपति हैं। वे स्वतंत्रता की ज्वाला के प्रायोजक हैं, तथा पोर्टिया न्याय की ज्वाला की। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जरमेन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी लोग जो सातवीं किरण का आह्वान करते हैं उन में ये एक सच्चे राजनीतिज्ञ में पाए जाने वाले सभी ईश्वरीय गुणों जैसे गरिमा, शालीनता, सज्जनता और संतुलन आदि को दर्शाते हैं। ये [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] द्वारा स्थापित [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हाउस]] के सदस्य हैं। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] आजकल इनके ट्रांसिल्वेनिया स्थित भवन में प्रतिष्ठित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''संत जर्मेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जर्मेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका ध्येय ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक दो हज़ार साल का चक्र सात किरणों में से एक के अंतर्गत आता है। [[Special:MyLanguage/jesus|ईसा मसीह]] छठी किरण के चौहान के रूप में पिछले 2000 वर्षों से युग के धर्मगुरु के पद पर कार्यरत थे। 1 मई, 1954 को संत जर्मेन और पोर्टिया को आने वाले युग (सातवीं किरण का चक्र) का निदेशक नियुक्त किया गया। सातवीं किरण कुम्भ राशि की है, तथा स्वतंत्रता और न्याय कुंभ राशि के स्त्री व पुरुष तत्त्व हैं। दया के साथ मिलकर वे इस [[Special:MyLanguage/dispensation|व्यवस्था]] में ईश्वर के अन्य सभी गुणों को दर्शाने का आधार प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन और पोर्टिया लोगों को सातवें युग और सातवीं किरण की एक नई जीवन तरंग, एक नई सभ्यता और एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। सातवीं किरण को [[Special:MyLanguage/violet ray|वायलेट लौ]] कहते हैं और स्वतंत्रता, न्याय, दया, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यविज्ञान]]और पवित्र अनुष्ठान इसके गुण हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सातवीं किरण के चौहान (स्वामी) के रूप में, संत जर्मेन वायलेट लौ के माध्यम से हमारी आत्माओं को [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] के विज्ञान और अनुष्ठान में दीक्षा देते हैं। रेवेलशन १०.७ में जिनके बारे में भविष्यवाणी की गयी थी ये वही सातवें देवदूत हैं। ये परमेश्वर के रहस्य के बारे में बताने आते हैं,और यही उन्होंने अपने &amp;quot;सेवकों और भविष्यवक्ताओं को बताया है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन कहते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
मैं एक आरोहित जीव हूँ, लेकिन हमेशा से मैं ऐसा नहीं था। एक या दो नहीं, बल्कि मैंने पृथ्वी पर कई जन्म लिए हैं, और मैं इस धरती पर वैसे ही घूमता था जैसे आज आप घूम रहे हैं। मेरा नश्वर शरीर भी भौतिक आयाम की सीमाओं में बंधा था। एक जन्म में मैं [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] पर था और एक अन्य जन्म में [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] पर। मैंने कई सभ्यताओं का विकास और विनाश देखा है। मानवजाति के [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] और आदिम काल तक के चक्र काल के दौरान मैंने चेतना के उतार चढ़ाव को देखा है। मैंने देखा है कि किस तरह अपने गलत चुनावों के कारण मनुष्य ने हज़ारों सालों के वैज्ञानिक विकास और प्राप्त की गयी उस उच्चतम ब्रह्मांडीय चेतना को खो दिया जो आज के युग में सबसे उन्नत धर्म के सदस्यों के पास भी नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ, मेरे पास कई विकल्प थे, और अपने लिए मैंने चुनाव स्वयं किया है। सही चुनाव करके ही स्त्री और पुरुष पदक्रम में अपना स्थान निर्धारित करते हैं। ईश्वर की इच्छानुसार चलने का चुनाव करके हम स्वतंत्र हो जाते हैं, मैं भी जन्म और मृत्यु के चक्र से स्वतंत्र हो गया और फिर इस चक्र के बाहर मुझे एक जीवन मिला। मैंने अपनी स्वतंत्रता लौ से प्राप्त की, कुम्भ युग के मूलस्वर से प्राप्त की जिसे प्राचीन आद्यवैज्ञानिकों ने ढूँढा है,  वही बैंगनी लौ जो संतजनों के पास रहती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आप नश्वर हैं। मैं अमर हूँ। हमारे बीच बस इतना ही अंतर है कि मैंने स्वतंत्रता का चुनाव किया है, और आपको यह चुनाव करना अभी बाकी है। हम दोनों की क्षमताएँ एक समान हैं, संसाधन भी एक समान हैं, और हम दोनों का उस एक (ईश्वर) से जुड़ाव भी समान है। मैंने अपनी ईश्वरीय पहचान बनाने का चुनाव किया है। बहुत समय पहले मेरे अंतर्मन से एक शांत एवं धीमी आवाज़ आयी थी: &amp;quot;ईश्वर की संतानों, अपनी ईश्वरीय पहचान बनाओ&amp;quot;। ऐसा लगा मानों ईश्वर ही कह रहे हों। रात के सन्नाटे में जब मैंने पुकार सुनी तो उत्तर दिया, &amp;quot;अवश्य&amp;quot;। उत्तर में पूरा ब्रह्मांड बोल उठा, &amp;quot;अवश्य&amp;quot; । जब मनुष्य अपनी इच्छा प्राक्जत करता है तो उसके अस्तित्व की असीमित क्षमता दिखती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं संत जर्मेन हूँ, और कुंभ युग की विजय के लिए मैं आपकी आत्मा और हृदय की अग्नि को अपने साथ ले जाने आया हूँ। मैंने आपकी आत्मा को [[Special:MyLanguage/initiation|दीक्षित]] करने का स्वरुप स्थापित कर दिया है... मैं स्वतंत्रता के पथ पर हूँ। आप भी उस पथ पर अपनी यात्रा आरम्भ करो, आप मुझे वहीँ पाओगे। अगर आप चाहोगे तो मैं आपका गुरु होना स्वीकार करूँगा।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;आई हैव चोसन टू बी फ्री,&amp;quot; {{POWref|१८|३०}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Ruler_of_a_golden-age_civilization&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== स्वर्ण युग की सभ्यता का शासक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Golden age in the Sahara Desert|सहारा मरुस्थल में स्वर्ण युग}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पचास हज़ार साल पहले संत जर्मेन उस उपजाऊ क्षेत्र - जहाँ आज सहारा मरुस्थल स्थित है - में स्वर्ण युगीन सभ्यता के शासक थे। एक सम्राट के रूप में, संत जर्मेन प्राचीन ज्ञान और भौतिक वृतों के ज्ञान में निपुण थे। लोग उन्हें अपने उभरते हुए ईश्वरत्व के मानक के रूप में देखते थे। उनका साम्राज्य सौंदर्य, समरूपता और पूर्णता की अद्वितीय ऊँचाई तक पहुँच गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ जैसे-जैसे यहाँ के लोग ईश्वर से विमुख हो अपनी इंद्रियों के सुखों में अधिक रुचि लेने लगे, ब्रह्मांडीय परिषद ने संत जर्मेन को वहां से हटने का निर्देश दिया। परिषद् ने कहा कि लोगों के कर्म ही अब से उनके गुरु होंगे। राजा ने अपने पार्षदों और लोक सेवकों के लिए एक भव्य भोज का आयोजन किया। उनके ५७६ अतिथियों में से प्रत्येक को क्रिस्टल का एक प्याला मिला जिसमें &amp;quot;शुद्ध इलेक्ट्रॉनिक सार&amp;quot; का अमृत भरा हुआ था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह अमृत संत जर्मेन ने उन्हें अपनी आत्मा की रक्षा के लिए उपहार-स्वरूप दिया था, ताकि जब कुंभ के युग में स्वर्ण युगीन सभ्यता को वापस लाने का अवसर आए, तो ये सब लोग अपने 'ईश्वरीय स्वरुप' को पहचान पाएं। और, साथ ही अन्य सभी लोगों को एक संकेत भी मिले कि जब मनुष्य अपने मन, हृदय और अपनी जीवात्मा को ईश्वर की आत्मा के निवास के लिए उपयुक्त बनाता है, तो ईश्वर अवश्य उनके साथ निवास करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भोजन के दौरान एक ब्रह्मांडीय गुरु - जिनकी पहचान उनके माथे पर लिखा शब्द 'विजय' था - ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने लोगों को आनेवाले उस संकट के प्रति आगाह किया जो उन्होंने ईश्वर में अपने अविश्वास के कारण आमंत्रित किया था; उन्होंने लोगों को अपने ईश्वरीय स्वरुप की उपेक्षा करने के लिए डांट लगाई; और यह भविष्यवाणी भी की कि जल्द ही यह साम्राज्य एक ऐसे राजकुमार के अधीन आ जाएगा जो राजा की पुत्री से विवाह करने का इच्छुक होगा। इस घटना के सात दिन बाद राजा ही और उनका परिवार स्वर्ण-युगीन सभ्यता के आकाशीय समकक्ष नगर में चले गए। अगले ही दिन एक राजकुमार वहाँ पहुँचे और उस राज्य का कार्यभार संभाल लिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;High_priest_on_Atlantis&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== अटलांटिस पर उच्च पुजारी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरह हज़ार साल पहले संत जर्मेन [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] के मुख्य भू-भाग पर स्थित वायलेट लौ मंदिर के मुख्य पुजारी थे। उस समय उन्होंने अपने आह्वानों और कारण शरीर द्वारा एक अग्नि स्तंभ - वायलेट लौ का एक फ़व्वारा - स्थापित किया था। यहाँ दूर दूर से लोग अपने शरीर, मस्तिष्क और जीवात्मा की शुद्धि के लिए आते थे। यह वे लोग वायलेट लौ का आह्वाहन तथा सातवीं किरण के अनुष्ठानों द्वारा प्राप्त करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन लोगों ने वायलेट लौ के मंदिर में सेवा की उन्हें [[Special:MyLanguage/Zadkiel|जैडकीयल]] के आकाशीय आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Temple of Purification|टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन]] में [[Special:MyLanguage/Melchizedek|मेलकिडेक समुदाय]] के सार्वभौमिक पुरोहिताई की शिक्षा दी गई। यह आश्रय स्थल उस स्थान पर था जहां आज क्यूबा द्वीप स्थित है। इस पुरोहिताई में धर्म और विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा दी जाती है। इसी स्थान पर संत जर्मेन और [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] दोनों का समुदाय में समावेशन हुआ था। स्वयं जैडकीयल ने कहा था, &amp;quot;आप सदा के लिए मेलकिडेक समुदाय के पुरोहित रहेंगे&amp;quot;। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अटलांटिस के डूबने से पहले जब [[Special:MyLanguage/Noah|नोआह]] अपना जहाज़ बना रहे थे और लोगों को आने वाले [[Special:MyLanguage/The Flood|जल प्रलय]] की चेतावनी दे रहे थे, उस समय महान दिव्य निर्देशक ने संत जर्मेन और कुछ अन्य वफ़ादार पुजारियों को मुक्ति की लौ को टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन से निकाल कर ट्रांसिल्वेनिया के कार्पेथियन तलहटी में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कहा। यहाँ उन्होंने ऐसे समय में भी स्वतंत्रता की अग्नि को प्रज्वलित करने का पवित्र अनुष्ठान जारी रखा जब ईश्वरीय आदेश के तहत मानवजाति को उनके कर्मों का फल मिल रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आने वाले अपने सभी जन्मों में महान दिव्य निर्देशक के मार्गदर्शन में संत जर्मेन और उनके अनुयायियों ने वायलेट लौ को पुनः ढूंढा और मंदिर की रक्षा भी की। इसके बाद महान दिव्य निर्देशक ने अपने शिष्य के साथ मिलकर लौ के स्थान पर एक आश्रय स्थल स्थापित किया और हंगरी के राजघराने राकोज़ी की स्थापना भी की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_prophet_Samuel&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== ईश्वर के दूत सेमुएल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Eli and Samuel.jpg|thumb|upright|''सेमुएल एली के घर पर उन्हें परमेश्वर के न्याय के बारे में बताते हुए'', जॉन सिंगलटन कोपले (१७८०)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Uncion de David por Samuel de Antonio Gonzalez Velazquez.JPG|thumb|एंटोनियो गोंज़ालेज़ वेलाज़क्वेज़ का चित्र जिसमें सैमुअल डेविड का अभिषेक कर रहे हैं]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ग्यारहवीं शताब्दी बी सी  में संत जर्मेन ने सैमुअल के रूप में अवतार लिया था। उस समय जब सभी लोग धर्म-विमुख थे, वे एक उत्तम धार्मिक नेता सिद्ध हुए। उन्होंने इज़राइल के अंतिम न्यायाधीश और प्रथम ईश्वरदूत के रूप में कार्य किया। उन दिनों न्यायाधीश केवल विवादों को नहीं सुलझाते थे वरन  ऐसे नेता माने जाते थे जिनका ईश्वर के साथ सीधा सम्बन्ध होता था और जो अत्याचारियों के विरुद्ध इज़राइल के कबीलों को एकजुट कर सकते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल [[Special:MyLanguage/Abraham|अब्राहम]] के वंश को भ्रष्ट पुरोहितों, एली के पुत्रों, और उन अशिक्षित लोगों (वे लोग जिन्होनें युद्ध में इजराइल के लोगों ली हत्या की थी) की दासता से मुक्त कराने वाले ईश्वर के दूत थे। पारंपरिक रूप से उनके नाम [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] के साथ लिया जाता है। जब राष्ट्र अशिक्षित लोगों से उत्त्पन खतरों का सामना कर रहा था, सैमुएल के बहुत हिम्मत कर के लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर लगाया, उन्होंने लोगों को “अपने पूरे दिल से नकली गुरुओं को छोड़ असली ईश्वर के ओर लौटने का आह्वान दिया &amp;lt;ref&amp;gt;आई सैमुएल ७:३.&amp;lt;/ref&amp;gt; जल्द ही लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पश्चाताप कर सैमुएल से विनती की कि वह उनके बचाव के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। जब सैमुएल प्रार्थना कर रहे थे और अनेक प्रकार के त्याग कर रहे थे तो एक भयंकर आंधी आई जिससे इजराइल के लोगों को अपने शत्रुओं को परास्त करने का मौका मिल गया। सैमुएल के रहते अशिक्षित लोग फिर कभी इस्राएल पर राज्य नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर  दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर &amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:५.&amp;lt;/ref&amp;gt; ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”&amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:७.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने इस्राएलियों को समझाया कि राजा का शासन होने के बाद उन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन लोग फिर भी राजा की माँग पर अटल रहे। तदुपरांत सैमुअल ने शाऊल को उनका नेता नियुक्त किया; उन्होंने उसे तथा लोगों को सदैव ईश्वर के रास्ते पर चलने का निर्देश भी दिया। पर शाऊल एक विश्वासघाती सेवक साबित हुआ इसलिए सैमुअल ने उसे दंड दिया और गुप्त रूप से [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] को राजा नियुक्त किया। सैमुअल की मृत्यु के बाद उन्हें रामाह में दफनाया गया। पूरे इज़राएल ने उनके निधन का शोक मनाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Joseph&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत जोसेफ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Saint Joseph|संत जोसेफ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में संत जोसेफ थे। वे ईसा मसीह के पिता और [[Special:MyLanguage/Mother Mary|मेरी]] के पति थे। न्यू टेस्टामेंट में उनके बारे में कुछ उल्लेख मिलते हैं। बाइबल में उन्हें [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] का वशंज बताया गया है। बाइबल में इस बात का भी वर्णन है कि जब एक देवदूत ने उन्हें स्वप्न में चेतावनी दी कि हेरोड ईसा मसीह को मारने की योजना बना रहा है, तो जोसेफ अपने परिवार-सहित वह स्थान छोड़ मिस्र चले गए। हेरोड की मृत्यु के बाद ही वे वापस लौटे। ऐसी मान्यता है कि जोसेफ एक बढ़ई थे और ईसा मसीह के सार्वजनिक मंत्रालय शुरू करने से पहले ही उनका निधन हो गया था। कैथोलिक परंपरा में संत जोसेफ को विश्वव्यापी चर्च के संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनका पर्व १९ मार्च को मनाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:St Alban Evesham All Saints' church.jpg|thumb|left|upright=0.5|एवेशम में ऑल सेंट्स चर्च में रंगीन कांच की खिड़की में संत एल्बन की तस्वीर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Alban&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत एल्बन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तीसरी शताब्दी के उत्तरार्ध में संत जर्मेन ने संत एल्बन के रूप में जन्म लिया। वे ब्रिटेन के पहले शहीद हुए। एल्बन रोमन सम्राट डायोक्लेटियन के शासनकाल में ईसाइयों पर हो रहे अत्याचारों के दौरान इंग्लैंड में थे। वे एक मूर्तिपूजक थे। उन्होंने रोमन सेना में सेवा भी की थी और बाद में वेरुलामियम नामक शहर में बस गए थे। वेरुलामियम शहर का नाम बाद में बदलकर सेंट एल्बंस कर दिया गया। एल्बन ने एम्फीबालस नामक एक भगोड़े ईसाई पादरी को छुपाया था, जिसने उनका धर्म परिवर्तन करवाया था। जब सैनिक उसे ढूँढ़ने आए तो एल्बन ने पादरी को वहां से भगा दिया और स्वयं पादरी का वेश धारण कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब उनका ये कृत्य उजागर हुआ तो एल्बन को मौत की सजा सुनाई गई; उन्हें कोड़े भी मारे गए। कहा जाता है कि एल्बन की फांसी को देखने के लिए इतनी लोग जमा हो गए कि वे रास्ते में आये एक संकरे पुल पर अटक गए, भीड़ पुल पार नहीं कर पा रही थी। एल्बन ने ईश्वर से प्रार्थना की और नदी का पानी भीड़ को रास्ता देने के लिए दो भागों में बंट गया। यह नज़ारा देखने के बाद जल्लाद स्वतः धर्मान्तरित हो गया, और उसने एल्बन की जगह स्वयं की मृत्यु की भीख माँगी। जल्लाद की प्रार्थना अस्वीकार कर दी गई परन्तु उसे भी एल्बन के साथ फांसी दे दी गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
३०३ ऐ डी  में एल्बन की मृत्यु के बाद से द्वीप के लोग उनकी पूजा करने लगे। श्रद्धेय एल्बन बटलर ने अपनी किताब &amp;quot; लाइविस ऑफ़ फादर्स, मार्टियर्स एंड अदर प्रिंसिपल सेंटस&amp;quot; में लिखा है, &amp;quot;कई युगों तक संत एल्बन हमारे द्वीप के जाने-माने गौरवशाली शहीद और ईश्वर के संरक्षक के रूप में स्थापित रहे। उनके कारण कई बार हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Teacher_of_Proclus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== प्रोक्लस के शिक्षक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने आंतरिक स्तर से नियोप्लैटोनिस्ट्स (वे दार्शनिक जिन्होंने प्लेटोनिक दर्शन का उत्तर-प्राचीन संस्करण विकसित किया था; तीसरी शताब्दी के दार्शनिक प्लोटिनस इसके संस्थापक थे) के पीछे प्रमुख शिक्षक के रूप में कार्य किया। वे यूनानी दार्शनिक प्रोक्लस (४१०–४८५ ऐ डी) के पोरेरणास्रोत थ। प्रोक्लस एथेंस में 'प्लेटो अकादमी' के प्रमुख थे और समाज के एक अत्यंत सम्मानित सदस्य थे। उन्होंने यह भी बताया की प्रोक्लस पूर्व जन्म में पाइथागोरियन दार्शनिक थे। उन्होंने प्रोक्लस को कॉन्स्टेंटाइन के ईसाई धर्म के पाखंडों के बारे में बताया, और साथ ही व्यक्तिवाद (प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में ईश्वर की खोज करे) के मार्ग का महत्व भी समझाया। ईसाई व्यक्तिवाद को &amp;quot;मूर्तिपूजा&amp;quot; कहते थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने गुरु संत जर्मेन के मार्गदर्शन में प्रोक्लस ने अपने दर्शनशास्त्र को इस सिद्धांत पर आधारित किया कि सत्य केवल एक ही है और वह है कि &amp;quot;ईश्वर एक है&amp;quot;। ईश्वर को पाना ही इस जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने कहा, &amp;quot;सभी शरीरों से परे आत्मा है, सभी आत्माओं से परे बौद्धिक अस्तित्व, और सभी बौद्धिक अस्तित्वों से परे एक (ईश्वर) है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;थॉमस व्हिटेकर, ''द नियो-प्लेटोनिस्ट्स: ए स्टडी इन द हिस्ट्री ऑफ़ हेलेनिज़्म'', दूसरा संस्करण (कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, १९२८), पृष्ठ १६५.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने विभिन्न विषयों पर लिखा जैसे दर्शनशास्त्र, खगोल विज्ञान, गणित, व्याकरण इत्यादि। उनका मानना था कि उन्हें यह ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। उन्होंने स्वयं को एक ऐसा माध्यम माना जिससे ईश्वरीय रहस्योद्घाटन मानवजाति तक पहुँचता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। वे स्वयं को 'दिव्य रहस्योद्घाटन' का एक माध्यम मानते थे। उनके शिष्य मारिनस के शब्दों में &amp;quot;वे वाकई दिव्य प्रेरणा से प्रतीत होते थे क्योंकि जब उनके मुख से ज्ञानपूर्ण शब्द निकलते थे उनकी आँखों से एक तेज़ आभा निकलती थी, और उनका पूरा शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगाता था।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;विक्टर कज़िन एंड थॉमस टेलर, अनुवादक, ''ट्रीयटाईसीस  ऑफ प्रोक्लस, द प्लेटोनिक सक्सेसर'' (लंदन: ऍन.पी., १८३३), पी.वी.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Merlin&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== मर्लिन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Merlin|मर्लिन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाँचवीं शताब्दी में संत जर्मेन मर्लिन के रूप में अवतरित हुए। वे [[Special:MyLanguage/King Arthur|राजा आर्थर]] के दरबार में एक रसायनशास्त्री थे, भविष्यवक्ता और सलाहकार के रूप में कार्य करते थे। युद्धरत सामंतों से विखंडित और सैक्सन आक्रमणकारियों से त्रस्त भूमि में मर्लिन ने ब्रिटेन के राज्य को एकजुट करने के लिए बारह युद्धों (जो वास्तव में बारह दीक्षाएँ थीं) में आर्थर का नेतृत्व किया। उन्होंने [[Special:MyLanguage/Round Table|राउंड टेबल]] की पवित्र अध्येतावृत्ति स्थापित करने के लिए राजा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मर्लिन और आर्थर के मार्गदर्शन में कैमलॉट [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्य का एक विद्यालय]] था जहाँ वीर पुरुष और स्त्रियां [[Special:MyLanguage/Holy Grail|होली ग्रेल]] के रहस्यों को जानने के लिए अध्ययन करते थे, और स्वयं का आध्यात्मिक विकास भी करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ परंपराओं में मर्लिन को एक ईश्वरीय ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है जिन्होंने तारों का अध्ययन किया और जिनकी भविष्यवाणियाँ सत्तर सचिवों द्वारा दर्ज की गईं। &amp;quot;द प्रोफेसीस ऑफ मर्लिन&amp;quot;, जो आर्थर के समय से लेकर सुदूर भविष्य तक की घटनाओं का वर्णन करती है, मध्य युग में अत्यंत लोकप्रिय थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Roger-bacon-statue.jpg|thumb|upright|alt=caption|ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में रोजर बेकन की प्रतिमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Roger_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== रोजर बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Roger Bacon|रोजर बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में रोजर बेकन (१२२०-१२९२) थे। बेकन के रूप में वे एक दार्शनिक, फ्रांसिस्कन भिक्षु, शिक्षाविद्, शैक्षिक सुधारक और प्रयोगात्मक वैज्ञानिक थे। वो एक ऐसा युग था जब विज्ञान का मापदंड धर्म और तर्क पर आधारित था, और ऐसे समय में बेकन ने विज्ञान में प्रयोगात्मक पद्धति को बढ़ावा दिया; उन्होंने कहा कि दुनिया गोल है - उन्होंने उस समय के विद्वानों और वैज्ञानिकों की संकीर्ण विचारधारा की निंदा की। उन्होंने कहा कि &amp;quot;सच्चा ज्ञान दूसरों के अधिकार से नहीं उत्पन्न होता और ना ही यह पुरातनपंथी सिद्धांतों के प्रति अंधश्रद्धा से उपजता है।&amp;quot; &amp;lt;ref&amp;gt;हेनरी थॉमस एंड डाना ली थॉमस, ''लिविंग बायोग्राफीज़ ऑफ़ ग्रेट साइंटिस्ट्स'' (गार्डन सिटी, न्यूयॉर्क: नेल्सन डबलडे, १९४१), पृष्ठ १५.&amp;lt;/ref&amp;gt; अंततः बेकन ने पेरिस विश्वविद्यालय में व्याख्याता का पद छोड़ दिया और फ्रांसिस्कन ऑर्डर ऑफ़ फ्रायर्स माइनर में शामिल हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेकन रसायन विद्या, प्रकाशविज्ञान, गणित और विभिन्न भाषाओं पर अपने गहन शोध के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत और आधुनिक तकनीक का भविष्यवक्ता माना जाता है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि आने वाले समय में गर्म हवा के गुब्बारे, उड़ने वाली मशीन, चश्मे, दूरबीन, सूक्ष्मदशंक यंत्र, लिफ्ट और यंत्रचालित जहाज़ और गाड़ियां होंगी - उन्होंने इन सब के बारे में ऐसे लिखा मानो ये उनका प्रत्यक्ष अनुभव हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनके वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण, धर्मशास्त्रियों पर उनके आक्षेपों और रसायन विद्या तथा ज्योतिष शास्त्र के उनके ज्ञान के कारण उन पर &amp;quot;विधर्मी और असमान्य&amp;quot; होने के आरोप लगे। इन सब बातों के लिए उनके साथी फ्रांसिस्कन लोगों ने उन्हें चौदह साल के लिए कारावास में डाल दिया। लेकिन अपने अनुयायियों के लिए बेकन &amp;quot;डॉक्टर मिराबिलिस&amp;quot; (&amp;quot;अद्भुत शिक्षक&amp;quot;) थे - ये एक ऐसी उपाधि है जिससे उन्हें सदियों से जाना जाता रहा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Portrait of a Man, Said to be Christopher Columbus.jpg|thumb|left|alt=caption|सेबेस्टियानो डेल पियोम्बो द्वारा बनाया गया क्रिस्टोफर कोलंबस का उनका मरणोपरांत चित्र (१५१९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Christopher_Columbus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== क्रिस्टोफर कोलंबस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Christopher Columbus|क्रिस्टोफर कोलंबस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि &amp;quot;यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२  की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें &amp;quot;नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। &amp;quot;इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.&amp;lt;/ref&amp;gt; उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, &amp;quot;आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।&amp;quot; कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक &amp;quot;लास प्रोफिसियास (द प्रोफेसीस )&amp;quot;, में लिखा। &amp;quot;द बुक ऑफ़ प्रोफेसीस कंसर्निंग द डिस्कवरी ऑफ़ इंडीज एंड द रिकवरी ऑफ़ जेरुसलम&amp;quot; में इन बातों के बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है। हालाँकि इस बात पर कम ही ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह एक माना हुआ तथ्य है तथा इसके बारे में &amp;quot;एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका&amp;quot; में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि &amp;quot;कोलंबस ने खगोल विज्ञान नहीं वरन भविष्यवाणी का अनुसरण कर अमरीका की खोज की थी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|फ्रांसिस बेकन, विस्काउंट सेंट एल्बन, एक अज्ञात कलाकार द्वारा बनाया चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== फ्रांसिस बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस बेकन (१५६१-१६२६) एक दार्शनिक, राजनेता, निबंधकार और साहित्यकार थे। बेकन को पश्चिम का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञानी और विचारक कहा जाता है। वे विवेचनात्मक तार्किकता (एक तर्क पद्धति है जिसमें विशिष्ट तथ्यों को जोड़कर एक सामान्य निष्कर्ष निकाला जाता है) और वैज्ञानिक पद्धति के जनक माने जाते हैं। वे काफी हद तक इस तकनीकी युग के लिए ज़िम्मेदार हैं जिसमें हम आज जी रहे हैं। वे जानते थे कि केवल व्यावहारिक विज्ञान ही जनसाधारण को मानवीय कष्टों और आम ज़िन्दगी की नीरसता से मुक्ति दिला सकता है और ऐसा होने पर ही मनुष्य आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सकता है, व् उस उत्तम आध्यात्मिकता की पुनः खोज कर सकता है जिसे वह पहले कभी अच्छी तरह से जानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;महान असंतृप्ति&amp;quot; (अर्थात पतन, नाश , गलतियों, और जीर्णावस्था के बाद वृहद् पुनर्स्थापना) &amp;quot;संपूर्ण विश्व&amp;quot; को बदलने का उनका तरीका था। इस बात की अवधारणा पहली बार उन्होंने बचपन में की थी। फिर १६०७, में उन्होंने इसी नाम से अपनी पुस्तक में इसे मूर्त रूप दिया। इसके बाद अंग्रेजी पुनर्जागरण की शुरुआत की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ-साथ बेकन ने अपने आसपास कुछ ऐसे लेखकों को एकत्र किया जो एलिज़ाबेथकालीन साहित्य के लिए ज़िम्मेदार थे। इनमें से कुछ एक &amp;quot;गुप्त संस्था&amp;quot;  - &amp;quot;द नाइट्स ऑफ़ द हेलमेट&amp;quot; के सदस्य थे।  इस संस्था का लक्ष्य अंग्रेजी भाषा का विस्तार करना था और एक ऐसे नए साहित्य की रचना करना था जिसे अंग्रेज लोग समझ पाएं। बेकन ने [[Special:MyLanguage/Bible translations|बाइबल के अनुवाद]] (किंग जेम्स का संस्करण) का भी आयोजन किया - उनका यह दृढ़ निश्चय था कि आम लोगों को भी ईश्वर के कहे शब्दों को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८९० के दशक में शेक्सपियर के नाटकों के मूल मुद्रणों और बेकन तथा अन्य एलिज़ाबेथ काल के लेखकों की कृतियों में लिखे सांकेतिक शब्दों से यह आभास होता है कि बेकन ने शेक्सपियर के नाटक लिखे थे और वे महारानी एलिजाबेथ और लॉर्ड लीसेस्टर के पुत्र थे।&amp;lt;ref&amp;gt;देखें{{TSC}}.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि उनकी माँ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया क्योंकि वह डरती थीं की सत्ता उचित समय से पहले भी उनके हाथ से निकल सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीवन के अंतिम वर्षों में बेकन को बहुत तंग किया गया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा को पहचानने वाला कोई नहीं था। ऐसा कहा जाता है कि उनकी मृत्यु १६२६ में हुई थी, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि उसके बाद भी वे गुप्त रूप से कुछ समय तक यूरोप में रहे। उन्होंने ऐसी कठिन परिस्थितियों का वीरता से सामना किया जो किसी भी सामान्य मनुष्य को नष्ट कर सकती हैं। फिर १ मई, १६८४, को उनकी जीवात्मा [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] के आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] से स्वर्ग सिधार गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Count of St Germain.jpg|thumb|upright|ले कॉम्टे डे संत जर्मेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Rembrandt - De Poolse ruiter, c.1655 (Frick Collection).jpg|thumb|upright=1.2|रेम्ब्रांट द्वारा लगभग १६५५ में बनाया गया चित्र ''द पोलिश राइडर'' जिसमें संत जर्मेन को यूरोप के वंडरमैन के रूप में दर्शाया गया है&amp;lt;ref&amp;gt;मार्क प्रोफेट, २९ दिसंबर, १९६७&amp;lt;/ref&amp;gt;]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_Wonderman_of_Europe&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यूरोप का अजूबा आदमी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Wonderman of Europe|यूरोप का अजूबा आदमी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लोगों को मुक्ति दिलाने की सर्वोपरि इच्छा रखते हुए संत जर्मेन ने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] से भौतिक शरीर में पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मांगी और उन्हें यह अनुमति मिल भी गई। वे &amp;quot;ले कॉम्टे डे सेंट जर्मेन&amp;quot; के रूप में प्रकट हुए - एक &amp;quot;चमत्कारी&amp;quot; सज्जन जिन्होंने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के दौरान यूरोप के दरबारों को चकित कर दिया था। यहीं से उन्हें &amp;quot;द वंडरमैन (एक अजूबा आदमी)&amp;quot; का खिताब मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे एक आद्यवैज्ञानिक, विद्वान, भाषाविद्, कवि, संगीतकार, कलाकार, कथाकार और राजनयिक थे। यूरोप के दरबारों में उनकी काफी प्रशंसा की जाती थी। उन्हें मणियों की पहचान थी, उन्हें हीरे और अन्य रत्नों में दोष निकालने के लिए जाना जाता था। साथ ही उन्हें एक हाथ से पत्र और दूसरे हाथ से कविता लिखने जैसे कार्य के लिए भी जाना जाता था। वोल्टेयर के शब्दों में &amp;quot;वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो कभी नहीं मर सकता, और जो सब कुछ जानता है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;वोल्टेयर, ''ओयूव्रेस'', लेट्रे cxviii, सं. बेउचोट, lviii, पृष्ठ ३६०, इसाबेल कूपर-ओकले, ''द काउंट ऑफ़ सेंट जर्मेन'' (ब्लौवेल्ट, एन.वाई.: रुडोल्फ स्टीनर पब्लिकेशंस, १९७०), पृष्ठ ९६ में उद्धृत।&amp;lt;/ref&amp;gt; उनका उल्लेख फ्रेडरिक द ग्रेट, वोल्टेयर, होरेस वालपोल और कैसानोवा के पत्रों और उस समय के समाचार पत्रों में मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परदे के पीछे से वे यह प्रयास कर रहे थे कि [[Special:MyLanguage/French Revolution|फ्रांसीसी क्रांति]] बिना रक्तपात के हो जाए - राजतंत्र को प्रजातंत्र में आराम से बदल दिया जाए ताकि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की सरकार हो। लेकिन उनकी इस सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यूरोप को एकजुट करने के अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने [[Special:MyLanguage/Napoleon|नेपोलियन]] का समर्थन किया, परन्तु नेपोलियन ने अपने गुरु की शक्तियों का दुरुपयोग किया और मृत्यु को प्राप्त किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन इससे भी पहले संत जर्मेन ने अपना ध्यान एक नई दुनिया की ओर मोड़ लिया था। वे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके [[Special:MyLanguage/George Washington|प्रथम राष्ट्रपति]] के प्रायोजक बने। स्वतंत्रता की घोषणा और संविधान उन्हीं से प्रेरित था। उन्होंने कई ऐसे उपकरणों को बनाने की प्रेरणा भी दी जिनसे शारीरिक श्रम का कम से कम उपयोग हो ताकि मानवजाति कठिन परिश्रम से मुक्त होकर ईश्वर-प्राप्ति के रास्ते पर चल सके। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Chohan_of_the_Seventh_Ray&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== सातवीं किरण के चौहान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, संत जर्मेन ने महिला दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Kuan Yin|कुआन यिन]] से सातवीं किरण चौहान का पद प्राप्त किया। सातवीं किरण दया, क्षमा और पवित्र अनुष्ठान की किरण है। इसके बाद, बीसवीं शताब्दी में, संत जर्मेन एक बार फिर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट व्हाइट ब्रदरहुड) की एक बाहरी गतिविधि को प्रायोजित करने के लिए आगे बढ़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९३० के दशक के आरंभ में उन्होंने अपने &amp;quot;पृथ्वी पर कार्यरत सेनापति&amp;quot; जॉर्ज वाशिंगटन से संपर्क किया, और उन्हें एक [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहक]] के रूप में प्रशिक्षित किया।  वाशिंगटन ने [[Special:MyLanguage/Godfré Ray King|गॉडफ्रे रे किंग]] के उपनाम से, &amp;quot;अनवील्ड मिस्ट्रीज़&amp;quot;, &amp;quot;द मैजिक प्रेज़ेंस&amp;quot; और &amp;quot;द &amp;quot;आई एम&amp;quot; डिस्कोर्सेज़&amp;quot; नामक पुस्तकें लिखीं जिनमें उन्होंने संत जर्मेन द्वारा नए युग के लिए दिए गए निर्देशों के बारे में लिखा। इसी दशक के अंतिम दिनों में न्याय की देवी और अन्य [[Special:MyLanguage/cosmic being|ब्रह्मांडीय प्राणी]] पवित्र अग्नि की शिक्षाओं को मानवजाति तक पहुँचाने और [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] की शुरुआत करने में संत जर्मेन की  सहायता करने पृथ्वी पर अवतरित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९६१ में संत जर्मेन ने पृथ्वी पर अपने प्रतिनिधि, संदेशवाहक [[Special:MyLanguage/Mark L. Prophet|मार्क एल. प्रोफेट]] से संपर्क किया और [[Special:MyLanguage/Ancient of Days|प्राचीन काल]] के स्वामी (सनत कुमार) और उनके प्रथम और दूसरे शिष्य शिष्य [[Special:MyLanguage/Gautama|गौतम]] और [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] की स्मृति में [[Special:MyLanguage/Keepers of the Flame Fraternity|लौ रक्षक बिरादरी]] (कीपर्स ऑफ़ द फ्लेम फ्रैटरनिटी) की स्थापना की। इनका उद्देश्य उन सभी लोगों को पुनर्जागृत करना था जो मूल रूप से [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] के साथ पृथ्वी पर आए थे। ये लोग पृथ्वी पर शिक्षकों के रूप में आये थे और इनका काम लोगों की सेवा करना था परन्तु यहाँ आकर वे सब बातें ये बातें भूल गए थे। संत जर्मेन का कार्य उन सबकी स्मृति को पुनर्स्थापित करना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार संत जर्मेन ने मूल लौ रक्षकों को प्राचीन काल के स्वामी की वाणी को ध्यान से सुनने को कहा। उन्होंने इन सभी लोगों को अपनी आत्मा में जीवन की ज्वाला और स्वतंत्रता की पवित्र अग्नि को पुनः प्रज्वलित करने और अपने जीवन को ईश्वर की सेवा में पुनः समर्पित करने के आह्वान दिया। संत जर्मेन लौ रक्षक बिरादरी के शूरवीर सेनाध्यक्ष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Hierarch_of_the_Aquarian_Age&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कुम्भ युग के अध्यक्ष ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१ मई १९५४ को संत जर्मेन ने सनत कुमार से शक्ति का प्रभुत्व और ईसा मसीह से अगले दो हज़ार वर्ष की अवधि के लिए मानवजाति की चेतना को निर्देशित का अधिकार प्राप्त किया। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईसा मसीह का महत्व कम हो गया है। वे अब उच्च स्तरों पर [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]] के रूप में काम कर रहे हैं, और अपनी चेतना को समस्त मानवजाति के लिए पहले से भी अधिक शक्तिशाली और सर्वव्यापी रूप से दे रहे हैं क्योंकि ईश्वर का स्वभाव निरंतर श्रेष्ठ होना है। हम एक ऐसे ब्रह्मांड में रहते हैं जिसका निरंतर विस्तार होता रहता  है - ब्रह्मांड जो ईश्वर के प्रत्येक पुत्र (सूर्य) के केंद्र से विस्तारित होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दो हजार वर्ष की अवधि के दौरान वायलेट लौ का आह्वान कर के हम स्वयं में ईश्वर की ऊर्जा (जिसे हमने हजारों वर्षों की अपनी गलत आदतों द्वारा अपवित्र किया है) को शुद्ध कर सकते हैं। ऐसा करने से समस्त मानवजाति भय, अभाव, पाप, बीमारी और मृत्यु से मुक्त हो सकती है, और सभी मनुष्य स्वतंत्र रूप से प्रकाश में चल सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/age of Aquarius|कुंभ युग]] की शुरुआत में  संत जर्मेन कर्म के स्वामी के समक्ष गए और उनसे वायलेट लौ को आम इंसानों तक पहुंचाने की आज्ञा मांगी। इसके पहले तक वायलेट लौ का ज्ञान श्वेत महासंघ के आंतरिक आश्रमों और [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालयों]] में ही था। संत जर्मेन हमें वायलेट लौ के आह्वान से होने वाले लाभ के बारे में बताते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
आपमें से कुछ लोगों के अधिकतर कर्म संतुलित हो गए हैं, कुछ के [[Special:MyLanguage/heart chakra|हृदय चक्र]] निर्मल हो गए हैं। जीवन में एक नया प्रेम, नई कोमलता, नई करुणा, जीवन के प्रति एक नई संवेदनशीलता, एक नई स्वतंत्रता और उस स्वतंत्रता की खोज में एक नया आनंद आ गया है। एक नई पवित्रता का उदय भी हुआ है क्योंकि मेरी लौ के माध्यम से आपका मेलकिडेक समुदाय के पुरोहितत्व से संपर्क हुआ है। अज्ञानता और मानसिक जड़ता कुछ सीमा तक समाप्त हुई है, और लोग एक ऐसे रास्ते पर  चल पड़े हैं जो उन्हें ईश्वर तक पहुंचाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ ने पारिवारिक रिश्तों में मदद की है। इसने कुछ लोगों को अपने पुराने कर्मों को संतुलित करने में सहायता की है और वे अपने पुराने दुखों से मुक्त होने लगे हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि वायलेट लौ में ईश्वरीय न्याय की लौ निहित है, और ईश्वरीय न्याय में ईश्वर का मूल्याङ्कन। इसलिए हम ये कह सकते हैं कि वायलेट लौ एक दोधारी [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] के सामान है जो सत्य को असत्य से अलग करती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ के अनेकानेक लाभ हैं पर उन सभी को यहाँ गिनाना संभव नहीं, लेकिन यह अवश्य है इसके प्रयोग से मनुष्य के भीतर एक गहन बदलाव होता है। वायलेट लौ हमारे उन सभी मतभेदों और मनोवैज्ञानिक समस्यायों का समाधान करती है जो बचपन से या फिर उसे से भी पहले पिछले जन्मों से चली आ रही हैं और जिन्होंने हमारी चेतना में इतनी गहरी जड़ें जमा ली हैं कि वे जन्म-जन्मांतर से वहीँ स्थित हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;कीप माई पर्पल हार्ट,&amp;quot; {{POWref|३१|७२}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Alchemy&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आद्यविज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Alchemy|आद्यविज्ञान}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने अपनी पुस्तक &amp;quot;सेंट जर्मेन ऑन अल्केमी&amp;quot; में आद्यविज्ञान की शिक्षा देते हैं। वे [[Special:MyLanguage/Amethyst (gemstone)|एमेथिस्ट (रत्न)]] का उपयोग करते हैं — यह आद्द्यवैज्ञनिकों का रत्न है, कुंभ युग का रत्न है और वायलेट लौ का भी। स्ट्रॉस के वाल्ट्ज़ में वायलेट लौ का स्पंदन है और यह आपको उनके साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है। उन्होंने हमें यह भी बताया है कि [[Special:MyLanguage/Franz Liszt|फ्रांज़ लिज़्ट]] का &amp;quot;राकोज़ी मार्च&amp;quot; उनके हृदय की लौ और वायलेट लौ के सूत्र को धारण करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रयस्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन का ध्यान सहारा रेगिस्तान के ऊपर स्थित स्वर्णिम [[Special:MyLanguage/etheric city|आकाशीय शहर]] में केंद्रित है। वे [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] के साथ-साथ टेबल माउंटेन, व्योमिंग स्थित अपने भौतिक/आकाशीय आश्रय स्थल, [[Special:MyLanguage/Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स]] में भी पढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त वे महान दिव्य निर्देशक के केंद्रों —भारत में [[Special:MyLanguage/Cave of Light|केव ऑफ लाइट]] और ट्रांसिल्वेनिया में [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] में भी कार्य करते हैं, जहाँ वे धर्मगुरु के रूप में विराजमान हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिण अमेरिका में [[Special:MyLanguage/God and Goddess Meru|मेरु देवी और देवता]] के आश्रय स्थल में भी अपना केंद्र स्थापित किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप [[Special:MyLanguage/Maltese cross|माल्टीज़ क्रॉस]] है; उनकी खुशबू, वायलेट फूलों की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टीआ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “Saint Germain.”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/3/hi&amp;diff=245736</id>
		<title>Translations:Saint Germain/3/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/3/hi&amp;diff=245736"/>
		<updated>2026-02-20T10:59:30Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;संत जरमेन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी लोग जो सातवीं किरण का आह्वान करते हैं उन में ये एक सच्चे राजनीतिज्ञ में पाए जाने वाले सभी ईश्वरीय गुणों जैसे गरिमा, शालीनता, सज्जनता और संतुलन आदि को दर्शाते हैं। ये [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] द्वारा स्थापित [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हाउस]] के सदस्य हैं। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] आजकल इनके ट्रांसिल्वेनिया स्थित भवन में प्रतिष्ठित है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245735</id>
		<title>Saint Germain/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245735"/>
		<updated>2026-02-20T10:58:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0000144 poster-saint-germain-sindelar-1403 600.jpeg|thumb|दिव्य गुरु संत जरमेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संत जरमेन''' सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] हैं। अपनी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ी ]] महिला गुरु [[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टिया]] - जिन्हें न्याय की देवी भी कहते हैं - के साथ, वे [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुंभ युग]] के अधिपति हैं। वे स्वतंत्रता की ज्वाला के प्रायोजक हैं, तथा पोर्टिया न्याय की ज्वाला की। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी लोग जो सातवीं किरण का आह्वान करते हैं उन में ये एक सच्चे राजनीतिज्ञ में पाए जाने वाले सभी ईश्वरीय गुणों जैसे गरिमा, शालीनता, सज्जनता और संतुलन आदि को दर्शाते हैं। ये [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] द्वारा स्थापित [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हाउस]] के सदस्य हैं। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] आजकल इनके ट्रांसिल्वेनिया स्थित भवन में प्रतिष्ठित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''संत जर्मेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जर्मेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका ध्येय ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक दो हज़ार साल का चक्र सात किरणों में से एक के अंतर्गत आता है। [[Special:MyLanguage/jesus|ईसा मसीह]] छठी किरण के चौहान के रूप में पिछले 2000 वर्षों से युग के धर्मगुरु के पद पर कार्यरत थे। 1 मई, 1954 को संत जर्मेन और पोर्टिया को आने वाले युग (सातवीं किरण का चक्र) का निदेशक नियुक्त किया गया। सातवीं किरण कुम्भ राशि की है, तथा स्वतंत्रता और न्याय कुंभ राशि के स्त्री व पुरुष तत्त्व हैं। दया के साथ मिलकर वे इस [[Special:MyLanguage/dispensation|व्यवस्था]] में ईश्वर के अन्य सभी गुणों को दर्शाने का आधार प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन और पोर्टिया लोगों को सातवें युग और सातवीं किरण की एक नई जीवन तरंग, एक नई सभ्यता और एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। सातवीं किरण को [[Special:MyLanguage/violet ray|वायलेट लौ]] कहते हैं और स्वतंत्रता, न्याय, दया, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यविज्ञान]]और पवित्र अनुष्ठान इसके गुण हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सातवीं किरण के चौहान (स्वामी) के रूप में, संत जर्मेन वायलेट लौ के माध्यम से हमारी आत्माओं को [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] के विज्ञान और अनुष्ठान में दीक्षा देते हैं। रेवेलशन १०.७ में जिनके बारे में भविष्यवाणी की गयी थी ये वही सातवें देवदूत हैं। ये परमेश्वर के रहस्य के बारे में बताने आते हैं,और यही उन्होंने अपने &amp;quot;सेवकों और भविष्यवक्ताओं को बताया है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन कहते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
मैं एक आरोहित जीव हूँ, लेकिन हमेशा से मैं ऐसा नहीं था। एक या दो नहीं, बल्कि मैंने पृथ्वी पर कई जन्म लिए हैं, और मैं इस धरती पर वैसे ही घूमता था जैसे आज आप घूम रहे हैं। मेरा नश्वर शरीर भी भौतिक आयाम की सीमाओं में बंधा था। एक जन्म में मैं [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] पर था और एक अन्य जन्म में [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] पर। मैंने कई सभ्यताओं का विकास और विनाश देखा है। मानवजाति के [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] और आदिम काल तक के चक्र काल के दौरान मैंने चेतना के उतार चढ़ाव को देखा है। मैंने देखा है कि किस तरह अपने गलत चुनावों के कारण मनुष्य ने हज़ारों सालों के वैज्ञानिक विकास और प्राप्त की गयी उस उच्चतम ब्रह्मांडीय चेतना को खो दिया जो आज के युग में सबसे उन्नत धर्म के सदस्यों के पास भी नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ, मेरे पास कई विकल्प थे, और अपने लिए मैंने चुनाव स्वयं किया है। सही चुनाव करके ही स्त्री और पुरुष पदक्रम में अपना स्थान निर्धारित करते हैं। ईश्वर की इच्छानुसार चलने का चुनाव करके हम स्वतंत्र हो जाते हैं, मैं भी जन्म और मृत्यु के चक्र से स्वतंत्र हो गया और फिर इस चक्र के बाहर मुझे एक जीवन मिला। मैंने अपनी स्वतंत्रता लौ से प्राप्त की, कुम्भ युग के मूलस्वर से प्राप्त की जिसे प्राचीन आद्यवैज्ञानिकों ने ढूँढा है,  वही बैंगनी लौ जो संतजनों के पास रहती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आप नश्वर हैं। मैं अमर हूँ। हमारे बीच बस इतना ही अंतर है कि मैंने स्वतंत्रता का चुनाव किया है, और आपको यह चुनाव करना अभी बाकी है। हम दोनों की क्षमताएँ एक समान हैं, संसाधन भी एक समान हैं, और हम दोनों का उस एक (ईश्वर) से जुड़ाव भी समान है। मैंने अपनी ईश्वरीय पहचान बनाने का चुनाव किया है। बहुत समय पहले मेरे अंतर्मन से एक शांत एवं धीमी आवाज़ आयी थी: &amp;quot;ईश्वर की संतानों, अपनी ईश्वरीय पहचान बनाओ&amp;quot;। ऐसा लगा मानों ईश्वर ही कह रहे हों। रात के सन्नाटे में जब मैंने पुकार सुनी तो उत्तर दिया, &amp;quot;अवश्य&amp;quot;। उत्तर में पूरा ब्रह्मांड बोल उठा, &amp;quot;अवश्य&amp;quot; । जब मनुष्य अपनी इच्छा प्राक्जत करता है तो उसके अस्तित्व की असीमित क्षमता दिखती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं संत जर्मेन हूँ, और कुंभ युग की विजय के लिए मैं आपकी आत्मा और हृदय की अग्नि को अपने साथ ले जाने आया हूँ। मैंने आपकी आत्मा को [[Special:MyLanguage/initiation|दीक्षित]] करने का स्वरुप स्थापित कर दिया है... मैं स्वतंत्रता के पथ पर हूँ। आप भी उस पथ पर अपनी यात्रा आरम्भ करो, आप मुझे वहीँ पाओगे। अगर आप चाहोगे तो मैं आपका गुरु होना स्वीकार करूँगा।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;आई हैव चोसन टू बी फ्री,&amp;quot; {{POWref|१८|३०}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Ruler_of_a_golden-age_civilization&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== स्वर्ण युग की सभ्यता का शासक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Golden age in the Sahara Desert|सहारा मरुस्थल में स्वर्ण युग}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पचास हज़ार साल पहले संत जर्मेन उस उपजाऊ क्षेत्र - जहाँ आज सहारा मरुस्थल स्थित है - में स्वर्ण युगीन सभ्यता के शासक थे। एक सम्राट के रूप में, संत जर्मेन प्राचीन ज्ञान और भौतिक वृतों के ज्ञान में निपुण थे। लोग उन्हें अपने उभरते हुए ईश्वरत्व के मानक के रूप में देखते थे। उनका साम्राज्य सौंदर्य, समरूपता और पूर्णता की अद्वितीय ऊँचाई तक पहुँच गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ जैसे-जैसे यहाँ के लोग ईश्वर से विमुख हो अपनी इंद्रियों के सुखों में अधिक रुचि लेने लगे, ब्रह्मांडीय परिषद ने संत जर्मेन को वहां से हटने का निर्देश दिया। परिषद् ने कहा कि लोगों के कर्म ही अब से उनके गुरु होंगे। राजा ने अपने पार्षदों और लोक सेवकों के लिए एक भव्य भोज का आयोजन किया। उनके ५७६ अतिथियों में से प्रत्येक को क्रिस्टल का एक प्याला मिला जिसमें &amp;quot;शुद्ध इलेक्ट्रॉनिक सार&amp;quot; का अमृत भरा हुआ था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह अमृत संत जर्मेन ने उन्हें अपनी आत्मा की रक्षा के लिए उपहार-स्वरूप दिया था, ताकि जब कुंभ के युग में स्वर्ण युगीन सभ्यता को वापस लाने का अवसर आए, तो ये सब लोग अपने 'ईश्वरीय स्वरुप' को पहचान पाएं। और, साथ ही अन्य सभी लोगों को एक संकेत भी मिले कि जब मनुष्य अपने मन, हृदय और अपनी जीवात्मा को ईश्वर की आत्मा के निवास के लिए उपयुक्त बनाता है, तो ईश्वर अवश्य उनके साथ निवास करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भोजन के दौरान एक ब्रह्मांडीय गुरु - जिनकी पहचान उनके माथे पर लिखा शब्द 'विजय' था - ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने लोगों को आनेवाले उस संकट के प्रति आगाह किया जो उन्होंने ईश्वर में अपने अविश्वास के कारण आमंत्रित किया था; उन्होंने लोगों को अपने ईश्वरीय स्वरुप की उपेक्षा करने के लिए डांट लगाई; और यह भविष्यवाणी भी की कि जल्द ही यह साम्राज्य एक ऐसे राजकुमार के अधीन आ जाएगा जो राजा की पुत्री से विवाह करने का इच्छुक होगा। इस घटना के सात दिन बाद राजा ही और उनका परिवार स्वर्ण-युगीन सभ्यता के आकाशीय समकक्ष नगर में चले गए। अगले ही दिन एक राजकुमार वहाँ पहुँचे और उस राज्य का कार्यभार संभाल लिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;High_priest_on_Atlantis&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== अटलांटिस पर उच्च पुजारी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरह हज़ार साल पहले संत जर्मेन [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] के मुख्य भू-भाग पर स्थित वायलेट लौ मंदिर के मुख्य पुजारी थे। उस समय उन्होंने अपने आह्वानों और कारण शरीर द्वारा एक अग्नि स्तंभ - वायलेट लौ का एक फ़व्वारा - स्थापित किया था। यहाँ दूर दूर से लोग अपने शरीर, मस्तिष्क और जीवात्मा की शुद्धि के लिए आते थे। यह वे लोग वायलेट लौ का आह्वाहन तथा सातवीं किरण के अनुष्ठानों द्वारा प्राप्त करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन लोगों ने वायलेट लौ के मंदिर में सेवा की उन्हें [[Special:MyLanguage/Zadkiel|जैडकीयल]] के आकाशीय आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Temple of Purification|टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन]] में [[Special:MyLanguage/Melchizedek|मेलकिडेक समुदाय]] के सार्वभौमिक पुरोहिताई की शिक्षा दी गई। यह आश्रय स्थल उस स्थान पर था जहां आज क्यूबा द्वीप स्थित है। इस पुरोहिताई में धर्म और विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा दी जाती है। इसी स्थान पर संत जर्मेन और [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] दोनों का समुदाय में समावेशन हुआ था। स्वयं जैडकीयल ने कहा था, &amp;quot;आप सदा के लिए मेलकिडेक समुदाय के पुरोहित रहेंगे&amp;quot;। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अटलांटिस के डूबने से पहले जब [[Special:MyLanguage/Noah|नोआह]] अपना जहाज़ बना रहे थे और लोगों को आने वाले [[Special:MyLanguage/The Flood|जल प्रलय]] की चेतावनी दे रहे थे, उस समय महान दिव्य निर्देशक ने संत जर्मेन और कुछ अन्य वफ़ादार पुजारियों को मुक्ति की लौ को टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन से निकाल कर ट्रांसिल्वेनिया के कार्पेथियन तलहटी में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कहा। यहाँ उन्होंने ऐसे समय में भी स्वतंत्रता की अग्नि को प्रज्वलित करने का पवित्र अनुष्ठान जारी रखा जब ईश्वरीय आदेश के तहत मानवजाति को उनके कर्मों का फल मिल रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आने वाले अपने सभी जन्मों में महान दिव्य निर्देशक के मार्गदर्शन में संत जर्मेन और उनके अनुयायियों ने वायलेट लौ को पुनः ढूंढा और मंदिर की रक्षा भी की। इसके बाद महान दिव्य निर्देशक ने अपने शिष्य के साथ मिलकर लौ के स्थान पर एक आश्रय स्थल स्थापित किया और हंगरी के राजघराने राकोज़ी की स्थापना भी की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_prophet_Samuel&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== ईश्वर के दूत सेमुएल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Eli and Samuel.jpg|thumb|upright|''सेमुएल एली के घर पर उन्हें परमेश्वर के न्याय के बारे में बताते हुए'', जॉन सिंगलटन कोपले (१७८०)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Uncion de David por Samuel de Antonio Gonzalez Velazquez.JPG|thumb|एंटोनियो गोंज़ालेज़ वेलाज़क्वेज़ का चित्र जिसमें सैमुअल डेविड का अभिषेक कर रहे हैं]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ग्यारहवीं शताब्दी बी सी  में संत जर्मेन ने सैमुअल के रूप में अवतार लिया था। उस समय जब सभी लोग धर्म-विमुख थे, वे एक उत्तम धार्मिक नेता सिद्ध हुए। उन्होंने इज़राइल के अंतिम न्यायाधीश और प्रथम ईश्वरदूत के रूप में कार्य किया। उन दिनों न्यायाधीश केवल विवादों को नहीं सुलझाते थे वरन  ऐसे नेता माने जाते थे जिनका ईश्वर के साथ सीधा सम्बन्ध होता था और जो अत्याचारियों के विरुद्ध इज़राइल के कबीलों को एकजुट कर सकते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल [[Special:MyLanguage/Abraham|अब्राहम]] के वंश को भ्रष्ट पुरोहितों, एली के पुत्रों, और उन अशिक्षित लोगों (वे लोग जिन्होनें युद्ध में इजराइल के लोगों ली हत्या की थी) की दासता से मुक्त कराने वाले ईश्वर के दूत थे। पारंपरिक रूप से उनके नाम [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] के साथ लिया जाता है। जब राष्ट्र अशिक्षित लोगों से उत्त्पन खतरों का सामना कर रहा था, सैमुएल के बहुत हिम्मत कर के लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर लगाया, उन्होंने लोगों को “अपने पूरे दिल से नकली गुरुओं को छोड़ असली ईश्वर के ओर लौटने का आह्वान दिया &amp;lt;ref&amp;gt;आई सैमुएल ७:३.&amp;lt;/ref&amp;gt; जल्द ही लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पश्चाताप कर सैमुएल से विनती की कि वह उनके बचाव के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। जब सैमुएल प्रार्थना कर रहे थे और अनेक प्रकार के त्याग कर रहे थे तो एक भयंकर आंधी आई जिससे इजराइल के लोगों को अपने शत्रुओं को परास्त करने का मौका मिल गया। सैमुएल के रहते अशिक्षित लोग फिर कभी इस्राएल पर राज्य नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर  दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर &amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:५.&amp;lt;/ref&amp;gt; ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”&amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:७.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने इस्राएलियों को समझाया कि राजा का शासन होने के बाद उन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन लोग फिर भी राजा की माँग पर अटल रहे। तदुपरांत सैमुअल ने शाऊल को उनका नेता नियुक्त किया; उन्होंने उसे तथा लोगों को सदैव ईश्वर के रास्ते पर चलने का निर्देश भी दिया। पर शाऊल एक विश्वासघाती सेवक साबित हुआ इसलिए सैमुअल ने उसे दंड दिया और गुप्त रूप से [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] को राजा नियुक्त किया। सैमुअल की मृत्यु के बाद उन्हें रामाह में दफनाया गया। पूरे इज़राएल ने उनके निधन का शोक मनाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Joseph&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत जोसेफ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Saint Joseph|संत जोसेफ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में संत जोसेफ थे। वे ईसा मसीह के पिता और [[Special:MyLanguage/Mother Mary|मेरी]] के पति थे। न्यू टेस्टामेंट में उनके बारे में कुछ उल्लेख मिलते हैं। बाइबल में उन्हें [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] का वशंज बताया गया है। बाइबल में इस बात का भी वर्णन है कि जब एक देवदूत ने उन्हें स्वप्न में चेतावनी दी कि हेरोड ईसा मसीह को मारने की योजना बना रहा है, तो जोसेफ अपने परिवार-सहित वह स्थान छोड़ मिस्र चले गए। हेरोड की मृत्यु के बाद ही वे वापस लौटे। ऐसी मान्यता है कि जोसेफ एक बढ़ई थे और ईसा मसीह के सार्वजनिक मंत्रालय शुरू करने से पहले ही उनका निधन हो गया था। कैथोलिक परंपरा में संत जोसेफ को विश्वव्यापी चर्च के संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनका पर्व १९ मार्च को मनाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:St Alban Evesham All Saints' church.jpg|thumb|left|upright=0.5|एवेशम में ऑल सेंट्स चर्च में रंगीन कांच की खिड़की में संत एल्बन की तस्वीर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Alban&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत एल्बन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तीसरी शताब्दी के उत्तरार्ध में संत जर्मेन ने संत एल्बन के रूप में जन्म लिया। वे ब्रिटेन के पहले शहीद हुए। एल्बन रोमन सम्राट डायोक्लेटियन के शासनकाल में ईसाइयों पर हो रहे अत्याचारों के दौरान इंग्लैंड में थे। वे एक मूर्तिपूजक थे। उन्होंने रोमन सेना में सेवा भी की थी और बाद में वेरुलामियम नामक शहर में बस गए थे। वेरुलामियम शहर का नाम बाद में बदलकर सेंट एल्बंस कर दिया गया। एल्बन ने एम्फीबालस नामक एक भगोड़े ईसाई पादरी को छुपाया था, जिसने उनका धर्म परिवर्तन करवाया था। जब सैनिक उसे ढूँढ़ने आए तो एल्बन ने पादरी को वहां से भगा दिया और स्वयं पादरी का वेश धारण कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब उनका ये कृत्य उजागर हुआ तो एल्बन को मौत की सजा सुनाई गई; उन्हें कोड़े भी मारे गए। कहा जाता है कि एल्बन की फांसी को देखने के लिए इतनी लोग जमा हो गए कि वे रास्ते में आये एक संकरे पुल पर अटक गए, भीड़ पुल पार नहीं कर पा रही थी। एल्बन ने ईश्वर से प्रार्थना की और नदी का पानी भीड़ को रास्ता देने के लिए दो भागों में बंट गया। यह नज़ारा देखने के बाद जल्लाद स्वतः धर्मान्तरित हो गया, और उसने एल्बन की जगह स्वयं की मृत्यु की भीख माँगी। जल्लाद की प्रार्थना अस्वीकार कर दी गई परन्तु उसे भी एल्बन के साथ फांसी दे दी गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
३०३ ऐ डी  में एल्बन की मृत्यु के बाद से द्वीप के लोग उनकी पूजा करने लगे। श्रद्धेय एल्बन बटलर ने अपनी किताब &amp;quot; लाइविस ऑफ़ फादर्स, मार्टियर्स एंड अदर प्रिंसिपल सेंटस&amp;quot; में लिखा है, &amp;quot;कई युगों तक संत एल्बन हमारे द्वीप के जाने-माने गौरवशाली शहीद और ईश्वर के संरक्षक के रूप में स्थापित रहे। उनके कारण कई बार हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Teacher_of_Proclus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== प्रोक्लस के शिक्षक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने आंतरिक स्तर से नियोप्लैटोनिस्ट्स (वे दार्शनिक जिन्होंने प्लेटोनिक दर्शन का उत्तर-प्राचीन संस्करण विकसित किया था; तीसरी शताब्दी के दार्शनिक प्लोटिनस इसके संस्थापक थे) के पीछे प्रमुख शिक्षक के रूप में कार्य किया। वे यूनानी दार्शनिक प्रोक्लस (४१०–४८५ ऐ डी) के पोरेरणास्रोत थ। प्रोक्लस एथेंस में 'प्लेटो अकादमी' के प्रमुख थे और समाज के एक अत्यंत सम्मानित सदस्य थे। उन्होंने यह भी बताया की प्रोक्लस पूर्व जन्म में पाइथागोरियन दार्शनिक थे। उन्होंने प्रोक्लस को कॉन्स्टेंटाइन के ईसाई धर्म के पाखंडों के बारे में बताया, और साथ ही व्यक्तिवाद (प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में ईश्वर की खोज करे) के मार्ग का महत्व भी समझाया। ईसाई व्यक्तिवाद को &amp;quot;मूर्तिपूजा&amp;quot; कहते थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने गुरु संत जर्मेन के मार्गदर्शन में प्रोक्लस ने अपने दर्शनशास्त्र को इस सिद्धांत पर आधारित किया कि सत्य केवल एक ही है और वह है कि &amp;quot;ईश्वर एक है&amp;quot;। ईश्वर को पाना ही इस जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने कहा, &amp;quot;सभी शरीरों से परे आत्मा है, सभी आत्माओं से परे बौद्धिक अस्तित्व, और सभी बौद्धिक अस्तित्वों से परे एक (ईश्वर) है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;थॉमस व्हिटेकर, ''द नियो-प्लेटोनिस्ट्स: ए स्टडी इन द हिस्ट्री ऑफ़ हेलेनिज़्म'', दूसरा संस्करण (कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, १९२८), पृष्ठ १६५.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने विभिन्न विषयों पर लिखा जैसे दर्शनशास्त्र, खगोल विज्ञान, गणित, व्याकरण इत्यादि। उनका मानना था कि उन्हें यह ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। उन्होंने स्वयं को एक ऐसा माध्यम माना जिससे ईश्वरीय रहस्योद्घाटन मानवजाति तक पहुँचता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। वे स्वयं को 'दिव्य रहस्योद्घाटन' का एक माध्यम मानते थे। उनके शिष्य मारिनस के शब्दों में &amp;quot;वे वाकई दिव्य प्रेरणा से प्रतीत होते थे क्योंकि जब उनके मुख से ज्ञानपूर्ण शब्द निकलते थे उनकी आँखों से एक तेज़ आभा निकलती थी, और उनका पूरा शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगाता था।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;विक्टर कज़िन एंड थॉमस टेलर, अनुवादक, ''ट्रीयटाईसीस  ऑफ प्रोक्लस, द प्लेटोनिक सक्सेसर'' (लंदन: ऍन.पी., १८३३), पी.वी.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Merlin&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== मर्लिन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Merlin|मर्लिन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाँचवीं शताब्दी में संत जर्मेन मर्लिन के रूप में अवतरित हुए। वे [[Special:MyLanguage/King Arthur|राजा आर्थर]] के दरबार में एक रसायनशास्त्री थे, भविष्यवक्ता और सलाहकार के रूप में कार्य करते थे। युद्धरत सामंतों से विखंडित और सैक्सन आक्रमणकारियों से त्रस्त भूमि में मर्लिन ने ब्रिटेन के राज्य को एकजुट करने के लिए बारह युद्धों (जो वास्तव में बारह दीक्षाएँ थीं) में आर्थर का नेतृत्व किया। उन्होंने [[Special:MyLanguage/Round Table|राउंड टेबल]] की पवित्र अध्येतावृत्ति स्थापित करने के लिए राजा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मर्लिन और आर्थर के मार्गदर्शन में कैमलॉट [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्य का एक विद्यालय]] था जहाँ वीर पुरुष और स्त्रियां [[Special:MyLanguage/Holy Grail|होली ग्रेल]] के रहस्यों को जानने के लिए अध्ययन करते थे, और स्वयं का आध्यात्मिक विकास भी करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ परंपराओं में मर्लिन को एक ईश्वरीय ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है जिन्होंने तारों का अध्ययन किया और जिनकी भविष्यवाणियाँ सत्तर सचिवों द्वारा दर्ज की गईं। &amp;quot;द प्रोफेसीस ऑफ मर्लिन&amp;quot;, जो आर्थर के समय से लेकर सुदूर भविष्य तक की घटनाओं का वर्णन करती है, मध्य युग में अत्यंत लोकप्रिय थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Roger-bacon-statue.jpg|thumb|upright|alt=caption|ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में रोजर बेकन की प्रतिमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Roger_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== रोजर बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Roger Bacon|रोजर बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में रोजर बेकन (१२२०-१२९२) थे। बेकन के रूप में वे एक दार्शनिक, फ्रांसिस्कन भिक्षु, शिक्षाविद्, शैक्षिक सुधारक और प्रयोगात्मक वैज्ञानिक थे। वो एक ऐसा युग था जब विज्ञान का मापदंड धर्म और तर्क पर आधारित था, और ऐसे समय में बेकन ने विज्ञान में प्रयोगात्मक पद्धति को बढ़ावा दिया; उन्होंने कहा कि दुनिया गोल है - उन्होंने उस समय के विद्वानों और वैज्ञानिकों की संकीर्ण विचारधारा की निंदा की। उन्होंने कहा कि &amp;quot;सच्चा ज्ञान दूसरों के अधिकार से नहीं उत्पन्न होता और ना ही यह पुरातनपंथी सिद्धांतों के प्रति अंधश्रद्धा से उपजता है।&amp;quot; &amp;lt;ref&amp;gt;हेनरी थॉमस एंड डाना ली थॉमस, ''लिविंग बायोग्राफीज़ ऑफ़ ग्रेट साइंटिस्ट्स'' (गार्डन सिटी, न्यूयॉर्क: नेल्सन डबलडे, १९४१), पृष्ठ १५.&amp;lt;/ref&amp;gt; अंततः बेकन ने पेरिस विश्वविद्यालय में व्याख्याता का पद छोड़ दिया और फ्रांसिस्कन ऑर्डर ऑफ़ फ्रायर्स माइनर में शामिल हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेकन रसायन विद्या, प्रकाशविज्ञान, गणित और विभिन्न भाषाओं पर अपने गहन शोध के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत और आधुनिक तकनीक का भविष्यवक्ता माना जाता है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि आने वाले समय में गर्म हवा के गुब्बारे, उड़ने वाली मशीन, चश्मे, दूरबीन, सूक्ष्मदशंक यंत्र, लिफ्ट और यंत्रचालित जहाज़ और गाड़ियां होंगी - उन्होंने इन सब के बारे में ऐसे लिखा मानो ये उनका प्रत्यक्ष अनुभव हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनके वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण, धर्मशास्त्रियों पर उनके आक्षेपों और रसायन विद्या तथा ज्योतिष शास्त्र के उनके ज्ञान के कारण उन पर &amp;quot;विधर्मी और असमान्य&amp;quot; होने के आरोप लगे। इन सब बातों के लिए उनके साथी फ्रांसिस्कन लोगों ने उन्हें चौदह साल के लिए कारावास में डाल दिया। लेकिन अपने अनुयायियों के लिए बेकन &amp;quot;डॉक्टर मिराबिलिस&amp;quot; (&amp;quot;अद्भुत शिक्षक&amp;quot;) थे - ये एक ऐसी उपाधि है जिससे उन्हें सदियों से जाना जाता रहा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Portrait of a Man, Said to be Christopher Columbus.jpg|thumb|left|alt=caption|सेबेस्टियानो डेल पियोम्बो द्वारा बनाया गया क्रिस्टोफर कोलंबस का उनका मरणोपरांत चित्र (१५१९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Christopher_Columbus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== क्रिस्टोफर कोलंबस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Christopher Columbus|क्रिस्टोफर कोलंबस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि &amp;quot;यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२  की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें &amp;quot;नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। &amp;quot;इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.&amp;lt;/ref&amp;gt; उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, &amp;quot;आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।&amp;quot; कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक &amp;quot;लास प्रोफिसियास (द प्रोफेसीस )&amp;quot;, में लिखा। &amp;quot;द बुक ऑफ़ प्रोफेसीस कंसर्निंग द डिस्कवरी ऑफ़ इंडीज एंड द रिकवरी ऑफ़ जेरुसलम&amp;quot; में इन बातों के बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है। हालाँकि इस बात पर कम ही ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह एक माना हुआ तथ्य है तथा इसके बारे में &amp;quot;एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका&amp;quot; में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि &amp;quot;कोलंबस ने खगोल विज्ञान नहीं वरन भविष्यवाणी का अनुसरण कर अमरीका की खोज की थी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|फ्रांसिस बेकन, विस्काउंट सेंट एल्बन, एक अज्ञात कलाकार द्वारा बनाया चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== फ्रांसिस बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस बेकन (१५६१-१६२६) एक दार्शनिक, राजनेता, निबंधकार और साहित्यकार थे। बेकन को पश्चिम का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञानी और विचारक कहा जाता है। वे विवेचनात्मक तार्किकता (एक तर्क पद्धति है जिसमें विशिष्ट तथ्यों को जोड़कर एक सामान्य निष्कर्ष निकाला जाता है) और वैज्ञानिक पद्धति के जनक माने जाते हैं। वे काफी हद तक इस तकनीकी युग के लिए ज़िम्मेदार हैं जिसमें हम आज जी रहे हैं। वे जानते थे कि केवल व्यावहारिक विज्ञान ही जनसाधारण को मानवीय कष्टों और आम ज़िन्दगी की नीरसता से मुक्ति दिला सकता है और ऐसा होने पर ही मनुष्य आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सकता है, व् उस उत्तम आध्यात्मिकता की पुनः खोज कर सकता है जिसे वह पहले कभी अच्छी तरह से जानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;महान असंतृप्ति&amp;quot; (अर्थात पतन, नाश , गलतियों, और जीर्णावस्था के बाद वृहद् पुनर्स्थापना) &amp;quot;संपूर्ण विश्व&amp;quot; को बदलने का उनका तरीका था। इस बात की अवधारणा पहली बार उन्होंने बचपन में की थी। फिर १६०७, में उन्होंने इसी नाम से अपनी पुस्तक में इसे मूर्त रूप दिया। इसके बाद अंग्रेजी पुनर्जागरण की शुरुआत की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ-साथ बेकन ने अपने आसपास कुछ ऐसे लेखकों को एकत्र किया जो एलिज़ाबेथकालीन साहित्य के लिए ज़िम्मेदार थे। इनमें से कुछ एक &amp;quot;गुप्त संस्था&amp;quot;  - &amp;quot;द नाइट्स ऑफ़ द हेलमेट&amp;quot; के सदस्य थे।  इस संस्था का लक्ष्य अंग्रेजी भाषा का विस्तार करना था और एक ऐसे नए साहित्य की रचना करना था जिसे अंग्रेज लोग समझ पाएं। बेकन ने [[Special:MyLanguage/Bible translations|बाइबल के अनुवाद]] (किंग जेम्स का संस्करण) का भी आयोजन किया - उनका यह दृढ़ निश्चय था कि आम लोगों को भी ईश्वर के कहे शब्दों को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८९० के दशक में शेक्सपियर के नाटकों के मूल मुद्रणों और बेकन तथा अन्य एलिज़ाबेथ काल के लेखकों की कृतियों में लिखे सांकेतिक शब्दों से यह आभास होता है कि बेकन ने शेक्सपियर के नाटक लिखे थे और वे महारानी एलिजाबेथ और लॉर्ड लीसेस्टर के पुत्र थे।&amp;lt;ref&amp;gt;देखें{{TSC}}.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि उनकी माँ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया क्योंकि वह डरती थीं की सत्ता उचित समय से पहले भी उनके हाथ से निकल सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीवन के अंतिम वर्षों में बेकन को बहुत तंग किया गया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा को पहचानने वाला कोई नहीं था। ऐसा कहा जाता है कि उनकी मृत्यु १६२६ में हुई थी, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि उसके बाद भी वे गुप्त रूप से कुछ समय तक यूरोप में रहे। उन्होंने ऐसी कठिन परिस्थितियों का वीरता से सामना किया जो किसी भी सामान्य मनुष्य को नष्ट कर सकती हैं। फिर १ मई, १६८४, को उनकी जीवात्मा [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] के आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] से स्वर्ग सिधार गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Count of St Germain.jpg|thumb|upright|ले कॉम्टे डे संत जर्मेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Rembrandt - De Poolse ruiter, c.1655 (Frick Collection).jpg|thumb|upright=1.2|रेम्ब्रांट द्वारा लगभग १६५५ में बनाया गया चित्र ''द पोलिश राइडर'' जिसमें संत जर्मेन को यूरोप के वंडरमैन के रूप में दर्शाया गया है&amp;lt;ref&amp;gt;मार्क प्रोफेट, २९ दिसंबर, १९६७&amp;lt;/ref&amp;gt;]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_Wonderman_of_Europe&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यूरोप का अजूबा आदमी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Wonderman of Europe|यूरोप का अजूबा आदमी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लोगों को मुक्ति दिलाने की सर्वोपरि इच्छा रखते हुए संत जर्मेन ने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] से भौतिक शरीर में पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मांगी और उन्हें यह अनुमति मिल भी गई। वे &amp;quot;ले कॉम्टे डे सेंट जर्मेन&amp;quot; के रूप में प्रकट हुए - एक &amp;quot;चमत्कारी&amp;quot; सज्जन जिन्होंने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के दौरान यूरोप के दरबारों को चकित कर दिया था। यहीं से उन्हें &amp;quot;द वंडरमैन (एक अजूबा आदमी)&amp;quot; का खिताब मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे एक आद्यवैज्ञानिक, विद्वान, भाषाविद्, कवि, संगीतकार, कलाकार, कथाकार और राजनयिक थे। यूरोप के दरबारों में उनकी काफी प्रशंसा की जाती थी। उन्हें मणियों की पहचान थी, उन्हें हीरे और अन्य रत्नों में दोष निकालने के लिए जाना जाता था। साथ ही उन्हें एक हाथ से पत्र और दूसरे हाथ से कविता लिखने जैसे कार्य के लिए भी जाना जाता था। वोल्टेयर के शब्दों में &amp;quot;वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो कभी नहीं मर सकता, और जो सब कुछ जानता है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;वोल्टेयर, ''ओयूव्रेस'', लेट्रे cxviii, सं. बेउचोट, lviii, पृष्ठ ३६०, इसाबेल कूपर-ओकले, ''द काउंट ऑफ़ सेंट जर्मेन'' (ब्लौवेल्ट, एन.वाई.: रुडोल्फ स्टीनर पब्लिकेशंस, १९७०), पृष्ठ ९६ में उद्धृत।&amp;lt;/ref&amp;gt; उनका उल्लेख फ्रेडरिक द ग्रेट, वोल्टेयर, होरेस वालपोल और कैसानोवा के पत्रों और उस समय के समाचार पत्रों में मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परदे के पीछे से वे यह प्रयास कर रहे थे कि [[Special:MyLanguage/French Revolution|फ्रांसीसी क्रांति]] बिना रक्तपात के हो जाए - राजतंत्र को प्रजातंत्र में आराम से बदल दिया जाए ताकि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की सरकार हो। लेकिन उनकी इस सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यूरोप को एकजुट करने के अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने [[Special:MyLanguage/Napoleon|नेपोलियन]] का समर्थन किया, परन्तु नेपोलियन ने अपने गुरु की शक्तियों का दुरुपयोग किया और मृत्यु को प्राप्त किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन इससे भी पहले संत जर्मेन ने अपना ध्यान एक नई दुनिया की ओर मोड़ लिया था। वे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके [[Special:MyLanguage/George Washington|प्रथम राष्ट्रपति]] के प्रायोजक बने। स्वतंत्रता की घोषणा और संविधान उन्हीं से प्रेरित था। उन्होंने कई ऐसे उपकरणों को बनाने की प्रेरणा भी दी जिनसे शारीरिक श्रम का कम से कम उपयोग हो ताकि मानवजाति कठिन परिश्रम से मुक्त होकर ईश्वर-प्राप्ति के रास्ते पर चल सके। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Chohan_of_the_Seventh_Ray&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== सातवीं किरण के चौहान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, संत जर्मेन ने महिला दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Kuan Yin|कुआन यिन]] से सातवीं किरण चौहान का पद प्राप्त किया। सातवीं किरण दया, क्षमा और पवित्र अनुष्ठान की किरण है। इसके बाद, बीसवीं शताब्दी में, संत जर्मेन एक बार फिर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट व्हाइट ब्रदरहुड) की एक बाहरी गतिविधि को प्रायोजित करने के लिए आगे बढ़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९३० के दशक के आरंभ में उन्होंने अपने &amp;quot;पृथ्वी पर कार्यरत सेनापति&amp;quot; जॉर्ज वाशिंगटन से संपर्क किया, और उन्हें एक [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहक]] के रूप में प्रशिक्षित किया।  वाशिंगटन ने [[Special:MyLanguage/Godfré Ray King|गॉडफ्रे रे किंग]] के उपनाम से, &amp;quot;अनवील्ड मिस्ट्रीज़&amp;quot;, &amp;quot;द मैजिक प्रेज़ेंस&amp;quot; और &amp;quot;द &amp;quot;आई एम&amp;quot; डिस्कोर्सेज़&amp;quot; नामक पुस्तकें लिखीं जिनमें उन्होंने संत जर्मेन द्वारा नए युग के लिए दिए गए निर्देशों के बारे में लिखा। इसी दशक के अंतिम दिनों में न्याय की देवी और अन्य [[Special:MyLanguage/cosmic being|ब्रह्मांडीय प्राणी]] पवित्र अग्नि की शिक्षाओं को मानवजाति तक पहुँचाने और [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] की शुरुआत करने में संत जर्मेन की  सहायता करने पृथ्वी पर अवतरित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९६१ में संत जर्मेन ने पृथ्वी पर अपने प्रतिनिधि, संदेशवाहक [[Special:MyLanguage/Mark L. Prophet|मार्क एल. प्रोफेट]] से संपर्क किया और [[Special:MyLanguage/Ancient of Days|प्राचीन काल]] के स्वामी (सनत कुमार) और उनके प्रथम और दूसरे शिष्य शिष्य [[Special:MyLanguage/Gautama|गौतम]] और [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] की स्मृति में [[Special:MyLanguage/Keepers of the Flame Fraternity|लौ रक्षक बिरादरी]] (कीपर्स ऑफ़ द फ्लेम फ्रैटरनिटी) की स्थापना की। इनका उद्देश्य उन सभी लोगों को पुनर्जागृत करना था जो मूल रूप से [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] के साथ पृथ्वी पर आए थे। ये लोग पृथ्वी पर शिक्षकों के रूप में आये थे और इनका काम लोगों की सेवा करना था परन्तु यहाँ आकर वे सब बातें ये बातें भूल गए थे। संत जर्मेन का कार्य उन सबकी स्मृति को पुनर्स्थापित करना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार संत जर्मेन ने मूल लौ रक्षकों को प्राचीन काल के स्वामी की वाणी को ध्यान से सुनने को कहा। उन्होंने इन सभी लोगों को अपनी आत्मा में जीवन की ज्वाला और स्वतंत्रता की पवित्र अग्नि को पुनः प्रज्वलित करने और अपने जीवन को ईश्वर की सेवा में पुनः समर्पित करने के आह्वान दिया। संत जर्मेन लौ रक्षक बिरादरी के शूरवीर सेनाध्यक्ष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Hierarch_of_the_Aquarian_Age&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कुम्भ युग के अध्यक्ष ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१ मई १९५४ को संत जर्मेन ने सनत कुमार से शक्ति का प्रभुत्व और ईसा मसीह से अगले दो हज़ार वर्ष की अवधि के लिए मानवजाति की चेतना को निर्देशित का अधिकार प्राप्त किया। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईसा मसीह का महत्व कम हो गया है। वे अब उच्च स्तरों पर [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]] के रूप में काम कर रहे हैं, और अपनी चेतना को समस्त मानवजाति के लिए पहले से भी अधिक शक्तिशाली और सर्वव्यापी रूप से दे रहे हैं क्योंकि ईश्वर का स्वभाव निरंतर श्रेष्ठ होना है। हम एक ऐसे ब्रह्मांड में रहते हैं जिसका निरंतर विस्तार होता रहता  है - ब्रह्मांड जो ईश्वर के प्रत्येक पुत्र (सूर्य) के केंद्र से विस्तारित होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दो हजार वर्ष की अवधि के दौरान वायलेट लौ का आह्वान कर के हम स्वयं में ईश्वर की ऊर्जा (जिसे हमने हजारों वर्षों की अपनी गलत आदतों द्वारा अपवित्र किया है) को शुद्ध कर सकते हैं। ऐसा करने से समस्त मानवजाति भय, अभाव, पाप, बीमारी और मृत्यु से मुक्त हो सकती है, और सभी मनुष्य स्वतंत्र रूप से प्रकाश में चल सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/age of Aquarius|कुंभ युग]] की शुरुआत में  संत जर्मेन कर्म के स्वामी के समक्ष गए और उनसे वायलेट लौ को आम इंसानों तक पहुंचाने की आज्ञा मांगी। इसके पहले तक वायलेट लौ का ज्ञान श्वेत महासंघ के आंतरिक आश्रमों और [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालयों]] में ही था। संत जर्मेन हमें वायलेट लौ के आह्वान से होने वाले लाभ के बारे में बताते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
आपमें से कुछ लोगों के अधिकतर कर्म संतुलित हो गए हैं, कुछ के [[Special:MyLanguage/heart chakra|हृदय चक्र]] निर्मल हो गए हैं। जीवन में एक नया प्रेम, नई कोमलता, नई करुणा, जीवन के प्रति एक नई संवेदनशीलता, एक नई स्वतंत्रता और उस स्वतंत्रता की खोज में एक नया आनंद आ गया है। एक नई पवित्रता का उदय भी हुआ है क्योंकि मेरी लौ के माध्यम से आपका मेलकिडेक समुदाय के पुरोहितत्व से संपर्क हुआ है। अज्ञानता और मानसिक जड़ता कुछ सीमा तक समाप्त हुई है, और लोग एक ऐसे रास्ते पर  चल पड़े हैं जो उन्हें ईश्वर तक पहुंचाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ ने पारिवारिक रिश्तों में मदद की है। इसने कुछ लोगों को अपने पुराने कर्मों को संतुलित करने में सहायता की है और वे अपने पुराने दुखों से मुक्त होने लगे हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि वायलेट लौ में ईश्वरीय न्याय की लौ निहित है, और ईश्वरीय न्याय में ईश्वर का मूल्याङ्कन। इसलिए हम ये कह सकते हैं कि वायलेट लौ एक दोधारी [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] के सामान है जो सत्य को असत्य से अलग करती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ के अनेकानेक लाभ हैं पर उन सभी को यहाँ गिनाना संभव नहीं, लेकिन यह अवश्य है इसके प्रयोग से मनुष्य के भीतर एक गहन बदलाव होता है। वायलेट लौ हमारे उन सभी मतभेदों और मनोवैज्ञानिक समस्यायों का समाधान करती है जो बचपन से या फिर उसे से भी पहले पिछले जन्मों से चली आ रही हैं और जिन्होंने हमारी चेतना में इतनी गहरी जड़ें जमा ली हैं कि वे जन्म-जन्मांतर से वहीँ स्थित हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;कीप माई पर्पल हार्ट,&amp;quot; {{POWref|३१|७२}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Alchemy&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आद्यविज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Alchemy|आद्यविज्ञान}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने अपनी पुस्तक &amp;quot;सेंट जर्मेन ऑन अल्केमी&amp;quot; में आद्यविज्ञान की शिक्षा देते हैं। वे [[Special:MyLanguage/Amethyst (gemstone)|एमेथिस्ट (रत्न)]] का उपयोग करते हैं — यह आद्द्यवैज्ञनिकों का रत्न है, कुंभ युग का रत्न है और वायलेट लौ का भी। स्ट्रॉस के वाल्ट्ज़ में वायलेट लौ का स्पंदन है और यह आपको उनके साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है। उन्होंने हमें यह भी बताया है कि [[Special:MyLanguage/Franz Liszt|फ्रांज़ लिज़्ट]] का &amp;quot;राकोज़ी मार्च&amp;quot; उनके हृदय की लौ और वायलेट लौ के सूत्र को धारण करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रयस्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन का ध्यान सहारा रेगिस्तान के ऊपर स्थित स्वर्णिम [[Special:MyLanguage/etheric city|आकाशीय शहर]] में केंद्रित है। वे [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] के साथ-साथ टेबल माउंटेन, व्योमिंग स्थित अपने भौतिक/आकाशीय आश्रय स्थल, [[Special:MyLanguage/Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स]] में भी पढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त वे महान दिव्य निर्देशक के केंद्रों —भारत में [[Special:MyLanguage/Cave of Light|केव ऑफ लाइट]] और ट्रांसिल्वेनिया में [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] में भी कार्य करते हैं, जहाँ वे धर्मगुरु के रूप में विराजमान हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिण अमेरिका में [[Special:MyLanguage/God and Goddess Meru|मेरु देवी और देवता]] के आश्रय स्थल में भी अपना केंद्र स्थापित किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप [[Special:MyLanguage/Maltese cross|माल्टीज़ क्रॉस]] है; उनकी खुशबू, वायलेट फूलों की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टीआ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “Saint Germain.”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/1/hi&amp;diff=245734</id>
		<title>Translations:Saint Germain/1/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/1/hi&amp;diff=245734"/>
		<updated>2026-02-20T10:58:07Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;दिव्य गुरु संत जरमेन&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/Page_display_title/hi&amp;diff=245733</id>
		<title>Translations:Saint Germain/Page display title/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/Page_display_title/hi&amp;diff=245733"/>
		<updated>2026-02-20T10:58:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;संत जरमेन&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245726</id>
		<title>Saint Germain/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Saint_Germain/hi&amp;diff=245726"/>
		<updated>2026-02-20T10:37:38Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0000144 poster-saint-germain-sindelar-1403 600.jpeg|thumb|दिव्य गुरु संत जर्मेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''संत जरमेन''' सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] हैं। अपनी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ी ]] महिला गुरु [[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टिया]] - जिन्हें न्याय की देवी भी कहते हैं - के साथ, वे [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुंभ युग]] के अधिपति हैं। वे स्वतंत्रता की ज्वाला के प्रायोजक हैं, तथा पोर्टिया न्याय की ज्वाला की। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक कूटनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे सभी लोग जो सातवीं किरण का आह्वान करते हैं उन में ये एक सच्चे राजनीतिज्ञ में पाए जाने वाले सभी ईश्वरीय गुणों जैसे गरिमा, शालीनता, सज्जनता और संतुलन आदि को दर्शाते हैं। ये [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] द्वारा स्थापित [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हाउस]] के सदस्य हैं। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] आजकल इनके ट्रांसिल्वेनिया स्थित भवन में प्रतिष्ठित है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''संत जर्मेन'' नाम लैटिन शब्द ''सैंक्टस जर्मेनस'' से आया है, जिसका अर्थ है “धर्मात्मा भाई”।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका ध्येय ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रत्येक दो हज़ार साल का चक्र सात किरणों में से एक के अंतर्गत आता है। [[Special:MyLanguage/jesus|ईसा मसीह]] छठी किरण के चौहान के रूप में पिछले 2000 वर्षों से युग के धर्मगुरु के पद पर कार्यरत थे। 1 मई, 1954 को संत जर्मेन और पोर्टिया को आने वाले युग (सातवीं किरण का चक्र) का निदेशक नियुक्त किया गया। सातवीं किरण कुम्भ राशि की है, तथा स्वतंत्रता और न्याय कुंभ राशि के स्त्री व पुरुष तत्त्व हैं। दया के साथ मिलकर वे इस [[Special:MyLanguage/dispensation|व्यवस्था]] में ईश्वर के अन्य सभी गुणों को दर्शाने का आधार प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन और पोर्टिया लोगों को सातवें युग और सातवीं किरण की एक नई जीवन तरंग, एक नई सभ्यता और एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। सातवीं किरण को [[Special:MyLanguage/violet ray|वायलेट लौ]] कहते हैं और स्वतंत्रता, न्याय, दया, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यविज्ञान]]और पवित्र अनुष्ठान इसके गुण हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सातवीं किरण के चौहान (स्वामी) के रूप में, संत जर्मेन वायलेट लौ के माध्यम से हमारी आत्माओं को [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] के विज्ञान और अनुष्ठान में दीक्षा देते हैं। रेवेलशन १०.७ में जिनके बारे में भविष्यवाणी की गयी थी ये वही सातवें देवदूत हैं। ये परमेश्वर के रहस्य के बारे में बताने आते हैं,और यही उन्होंने अपने &amp;quot;सेवकों और भविष्यवक्ताओं को बताया है।&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन कहते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
मैं एक आरोहित जीव हूँ, लेकिन हमेशा से मैं ऐसा नहीं था। एक या दो नहीं, बल्कि मैंने पृथ्वी पर कई जन्म लिए हैं, और मैं इस धरती पर वैसे ही घूमता था जैसे आज आप घूम रहे हैं। मेरा नश्वर शरीर भी भौतिक आयाम की सीमाओं में बंधा था। एक जन्म में मैं [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] पर था और एक अन्य जन्म में [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] पर। मैंने कई सभ्यताओं का विकास और विनाश देखा है। मानवजाति के [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] और आदिम काल तक के चक्र काल के दौरान मैंने चेतना के उतार चढ़ाव को देखा है। मैंने देखा है कि किस तरह अपने गलत चुनावों के कारण मनुष्य ने हज़ारों सालों के वैज्ञानिक विकास और प्राप्त की गयी उस उच्चतम ब्रह्मांडीय चेतना को खो दिया जो आज के युग में सबसे उन्नत धर्म के सदस्यों के पास भी नहीं है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हाँ, मेरे पास कई विकल्प थे, और अपने लिए मैंने चुनाव स्वयं किया है। सही चुनाव करके ही स्त्री और पुरुष पदक्रम में अपना स्थान निर्धारित करते हैं। ईश्वर की इच्छानुसार चलने का चुनाव करके हम स्वतंत्र हो जाते हैं, मैं भी जन्म और मृत्यु के चक्र से स्वतंत्र हो गया और फिर इस चक्र के बाहर मुझे एक जीवन मिला। मैंने अपनी स्वतंत्रता लौ से प्राप्त की, कुम्भ युग के मूलस्वर से प्राप्त की जिसे प्राचीन आद्यवैज्ञानिकों ने ढूँढा है,  वही बैंगनी लौ जो संतजनों के पास रहती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आप नश्वर हैं। मैं अमर हूँ। हमारे बीच बस इतना ही अंतर है कि मैंने स्वतंत्रता का चुनाव किया है, और आपको यह चुनाव करना अभी बाकी है। हम दोनों की क्षमताएँ एक समान हैं, संसाधन भी एक समान हैं, और हम दोनों का उस एक (ईश्वर) से जुड़ाव भी समान है। मैंने अपनी ईश्वरीय पहचान बनाने का चुनाव किया है। बहुत समय पहले मेरे अंतर्मन से एक शांत एवं धीमी आवाज़ आयी थी: &amp;quot;ईश्वर की संतानों, अपनी ईश्वरीय पहचान बनाओ&amp;quot;। ऐसा लगा मानों ईश्वर ही कह रहे हों। रात के सन्नाटे में जब मैंने पुकार सुनी तो उत्तर दिया, &amp;quot;अवश्य&amp;quot;। उत्तर में पूरा ब्रह्मांड बोल उठा, &amp;quot;अवश्य&amp;quot; । जब मनुष्य अपनी इच्छा प्राक्जत करता है तो उसके अस्तित्व की असीमित क्षमता दिखती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं संत जर्मेन हूँ, और कुंभ युग की विजय के लिए मैं आपकी आत्मा और हृदय की अग्नि को अपने साथ ले जाने आया हूँ। मैंने आपकी आत्मा को [[Special:MyLanguage/initiation|दीक्षित]] करने का स्वरुप स्थापित कर दिया है... मैं स्वतंत्रता के पथ पर हूँ। आप भी उस पथ पर अपनी यात्रा आरम्भ करो, आप मुझे वहीँ पाओगे। अगर आप चाहोगे तो मैं आपका गुरु होना स्वीकार करूँगा।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;आई हैव चोसन टू बी फ्री,&amp;quot; {{POWref|१८|३०}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Ruler_of_a_golden-age_civilization&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== स्वर्ण युग की सभ्यता का शासक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Golden age in the Sahara Desert|सहारा मरुस्थल में स्वर्ण युग}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पचास हज़ार साल पहले संत जर्मेन उस उपजाऊ क्षेत्र - जहाँ आज सहारा मरुस्थल स्थित है - में स्वर्ण युगीन सभ्यता के शासक थे। एक सम्राट के रूप में, संत जर्मेन प्राचीन ज्ञान और भौतिक वृतों के ज्ञान में निपुण थे। लोग उन्हें अपने उभरते हुए ईश्वरत्व के मानक के रूप में देखते थे। उनका साम्राज्य सौंदर्य, समरूपता और पूर्णता की अद्वितीय ऊँचाई तक पहुँच गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ जैसे-जैसे यहाँ के लोग ईश्वर से विमुख हो अपनी इंद्रियों के सुखों में अधिक रुचि लेने लगे, ब्रह्मांडीय परिषद ने संत जर्मेन को वहां से हटने का निर्देश दिया। परिषद् ने कहा कि लोगों के कर्म ही अब से उनके गुरु होंगे। राजा ने अपने पार्षदों और लोक सेवकों के लिए एक भव्य भोज का आयोजन किया। उनके ५७६ अतिथियों में से प्रत्येक को क्रिस्टल का एक प्याला मिला जिसमें &amp;quot;शुद्ध इलेक्ट्रॉनिक सार&amp;quot; का अमृत भरा हुआ था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह अमृत संत जर्मेन ने उन्हें अपनी आत्मा की रक्षा के लिए उपहार-स्वरूप दिया था, ताकि जब कुंभ के युग में स्वर्ण युगीन सभ्यता को वापस लाने का अवसर आए, तो ये सब लोग अपने 'ईश्वरीय स्वरुप' को पहचान पाएं। और, साथ ही अन्य सभी लोगों को एक संकेत भी मिले कि जब मनुष्य अपने मन, हृदय और अपनी जीवात्मा को ईश्वर की आत्मा के निवास के लिए उपयुक्त बनाता है, तो ईश्वर अवश्य उनके साथ निवास करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भोजन के दौरान एक ब्रह्मांडीय गुरु - जिनकी पहचान उनके माथे पर लिखा शब्द 'विजय' था - ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने लोगों को आनेवाले उस संकट के प्रति आगाह किया जो उन्होंने ईश्वर में अपने अविश्वास के कारण आमंत्रित किया था; उन्होंने लोगों को अपने ईश्वरीय स्वरुप की उपेक्षा करने के लिए डांट लगाई; और यह भविष्यवाणी भी की कि जल्द ही यह साम्राज्य एक ऐसे राजकुमार के अधीन आ जाएगा जो राजा की पुत्री से विवाह करने का इच्छुक होगा। इस घटना के सात दिन बाद राजा ही और उनका परिवार स्वर्ण-युगीन सभ्यता के आकाशीय समकक्ष नगर में चले गए। अगले ही दिन एक राजकुमार वहाँ पहुँचे और उस राज्य का कार्यभार संभाल लिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;High_priest_on_Atlantis&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== अटलांटिस पर उच्च पुजारी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तेरह हज़ार साल पहले संत जर्मेन [[Special:MyLanguage/Atlantis|अटलांटिस]] के मुख्य भू-भाग पर स्थित वायलेट लौ मंदिर के मुख्य पुजारी थे। उस समय उन्होंने अपने आह्वानों और कारण शरीर द्वारा एक अग्नि स्तंभ - वायलेट लौ का एक फ़व्वारा - स्थापित किया था। यहाँ दूर दूर से लोग अपने शरीर, मस्तिष्क और जीवात्मा की शुद्धि के लिए आते थे। यह वे लोग वायलेट लौ का आह्वाहन तथा सातवीं किरण के अनुष्ठानों द्वारा प्राप्त करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जिन लोगों ने वायलेट लौ के मंदिर में सेवा की उन्हें [[Special:MyLanguage/Zadkiel|जैडकीयल]] के आकाशीय आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Temple of Purification|टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन]] में [[Special:MyLanguage/Melchizedek|मेलकिडेक समुदाय]] के सार्वभौमिक पुरोहिताई की शिक्षा दी गई। यह आश्रय स्थल उस स्थान पर था जहां आज क्यूबा द्वीप स्थित है। इस पुरोहिताई में धर्म और विज्ञान की सम्पूर्ण शिक्षा दी जाती है। इसी स्थान पर संत जर्मेन और [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] दोनों का समुदाय में समावेशन हुआ था। स्वयं जैडकीयल ने कहा था, &amp;quot;आप सदा के लिए मेलकिडेक समुदाय के पुरोहित रहेंगे&amp;quot;। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अटलांटिस के डूबने से पहले जब [[Special:MyLanguage/Noah|नोआह]] अपना जहाज़ बना रहे थे और लोगों को आने वाले [[Special:MyLanguage/The Flood|जल प्रलय]] की चेतावनी दे रहे थे, उस समय महान दिव्य निर्देशक ने संत जर्मेन और कुछ अन्य वफ़ादार पुजारियों को मुक्ति की लौ को टेम्पल ऑफ़ पूरीफिकेशन से निकाल कर ट्रांसिल्वेनिया के कार्पेथियन तलहटी में एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कहा। यहाँ उन्होंने ऐसे समय में भी स्वतंत्रता की अग्नि को प्रज्वलित करने का पवित्र अनुष्ठान जारी रखा जब ईश्वरीय आदेश के तहत मानवजाति को उनके कर्मों का फल मिल रहा था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आने वाले अपने सभी जन्मों में महान दिव्य निर्देशक के मार्गदर्शन में संत जर्मेन और उनके अनुयायियों ने वायलेट लौ को पुनः ढूंढा और मंदिर की रक्षा भी की। इसके बाद महान दिव्य निर्देशक ने अपने शिष्य के साथ मिलकर लौ के स्थान पर एक आश्रय स्थल स्थापित किया और हंगरी के राजघराने राकोज़ी की स्थापना भी की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_prophet_Samuel&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== ईश्वर के दूत सेमुएल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Eli and Samuel.jpg|thumb|upright|''सेमुएल एली के घर पर उन्हें परमेश्वर के न्याय के बारे में बताते हुए'', जॉन सिंगलटन कोपले (१७८०)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Uncion de David por Samuel de Antonio Gonzalez Velazquez.JPG|thumb|एंटोनियो गोंज़ालेज़ वेलाज़क्वेज़ का चित्र जिसमें सैमुअल डेविड का अभिषेक कर रहे हैं]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ग्यारहवीं शताब्दी बी सी  में संत जर्मेन ने सैमुअल के रूप में अवतार लिया था। उस समय जब सभी लोग धर्म-विमुख थे, वे एक उत्तम धार्मिक नेता सिद्ध हुए। उन्होंने इज़राइल के अंतिम न्यायाधीश और प्रथम ईश्वरदूत के रूप में कार्य किया। उन दिनों न्यायाधीश केवल विवादों को नहीं सुलझाते थे वरन  ऐसे नेता माने जाते थे जिनका ईश्वर के साथ सीधा सम्बन्ध होता था और जो अत्याचारियों के विरुद्ध इज़राइल के कबीलों को एकजुट कर सकते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल [[Special:MyLanguage/Abraham|अब्राहम]] के वंश को भ्रष्ट पुरोहितों, एली के पुत्रों, और उन अशिक्षित लोगों (वे लोग जिन्होनें युद्ध में इजराइल के लोगों ली हत्या की थी) की दासता से मुक्त कराने वाले ईश्वर के दूत थे। पारंपरिक रूप से उनके नाम [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] के साथ लिया जाता है। जब राष्ट्र अशिक्षित लोगों से उत्त्पन खतरों का सामना कर रहा था, सैमुएल के बहुत हिम्मत कर के लोगों को अध्यात्म के मार्ग पर लगाया, उन्होंने लोगों को “अपने पूरे दिल से नकली गुरुओं को छोड़ असली ईश्वर के ओर लौटने का आह्वान दिया &amp;lt;ref&amp;gt;आई सैमुएल ७:३.&amp;lt;/ref&amp;gt; जल्द ही लोगों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पश्चाताप कर सैमुएल से विनती की कि वह उनके बचाव के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। जब सैमुएल प्रार्थना कर रहे थे और अनेक प्रकार के त्याग कर रहे थे तो एक भयंकर आंधी आई जिससे इजराइल के लोगों को अपने शत्रुओं को परास्त करने का मौका मिल गया। सैमुएल के रहते अशिक्षित लोग फिर कभी इस्राएल पर राज्य नहीं कर पाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर  दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर &amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:५.&amp;lt;/ref&amp;gt; ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”&amp;lt;ref&amp;gt;१ सैमुअल ८:७.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सैमुअल ने इस्राएलियों को समझाया कि राजा का शासन होने के बाद उन्हें कई खतरों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन लोग फिर भी राजा की माँग पर अटल रहे। तदुपरांत सैमुअल ने शाऊल को उनका नेता नियुक्त किया; उन्होंने उसे तथा लोगों को सदैव ईश्वर के रास्ते पर चलने का निर्देश भी दिया। पर शाऊल एक विश्वासघाती सेवक साबित हुआ इसलिए सैमुअल ने उसे दंड दिया और गुप्त रूप से [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] को राजा नियुक्त किया। सैमुअल की मृत्यु के बाद उन्हें रामाह में दफनाया गया। पूरे इज़राएल ने उनके निधन का शोक मनाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Joseph&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत जोसेफ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Saint Joseph|संत जोसेफ}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में संत जोसेफ थे। वे ईसा मसीह के पिता और [[Special:MyLanguage/Mother Mary|मेरी]] के पति थे। न्यू टेस्टामेंट में उनके बारे में कुछ उल्लेख मिलते हैं। बाइबल में उन्हें [[Special:MyLanguage/King David|राजा डेविड]] का वशंज बताया गया है। बाइबल में इस बात का भी वर्णन है कि जब एक देवदूत ने उन्हें स्वप्न में चेतावनी दी कि हेरोड ईसा मसीह को मारने की योजना बना रहा है, तो जोसेफ अपने परिवार-सहित वह स्थान छोड़ मिस्र चले गए। हेरोड की मृत्यु के बाद ही वे वापस लौटे। ऐसी मान्यता है कि जोसेफ एक बढ़ई थे और ईसा मसीह के सार्वजनिक मंत्रालय शुरू करने से पहले ही उनका निधन हो गया था। कैथोलिक परंपरा में संत जोसेफ को विश्वव्यापी चर्च के संरक्षक के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनका पर्व १९ मार्च को मनाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:St Alban Evesham All Saints' church.jpg|thumb|left|upright=0.5|एवेशम में ऑल सेंट्स चर्च में रंगीन कांच की खिड़की में संत एल्बन की तस्वीर]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Saint_Alban&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== संत एल्बन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तीसरी शताब्दी के उत्तरार्ध में संत जर्मेन ने संत एल्बन के रूप में जन्म लिया। वे ब्रिटेन के पहले शहीद हुए। एल्बन रोमन सम्राट डायोक्लेटियन के शासनकाल में ईसाइयों पर हो रहे अत्याचारों के दौरान इंग्लैंड में थे। वे एक मूर्तिपूजक थे। उन्होंने रोमन सेना में सेवा भी की थी और बाद में वेरुलामियम नामक शहर में बस गए थे। वेरुलामियम शहर का नाम बाद में बदलकर सेंट एल्बंस कर दिया गया। एल्बन ने एम्फीबालस नामक एक भगोड़े ईसाई पादरी को छुपाया था, जिसने उनका धर्म परिवर्तन करवाया था। जब सैनिक उसे ढूँढ़ने आए तो एल्बन ने पादरी को वहां से भगा दिया और स्वयं पादरी का वेश धारण कर लिया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब उनका ये कृत्य उजागर हुआ तो एल्बन को मौत की सजा सुनाई गई; उन्हें कोड़े भी मारे गए। कहा जाता है कि एल्बन की फांसी को देखने के लिए इतनी लोग जमा हो गए कि वे रास्ते में आये एक संकरे पुल पर अटक गए, भीड़ पुल पार नहीं कर पा रही थी। एल्बन ने ईश्वर से प्रार्थना की और नदी का पानी भीड़ को रास्ता देने के लिए दो भागों में बंट गया। यह नज़ारा देखने के बाद जल्लाद स्वतः धर्मान्तरित हो गया, और उसने एल्बन की जगह स्वयं की मृत्यु की भीख माँगी। जल्लाद की प्रार्थना अस्वीकार कर दी गई परन्तु उसे भी एल्बन के साथ फांसी दे दी गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
३०३ ऐ डी  में एल्बन की मृत्यु के बाद से द्वीप के लोग उनकी पूजा करने लगे। श्रद्धेय एल्बन बटलर ने अपनी किताब &amp;quot; लाइविस ऑफ़ फादर्स, मार्टियर्स एंड अदर प्रिंसिपल सेंटस&amp;quot; में लिखा है, &amp;quot;कई युगों तक संत एल्बन हमारे द्वीप के जाने-माने गौरवशाली शहीद और ईश्वर के संरक्षक के रूप में स्थापित रहे। उनके कारण कई बार हमें ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Teacher_of_Proclus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== प्रोक्लस के शिक्षक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने आंतरिक स्तर से नियोप्लैटोनिस्ट्स (वे दार्शनिक जिन्होंने प्लेटोनिक दर्शन का उत्तर-प्राचीन संस्करण विकसित किया था; तीसरी शताब्दी के दार्शनिक प्लोटिनस इसके संस्थापक थे) के पीछे प्रमुख शिक्षक के रूप में कार्य किया। वे यूनानी दार्शनिक प्रोक्लस (४१०–४८५ ऐ डी) के पोरेरणास्रोत थ। प्रोक्लस एथेंस में 'प्लेटो अकादमी' के प्रमुख थे और समाज के एक अत्यंत सम्मानित सदस्य थे। उन्होंने यह भी बताया की प्रोक्लस पूर्व जन्म में पाइथागोरियन दार्शनिक थे। उन्होंने प्रोक्लस को कॉन्स्टेंटाइन के ईसाई धर्म के पाखंडों के बारे में बताया, और साथ ही व्यक्तिवाद (प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में ईश्वर की खोज करे) के मार्ग का महत्व भी समझाया। ईसाई व्यक्तिवाद को &amp;quot;मूर्तिपूजा&amp;quot; कहते थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपने गुरु संत जर्मेन के मार्गदर्शन में प्रोक्लस ने अपने दर्शनशास्त्र को इस सिद्धांत पर आधारित किया कि सत्य केवल एक ही है और वह है कि &amp;quot;ईश्वर एक है&amp;quot;। ईश्वर को पाना ही इस जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। उन्होंने कहा, &amp;quot;सभी शरीरों से परे आत्मा है, सभी आत्माओं से परे बौद्धिक अस्तित्व, और सभी बौद्धिक अस्तित्वों से परे एक (ईश्वर) है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;थॉमस व्हिटेकर, ''द नियो-प्लेटोनिस्ट्स: ए स्टडी इन द हिस्ट्री ऑफ़ हेलेनिज़्म'', दूसरा संस्करण (कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, १९२८), पृष्ठ १६५.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने विभिन्न विषयों पर लिखा जैसे दर्शनशास्त्र, खगोल विज्ञान, गणित, व्याकरण इत्यादि। उनका मानना था कि उन्हें यह ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। उन्होंने स्वयं को एक ऐसा माध्यम माना जिससे ईश्वरीय रहस्योद्घाटन मानवजाति तक पहुँचता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रोक्लस ने यह स्वीकार किया था कि उन्हें ज्ञान और दर्शन ऊपर (ईश्वर) से मिला था। वे स्वयं को 'दिव्य रहस्योद्घाटन' का एक माध्यम मानते थे। उनके शिष्य मारिनस के शब्दों में &amp;quot;वे वाकई दिव्य प्रेरणा से प्रतीत होते थे क्योंकि जब उनके मुख से ज्ञानपूर्ण शब्द निकलते थे उनकी आँखों से एक तेज़ आभा निकलती थी, और उनका पूरा शरीर दिव्य प्रकाश से जगमगाता था।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;विक्टर कज़िन एंड थॉमस टेलर, अनुवादक, ''ट्रीयटाईसीस  ऑफ प्रोक्लस, द प्लेटोनिक सक्सेसर'' (लंदन: ऍन.पी., १८३३), पी.वी.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Merlin&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== मर्लिन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Merlin|मर्लिन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाँचवीं शताब्दी में संत जर्मेन मर्लिन के रूप में अवतरित हुए। वे [[Special:MyLanguage/King Arthur|राजा आर्थर]] के दरबार में एक रसायनशास्त्री थे, भविष्यवक्ता और सलाहकार के रूप में कार्य करते थे। युद्धरत सामंतों से विखंडित और सैक्सन आक्रमणकारियों से त्रस्त भूमि में मर्लिन ने ब्रिटेन के राज्य को एकजुट करने के लिए बारह युद्धों (जो वास्तव में बारह दीक्षाएँ थीं) में आर्थर का नेतृत्व किया। उन्होंने [[Special:MyLanguage/Round Table|राउंड टेबल]] की पवित्र अध्येतावृत्ति स्थापित करने के लिए राजा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। मर्लिन और आर्थर के मार्गदर्शन में कैमलॉट [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्य का एक विद्यालय]] था जहाँ वीर पुरुष और स्त्रियां [[Special:MyLanguage/Holy Grail|होली ग्रेल]] के रहस्यों को जानने के लिए अध्ययन करते थे, और स्वयं का आध्यात्मिक विकास भी करते थे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुछ परंपराओं में मर्लिन को एक ईश्वरीय ऋषि के रूप में वर्णित किया गया है जिन्होंने तारों का अध्ययन किया और जिनकी भविष्यवाणियाँ सत्तर सचिवों द्वारा दर्ज की गईं। &amp;quot;द प्रोफेसीस ऑफ मर्लिन&amp;quot;, जो आर्थर के समय से लेकर सुदूर भविष्य तक की घटनाओं का वर्णन करती है, मध्य युग में अत्यंत लोकप्रिय थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Roger-bacon-statue.jpg|thumb|upright|alt=caption|ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में रोजर बेकन की प्रतिमा]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Roger_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== रोजर बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Roger Bacon|रोजर बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन एक जन्म में रोजर बेकन (१२२०-१२९२) थे। बेकन के रूप में वे एक दार्शनिक, फ्रांसिस्कन भिक्षु, शिक्षाविद्, शैक्षिक सुधारक और प्रयोगात्मक वैज्ञानिक थे। वो एक ऐसा युग था जब विज्ञान का मापदंड धर्म और तर्क पर आधारित था, और ऐसे समय में बेकन ने विज्ञान में प्रयोगात्मक पद्धति को बढ़ावा दिया; उन्होंने कहा कि दुनिया गोल है - उन्होंने उस समय के विद्वानों और वैज्ञानिकों की संकीर्ण विचारधारा की निंदा की। उन्होंने कहा कि &amp;quot;सच्चा ज्ञान दूसरों के अधिकार से नहीं उत्पन्न होता और ना ही यह पुरातनपंथी सिद्धांतों के प्रति अंधश्रद्धा से उपजता है।&amp;quot; &amp;lt;ref&amp;gt;हेनरी थॉमस एंड डाना ली थॉमस, ''लिविंग बायोग्राफीज़ ऑफ़ ग्रेट साइंटिस्ट्स'' (गार्डन सिटी, न्यूयॉर्क: नेल्सन डबलडे, १९४१), पृष्ठ १५.&amp;lt;/ref&amp;gt; अंततः बेकन ने पेरिस विश्वविद्यालय में व्याख्याता का पद छोड़ दिया और फ्रांसिस्कन ऑर्डर ऑफ़ फ्रायर्स माइनर में शामिल हो गए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बेकन रसायन विद्या, प्रकाशविज्ञान, गणित और विभिन्न भाषाओं पर अपने गहन शोध के लिए प्रसिद्ध थे। उन्हें आधुनिक विज्ञान का अग्रदूत और आधुनिक तकनीक का भविष्यवक्ता माना जाता है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि आने वाले समय में गर्म हवा के गुब्बारे, उड़ने वाली मशीन, चश्मे, दूरबीन, सूक्ष्मदशंक यंत्र, लिफ्ट और यंत्रचालित जहाज़ और गाड़ियां होंगी - उन्होंने इन सब के बारे में ऐसे लिखा मानो ये उनका प्रत्यक्ष अनुभव हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनके वैज्ञानिक और दार्शनिक दृष्टिकोण, धर्मशास्त्रियों पर उनके आक्षेपों और रसायन विद्या तथा ज्योतिष शास्त्र के उनके ज्ञान के कारण उन पर &amp;quot;विधर्मी और असमान्य&amp;quot; होने के आरोप लगे। इन सब बातों के लिए उनके साथी फ्रांसिस्कन लोगों ने उन्हें चौदह साल के लिए कारावास में डाल दिया। लेकिन अपने अनुयायियों के लिए बेकन &amp;quot;डॉक्टर मिराबिलिस&amp;quot; (&amp;quot;अद्भुत शिक्षक&amp;quot;) थे - ये एक ऐसी उपाधि है जिससे उन्हें सदियों से जाना जाता रहा है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Portrait of a Man, Said to be Christopher Columbus.jpg|thumb|left|alt=caption|सेबेस्टियानो डेल पियोम्बो द्वारा बनाया गया क्रिस्टोफर कोलंबस का उनका मरणोपरांत चित्र (१५१९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Christopher_Columbus&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== क्रिस्टोफर कोलंबस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Christopher Columbus|क्रिस्टोफर कोलंबस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक अन्य जन्म में संत जर्मेन अमेरिका के आविष्कारक क्रिस्टोफर कोलंबस (१४५१-१५०६) थे। कोलंबस के जन्म से दो शताब्दी से भी अधिक समय पहले रोजर बेकन कोलंबस की यात्रा के लिए मंच तैयार किया था - उन्होंने अपनी पुस्तक ''ओपस माजस'' में लिखा था कि &amp;quot;यदि मौसम अनुकूल हो तो पश्चिम में स्पेन के अंत और पूर्व में भारत की शुरुआत के बीच का समुद्र की यात्रा कुछ ही दिनों की जा सकती है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;डेविड वॉलेचिन्स्की, एमी वालेस एंड इरविंग वालेस की पुस्तक ''द बुक ऑफ प्रेडिक्शन्स'' (न्यूयॉर्क: विलियम मोरो एंड कंपनी, १९८०), पृष्ठ ३४६.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि यह कथन गलत था क्योंकि स्पेन के पश्चिम में स्थित भूमि भारत नहीं थी, फिर भी यह कथन कोलंबस की खोज में सहायक हुआ था। कोलम्बस ने १४९८ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखे अपने एक पत्र में ''ओपस माजस'' में लिखी इस बात को उद्धृत किया और कहा कि उनकी १४९२  की यात्रा आंशिक रूप से इसी दूरदर्शी कथन से प्रेरित थी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कोलंबस का मानना ​​था कि ईश्वर ने उन्हें &amp;quot;नए स्वर्ग और नई पृथ्वी का संदेशवाहक बनाया था, जिसके बारे में उन्होंने अपोकलीप्स ऑफ़ सेंट जॉन में लिखा था, आईज़ेयाह ने भी इसके बारे में कहा था। &amp;quot;इंडीज के इस उद्यम को अंजाम देने में,&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;क्लेमेंट्स आर. मार्खम, ''क्रिस्टोफर कोलंबस का जीवन'' (लंदन: जॉर्ज फिलिप एंड सन, १८९२), पृष्ठ २०७–८.&amp;lt;/ref&amp;gt; उन्होंने १५०२ में राजा फर्डिनेंड और रानी इसाबेला को लिखा, &amp;quot;आईज़ेयाह पूरी तरह से सही कहा था - तर्क, गणित, या नक्शे मेरे किसी काम के नहीं थे।&amp;quot; कोलंबस आईज़ेयाह की ११:१०–१२ में दर्ज भविष्यवाणी का उल्लेख कर रहे थे कि प्रभु “अपनी प्रजा के बचे हुओं को बचा लेंगे... और इस्राएल के निकाले हुओं को इकट्ठा करेंगे, और पृथ्वी की चारों दिशाओं से जुडाह के बिखरे हुओं को इकट्ठा करेंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;''एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका'', १५वां संस्करण, एस.वी. “कोलंबस, क्रिस्टोफर।”&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्हें पूरा विश्वास था कि ईश्वर ने ही उन्हें इस मिशन के लिए चुना है। उन्होंने बाइबिल में लिखी भविष्यवाणियों को पढ़ा और अपने मिशन से संबंधित बातों को अपनी एक पुस्तक &amp;quot;लास प्रोफिसियास (द प्रोफेसीस )&amp;quot;, में लिखा। &amp;quot;द बुक ऑफ़ प्रोफेसीस कंसर्निंग द डिस्कवरी ऑफ़ इंडीज एंड द रिकवरी ऑफ़ जेरुसलम&amp;quot; में इन बातों के बारे में विस्तारपूर्वक लिखा है। हालाँकि इस बात पर कम ही ज़ोर दिया जाता है, लेकिन यह एक माना हुआ तथ्य है तथा इसके बारे में &amp;quot;एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका&amp;quot; में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि &amp;quot;कोलंबस ने खगोल विज्ञान नहीं वरन भविष्यवाणी का अनुसरण कर अमरीका की खोज की थी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Francis Bacon, Viscount St Alban from NPG (2).jpg|thumb|upright|alt=caption|फ्रांसिस बेकन, विस्काउंट सेंट एल्बन, एक अज्ञात कलाकार द्वारा बनाया चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_Bacon&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== फ्रांसिस बेकन ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस बेकन (१५६१-१६२६) एक दार्शनिक, राजनेता, निबंधकार और साहित्यकार थे। बेकन को पश्चिम का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञानी और विचारक कहा जाता है। वे विवेचनात्मक तार्किकता (एक तर्क पद्धति है जिसमें विशिष्ट तथ्यों को जोड़कर एक सामान्य निष्कर्ष निकाला जाता है) और वैज्ञानिक पद्धति के जनक माने जाते हैं। वे काफी हद तक इस तकनीकी युग के लिए ज़िम्मेदार हैं जिसमें हम आज जी रहे हैं। वे जानते थे कि केवल व्यावहारिक विज्ञान ही जनसाधारण को मानवीय कष्टों और आम ज़िन्दगी की नीरसता से मुक्ति दिला सकता है और ऐसा होने पर ही मनुष्य आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हो सकता है, व् उस उत्तम आध्यात्मिकता की पुनः खोज कर सकता है जिसे वह पहले कभी अच्छी तरह से जानता था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;quot;महान असंतृप्ति&amp;quot; (अर्थात पतन, नाश , गलतियों, और जीर्णावस्था के बाद वृहद् पुनर्स्थापना) &amp;quot;संपूर्ण विश्व&amp;quot; को बदलने का उनका तरीका था। इस बात की अवधारणा पहली बार उन्होंने बचपन में की थी। फिर १६०७, में उन्होंने इसी नाम से अपनी पुस्तक में इसे मूर्त रूप दिया। इसके बाद अंग्रेजी पुनर्जागरण की शुरुआत की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
समय के साथ-साथ बेकन ने अपने आसपास कुछ ऐसे लेखकों को एकत्र किया जो एलिज़ाबेथकालीन साहित्य के लिए ज़िम्मेदार थे। इनमें से कुछ एक &amp;quot;गुप्त संस्था&amp;quot;  - &amp;quot;द नाइट्स ऑफ़ द हेलमेट&amp;quot; के सदस्य थे।  इस संस्था का लक्ष्य अंग्रेजी भाषा का विस्तार करना था और एक ऐसे नए साहित्य की रचना करना था जिसे अंग्रेज लोग समझ पाएं। बेकन ने [[Special:MyLanguage/Bible translations|बाइबल के अनुवाद]] (किंग जेम्स का संस्करण) का भी आयोजन किया - उनका यह दृढ़ निश्चय था कि आम लोगों को भी ईश्वर के कहे शब्दों को पढ़ने का मौका मिलना चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८९० के दशक में शेक्सपियर के नाटकों के मूल मुद्रणों और बेकन तथा अन्य एलिज़ाबेथ काल के लेखकों की कृतियों में लिखे सांकेतिक शब्दों से यह आभास होता है कि बेकन ने शेक्सपियर के नाटक लिखे थे और वे महारानी एलिजाबेथ और लॉर्ड लीसेस्टर के पुत्र थे।&amp;lt;ref&amp;gt;देखें{{TSC}}.&amp;lt;/ref&amp;gt; हालाँकि उनकी माँ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया क्योंकि वह डरती थीं की सत्ता उचित समय से पहले भी उनके हाथ से निकल सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जीवन के अंतिम वर्षों में बेकन को बहुत तंग किया गया। उनकी बहुमुखी प्रतिभा को पहचानने वाला कोई नहीं था। ऐसा कहा जाता है कि उनकी मृत्यु १६२६ में हुई थी, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि उसके बाद भी वे गुप्त रूप से कुछ समय तक यूरोप में रहे। उन्होंने ऐसी कठिन परिस्थितियों का वीरता से सामना किया जो किसी भी सामान्य मनुष्य को नष्ट कर सकती हैं। फिर १ मई, १६८४, को उनकी जीवात्मा [[Special:MyLanguage/Great Divine Director|महान दिव्य निर्देशक]] के आश्रय स्थल [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] से स्वर्ग सिधार गयी।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Count of St Germain.jpg|thumb|upright|ले कॉम्टे डे संत जर्मेन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Rembrandt - De Poolse ruiter, c.1655 (Frick Collection).jpg|thumb|upright=1.2|रेम्ब्रांट द्वारा लगभग १६५५ में बनाया गया चित्र ''द पोलिश राइडर'' जिसमें संत जर्मेन को यूरोप के वंडरमैन के रूप में दर्शाया गया है&amp;lt;ref&amp;gt;मार्क प्रोफेट, २९ दिसंबर, १९६७&amp;lt;/ref&amp;gt;]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_Wonderman_of_Europe&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== यूरोप का अजूबा आदमी ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Wonderman of Europe|यूरोप का अजूबा आदमी}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लोगों को मुक्ति दिलाने की सर्वोपरि इच्छा रखते हुए संत जर्मेन ने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] से भौतिक शरीर में पृथ्वी पर लौटने की अनुमति मांगी और उन्हें यह अनुमति मिल भी गई। वे &amp;quot;ले कॉम्टे डे सेंट जर्मेन&amp;quot; के रूप में प्रकट हुए - एक &amp;quot;चमत्कारी&amp;quot; सज्जन जिन्होंने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के दौरान यूरोप के दरबारों को चकित कर दिया था। यहीं से उन्हें &amp;quot;द वंडरमैन (एक अजूबा आदमी)&amp;quot; का खिताब मिला।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वे एक आद्यवैज्ञानिक, विद्वान, भाषाविद्, कवि, संगीतकार, कलाकार, कथाकार और राजनयिक थे। यूरोप के दरबारों में उनकी काफी प्रशंसा की जाती थी। उन्हें मणियों की पहचान थी, उन्हें हीरे और अन्य रत्नों में दोष निकालने के लिए जाना जाता था। साथ ही उन्हें एक हाथ से पत्र और दूसरे हाथ से कविता लिखने जैसे कार्य के लिए भी जाना जाता था। वोल्टेयर के शब्दों में &amp;quot;वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो कभी नहीं मर सकता, और जो सब कुछ जानता है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;वोल्टेयर, ''ओयूव्रेस'', लेट्रे cxviii, सं. बेउचोट, lviii, पृष्ठ ३६०, इसाबेल कूपर-ओकले, ''द काउंट ऑफ़ सेंट जर्मेन'' (ब्लौवेल्ट, एन.वाई.: रुडोल्फ स्टीनर पब्लिकेशंस, १९७०), पृष्ठ ९६ में उद्धृत।&amp;lt;/ref&amp;gt; उनका उल्लेख फ्रेडरिक द ग्रेट, वोल्टेयर, होरेस वालपोल और कैसानोवा के पत्रों और उस समय के समाचार पत्रों में मिलता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परदे के पीछे से वे यह प्रयास कर रहे थे कि [[Special:MyLanguage/French Revolution|फ्रांसीसी क्रांति]] बिना रक्तपात के हो जाए - राजतंत्र को प्रजातंत्र में आराम से बदल दिया जाए ताकि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों की सरकार हो। लेकिन उनकी इस सलाह को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। यूरोप को एकजुट करने के अपने अंतिम प्रयास में उन्होंने [[Special:MyLanguage/Napoleon|नेपोलियन]] का समर्थन किया, परन्तु नेपोलियन ने अपने गुरु की शक्तियों का दुरुपयोग किया और मृत्यु को प्राप्त किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन इससे भी पहले संत जर्मेन ने अपना ध्यान एक नई दुनिया की ओर मोड़ लिया था। वे संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके [[Special:MyLanguage/George Washington|प्रथम राष्ट्रपति]] के प्रायोजक बने। स्वतंत्रता की घोषणा और संविधान उन्हीं से प्रेरित था। उन्होंने कई ऐसे उपकरणों को बनाने की प्रेरणा भी दी जिनसे शारीरिक श्रम का कम से कम उपयोग हो ताकि मानवजाति कठिन परिश्रम से मुक्त होकर ईश्वर-प्राप्ति के रास्ते पर चल सके। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Chohan_of_the_Seventh_Ray&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== सातवीं किरण के चौहान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, संत जर्मेन ने महिला दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Kuan Yin|कुआन यिन]] से सातवीं किरण चौहान का पद प्राप्त किया। सातवीं किरण दया, क्षमा और पवित्र अनुष्ठान की किरण है। इसके बाद, बीसवीं शताब्दी में, संत जर्मेन एक बार फिर [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट व्हाइट ब्रदरहुड) की एक बाहरी गतिविधि को प्रायोजित करने के लिए आगे बढ़े।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९३० के दशक के आरंभ में उन्होंने अपने &amp;quot;पृथ्वी पर कार्यरत सेनापति&amp;quot; जॉर्ज वाशिंगटन से संपर्क किया, और उन्हें एक [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहक]] के रूप में प्रशिक्षित किया।  वाशिंगटन ने [[Special:MyLanguage/Godfré Ray King|गॉडफ्रे रे किंग]] के उपनाम से, &amp;quot;अनवील्ड मिस्ट्रीज़&amp;quot;, &amp;quot;द मैजिक प्रेज़ेंस&amp;quot; और &amp;quot;द &amp;quot;आई एम&amp;quot; डिस्कोर्सेज़&amp;quot; नामक पुस्तकें लिखीं जिनमें उन्होंने संत जर्मेन द्वारा नए युग के लिए दिए गए निर्देशों के बारे में लिखा। इसी दशक के अंतिम दिनों में न्याय की देवी और अन्य [[Special:MyLanguage/cosmic being|ब्रह्मांडीय प्राणी]] पवित्र अग्नि की शिक्षाओं को मानवजाति तक पहुँचाने और [[Special:MyLanguage/golden age|स्वर्ण युग]] की शुरुआत करने में संत जर्मेन की  सहायता करने पृथ्वी पर अवतरित हुए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९६१ में संत जर्मेन ने पृथ्वी पर अपने प्रतिनिधि, संदेशवाहक [[Special:MyLanguage/Mark L. Prophet|मार्क एल. प्रोफेट]] से संपर्क किया और [[Special:MyLanguage/Ancient of Days|प्राचीन काल]] के स्वामी (सनत कुमार) और उनके प्रथम और दूसरे शिष्य शिष्य [[Special:MyLanguage/Gautama|गौतम]] और [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] की स्मृति में [[Special:MyLanguage/Keepers of the Flame Fraternity|लौ रक्षक बिरादरी]] (कीपर्स ऑफ़ द फ्लेम फ्रैटरनिटी) की स्थापना की। इनका उद्देश्य उन सभी लोगों को पुनर्जागृत करना था जो मूल रूप से [[Special:MyLanguage/Sanat Kumara|सनत कुमार]] के साथ पृथ्वी पर आए थे। ये लोग पृथ्वी पर शिक्षकों के रूप में आये थे और इनका काम लोगों की सेवा करना था परन्तु यहाँ आकर वे सब बातें ये बातें भूल गए थे। संत जर्मेन का कार्य उन सबकी स्मृति को पुनर्स्थापित करना था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार संत जर्मेन ने मूल लौ रक्षकों को प्राचीन काल के स्वामी की वाणी को ध्यान से सुनने को कहा। उन्होंने इन सभी लोगों को अपनी आत्मा में जीवन की ज्वाला और स्वतंत्रता की पवित्र अग्नि को पुनः प्रज्वलित करने और अपने जीवन को ईश्वर की सेवा में पुनः समर्पित करने के आह्वान दिया। संत जर्मेन लौ रक्षक बिरादरी के शूरवीर सेनाध्यक्ष हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Hierarch_of_the_Aquarian_Age&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कुम्भ युग के अध्यक्ष ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१ मई १९५४ को संत जर्मेन ने सनत कुमार से शक्ति का प्रभुत्व और ईसा मसीह से अगले दो हज़ार वर्ष की अवधि के लिए मानवजाति की चेतना को निर्देशित का अधिकार प्राप्त किया। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईसा मसीह का महत्व कम हो गया है। वे अब उच्च स्तरों पर [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]] के रूप में काम कर रहे हैं, और अपनी चेतना को समस्त मानवजाति के लिए पहले से भी अधिक शक्तिशाली और सर्वव्यापी रूप से दे रहे हैं क्योंकि ईश्वर का स्वभाव निरंतर श्रेष्ठ होना है। हम एक ऐसे ब्रह्मांड में रहते हैं जिसका निरंतर विस्तार होता रहता  है - ब्रह्मांड जो ईश्वर के प्रत्येक पुत्र (सूर्य) के केंद्र से विस्तारित होता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस दो हजार वर्ष की अवधि के दौरान वायलेट लौ का आह्वान कर के हम स्वयं में ईश्वर की ऊर्जा (जिसे हमने हजारों वर्षों की अपनी गलत आदतों द्वारा अपवित्र किया है) को शुद्ध कर सकते हैं। ऐसा करने से समस्त मानवजाति भय, अभाव, पाप, बीमारी और मृत्यु से मुक्त हो सकती है, और सभी मनुष्य स्वतंत्र रूप से प्रकाश में चल सकते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/age of Aquarius|कुंभ युग]] की शुरुआत में  संत जर्मेन कर्म के स्वामी के समक्ष गए और उनसे वायलेट लौ को आम इंसानों तक पहुंचाने की आज्ञा मांगी। इसके पहले तक वायलेट लौ का ज्ञान श्वेत महासंघ के आंतरिक आश्रमों और [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालयों]] में ही था। संत जर्मेन हमें वायलेट लौ के आह्वान से होने वाले लाभ के बारे में बताते हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
आपमें से कुछ लोगों के अधिकतर कर्म संतुलित हो गए हैं, कुछ के [[Special:MyLanguage/heart chakra|हृदय चक्र]] निर्मल हो गए हैं। जीवन में एक नया प्रेम, नई कोमलता, नई करुणा, जीवन के प्रति एक नई संवेदनशीलता, एक नई स्वतंत्रता और उस स्वतंत्रता की खोज में एक नया आनंद आ गया है। एक नई पवित्रता का उदय भी हुआ है क्योंकि मेरी लौ के माध्यम से आपका मेलकिडेक समुदाय के पुरोहितत्व से संपर्क हुआ है। अज्ञानता और मानसिक जड़ता कुछ सीमा तक समाप्त हुई है, और लोग एक ऐसे रास्ते पर  चल पड़े हैं जो उन्हें ईश्वर तक पहुंचाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ ने पारिवारिक रिश्तों में मदद की है। इसने कुछ लोगों को अपने पुराने कर्मों को संतुलित करने में सहायता की है और वे अपने पुराने दुखों से मुक्त होने लगे हैं। हमें यह याद रखना चाहिए कि वायलेट लौ में ईश्वरीय न्याय की लौ निहित है, और ईश्वरीय न्याय में ईश्वर का मूल्याङ्कन। इसलिए हम ये कह सकते हैं कि वायलेट लौ एक दोधारी [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] के सामान है जो सत्य को असत्य से अलग करती है...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
वायलेट लौ के अनेकानेक लाभ हैं पर उन सभी को यहाँ गिनाना संभव नहीं, लेकिन यह अवश्य है इसके प्रयोग से मनुष्य के भीतर एक गहन बदलाव होता है। वायलेट लौ हमारे उन सभी मतभेदों और मनोवैज्ञानिक समस्यायों का समाधान करती है जो बचपन से या फिर उसे से भी पहले पिछले जन्मों से चली आ रही हैं और जिन्होंने हमारी चेतना में इतनी गहरी जड़ें जमा ली हैं कि वे जन्म-जन्मांतर से वहीँ स्थित हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;संत जर्मेन, &amp;quot;कीप माई पर्पल हार्ट,&amp;quot; {{POWref|३१|७२}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Alchemy&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आद्यविज्ञान ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Alchemy|आद्यविज्ञान}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन ने अपनी पुस्तक &amp;quot;सेंट जर्मेन ऑन अल्केमी&amp;quot; में आद्यविज्ञान की शिक्षा देते हैं। वे [[Special:MyLanguage/Amethyst (gemstone)|एमेथिस्ट (रत्न)]] का उपयोग करते हैं — यह आद्द्यवैज्ञनिकों का रत्न है, कुंभ युग का रत्न है और वायलेट लौ का भी। स्ट्रॉस के वाल्ट्ज़ में वायलेट लौ का स्पंदन है और यह आपको उनके साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है। उन्होंने हमें यह भी बताया है कि [[Special:MyLanguage/Franz Liszt|फ्रांज़ लिज़्ट]] का &amp;quot;राकोज़ी मार्च&amp;quot; उनके हृदय की लौ और वायलेट लौ के सूत्र को धारण करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रयस्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
संत जर्मेन का ध्यान सहारा रेगिस्तान के ऊपर स्थित स्वर्णिम [[Special:MyLanguage/etheric city|आकाशीय शहर]] में केंद्रित है। वे [[Special:MyLanguage/Royal Teton Retreat|रॉयल टेटन रिट्रीट]] के साथ-साथ टेबल माउंटेन, व्योमिंग स्थित अपने भौतिक/आकाशीय आश्रय स्थल, [[Special:MyLanguage/Cave of Symbols|केव ऑफ सिम्बल्स]] में भी पढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त वे महान दिव्य निर्देशक के केंद्रों —भारत में [[Special:MyLanguage/Cave of Light|केव ऑफ लाइट]] और ट्रांसिल्वेनिया में [[Special:MyLanguage/Rakoczy Mansion|राकोज़ी हवेली]] में भी कार्य करते हैं, जहाँ वे धर्मगुरु के रूप में विराजमान हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिण अमेरिका में [[Special:MyLanguage/God and Goddess Meru|मेरु देवी और देवता]] के आश्रय स्थल में भी अपना केंद्र स्थापित किया है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उनका इलेक्ट्रॉनिक स्वरुप [[Special:MyLanguage/Maltese cross|माल्टीज़ क्रॉस]] है; उनकी खुशबू, वायलेट फूलों की है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टीआ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “Saint Germain.”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/2/hi&amp;diff=245725</id>
		<title>Translations:Saint Germain/2/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Saint_Germain/2/hi&amp;diff=245725"/>
		<updated>2026-02-20T10:37:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''संत जरमेन''' सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] हैं। अपनी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ी ]] महिला गुरु [[Special:MyLanguage/Portia|पोर्टिया]] - जिन्हें न्याय की देवी भी कहते हैं - के साथ, वे [[Special:MyLanguage/Aquarian age|कुंभ युग]] के अधिपति हैं। वे स्वतंत्रता की ज्वाला के प्रायोजक हैं, तथा पोर्टिया न्याय की ज्वाला की।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Sacred_labor/hi&amp;diff=245724</id>
		<title>Sacred labor/hi</title>
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		<updated>2026-02-20T10:32:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''पवित्र श्रम''' वह विशिष्ट कार्य, आजीविका का साधन या व्यवसाय है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने लिए तथा अपने साथियों के लिए अपनी जीवात्मा का महत्व स्थापित करता है। व्यक्ति ईश्वर द्वारा दी गयी प्रतिभाओं को विकसित करने के साथ साथ [[Special:MyLanguage/Holy Spirit|आत्मा]] के वरदानों को भी विकसित करता है  और उन्हें मानवता की सेवा के प्रति अर्पित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम न केवल व्यक्ति विशेष का समाज को एक योगदान है, बल्कि यह वह साधन है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी [[Special:MyLanguage/threefold flame| त्रिज्योति लौ]] को संतुलित कर सकती है और [[Special:MyLanguage/seven rays|सात किरणों]] (seven rays) की परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो सकती है। व्यावहारिक जीवन में स्वयं को ईश्वर को समर्पित करने का यही एक मार्ग है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Gerrit van Honthorst - Childhood of Christ - WGA11656.jpg|thumb|&lt;br /&gt;
''ईसा मसीह का बचपन'', जेरार्ड वैन हांथोरोस्ट&lt;br /&gt;
(Childhood of Christ, Gerard van Honthorst)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_sacred_labor_and_community&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== पवित्र श्रम और समाज ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम में कार्यरत सभी जीवात्माओं को मिलाकर [[Special:MyLanguage/community of the Holy Spirit|आत्मा का समाज]] (community of the Holy Spirit) बनता हैं। जब हम [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के जीवन पर नज़र डालते हैं, तो हम  देखते हैं कि उनका ईसाई धर्म का अनुपालन तथा मनुष्य में ईश्वर के कार्यों को क्रियान्वित करने का उनका मार्ग एक साधारण घर में शुरू हुआ, उस घर में जहाँ उनकी माँ ने उन्हें आध्यात्मिक विषयों की शिक्षा दी थी। बहुत ही कम उम्र में ही ईसा मसीह को अपने पिता के पास बढ़ईगीरी का काम सीखने के लिए प्रशिक्षु के रूप में भेज दिया गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान स्थित [[Special:MyLanguage/Essenes|एस्सेन समाज]] पवित्र आत्मा के समाज का एक उदाहरण है। इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति के पवित्र श्रम का सम्मान किया जाता था। प्रत्येक व्यक्ति (चाहे वह पुरुष हो या स्त्री) को ईसा मसीह का चेला माना जाता था और इस नाते प्रत्येक जन को किसी न किसी व्यवसाय में निपुणता प्राप्त करना आवश्यक था। इस तरह उनका व्यवसाय ने केवल समुदाय प्रति उनका योगदान हुआ, बल्कि उनकी जीवात्मा की पूर्णता का साधन भी बन गया। तो हम यह कह सकते हैं कि प्रत्येक युग में पवित्र श्रम वह साधन प्रदान करता है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी त्रिदेव ज्योत को संतुलित कर सकती है, और व्यवहारिक तथा सैद्धांतिक रूप से सात किरणों की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Summit University|समिट यूनिवर्सिटी]] (Summit University) के छात्रों को जीवन के प्रत्येक पहलु में उत्कृष्टता हासिल करने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि इसी से रचनात्मक पूर्णता का एहसास होता है और ऐसा करने से ही जीवात्मा अपनी विभिन्न ऊर्जाओं पर नियंत्रण भी प्राप्त कर सकती है। सभी छात्रों को ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे वे ईश्वर द्वारा दी गई अपनी विशिष्ट प्रतिभा को खोज पाएं। उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य ढूंढ़ना होता है और यह भी पता लगाना होता है कि कैसे वे अपनी जीवात्मा में निहित रूपरेखा के अनुसार काम कर सकते हैं, और कैसे उन प्रतिज्ञाओं का पालन कर सकते हैं जो उन्होंने इस जन्म से पहले [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] (Lords of Karma) के सामने लीं थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे-जैसे वे अपने अध्ययन में आगे बढ़ते हैं, विद्यार्थी इस बारे में विचार करते हैं कि उनका पवित्र श्रम क्या होगा; एवं व्यक्ति, जाति और समस्त समाज के विकास के लिए उन्हें क्या करना है। चाहे वह व्यापार हो या कोई अन्य व्यवसाय, वह उसकी कमाई का साधन हो या न हो, पवित्र श्रम  एक ऐसी प्रतिभा है जिसे बढ़ाया और परिष्कृत किया जाता है; जिसके द्वारा विद्यार्थी स्वयं को और अपने साथियों को अपनी जीवात्मा का महत्व समझा पाता है। पवित्र श्रम जीवात्मा की आंतरिक पुकार है और इसे व्यावहारिक रूप में सुधारना चाहिए जिससे समाज की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए इसका इस्तेमाल हो सके हो। पवित्र श्रम स्वयं को पहचानने के मार्ग का एक अनिवार्य अंग है। यह पवित्र आत्मा की ज्योति का हथियार है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम के माध्यम से सभी (पुरुष और महिलाएं) अपने मन और वचन से चैतन्य होने की क्षमता का एहसास करते हैं। पवित्र श्रम के माध्यम से ही छात्र जीवन के किसी एक पहलू पर महारत हासिल करने के लिए आवश्यक विधाओं में निपुणता हासिल करते हैं जिससे कि वे अंततः स्वयं पर विजय प्राप्त कर पाते हैं। आत्मिक ज्ञान में प्रशिक्षित समिट विश्वविद्यालय के छात्र एक संतुलित जीवन जी पाते हैं (चाहे वे विवाह करें और परिवार बढ़ाएँ या फिर आजीवन ब्रह्मचारी रहें) और विश्व समुदाय के ज़िम्मेदार सदस्य बनते हैं। वे अपने [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] (ascension) की ज़रूरतों को जानते है और उनके प्रति कार्यरत रहते हैं, पर साथ ही वे अपनी व् अपने परिवार की, पड़ोसियों की और दोस्तों के सांसारिक जीवन की ज़रूरतों को भी समझते हैं, और उनके प्रति भी समर्पित रहते हैं। साथ ही वे अन्य लोगों को [[Special:MyLanguage/ascended master|दिव्य गुरूओं]] (ascended master) द्वारा दिखाए गए ईश्वर के मार्ग पर चलने में भी सहायता करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{IDN}}.&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Sacred_labor/11/hi&amp;diff=245723</id>
		<title>Translations:Sacred labor/11/hi</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;पवित्र श्रम के माध्यम से सभी (पुरुष और महिलाएं) अपने मन और वचन से चैतन्य होने की क्षमता का एहसास करते हैं। पवित्र श्रम के माध्यम से ही छात्र जीवन के किसी एक पहलू पर महारत हासिल करने के लिए आवश्यक विधाओं में निपुणता हासिल करते हैं जिससे कि वे अंततः स्वयं पर विजय प्राप्त कर पाते हैं। आत्मिक ज्ञान में प्रशिक्षित समिट विश्वविद्यालय के छात्र एक संतुलित जीवन जी पाते हैं (चाहे वे विवाह करें और परिवार बढ़ाएँ या फिर आजीवन ब्रह्मचारी रहें) और विश्व समुदाय के ज़िम्मेदार सदस्य बनते हैं। वे अपने [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] (ascension) की ज़रूरतों को जानते है और उनके प्रति कार्यरत रहते हैं, पर साथ ही वे अपनी व् अपने परिवार की, पड़ोसियों की और दोस्तों के सांसारिक जीवन की ज़रूरतों को भी समझते हैं, और उनके प्रति भी समर्पित रहते हैं। साथ ही वे अन्य लोगों को [[Special:MyLanguage/ascended master|दिव्य गुरूओं]] (ascended master) द्वारा दिखाए गए ईश्वर के मार्ग पर चलने में भी सहायता करते हैं।&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''पवित्र श्रम''' वह विशिष्ट कार्य, आजीविका का साधन या व्यवसाय है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने लिए तथा अपने साथियों के लिए अपनी जीवात्मा का महत्व स्थापित करता है। व्यक्ति ईश्वर द्वारा दी गयी प्रतिभाओं को विकसित करने के साथ साथ [[Special:MyLanguage/Holy Spirit|आत्मा]] के वरदानों को भी विकसित करता है  और उन्हें मानवता की सेवा के प्रति अर्पित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम न केवल व्यक्ति विशेष का समाज को एक योगदान है, बल्कि यह वह साधन है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी [[Special:MyLanguage/threefold flame| त्रिज्योति लौ]] को संतुलित कर सकती है और [[Special:MyLanguage/seven rays|सात किरणों]] (seven rays) की परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो सकती है। व्यावहारिक जीवन में स्वयं को ईश्वर को समर्पित करने का यही एक मार्ग है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Gerrit van Honthorst - Childhood of Christ - WGA11656.jpg|thumb|&lt;br /&gt;
''ईसा मसीह का बचपन'', जेरार्ड वैन हांथोरोस्ट&lt;br /&gt;
(Childhood of Christ, Gerard van Honthorst)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_sacred_labor_and_community&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== पवित्र श्रम और समाज ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम में कार्यरत सभी जीवात्माओं को मिलाकर [[Special:MyLanguage/community of the Holy Spirit|आत्मा का समाज]] (community of the Holy Spirit) बनता हैं। जब हम [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के जीवन पर नज़र डालते हैं, तो हम  देखते हैं कि उनका ईसाई धर्म का अनुपालन तथा मनुष्य में ईश्वर के कार्यों को क्रियान्वित करने का उनका मार्ग एक साधारण घर में शुरू हुआ, उस घर में जहाँ उनकी माँ ने उन्हें आध्यात्मिक विषयों की शिक्षा दी थी। बहुत ही कम उम्र में ही ईसा मसीह को अपने पिता के पास बढ़ईगीरी का काम सीखने के लिए प्रशिक्षु के रूप में भेज दिया गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान स्थित [[Special:MyLanguage/Essenes|एस्सेन समाज]] पवित्र आत्मा के समाज का एक उदाहरण है। इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति के पवित्र श्रम का सम्मान किया जाता था। प्रत्येक व्यक्ति (चाहे वह पुरुष हो या स्त्री) को ईसा मसीह का चेला माना जाता था और इस नाते प्रत्येक जन को किसी न किसी व्यवसाय में निपुणता प्राप्त करना आवश्यक था। इस तरह उनका व्यवसाय ने केवल समुदाय प्रति उनका योगदान हुआ, बल्कि उनकी जीवात्मा की पूर्णता का साधन भी बन गया। तो हम यह कह सकते हैं कि प्रत्येक युग में पवित्र श्रम वह साधन प्रदान करता है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी त्रिदेव ज्योत को संतुलित कर सकती है, और व्यवहारिक तथा सैद्धांतिक रूप से सात किरणों की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Summit University|समिट यूनिवर्सिटी]] (Summit University) के छात्रों को जीवन के प्रत्येक पहलु में उत्कृष्टता हासिल करने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि इसी से रचनात्मक पूर्णता का एहसास होता है और ऐसा करने से ही जीवात्मा अपनी विभिन्न ऊर्जाओं पर नियंत्रण भी प्राप्त कर सकती है। सभी छात्रों को ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे वे ईश्वर द्वारा दी गई अपनी विशिष्ट प्रतिभा को खोज पाएं। उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य ढूंढ़ना होता है और यह भी पता लगाना होता है कि कैसे वे अपनी जीवात्मा में निहित रूपरेखा के अनुसार काम कर सकते हैं, और कैसे उन प्रतिज्ञाओं का पालन कर सकते हैं जो उन्होंने इस जन्म से पहले [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] (Lords of Karma) के सामने लीं थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे-जैसे वे अपने अध्ययन में आगे बढ़ते हैं, विद्यार्थी इस बारे में विचार करते हैं कि उनका पवित्र श्रम क्या होगा; एवं व्यक्ति, जाति और समस्त समाज के विकास के लिए उन्हें क्या करना है। चाहे वह व्यापार हो या कोई अन्य व्यवसाय, वह उसकी कमाई का साधन हो या न हो, पवित्र श्रम  एक ऐसी प्रतिभा है जिसे बढ़ाया और परिष्कृत किया जाता है; जिसके द्वारा विद्यार्थी स्वयं को और अपने साथियों को अपनी जीवात्मा का महत्व समझा पाता है। पवित्र श्रम जीवात्मा की आंतरिक पुकार है और इसे व्यावहारिक रूप में सुधारना चाहिए जिससे समाज की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए इसका इस्तेमाल हो सके हो। पवित्र श्रम स्वयं को पहचानने के मार्ग का एक अनिवार्य अंग है। यह पवित्र आत्मा की ज्योति का हथियार है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम के माध्यम से सभी (पुरुष और महिलाएं) अपने मन और वचन से चैतन्य होने की क्षमता का एहसास करते हैं। पवित्र श्रम के माध्यम से ही छात्र जीवन के किसी एक पहलू पर महारत हासिल करने के लिए आवश्यक विधाओं में निपुणता हासिल करते हैं जिससे कि वे अंततः स्वयं पर विजय प्राप्त कर पाते हैं। आत्मिक ज्ञान में प्रशिक्षित समिट विश्वविद्यालय के छात्र एक संतुलित जीवन जी पाते हैं (चाहे वे विवाह करें और परिवार बढ़ाएँ या फिर आजीवन ब्रह्मचारी रहें) और विश्व समुदाय के ज़िम्मेदार सदस्य बनते हैं। वे अपने [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] की ज़रूरतों को जानते है और उनके प्रति कार्यरत रहते हैं, पर साथ ही वे अपनी व् अपने परिवार की, पड़ोसियों की और दोस्तों के सांसारिक जीवन की ज़रूरतों को भी समझते हैं, और उनके प्रति भी समर्पित रहते हैं। साथ ही वे अन्य लोगों को [[Special:MyLanguage/ascended master|दिव्य गुरूओं]] द्वारा दिखाए गए ईश्वर के मार्ग पर चलने में भी सहायता करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{IDN}}.&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Special:MyLanguage/Summit University|समिट यूनिवर्सिटी]] (Summit University) के छात्रों को जीवन के प्रत्येक पहलु में उत्कृष्टता हासिल करने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि इसी से रचनात्मक पूर्णता का एहसास होता है और ऐसा करने से ही जीवात्मा अपनी विभिन्न ऊर्जाओं पर नियंत्रण भी प्राप्त कर सकती है। सभी छात्रों को ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे वे ईश्वर द्वारा दी गई अपनी विशिष्ट प्रतिभा को खोज पाएं। उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य ढूंढ़ना होता है और यह भी पता लगाना होता है कि कैसे वे अपनी जीवात्मा में निहित रूपरेखा के अनुसार काम कर सकते हैं, और कैसे उन प्रतिज्ञाओं का पालन कर सकते हैं जो उन्होंने इस जन्म से पहले [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] (Lords of Karma) के सामने लीं थीं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<title>Sacred labor/hi</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''पवित्र श्रम''' वह विशिष्ट कार्य, आजीविका का साधन या व्यवसाय है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने लिए तथा अपने साथियों के लिए अपनी जीवात्मा का महत्व स्थापित करता है। व्यक्ति ईश्वर द्वारा दी गयी प्रतिभाओं को विकसित करने के साथ साथ [[Special:MyLanguage/Holy Spirit|आत्मा]] के वरदानों को भी विकसित करता है  और उन्हें मानवता की सेवा के प्रति अर्पित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम न केवल व्यक्ति विशेष का समाज को एक योगदान है, बल्कि यह वह साधन है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी [[Special:MyLanguage/threefold flame| त्रिज्योति लौ]] को संतुलित कर सकती है और [[Special:MyLanguage/seven rays|सात किरणों]] (seven rays) की परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो सकती है। व्यावहारिक जीवन में स्वयं को ईश्वर को समर्पित करने का यही एक मार्ग है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Gerrit van Honthorst - Childhood of Christ - WGA11656.jpg|thumb|&lt;br /&gt;
''ईसा मसीह का बचपन'', जेरार्ड वैन हांथोरोस्ट&lt;br /&gt;
(Childhood of Christ, Gerard van Honthorst)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_sacred_labor_and_community&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== पवित्र श्रम और समाज ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम में कार्यरत सभी जीवात्माओं को मिलाकर [[Special:MyLanguage/community of the Holy Spirit|आत्मा का समाज]] (community of the Holy Spirit) बनता हैं। जब हम [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के जीवन पर नज़र डालते हैं, तो हम  देखते हैं कि उनका ईसाई धर्म का अनुपालन तथा मनुष्य में ईश्वर के कार्यों को क्रियान्वित करने का उनका मार्ग एक साधारण घर में शुरू हुआ, उस घर में जहाँ उनकी माँ ने उन्हें आध्यात्मिक विषयों की शिक्षा दी थी। बहुत ही कम उम्र में ही ईसा मसीह को अपने पिता के पास बढ़ईगीरी का काम सीखने के लिए प्रशिक्षु के रूप में भेज दिया गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान स्थित [[Special:MyLanguage/Essenes|एस्सेन समाज]] पवित्र आत्मा के समाज का एक उदाहरण है। इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति के पवित्र श्रम का सम्मान किया जाता था। प्रत्येक व्यक्ति (चाहे वह पुरुष हो या स्त्री) को ईसा मसीह का चेला माना जाता था और इस नाते प्रत्येक जन को किसी न किसी व्यवसाय में निपुणता प्राप्त करना आवश्यक था। इस तरह उनका व्यवसाय ने केवल समुदाय प्रति उनका योगदान हुआ, बल्कि उनकी जीवात्मा की पूर्णता का साधन भी बन गया। तो हम यह कह सकते हैं कि प्रत्येक युग में पवित्र श्रम वह साधन प्रदान करता है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी त्रिदेव ज्योत को संतुलित कर सकती है, और व्यवहारिक तथा सैद्धांतिक रूप से सात किरणों की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Summit University|समिट यूनिवर्सिटी]] के छात्रों को जीवन के प्रत्येक पहलु में उत्कृष्टता हासिल करने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि इसी से रचनात्मक पूर्णता का एहसास होता है और ऐसा करने से ही जीवात्मा अपनी विभिन्न ऊर्जाओं पर नियंत्रण भी प्राप्त कर सकती है। सभी छात्रों को ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे वे ईश्वर द्वारा दी गई अपनी विशिष्ट प्रतिभा को खोज पाएं। उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य ढूंढ़ना होता है और यह भी पता लगाना होता है कि कैसे वे अपनी जीवात्मा में निहित रूपरेखा के अनुसार काम कर सकते हैं, और कैसे उन प्रतिज्ञाओं का पालन कर सकते हैं जो उन्होंने इस जन्म से पहले [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] के सामने लीं थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे-जैसे वे अपने अध्ययन में आगे बढ़ते हैं, विद्यार्थी इस बारे में विचार करते हैं कि उनका पवित्र श्रम क्या होगा; एवं व्यक्ति, जाति और समस्त समाज के विकास के लिए उन्हें क्या करना है। चाहे वह व्यापार हो या कोई अन्य व्यवसाय, वह उसकी कमाई का साधन हो या न हो, पवित्र श्रम  एक ऐसी प्रतिभा है जिसे बढ़ाया और परिष्कृत किया जाता है; जिसके द्वारा विद्यार्थी स्वयं को और अपने साथियों को अपनी जीवात्मा का महत्व समझा पाता है। पवित्र श्रम जीवात्मा की आंतरिक पुकार है और इसे व्यावहारिक रूप में सुधारना चाहिए जिससे समाज की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए इसका इस्तेमाल हो सके हो। पवित्र श्रम स्वयं को पहचानने के मार्ग का एक अनिवार्य अंग है। यह पवित्र आत्मा की ज्योति का हथियार है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम के माध्यम से सभी (पुरुष और महिलाएं) अपने मन और वचन से चैतन्य होने की क्षमता का एहसास करते हैं। पवित्र श्रम के माध्यम से ही छात्र जीवन के किसी एक पहलू पर महारत हासिल करने के लिए आवश्यक विधाओं में निपुणता हासिल करते हैं जिससे कि वे अंततः स्वयं पर विजय प्राप्त कर पाते हैं। आत्मिक ज्ञान में प्रशिक्षित समिट विश्वविद्यालय के छात्र एक संतुलित जीवन जी पाते हैं (चाहे वे विवाह करें और परिवार बढ़ाएँ या फिर आजीवन ब्रह्मचारी रहें) और विश्व समुदाय के ज़िम्मेदार सदस्य बनते हैं। वे अपने [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] की ज़रूरतों को जानते है और उनके प्रति कार्यरत रहते हैं, पर साथ ही वे अपनी व् अपने परिवार की, पड़ोसियों की और दोस्तों के सांसारिक जीवन की ज़रूरतों को भी समझते हैं, और उनके प्रति भी समर्पित रहते हैं। साथ ही वे अन्य लोगों को [[Special:MyLanguage/ascended master|दिव्य गुरूओं]] द्वारा दिखाए गए ईश्वर के मार्ग पर चलने में भी सहायता करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{IDN}}.&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Sacred_labor/7/hi&amp;diff=245719</id>
		<title>Translations:Sacred labor/7/hi</title>
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		<updated>2026-02-20T10:25:32Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;पवित्र श्रम में कार्यरत सभी जीवात्माओं को मिलाकर [[Special:MyLanguage/community of the Holy Spirit|आत्मा का समाज]] (community of the Holy Spirit) बनता हैं। जब हम [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के जीवन पर नज़र डालते हैं, तो हम  देखते हैं कि उनका ईसाई धर्म का अनुपालन तथा मनुष्य में ईश्वर के कार्यों को क्रियान्वित करने का उनका मार्ग एक साधारण घर में शुरू हुआ, उस घर में जहाँ उनकी माँ ने उन्हें आध्यात्मिक विषयों की शिक्षा दी थी। बहुत ही कम उम्र में ही ईसा मसीह को अपने पिता के पास बढ़ईगीरी का काम सीखने के लिए प्रशिक्षु के रूप में भेज दिया गया था।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''पवित्र श्रम''' वह विशिष्ट कार्य, आजीविका का साधन या व्यवसाय है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने लिए तथा अपने साथियों के लिए अपनी जीवात्मा का महत्व स्थापित करता है। व्यक्ति ईश्वर द्वारा दी गयी प्रतिभाओं को विकसित करने के साथ साथ [[Special:MyLanguage/Holy Spirit|आत्मा]] के वरदानों को भी विकसित करता है  और उन्हें मानवता की सेवा के प्रति अर्पित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम न केवल व्यक्ति विशेष का समाज को एक योगदान है, बल्कि यह वह साधन है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी [[Special:MyLanguage/threefold flame| त्रिज्योति लौ]] को संतुलित कर सकती है और [[Special:MyLanguage/seven rays|सात किरणों]] (seven rays) की परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो सकती है। व्यावहारिक जीवन में स्वयं को ईश्वर को समर्पित करने का यही एक मार्ग है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Gerrit van Honthorst - Childhood of Christ - WGA11656.jpg|thumb|&lt;br /&gt;
''ईसा मसीह का बचपन'', जेरार्ड वैन हांथोरोस्ट&lt;br /&gt;
(Childhood of Christ, Gerard van Honthorst)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_sacred_labor_and_community&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== पवित्र श्रम और समाज ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम में कार्यरत सभी जीवात्माओं को मिलाकर [[Special:MyLanguage/community of the Holy Spirit|आत्मा का समाज]] बनता हैं। जब हम [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के जीवन पर नज़र डालते हैं, तो हम  देखते हैं कि उनका ईसाई धर्म का अनुपालन तथा मनुष्य में ईश्वर के कार्यों को क्रियान्वित करने का उनका मार्ग एक साधारण घर में शुरू हुआ, उस घर में जहाँ उनकी माँ ने उन्हें आध्यात्मिक विषयों की शिक्षा दी थी। बहुत ही कम उम्र में ही ईसा मसीह को अपने पिता के पास बढ़ईगीरी का काम सीखने के लिए प्रशिक्षु के रूप में भेज दिया गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान स्थित [[Special:MyLanguage/Essenes|एस्सेन समाज]] पवित्र आत्मा के समाज का एक उदाहरण है। इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति के पवित्र श्रम का सम्मान किया जाता था। प्रत्येक व्यक्ति (चाहे वह पुरुष हो या स्त्री) को ईसा मसीह का चेला माना जाता था और इस नाते प्रत्येक जन को किसी न किसी व्यवसाय में निपुणता प्राप्त करना आवश्यक था। इस तरह उनका व्यवसाय ने केवल समुदाय प्रति उनका योगदान हुआ, बल्कि उनकी जीवात्मा की पूर्णता का साधन भी बन गया। तो हम यह कह सकते हैं कि प्रत्येक युग में पवित्र श्रम वह साधन प्रदान करता है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी त्रिदेव ज्योत को संतुलित कर सकती है, और व्यवहारिक तथा सैद्धांतिक रूप से सात किरणों की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Summit University|समिट यूनिवर्सिटी]] के छात्रों को जीवन के प्रत्येक पहलु में उत्कृष्टता हासिल करने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि इसी से रचनात्मक पूर्णता का एहसास होता है और ऐसा करने से ही जीवात्मा अपनी विभिन्न ऊर्जाओं पर नियंत्रण भी प्राप्त कर सकती है। सभी छात्रों को ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे वे ईश्वर द्वारा दी गई अपनी विशिष्ट प्रतिभा को खोज पाएं। उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य ढूंढ़ना होता है और यह भी पता लगाना होता है कि कैसे वे अपनी जीवात्मा में निहित रूपरेखा के अनुसार काम कर सकते हैं, और कैसे उन प्रतिज्ञाओं का पालन कर सकते हैं जो उन्होंने इस जन्म से पहले [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] के सामने लीं थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे-जैसे वे अपने अध्ययन में आगे बढ़ते हैं, विद्यार्थी इस बारे में विचार करते हैं कि उनका पवित्र श्रम क्या होगा; एवं व्यक्ति, जाति और समस्त समाज के विकास के लिए उन्हें क्या करना है। चाहे वह व्यापार हो या कोई अन्य व्यवसाय, वह उसकी कमाई का साधन हो या न हो, पवित्र श्रम  एक ऐसी प्रतिभा है जिसे बढ़ाया और परिष्कृत किया जाता है; जिसके द्वारा विद्यार्थी स्वयं को और अपने साथियों को अपनी जीवात्मा का महत्व समझा पाता है। पवित्र श्रम जीवात्मा की आंतरिक पुकार है और इसे व्यावहारिक रूप में सुधारना चाहिए जिससे समाज की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए इसका इस्तेमाल हो सके हो। पवित्र श्रम स्वयं को पहचानने के मार्ग का एक अनिवार्य अंग है। यह पवित्र आत्मा की ज्योति का हथियार है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम के माध्यम से सभी (पुरुष और महिलाएं) अपने मन और वचन से चैतन्य होने की क्षमता का एहसास करते हैं। पवित्र श्रम के माध्यम से ही छात्र जीवन के किसी एक पहलू पर महारत हासिल करने के लिए आवश्यक विधाओं में निपुणता हासिल करते हैं जिससे कि वे अंततः स्वयं पर विजय प्राप्त कर पाते हैं। आत्मिक ज्ञान में प्रशिक्षित समिट विश्वविद्यालय के छात्र एक संतुलित जीवन जी पाते हैं (चाहे वे विवाह करें और परिवार बढ़ाएँ या फिर आजीवन ब्रह्मचारी रहें) और विश्व समुदाय के ज़िम्मेदार सदस्य बनते हैं। वे अपने [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] की ज़रूरतों को जानते है और उनके प्रति कार्यरत रहते हैं, पर साथ ही वे अपनी व् अपने परिवार की, पड़ोसियों की और दोस्तों के सांसारिक जीवन की ज़रूरतों को भी समझते हैं, और उनके प्रति भी समर्पित रहते हैं। साथ ही वे अन्य लोगों को [[Special:MyLanguage/ascended master|दिव्य गुरूओं]] द्वारा दिखाए गए ईश्वर के मार्ग पर चलने में भी सहायता करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{IDN}}.&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Sacred_labor/5/hi&amp;diff=245717</id>
		<title>Translations:Sacred labor/5/hi</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;br /&gt;
''ईसा मसीह का बचपन'', जेरार्ड वैन हांथोरोस्ट&lt;br /&gt;
(Childhood of Christ, Gerard van Honthorst)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<updated>2026-02-20T10:21:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
'''पवित्र श्रम''' वह विशिष्ट कार्य, आजीविका का साधन या व्यवसाय है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने लिए तथा अपने साथियों के लिए अपनी जीवात्मा का महत्व स्थापित करता है। व्यक्ति ईश्वर द्वारा दी गयी प्रतिभाओं को विकसित करने के साथ साथ [[Special:MyLanguage/Holy Spirit|आत्मा]] के वरदानों को भी विकसित करता है  और उन्हें मानवता की सेवा के प्रति अर्पित करता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम न केवल व्यक्ति विशेष का समाज को एक योगदान है, बल्कि यह वह साधन है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी [[Special:MyLanguage/threefold flame| त्रिज्योति लौ]] को संतुलित कर सकती है और [[Special:MyLanguage/seven rays|सात किरणों]] (seven rays) की परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो सकती है। व्यावहारिक जीवन में स्वयं को ईश्वर को समर्पित करने का यही एक मार्ग है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Gerrit van Honthorst - Childhood of Christ - WGA11656.jpg|thumb|&lt;br /&gt;
''ईसा मसीह का बचपन'', जेरार्ड वैन हांथोरोस्ट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_sacred_labor_and_community&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== पवित्र श्रम और समाज ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम में कार्यरत सभी जीवात्माओं को मिलाकर [[Special:MyLanguage/community of the Holy Spirit|आत्मा का समाज]] बनता हैं। जब हम [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के जीवन पर नज़र डालते हैं, तो हम  देखते हैं कि उनका ईसाई धर्म का अनुपालन तथा मनुष्य में ईश्वर के कार्यों को क्रियान्वित करने का उनका मार्ग एक साधारण घर में शुरू हुआ, उस घर में जहाँ उनकी माँ ने उन्हें आध्यात्मिक विषयों की शिक्षा दी थी। बहुत ही कम उम्र में ही ईसा मसीह को अपने पिता के पास बढ़ईगीरी का काम सीखने के लिए प्रशिक्षु के रूप में भेज दिया गया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान स्थित [[Special:MyLanguage/Essenes|एस्सेन समाज]] पवित्र आत्मा के समाज का एक उदाहरण है। इस समाज में प्रत्येक व्यक्ति के पवित्र श्रम का सम्मान किया जाता था। प्रत्येक व्यक्ति (चाहे वह पुरुष हो या स्त्री) को ईसा मसीह का चेला माना जाता था और इस नाते प्रत्येक जन को किसी न किसी व्यवसाय में निपुणता प्राप्त करना आवश्यक था। इस तरह उनका व्यवसाय ने केवल समुदाय प्रति उनका योगदान हुआ, बल्कि उनकी जीवात्मा की पूर्णता का साधन भी बन गया। तो हम यह कह सकते हैं कि प्रत्येक युग में पवित्र श्रम वह साधन प्रदान करता है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी त्रिदेव ज्योत को संतुलित कर सकती है, और व्यवहारिक तथा सैद्धांतिक रूप से सात किरणों की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर सकती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Summit University|समिट यूनिवर्सिटी]] के छात्रों को जीवन के प्रत्येक पहलु में उत्कृष्टता हासिल करने की शिक्षा दी जाती है क्योंकि इसी से रचनात्मक पूर्णता का एहसास होता है और ऐसा करने से ही जीवात्मा अपनी विभिन्न ऊर्जाओं पर नियंत्रण भी प्राप्त कर सकती है। सभी छात्रों को ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे वे ईश्वर द्वारा दी गई अपनी विशिष्ट प्रतिभा को खोज पाएं। उन्हें अपने जीवन का उद्देश्य ढूंढ़ना होता है और यह भी पता लगाना होता है कि कैसे वे अपनी जीवात्मा में निहित रूपरेखा के अनुसार काम कर सकते हैं, और कैसे उन प्रतिज्ञाओं का पालन कर सकते हैं जो उन्होंने इस जन्म से पहले [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] के सामने लीं थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे-जैसे वे अपने अध्ययन में आगे बढ़ते हैं, विद्यार्थी इस बारे में विचार करते हैं कि उनका पवित्र श्रम क्या होगा; एवं व्यक्ति, जाति और समस्त समाज के विकास के लिए उन्हें क्या करना है। चाहे वह व्यापार हो या कोई अन्य व्यवसाय, वह उसकी कमाई का साधन हो या न हो, पवित्र श्रम  एक ऐसी प्रतिभा है जिसे बढ़ाया और परिष्कृत किया जाता है; जिसके द्वारा विद्यार्थी स्वयं को और अपने साथियों को अपनी जीवात्मा का महत्व समझा पाता है। पवित्र श्रम जीवात्मा की आंतरिक पुकार है और इसे व्यावहारिक रूप में सुधारना चाहिए जिससे समाज की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए इसका इस्तेमाल हो सके हो। पवित्र श्रम स्वयं को पहचानने के मार्ग का एक अनिवार्य अंग है। यह पवित्र आत्मा की ज्योति का हथियार है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र श्रम के माध्यम से सभी (पुरुष और महिलाएं) अपने मन और वचन से चैतन्य होने की क्षमता का एहसास करते हैं। पवित्र श्रम के माध्यम से ही छात्र जीवन के किसी एक पहलू पर महारत हासिल करने के लिए आवश्यक विधाओं में निपुणता हासिल करते हैं जिससे कि वे अंततः स्वयं पर विजय प्राप्त कर पाते हैं। आत्मिक ज्ञान में प्रशिक्षित समिट विश्वविद्यालय के छात्र एक संतुलित जीवन जी पाते हैं (चाहे वे विवाह करें और परिवार बढ़ाएँ या फिर आजीवन ब्रह्मचारी रहें) और विश्व समुदाय के ज़िम्मेदार सदस्य बनते हैं। वे अपने [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] की ज़रूरतों को जानते है और उनके प्रति कार्यरत रहते हैं, पर साथ ही वे अपनी व् अपने परिवार की, पड़ोसियों की और दोस्तों के सांसारिक जीवन की ज़रूरतों को भी समझते हैं, और उनके प्रति भी समर्पित रहते हैं। साथ ही वे अन्य लोगों को [[Special:MyLanguage/ascended master|दिव्य गुरूओं]] द्वारा दिखाए गए ईश्वर के मार्ग पर चलने में भी सहायता करते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{IDN}}.&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;पवित्र श्रम न केवल व्यक्ति विशेष का समाज को एक योगदान है, बल्कि यह वह साधन है जिसके द्वारा जीवात्मा अपनी [[Special:MyLanguage/threefold flame| त्रिज्योति लौ]] को संतुलित कर सकती है और [[Special:MyLanguage/seven rays|सात किरणों]] (seven rays) की परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो सकती है। व्यावहारिक जीवन में स्वयं को ईश्वर को समर्पित करने का यही एक मार्ग है।&lt;/div&gt;</summary>
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		<updated>2026-02-20T10:01:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
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		<title>Sacred fire/hi</title>
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		<updated>2026-02-20T10:00:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Kundalini|कुंडलिनी]] (Kundalini) अग्नि रीढ़ की हड्डी के अंतिम भाग में स्थित [[Special:MyLanguage/base-of-the-spine chakra|मूलाधार चक्र]] (base-of-the-spine) में एक कुंडलित सर्प के रूप में रहती है। जब कोई व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से शुद्ध हो स्वयं पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है तो यह अग्नि सर्पिल रूप से [[Special:MyLanguage/crown chakra|सहस्रार चक्र]] (crown chakra) की ओर ऊपर उठती है। यह मार्ग में आने वाले सभी आध्यात्मिक केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करती जाती है। ईश्वर, प्रकाश, जीवन, ऊर्जा, [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM)। &amp;quot;हमारा ईश्वर सब कुछ भस्म करने वाली अग्नि है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;हेब १२:२९.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र अग्नि जीवात्माओं के शुद्धिकरण, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यवैज्ञानिक प्रक्रिया]] (alchemy), [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] (transmutation) तथा [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] (ascension) के लिए [[Special:MyLanguage/Holy Ghost|आत्मा]] का अवक्षेपण करती है। यह जावात्मा द्वारा परम पिता परमात्मा की ओर लौटने के एक पवित्र अनुष्ठान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
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		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Sacred_fire/2/hi&amp;diff=245711</id>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;पवित्र अग्नि जीवात्माओं के शुद्धिकरण, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यवैज्ञानिक प्रक्रिया]] (alchemy), [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] (transmutation) तथा [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] (ascension) के लिए [[Special:MyLanguage/Holy Ghost|आत्मा]] का अवक्षेपण करती है। यह जावात्मा द्वारा परम पिता परमात्मा की ओर लौटने के एक पवित्र अनुष्ठान है।&lt;/div&gt;</summary>
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&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Kundalini|कुंडलिनी]] (Kundalini) अग्नि रीढ़ की हड्डी के अंतिम भाग में स्थित [[Special:MyLanguage/base-of-the-spine chakra|मूलाधार चक्र]] (base-of-the-spine) में एक कुंडलित सर्प के रूप में रहती है। जब कोई व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से शुद्ध हो स्वयं पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है तो यह अग्नि सर्पिल रूप से [[Special:MyLanguage/crown chakra|सहस्रार चक्र]] (crown chakra) की ओर ऊपर उठती है। यह मार्ग में आने वाले सभी आध्यात्मिक केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करती जाती है। ईश्वर, प्रकाश, जीवन, ऊर्जा, [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM)। &amp;quot;हमारा ईश्वर सब कुछ भस्म करने वाली अग्नि है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;हेब १२:२९.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पवित्र अग्नि जीवात्माओं के शुद्धिकरण, [[Special:MyLanguage/alchemy|आद्यवैज्ञानिक प्रक्रिया]], [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण]] तथा [[Special:MyLanguage/ascension|आध्यात्मिक उत्थान]] के लिए [[Special:MyLanguage/Holy Ghost|आत्मा]] का अवक्षेपण करती है। यह जावात्मा द्वारा परम पिता परमात्मा की ओर लौटने के एक पवित्र अनुष्ठान है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Special:MyLanguage/Kundalini|कुंडलिनी]] (Kundalini) अग्नि रीढ़ की हड्डी के अंतिम भाग में स्थित [[Special:MyLanguage/base-of-the-spine chakra|मूलाधार चक्र]] (base-of-the-spine) में एक कुंडलित सर्प के रूप में रहती है। जब कोई व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से शुद्ध हो स्वयं पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है तो यह अग्नि सर्पिल रूप से [[Special:MyLanguage/crown chakra|सहस्रार चक्र]] (crown chakra) की ओर ऊपर उठती है। यह मार्ग में आने वाले सभी आध्यात्मिक केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करती जाती है। ईश्वर, प्रकाश, जीवन, ऊर्जा, [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM)। &amp;quot;हमारा ईश्वर सब कुछ भस्म करने वाली अग्नि है।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;हेब १२:२९.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
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वह जो गुप्त है &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) के &amp;quot;गुप्त&amp;quot; रहस्य हज़ारों वर्षों से उनके [[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थलों]] (Etheric retreats) में रखे हैं। वर्तमान समय में [[Special:MyLanguage/ascended masters|दिव्यगुरु]] (ascended masters) अपने [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहकों]] (messengers)  के माध्यम से इन रहस्यों को सामने ला रहे हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बाइबिल में तो नहीं, पर कई अन्य शास्त्रों और धार्मिक लेखों जैसे कि [[Special:MyLanguage/Gnostic gospels|गनोस्टिक गॉस्पेल]] (Gnostic gospels), [[Special:MyLanguage/Gospel of Thomas|गॉस्पेल ऑफ थॉमस]] (Gospel of Thomas) और [[Special:MyLanguage/Secret Gospel of Mark|सीक्रेट गॉस्पेल ऑफ मार्क]] (Secret Gospel of Mark) में लिखा है कि धर्मगुरुओं ने [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] द्वारा दी गई एक उन्नत शिक्षा को गुप्त रखा। यह शिक्षा ईसा मसीह ने अपने कुछ करीबी लोगों को ही दी थी। सेंट पॉल द्वारा कहा गया वाक्य &amp;quot;हम परमेश्वर के ज्ञान को एक रहस्य मानते हैं, एक गुप्त ज्ञान, जिसे परमेश्वर ने संसार बनाने से पहले ही हमारे लिए निर्मित किया था”?, क्या इसी बात को दर्शाता है? &amp;lt;ref&amp;gt;I Cor. २:७.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Gnosticism|प्रज्ञानवाद]] (Gnosticism)&lt;br /&gt;
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[[Special:MyLanguage/Gnostic gospels|गनोस्टिक गॉस्पेल]] (Gnostic gospels)&lt;br /&gt;
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== अधिक जानकारी के लिए ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जेम्स एम. रॉबिन्सन, ''द नाग हम्मादी लाइब्रेरी इन इंग्लिश'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७७)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलेन पैगल्स, ''द ग्नोस्टिक गॉस्पेल्स'' (न्यूयॉर्क: रैंडम हाउस, १९७९)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मॉर्टन स्मिथ, ''द सीक्रेट गॉस्पेल'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७३) . &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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== स्रोत ==&lt;br /&gt;
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&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Occult/3/hi&amp;diff=235473</id>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;बाइबिल में तो नहीं, पर कई अन्य शास्त्रों और धार्मिक लेखों जैसे कि [[Special:MyLanguage/Gnostic gospels|गनोस्टिक गॉस्पेल]] (Gnostic gospels), [[Special:MyLanguage/Gospel of Thomas|गॉस्पेल ऑफ थॉमस]] (Gospel of Thomas) और [[Special:MyLanguage/Secret Gospel of Mark|सीक्रेट गॉस्पेल ऑफ मार्क]] (Secret Gospel of Mark) में लिखा है कि धर्मगुरुओं ने [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] द्वारा दी गई एक उन्नत शिक्षा को गुप्त रखा। यह शिक्षा ईसा मसीह ने अपने कुछ करीबी लोगों को ही दी थी। सेंट पॉल द्वारा कहा गया वाक्य &amp;quot;हम परमेश्वर के ज्ञान को एक रहस्य मानते हैं, एक गुप्त ज्ञान, जिसे परमेश्वर ने संसार बनाने से पहले ही हमारे लिए निर्मित किया था”?, क्या इसी बात को दर्शाता है? &amp;lt;ref&amp;gt;I Cor. २:७.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
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वह जो गुप्त है &lt;br /&gt;
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&lt;br /&gt;
बाइबिल में तो नहीं, पर कई अन्य शास्त्रों और धार्मिक लेखों जैसे कि [[Special:MyLanguage/Gnostic gospels|गनोस्टिक गॉस्पेल]], [[Special:MyLanguage/Gospel of Thomas|गॉस्पेल ऑफ थॉमस]] और [[Special:MyLanguage/Secret Gospel of Mark|सीक्रेट गॉस्पेल ऑफ मार्क]] में लिखा है कि धर्मगुरुओं ने [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] द्वारा दी गई एक उन्नत शिक्षा को गुप्त रखा। यह शिक्षा ईसा मसीह ने अपने कुछ करीबी लोगों को ही दी थी। सेंट पॉल द्वारा कहा गया वाक्य &amp;quot;हम परमेश्वर के ज्ञान को एक रहस्य मानते हैं, एक गुप्त ज्ञान, जिसे परमेश्वर ने संसार बनाने से पहले ही हमारे लिए निर्मित किया था”?, क्या इसी बात को दर्शाता है? &amp;lt;ref&amp;gt;I Cor. २:७.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
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जेम्स एम. रॉबिन्सन, ''द नाग हम्मादी लाइब्रेरी इन इंग्लिश'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७७)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलेन पैगल्स, ''द ग्नोस्टिक गॉस्पेल्स'' (न्यूयॉर्क: रैंडम हाउस, १९७९)&lt;br /&gt;
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मॉर्टन स्मिथ, ''द सीक्रेट गॉस्पेल'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७३) . &lt;br /&gt;
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&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
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&lt;br /&gt;
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जेम्स एम. रॉबिन्सन, ''द नाग हम्मादी लाइब्रेरी इन इंग्लिश'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७७)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलेन पैगल्स, ''द ग्नोस्टिक गॉस्पेल्स'' (न्यूयॉर्क: रैंडम हाउस, १९७९)&lt;br /&gt;
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मॉर्टन स्मिथ, ''द सीक्रेट गॉस्पेल'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७३) . &lt;br /&gt;
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		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<updated>2026-01-19T13:00:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
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&lt;div&gt;[[Special:MyLanguage/Gnostic gospels|गनोस्टिक गॉस्पेल]] (Gnostic gospels)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<title>Occult/hi</title>
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		<updated>2026-01-19T13:00:28Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
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वह जो गुप्त है &lt;br /&gt;
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[[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] के &amp;quot;गुप्त&amp;quot; रहस्य हज़ारों वर्षों से उनके [[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थलों]] में रखे हैं। वर्तमान समय में [[Special:MyLanguage/ascended masters|दिव्यगुरु]] अपने [[Special:MyLanguage/messenger|संदेशवाहकों]]  के माध्यम से इन रहस्यों को सामने ला रहे हैं। &lt;br /&gt;
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== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
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जेम्स एम. रॉबिन्सन, ''द नाग हम्मादी लाइब्रेरी इन इंग्लिश'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७७)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलेन पैगल्स, ''द ग्नोस्टिक गॉस्पेल्स'' (न्यूयॉर्क: रैंडम हाउस, १९७९)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मॉर्टन स्मिथ, ''द सीक्रेट गॉस्पेल'' (न्यूयॉर्क: हार्पर एंड रो, १९७३) . &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
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&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Occult/5/hi&amp;diff=235467</id>
		<title>Translations:Occult/5/hi</title>
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		<updated>2026-01-19T13:00:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Special:MyLanguage/Gnosticism|प्रज्ञानवाद]] (Gnosticism)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Mystery_school/hi&amp;diff=235466</id>
		<title>Mystery school/hi</title>
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		<updated>2026-01-19T12:58:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब स्त्री और पुरुष ने [[Special:MyLanguage/free will|स्वेच्छा]] (free will) का गलत उपयोग करके [[Special:MyLanguage/sacred fire|पवित्र अग्नि]] (sacred fire) का दुरुपयोग किया तब उन्हें [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ ईडन]] (Garden of Eden) ([[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|स्वामी/प्रभु मैत्रेय]] (Lord Maitreya) का रहस्यवादी विद्यालय) से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) ने रहस्यवादी विद्यालय (mystery schools) और आश्रय स्थल (retreats) बनाये रखे हैं। ये स्थान पवित्र अग्नि के ज्ञान कोष हैं और इन्हें [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ियों]] (twin flames) को तब प्रदान किया जाता है जब वे [[Special:MyLanguage/Tree of Life|जीवन के वृक्ष]] (Tree of Life) को बनाये रखने के लिए निर्धारित अनुशासन का पालन करने में खरे उतारते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] (Essene community) (एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था), और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन (Solomon) के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] (Great Pyramid) के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] (King Arthur) और उनके राउंड टेबल (Round Table) के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] (etheric plane) पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टीटाॅन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Known_mystery_schools&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== रहस्यवादी विद्यालय जिनके बारे में ज्ञात है ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में पैथागोरस के विद्यालय&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गौतम बुध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान का [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/King Arthur’s Camelot|किंग आर्थर का कमेलॉट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Maitreya’s Mystery School|मैत्रेय का रहस्यवादी विद्यालय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ३१ दिसम्बर १९७६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Mystery_school/5/hi&amp;diff=235465</id>
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		<updated>2026-01-19T12:58:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टीटाॅन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी।&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब स्त्री और पुरुष ने [[Special:MyLanguage/free will|स्वेच्छा]] (free will) का गलत उपयोग करके [[Special:MyLanguage/sacred fire|पवित्र अग्नि]] (sacred fire) का दुरुपयोग किया तब उन्हें [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ ईडन]] (Garden of Eden) ([[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|स्वामी/प्रभु मैत्रेय]] (Lord Maitreya) का रहस्यवादी विद्यालय) से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) ने रहस्यवादी विद्यालय (mystery schools) और आश्रय स्थल (retreats) बनाये रखे हैं। ये स्थान पवित्र अग्नि के ज्ञान कोष हैं और इन्हें [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ियों]] (twin flames) को तब प्रदान किया जाता है जब वे [[Special:MyLanguage/Tree of Life|जीवन के वृक्ष]] (Tree of Life) को बनाये रखने के लिए निर्धारित अनुशासन का पालन करने में खरे उतारते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] (Essene community) (एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था), और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन (Solomon) के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] (Great Pyramid) के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] (King Arthur) और उनके राउंड टेबल (Round Table) के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] (etheric plane) पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टेटन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Known_mystery_schools&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== रहस्यवादी विद्यालय जिनके बारे में ज्ञात है ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में पैथागोरस के विद्यालय&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गौतम बुध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान का [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/King Arthur’s Camelot|किंग आर्थर का कमेलॉट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Maitreya’s Mystery School|मैत्रेय का रहस्यवादी विद्यालय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ३१ दिसम्बर १९७६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Mystery_school/4/hi&amp;diff=235463</id>
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		<updated>2026-01-19T12:53:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] (etheric plane) पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था।&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब स्त्री और पुरुष ने [[Special:MyLanguage/free will|स्वेच्छा]] (free will) का गलत उपयोग करके [[Special:MyLanguage/sacred fire|पवित्र अग्नि]] (sacred fire) का दुरुपयोग किया तब उन्हें [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ ईडन]] (Garden of Eden) ([[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|स्वामी/प्रभु मैत्रेय]] (Lord Maitreya) का रहस्यवादी विद्यालय) से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) ने रहस्यवादी विद्यालय (mystery schools) और आश्रय स्थल (retreats) बनाये रखे हैं। ये स्थान पवित्र अग्नि के ज्ञान कोष हैं और इन्हें [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ियों]] (twin flames) को तब प्रदान किया जाता है जब वे [[Special:MyLanguage/Tree of Life|जीवन के वृक्ष]] (Tree of Life) को बनाये रखने के लिए निर्धारित अनुशासन का पालन करने में खरे उतारते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] (Essene community) (एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था), और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन (Solomon) के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] (Great Pyramid) के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] (King Arthur) और उनके राउंड टेबल (Round Table) के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जर्मेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टेटन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Known_mystery_schools&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== रहस्यवादी विद्यालय जिनके बारे में ज्ञात है ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में पैथागोरस के विद्यालय&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गौतम बुध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान का [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/King Arthur’s Camelot|किंग आर्थर का कमेलॉट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Maitreya’s Mystery School|मैत्रेय का रहस्यवादी विद्यालय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ३१ दिसम्बर १९७६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन (Solomon) के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] (Great Pyramid) के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] (King Arthur) और उनके राउंड टेबल (Round Table) के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं।&lt;/div&gt;</summary>
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		<updated>2026-01-19T12:51:33Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब स्त्री और पुरुष ने [[Special:MyLanguage/free will|स्वेच्छा]] (free will) का गलत उपयोग करके [[Special:MyLanguage/sacred fire|पवित्र अग्नि]] (sacred fire) का दुरुपयोग किया तब उन्हें [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ ईडन]] (Garden of Eden) ([[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|स्वामी/प्रभु मैत्रेय]] (Lord Maitreya) का रहस्यवादी विद्यालय) से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) ने रहस्यवादी विद्यालय (mystery schools) और आश्रय स्थल (retreats) बनाये रखे हैं। ये स्थान पवित्र अग्नि के ज्ञान कोष हैं और इन्हें [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ियों]] (twin flames) को तब प्रदान किया जाता है जब वे [[Special:MyLanguage/Tree of Life|जीवन के वृक्ष]] (Tree of Life) को बनाये रखने के लिए निर्धारित अनुशासन का पालन करने में खरे उतारते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] (Essene community) (एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था), और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन (Solomon) के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] (Great Pyramid) के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] (King Arthur) और उनके राउंड टेबल के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जर्मेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टेटन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Known_mystery_schools&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== रहस्यवादी विद्यालय जिनके बारे में ज्ञात है ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में पैथागोरस के विद्यालय&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गौतम बुध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान का [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/King Arthur’s Camelot|किंग आर्थर का कमेलॉट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Maitreya’s Mystery School|मैत्रेय का रहस्यवादी विद्यालय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ३१ दिसम्बर १९७६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Mystery_school/3/hi&amp;diff=235459</id>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन (Solomon) के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] (Great Pyramid) के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] (King Arthur) और उनके राउंड टेबल के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं।&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब स्त्री और पुरुष ने [[Special:MyLanguage/free will|स्वेच्छा]] (free will) का गलत उपयोग करके [[Special:MyLanguage/sacred fire|पवित्र अग्नि]] (sacred fire) का दुरुपयोग किया तब उन्हें [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ ईडन]] (Garden of Eden) ([[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|स्वामी/प्रभु मैत्रेय]] (Lord Maitreya) का रहस्यवादी विद्यालय) से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) ने रहस्यवादी विद्यालय (mystery schools) और आश्रय स्थल (retreats) बनाये रखे हैं। ये स्थान पवित्र अग्नि के ज्ञान कोष हैं और इन्हें [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ियों]] (twin flames) को तब प्रदान किया जाता है जब वे [[Special:MyLanguage/Tree of Life|जीवन के वृक्ष]] (Tree of Life) को बनाये रखने के लिए निर्धारित अनुशासन का पालन करने में खरे उतारते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] (Essene community) (एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था), और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] और उनके राउंड टेबल के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जर्मेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टेटन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Known_mystery_schools&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== रहस्यवादी विद्यालय जिनके बारे में ज्ञात है ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में पैथागोरस के विद्यालय&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गौतम बुध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान का [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/King Arthur’s Camelot|किंग आर्थर का कमेलॉट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Maitreya’s Mystery School|मैत्रेय का रहस्यवादी विद्यालय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ३१ दिसम्बर १९७६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] (Essene community) (एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था), और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे।&lt;/div&gt;</summary>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब स्त्री और पुरुष ने [[Special:MyLanguage/free will|स्वेच्छा]] (free will) का गलत उपयोग करके [[Special:MyLanguage/sacred fire|पवित्र अग्नि]] (sacred fire) का दुरुपयोग किया तब उन्हें [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ ईडन]] (Garden of Eden) ([[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|स्वामी/प्रभु मैत्रेय]] (Lord Maitreya) का रहस्यवादी विद्यालय) से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) ने रहस्यवादी विद्यालय (mystery schools) और आश्रय स्थल (retreats) बनाये रखे हैं। ये स्थान पवित्र अग्नि के ज्ञान कोष हैं और इन्हें [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ियों]] (twin flames) को तब प्रदान किया जाता है जब वे [[Special:MyLanguage/Tree of Life|जीवन के वृक्ष]] (Tree of Life) को बनाये रखने के लिए निर्धारित अनुशासन का पालन करने में खरे उतारते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] [(Essene community) एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था], और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] और उनके राउंड टेबल के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जर्मेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टेटन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Known_mystery_schools&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== रहस्यवादी विद्यालय जिनके बारे में ज्ञात है ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में पैथागोरस के विद्यालय&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गौतम बुध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान का [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/King Arthur’s Camelot|किंग आर्थर का कमेलॉट]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Maitreya’s Mystery School|मैत्रेय का रहस्यवादी विद्यालय]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ३१ दिसम्बर १९७६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{SGA}}&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (the Fall) (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] (Lemuria) और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] (Atlantis) पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] (adept) के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]] (Sangha), कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सीन समुदाय]] [(Essene community) एस्सीन समुदाय एक प्राचीन यहूदी धार्मिक समुदाय था], और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] (Pythagoras) का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे।&lt;/div&gt;</summary>
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		<updated>2026-01-19T12:35:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
जब स्त्री और पुरुष ने [[Special:MyLanguage/free will|स्वेच्छा]] (free will) का गलत उपयोग करके [[Special:MyLanguage/sacred fire|पवित्र अग्नि]] (sacred fire) का दुरुपयोग किया तब उन्हें [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ ईडन]] (Garden of Eden) ([[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|स्वामी/प्रभु मैत्रेय]] (Lord Maitreya) का रहस्यवादी विद्यालय) से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद से [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) ने रहस्यवादी विद्यालय (mystery schools) और आश्रय स्थल (retreats) बनाये रखे हैं। ये स्थान पवित्र अग्नि के ज्ञान कोष हैं और इन्हें [[Special:MyLanguage/twin flame|समरूप जोड़ियों]] (twin flames) को तब प्रदान किया जाता है जब वे [[Special:MyLanguage/Tree of Life|जीवन के वृक्ष]] (Tree of Life) को बनाये रखने के लिए निर्धारित अनुशासन का पालन करने में खरे उतारते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] (जानबूझकर चेतना के निचले स्तरों में उतरना) के बाद, श्वेत महासंघ ने [[Special:MyLanguage/Lemuria|लेमुरिया]] और [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस]] पर रहस्यवादी विद्यालय खोले जहाँ उन सभी लोगों को उच्च आध्यात्मिक ज्ञान सिखाया जाता था जो [[Special:MyLanguage/adept|सिद्ध पुरुष]] के अनुशासन को बनाए रखने के लिए तैयार थे। बुद्ध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]], कुमरान में [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]], और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में [[Special:MyLanguage/Pythagoras|पाइथागोरस]] का विद्यालय इस रहस्यवादी विद्यालयों के अंतर्गत आते हैं। ऐसे अन्य विद्यालय हिमालय, सुदूर पूर्व और मिस्र, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में भी खोले गए थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मध्यकालीन यूरोप में, संघ रहस्यवादी विद्यालयों का कार्य करते थे। उनके द्वारा बनाये गए गिरजाघरों की वास्तुकला और बनावट जीवात्मा के आंतरिक नियमों के रहस्यों को दर्शाती है, जो कि उस समय के मनुष्य की समझ से कहीं परे था। कारीगरों ने इनकी संरचना ''ईश्वर की गूढ़ ज्यामिति'' की अनुसार की थी जिसके कारण इनके अंदर प्रवेश करने वाले की चेतना में स्वतः वृद्धि हो जाती थी। इन रहस्यवादी विद्यालयों की शिक्षाओं में सोलोमन के मंदिर और [[Special:MyLanguage/Great Pyramid|ग्रेट पिरामिड]] के कई गुप्त तत्वों का सबूत मिलता है। [[Special:MyLanguage/King Arthur|किंग आर्थर]] और उनके राउंड टेबल के शूरवीरों के क्रियाकलाप भी महासंघ के एक रहस्यवादी विद्यालय की रिपोर्ट से लिए गए हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जर्मेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१९८४ में, मैत्रेय भगवन ने दक्षिण-पश्चिम मोंटाना में [[Special:MyLanguage/Royal Teton Ranch|रॉयल टेटन रेंच]] में अपने रहस्यवादी  विद्यालय की पुनः स्थापना की थी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Known_mystery_schools&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== रहस्यवादी विद्यालय जिनके बारे में ज्ञात है ==&lt;br /&gt;
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[[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में पैथागोरस के विद्यालय&lt;br /&gt;
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गौतम बुध का [[Special:MyLanguage/Sangha|संघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुमरान का [[Special:MyLanguage/Essene community|एस्सेन समुदाय]]&lt;br /&gt;
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[[Special:MyLanguage/King Arthur’s Camelot|किंग आर्थर का कमेलॉट]]&lt;br /&gt;
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[[Special:MyLanguage/Maitreya’s Mystery School|मैत्रेय का रहस्यवादी विद्यालय]]&lt;br /&gt;
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&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
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[[Special:MyLanguage/Etheric retreat|आकाशीय आश्रय स्थल]]&lt;br /&gt;
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== स्रोत ==&lt;br /&gt;
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एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ३१ दिसम्बर १९७६&lt;br /&gt;
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		<author><name>PoonamChugh</name></author>
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