<?xml version="1.0"?>
<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom" xml:lang="en">
	<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=PoonamChugh-old</id>
	<title>TSL Encyclopedia - User contributions [en]</title>
	<link rel="self" type="application/atom+xml" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/api.php?action=feedcontributions&amp;feedformat=atom&amp;user=PoonamChugh-old"/>
	<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/Special:Contributions/PoonamChugh-old"/>
	<updated>2026-04-29T11:00:18Z</updated>
	<subtitle>User contributions</subtitle>
	<generator>MediaWiki 1.40.1</generator>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169877</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169877"/>
		<updated>2025-03-20T11:30:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}} (Francis of Assisi)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस (Francis) और क्लेयर (Clare) के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली (Santa Maria degli Angeli) में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह (Koot Hoomi Lal Singh) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय (Oxford University) में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन (Dresden), वुर्जबर्ग (Würzburg), नूर्नबर्ग (Nürnberg) और लीपज़िग  विश्वविद्यालय (university of Leipzig) में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर (Dr. Gustav Fechner) से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] (Helena P. Blavatsky) और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]] (El Morya), जिन्हें मास्टर एम. (Master M.) के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] (Theosophical Society) की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया (Lemuria) और अटलांटिस (Atlantis) के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/28/hi&amp;diff=169876</id>
		<title>Translations:Kuthumi/28/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/28/hi&amp;diff=169876"/>
		<updated>2025-03-20T11:30:42Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] (Helena P. Blavatsky) और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]] (El Morya), जिन्हें मास्टर एम. (Master M.) के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] (Theosophical Society) की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया (Lemuria) और अटलांटिस (Atlantis) के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169875</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169875"/>
		<updated>2025-03-20T11:25:33Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}} (Francis of Assisi)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस (Francis) और क्लेयर (Clare) के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली (Santa Maria degli Angeli) में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह (Koot Hoomi Lal Singh) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय (Oxford University) में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन (Dresden), वुर्जबर्ग (Würzburg), नूर्नबर्ग (Nürnberg) और लीपज़िग  विश्वविद्यालय (university of Leipzig) में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर (Dr. Gustav Fechner) से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/27/hi&amp;diff=169874</id>
		<title>Translations:Kuthumi/27/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/27/hi&amp;diff=169874"/>
		<updated>2025-03-20T11:25:32Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन (Dresden), वुर्जबर्ग (Würzburg), नूर्नबर्ग (Nürnberg) और लीपज़िग  विश्वविद्यालय (university of Leipzig) में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर (Dr. Gustav Fechner) से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169867</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169867"/>
		<updated>2025-03-20T11:22:48Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}} (Francis of Assisi)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस (Francis) और क्लेयर (Clare) के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली (Santa Maria degli Angeli) में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह (Koot Hoomi Lal Singh) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय (Oxford University) में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/26/hi&amp;diff=169866</id>
		<title>Translations:Kuthumi/26/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/26/hi&amp;diff=169866"/>
		<updated>2025-03-20T11:22:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय (Oxford University) में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169865</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169865"/>
		<updated>2025-03-20T11:21:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}} (Francis of Assisi)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस (Francis) और क्लेयर (Clare) के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली (Santa Maria degli Angeli) में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह (Koot Hoomi Lal Singh) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/25/hi&amp;diff=169864</id>
		<title>Translations:Kuthumi/25/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/25/hi&amp;diff=169864"/>
		<updated>2025-03-20T11:21:32Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;=== कूट हूमी लाल सिंह (Koot Hoomi Lal Singh) ===&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169861</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169861"/>
		<updated>2025-03-20T11:19:39Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}} (Francis of Assisi)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस (Francis) और क्लेयर (Clare) के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली (Santa Maria degli Angeli) में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/19/hi&amp;diff=169860</id>
		<title>Translations:Kuthumi/19/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/19/hi&amp;diff=169860"/>
		<updated>2025-03-20T11:19:37Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;फ्रांसिस (Francis) और क्लेयर (Clare) के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली (Santa Maria degli Angeli) में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169853</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169853"/>
		<updated>2025-03-20T11:17:07Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}} (Francis of Assisi)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/17/hi&amp;diff=169852</id>
		<title>Translations:Kuthumi/17/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/17/hi&amp;diff=169852"/>
		<updated>2025-03-20T11:17:06Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}} (Francis of Assisi)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169851</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169851"/>
		<updated>2025-03-20T11:16:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/16/hi&amp;diff=169850</id>
		<title>Translations:Kuthumi/16/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/16/hi&amp;diff=169850"/>
		<updated>2025-03-20T11:16:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;=== असीसी के फ्रांसिस (Francis of Assisi) ===&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169849</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169849"/>
		<updated>2025-03-20T11:16:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/15/hi&amp;diff=169848</id>
		<title>Translations:Kuthumi/15/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/15/hi&amp;diff=169848"/>
		<updated>2025-03-20T11:16:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (Three Wise Men) [खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ (astronomer/adepts)] में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया (Ethiopia) के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169847</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169847"/>
		<updated>2025-03-20T11:12:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/66/hi&amp;diff=169846</id>
		<title>Translations:Kuthumi/66/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/66/hi&amp;diff=169846"/>
		<updated>2025-03-20T11:12:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}} (Three Wise Men)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169845</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169845"/>
		<updated>2025-03-20T11:12:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/14/hi&amp;diff=169844</id>
		<title>Translations:Kuthumi/14/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/14/hi&amp;diff=169844"/>
		<updated>2025-03-20T11:12:35Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;=== बैल्थाज़ार (Balthazar) ===&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169843</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169843"/>
		<updated>2025-03-20T11:12:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/13/hi&amp;diff=169842</id>
		<title>Translations:Kuthumi/13/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/13/hi&amp;diff=169842"/>
		<updated>2025-03-20T11:12:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (Cylon) (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (Hieros Logos) (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/13/hi&amp;diff=169839</id>
		<title>Translations:Kuthumi/13/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/13/hi&amp;diff=169839"/>
		<updated>2025-03-20T11:05:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो (Plato), एरिस्टोटल (Aristotle), ऑगस्टीन (Augustine), थॉमस एक्विनास (Thomas Aquinas) और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] (Francis Bacon) को प्रभावित किया है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169826</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169826"/>
		<updated>2025-03-20T10:55:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/12/hi&amp;diff=169824</id>
		<title>Translations:Kuthumi/12/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/12/hi&amp;diff=169824"/>
		<updated>2025-03-20T10:55:01Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया (Magna Grecia) को काफी प्रभावित किया।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169822</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169822"/>
		<updated>2025-03-20T10:54:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/11/hi&amp;diff=169821</id>
		<title>Translations:Kuthumi/11/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/11/hi&amp;diff=169821"/>
		<updated>2025-03-20T10:54:27Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;क्रोटोना (Crotona) में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति (mathematical expression) पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' (Golden Verses) में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169812</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169812"/>
		<updated>2025-03-20T10:50:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/10/hi&amp;diff=169811</id>
		<title>Translations:Kuthumi/10/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/10/hi&amp;diff=169811"/>
		<updated>2025-03-20T10:50:00Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] (I AM THAT I AM) के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] (Moses) को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] (magi) ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन (Babylon) छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] (Crotona) में चेलों के एक महासंघ (brotherhood) की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन (Dorian) का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (mystery school) है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169800</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169800"/>
		<updated>2025-03-20T10:40:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/9/hi&amp;diff=169799</id>
		<title>Translations:Kuthumi/9/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/9/hi&amp;diff=169799"/>
		<updated>2025-03-20T10:40:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। जिन्हें &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; (fair-haired Samian) भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] (Apollo) का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (Demeter) (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस (Memphis) के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स (Thebes) नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (Isis) (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169779</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169779"/>
		<updated>2025-03-20T10:21:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। सेमोस द्वीप के निवासी पाइथागोरस को &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/8/hi&amp;diff=169778</id>
		<title>Translations:Kuthumi/8/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/8/hi&amp;diff=169778"/>
		<updated>2025-03-20T10:21:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;=== पाइथागोरस (Pythagoras) ===&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169777</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169777"/>
		<updated>2025-03-20T10:20:46Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। सेमोस द्वीप के निवासी पाइथागोरस को &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/7/hi&amp;diff=169776</id>
		<title>Translations:Kuthumi/7/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/7/hi&amp;diff=169776"/>
		<updated>2025-03-20T10:20:45Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)&lt;br /&gt;
(Pythagoras, from ''The School of Athens'', Raphael (1509))&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169775</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169775"/>
		<updated>2025-03-20T10:20:05Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। सेमोस द्वीप के निवासी पाइथागोरस को &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/6/hi&amp;diff=169774</id>
		<title>Translations:Kuthumi/6/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/6/hi&amp;diff=169774"/>
		<updated>2025-03-20T10:20:04Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169771</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169771"/>
		<updated>2025-03-20T10:18:42Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। सेमोस द्वीप के निवासी पाइथागोरस को &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/6/hi&amp;diff=169770</id>
		<title>Translations:Kuthumi/6/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/6/hi&amp;diff=169770"/>
		<updated>2025-03-20T10:18:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शा मिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169767</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169767"/>
		<updated>2025-03-20T10:15:02Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शामिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस सूर्य देवता अमोन-रा के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। सेमोस द्वीप के निवासी पाइथागोरस को &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/5/hi&amp;diff=169766</id>
		<title>Translations:Kuthumi/5/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/5/hi&amp;diff=169766"/>
		<updated>2025-03-20T10:15:00Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;=== थुटमोस III (Thutmose III) ===&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169763</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169763"/>
		<updated>2025-03-20T10:11:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शामिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस सूर्य देवता अमोन-रा के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। सेमोस द्वीप के निवासी पाइथागोरस को &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/3/hi&amp;diff=169762</id>
		<title>Translations:Kuthumi/3/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/3/hi&amp;diff=169762"/>
		<updated>2025-03-20T10:11:55Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई]] (Brothers of the Golden Robe) के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] (meditation) की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169761</id>
		<title>Kuthumi/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuthumi/hi&amp;diff=169761"/>
		<updated>2025-03-20T10:10:00Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:0001161 kuthumi-2383-G 600.jpeg|thumb|upright|alt=Portrait of Kuthumi, wearing a brown robe and a fur hat|कुथुमी]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ये [[Special:MyLanguage/Brothers of the Golden Robe|ब्रदर्स ऑफ द गोल्डन रोब]] के प्रधानाध्यापक हैं और ज्ञान की किरण पर मौजूद छात्रों को [[Special:MyLanguage/meditation|ध्यान]] की कला और शब्द के विज्ञान में प्रशिक्षित करते हैं ताकि वे अपने चित्त, [[Special:MyLanguage/soul|जीवात्मा]] के मनोवैज्ञानिक बन सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Embodiments&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अवतार ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Thutmose_III&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== थुटमोस III ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फैरो थुटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान ईश्वरदूत और पुजारी माना जाता है। ये कला के पारखी एवं संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। इन्होनें मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शामिल कर इसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल के पास के मैदान पर हुए युद्ध में इनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां ये लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए ये अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थुटमोस सूर्य देवता अमोन-रा के चित्र को लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Pythagoras with tablet of ratios.jpg|thumb|upright|alt=Seated figure wearing a robe, writing in a book|''द स्कूल ऑफ एथेंस'' से लिया गया पाइथागोरस का चित्र, राफेल (१५०९)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Pythagoras&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== पाइथागोरस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
छठी शताब्दी बी.सी में ये यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस थे। सेमोस द्वीप के निवासी पाइथागोरस को &amp;quot;गोरे बालों वाला सैमियन&amp;quot; भी कहा जाता था। इन्हें [[Special:MyLanguage/Apollo|अपोलो]] का पुत्र माना जाता था। युवावस्था में एक बार जब ये ध्यान में थे तो डेमेटर (यूनान में कृषि की देवी जिन्हें धरती की माँ भी कहते हैं) ने इन्हें आतंरिक न्याय के बारे में ज्ञान दिया। इसके बाद से इस ज्ञान का वैज्ञानिक प्रमाण जानने के लिए ये अक्सर पुजारियों और विद्वानों के साथ निर्भीक रूप से चर्चा करते लगे। सत्य की खोज में ये कई स्थानों, जैसे फिलिस्तीन, अरब, और भारत गए। अंततः ये मिस्र के मंदिरों में पहुंचे जहां उन्होंने मेम्फिस के पुजारियों का विश्वास जीता तथा थेब्स नामक शहर में [[Special:MyLanguage/Isis|आइसिस]] (मिस्र की देवी जिन्हें दिव्य माँ भी कहते हैं) के रहस्यों को जानने शिष्यता प्राप्त की।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लगभग ५२९ बीसी के दौरान जब एशिया के एक विजेता कमबाईसिस ने मिस्र पर आक्रमण किया तो पाइथागोरस को बेबीलोन भेज दिया गया। धर्मदूत डैनियल यहाँ पर राजा के मंत्री के पद पर कार्यरत थे। यहां पर धर्मगुरुओं ने उन्हें [[Special:MyLanguage/I AM THAT I AM|ईश्वरीय स्वरूप]] के बारे में शिक्षा दी - यह शिक्षा पहले [[Special:MyLanguage/Moses|मूसा]] को दी गई थी। पारसी पुजारियों [[Special:MyLanguage/magi|मैगी]] ने उन्हें संगीत, खगोल विज्ञान और आह्वान करने के विज्ञान के बारे में शिक्षा दी। पाइथागोरस यहाँ पर १२ साल रहे जिसके उपरान्त उन्होंने बेबीलोन छोड़ दिया और [[Special:MyLanguage/Crotona|क्रोटोना]] में चेलों के एक ब्रदरहुड की स्थापना की। क्रोटना दक्षिणी इटली में स्थित डोरियन का एक व्यस्त बंदरगाह है। यह स्थान [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (ग्रेट वाइट ब्रदरहुड) का एक [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवादी विद्यालय]] (मिस्ट्री स्कूल) है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्रोटोना में कुछ चुने गए पुरुषों और स्त्रियों ने सार्वभौमिक कानून की गणितीय अभिव्यक्ति पर आधारित एक दर्शन का अनुसरण किया। यह उनके अनुशासित तरीके के जीवन की  लय और सद्भाव एवं संगीत में चित्रित है। पांच साल की कठिन मौन के बाद, पाइथागोरस के &amp;quot;गणितज्ञों&amp;quot; ने अमर होने के लिए नाना प्रकार की दीक्षाओं के माध्यम से अपने हृदय की अंतर्ज्ञानी क्षमताओं का विकास किया। पाइथागोरस के ''गो”ल्डन वर्सेज'' में इन्हें “अमरता प्राप्त किये हुए दिव्य ईश्वर, जो अंनश्वर हैं”, कहा गया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस परोक्ष रूप से गुप्त भाषा में व्याख्यान देते थे - उनके शब्दों का सार केवल उच्च श्रेणी के शिष्य ही समझ सकते थे। उनका मानना था कि संख्या ही सृष्टि का रूप है और सार भी। उन्होंने यूक्लिड ज्यामिति के मुख्य भागों की रचना की और कई खगोलीय सिद्धांतो पर काम किया जिन पर बाद में कोपरनिकस ने भी काम किया और कई अवधारणाएं प्रतिपादित कीं। पाइथागोरस से प्रभावित होकर क्रोटोना के लगधग दो हजार नागरिकों ने अपनी पारंपरिक जीवनशैली छोड़ काउंसिल ऑफ़ थ्रीहंड्रेड (Council of Three Hundred) के तहत पायथागॉरियन समुदाय का निर्माण किया। इस काउंसिल ने एक सरकारी, वैज्ञानिक और धार्मिक संस्थान के तरीके से कार्य किया जिसने बाद में मैग्ना ग्रीसिया को काफी प्रभावित किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पाइथागोरस बहुत “परिश्रमी पुरुष” थे। वे नब्बे वर्ष के थे जब साईलोन (जिनका दाख़िला रहस्यवादी विद्यालय ने अस्वीकार किया था) ने लोगों को हिंसक अत्याचार को उकसाया। क्रोटोना के प्रांगण में खड़े होकर पढ़ा साईलोन ने पाइथागोरस की एक गुप्त पुस्तक, ''हिरोस लोगो'' (पवित्र शब्द), को जोर से पढ़ा, और उनकी लिखी बातों का मज़ाक उड़ाया। जब पाइथागोरस और काउंसिल के चालीस मुख्य सदस्य वहाँ एकत्रित हुए तो साईलोन ने उस इमारत में आग लगा दी। इस आग में दो को छोड़कर सभी सदस्य मारे गए। परिणामस्वरूप पूरा पायथागॉरियन समुदाय तथा उनकी अधिकांश मूल शिक्षाएँ नष्ट हो गईं। फिर भी, &amp;quot;मास्टर&amp;quot; (पाइथागोरस) ने कई दार्शनिकों जैसे प्लेटो, एरिस्टोटल, ऑगस्टीन, थॉमस एक्विनास और [[Special:MyLanguage/Francis Bacon|फ्रांसिस बेकन]] को प्रभावित किया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Balthazar&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== बैल्थाज़ार ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Three Wise Men|तीन बुद्धिमान पुरुष}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बल्थाजार [[Special:MyLanguage/Three Wise Men|तीन ज्योतिषियों]] (खगोल-विद्या विशारद/विशेषज्ञ) में से एक थे जिन्होनें बालक ईसा मसीह की उपस्थिति के तारे का अनुसरण किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कुथुमी एक समय में इथियोपिया के वही राजा थे जिन्होंने अपने क्षेत्र से खूब सारा खज़ाना लाकर ईसा मसीह को दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Francis_of_Assisi&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== असीसी के फ्रांसिस ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|Francis of Assisi|असीसी के फ्रांसिस}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
असीसी के दैवीय संरक्षक फ्रांसिस (सी. ११८१-१२२६) के रूप में उन्होंने अपने परिवार और धन को त्याग गरीबों और कोढ़ियों के बीच रह उनकी सेवा को अपना धर्म माना; ईसा मसीह के दिखाए मार्ग का अनुकरण करना उन्हें ज़्यादा आनंदमय लगा। १२०९ में सेंट मैथियास के पर्व पर पूजा करते करते समय उन्होंने पुजारी द्वारा पढ़ा गया यीशु का वह धर्मसिद्धांत सुना जिसमे उन्होंने अपने अनुयायियों को प्रचार करने को कहा था। इसके बाद फ्रांसिस ने उस छोटे गिरिजाघर से बाहर निकल ईसाई धर्म का प्रचार तथा लोगों का धर्म परिवर्तन कराना शुरू कर दिया। जिन लोगों ने अपना धर्मं परिवर्तन किया उनमें एक सम्भ्रान्त महिला, लेडी क्लेयर, भी थीं, जिन्होंने अपना घर त्याग एक भिक्षुक का जीवन जीने का फैसला किया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फ्रांसिस और क्लेयर के जीवन से जुड़ी कई किंवदंतियों में से एक सांता मारिया डेगली एंजेली में उनके भोजन के समय ईश्वर के बारे में दिए  गए व्याख्यान से समबंधित है। व्याख्यान इतना मधुर था की सभी सुननेवाले अपना आपा खो उसमें मंत्रमुग्ध हो गए। तभी अचानक गांव के लोगों ने देखा की कॉन्वेंट और जंगल दोनों जगह आग लगी हुई है। सभी लोग आग बुझाने के लिए तेजी से आगे दौड़े तब आग की उस तेज रोशनी में उन्हें लोगों का एक छोटा समूह दिखाई दिया; उन्होंने देखा कि समूह के लोगों की भुजाएँ स्वर्ग की ओर उठी हुई थीं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भगवान ने फ्रांसिस को &amp;quot;सूर्य&amp;quot; और &amp;quot;चंद्रमा&amp;quot; में अपनी दिव्य उपस्थिति का एहसास दिलाया, और सूली पर चढ़ाए गए ईसा मसीह के [[Special:MyLanguage/stigmata|चिन्ह]] देकर उनकी भक्ति को पुरस्कृत भी किया। फ्रांसिस यह सम्मान पाने वाले पहले संत थे। सेंट फ्रांसिस की प्रार्थना दुनिया भर में सभी धर्मों के लोग करते हैं: &amp;quot;भगवान, मुझे अपनी शांति का साधन बनाइये!...&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Shah Jahan on Horseback , Folio from the Shah Jahan Album MET CAT 40r6 89C.jpg|thumb|upright|शाहजहाँ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:1200px-Taj Mahal, Agra, India.jpg|thumb|alt=caption|ताज महल]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Shah_Jahan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शाहजहाँ ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भारत के मुगल सम्राट शाहजहाँ (१५९२-१६६६) के रूप में, कुथुमी ने अपने पिता, जहाँगीर, की भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंका, और अपने दादा [[Special:MyLanguage/Akbar the Great|अकबर]] की महान नैतिकता को आंशिक रूप से बहाल किया। उनके प्रबुद्ध शासनकाल के दौरान मुगल दरबार का वैभव अपनी चरम सीमा पर था - तब कला और वास्तुकला काफी उन्नत थी। शाहजहाँ ने संगीत और चित्रकला के प्रचार और प्रसार तथा स्मारकों, मस्जिदों, सार्वजनिक भवनों और सिंहासनों के निर्माण पर अपना शाही खजाना लुटा दिया - इनमें से कुछ चीज़ें आज भी देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रसिद्ध स्मारक ताज महल, जिसे &amp;quot;चमत्कारों में चमत्कार और दुनिया का अप्रतिम आश्चर्य&amp;quot; कहा जाता है, शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र के रूप में बनवाया था। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ के साथ साथ शासन किया था और १६३१ में अपने चौदहवें बच्चे को जन्म देते समय उनकी मृत्यु हो गई। शाहजहाँ ने स्मारक को &amp;quot;मुमताज़ जितना ही सुन्दर&amp;quot; बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ताज महल मातृ तत्व का प्रतीक है और मुमताज के प्रति उनके शाश्वत प्रेम को दर्शाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Koot_Hoomi_Lal_Singh&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कूट हूमी लाल सिंह ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पृथ्वी पर अपने अंतिम जन्म में, कुथुमी एक कश्मीरी ब्राह्मण थे - कूट हूमी लाल सिंह (जिन्हें कूट हूमी और के.एच. के नाम से भी जाना जाता है)। अत्यंत एकाकी जीवन जीने के बावजूद वे समाज में काफी सम्मानित थे। कुछ खंडित अभिलेखों के अलावा उनके जीवन और  कार्यों का लेखा जोखा मौजूद नहीं है। उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में जन्मे महात्मा कुथुमी एक पंजाबी थे जिनका परिवार कश्मीर में बस गया था। उन्होंने १८५० में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और माना जाता है कि भारत लौटने से पहले, १८५० के दशक में उन्होंने ''द डबलिन यूनिवर्सिटी मैगज़ीन'' में &amp;quot;द ड्रीम ऑफ़ रावन&amp;quot; (रामायण के रावण पर आधारित आध्यात्मिक निबंध) लिखे थे। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कश्मीरी ब्राह्मण ने ड्रेसडेन, वुर्जबर्ग, नूर्नबर्ग और लीपज़िग विश्वविद्यालय में काफी समय बिताया। १८७५ में उन्होंने आधुनिक मनोविज्ञान के संस्थापक डॉ. गुस्ताव फेचनर से मुलाकात की। उनका बाकी का जीवन तिब्बत के शिगात्से में बौद्ध भिक्षुओं के मठ में बीता, जहां बाहरी दुनिया के साथ उनके संपर्क में उनके कुछ समर्पित छात्रों को डाक द्वारा भेजे गए उपदेशात्मक लेख शामिल थे। ये पत्र अब ब्रिटिश संग्रहालय में संग्रहीत हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
१८७५ में कुथुमी ने [[Special:MyLanguage/Helena P. Blavatsky|हेलेना पी. ब्लावात्स्की]] और [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोर्या]], जिन्हें मास्टर एम. के नाम से जाना जाता है, के साथ मिलकर [[Special:MyLanguage/Theosophical Society|थियोसोफिकल सोसाइटी]] की स्थापना की। उन्होंने हेलेना पी. ब्लावात्स्की को ''आइसिस अनवील्ड'' और ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'' लिखने का काम सौंपा। इन किताबों के माध्यम से कुथुमी मानव जाति को प्राचीन युग के उस ज्ञान से पुनः परिचित करवाना चाहते थे जो दुनिया के सभी धर्मों का आधार है - यह ज्ञान लेमुरिया और अटलांटिस के रहस्यवादी विद्यालयों में संरक्षित है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर को पाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है, वह लक्ष्य जिसकी प्राप्ति के लिए जाने-अनजाने ईश्वर का प्रत्येक पुत्र और पुत्री काम कर रहा है। इनमें पुनर्जन्म का सिद्धांत भी शामिल है, जिसका प्रचार संत फ्रांसिस ने गाँव-गाँव जाकर किया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
थियोसोफिकल सोसाइटी ने अपने छात्रों के लिए कुथुमी और एल मोर्या के पत्रों को ''द महात्मा लेटर्स'' और अन्य कार्यों में प्रकाशित किया है। उन्नीसवीं सदी के अंत में कुथुमी ने अपना शरीर छोड़ दिया था।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;His_mission_today&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== उनका आज का लक्ष्य ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;World_Teacher&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== विश्व गुरु ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{Main-hi|World Teacher|विश्व गुरु}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ईसा मसीह ने दिव्यगुरु कुथुमी को विश्व शिक्षक का पद प्रदान किया - यह पद ईसा मसीह और कुथुमी दोनों संयुक्त रूप से संभालते हैं। ये दोनों ईश्वर के साथ पुनर्मिलन की चाह रखने वाली प्रत्येक जीवात्मा को प्रायोजित करते हैं - ये उन्हें कर्म के कारण/ प्रभाव अनुक्रमों को नियंत्रित करने वाले मौलिक कानूनों की शिक्षा देते हैं और दैनिक चुनौतियों से निपटने के तरीके भी सिखाते हैं। [[Special:MyLanguage/dharma|धर्म]] एवं [[Special:MyLanguage/sacred labor|पवित्र श्रम]] के माध्यम से अपने ईश्वरीय स्वरुप की क्षमता को पूरा करना हरेक व्यक्ति का कर्तव्य है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Master_psychologist&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== निपुण मनोवैज्ञानिक ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी एक निपुण मनोवैज्ञानिक माने जाते हैं, और उनका काम सभी शिष्यों को उनके मनोवैज्ञानिक मसलों को सुलझाने में सहायता करना है।  २७ जनवरी १९८५ को उन्होंने [[Special:MyLanguage/Lord Maitreya|मैत्रेय]] द्वारा दिए गए [[Special:MyLanguage/dispensation|प्रकाश रुपी उपहार]] की घोषणा की: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;यह उपहार मेरा एक काम है जो मुझे आप में से प्रत्येक व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से मिलकर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उपचार के लिए करना है ताकि हम शीघ्रातिशीघ्र शारीरिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक स्थितियों के मूल कारण तक पहुंच सकें। ताकि ईश्वर को प्राप्त करने के मार्ग में अब कोई बाधाएं ना आएं। अब आप लोग अपने कदमों को डगमगाने ना दें।&amp;lt;ref&amp;gt;कुथुमी, &amp;quot;रेमेम्बेर द एंशिएंट एनकाउंटर (Remember the Ancient Encounter),&amp;quot; {{POWref|२८|९|, ३ मार्च, १९८५}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अपनी शिक्षाओं में कुथुमी ने हमें अपनी [[Special:MyLanguage/dweller-on-the-threshold|दहलीज पर रहनेवाले दुष्ट]] और इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट को समझने का मार्ग दिखाया है। मनुष्य के सारे नकारात्मक कर्म उसके [[Special:MyLanguage/Synthetic image|कृत्रिम स्व]] या [[Special:MyLanguage/carnal mind|दैहिक मन]] में नाभि के निचले हिस्से में एकत्रित हो एक पेटी के सामान उससे लिपटे रहते हैं। इसे ही [[Special:MyLanguage/electronic belt|इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट]] कहते हैं। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Solar-plexus chakra|मणिपुर चक्र]] के बिंदु पर आरेखित, शरीर के निचले भाग की ओर सर्पिल गति से जाते हुए मनुष्य के सब नकारात्मक कर्म पैरों के नीचे जाकर इकट्ठे होते हैं, जहाँ यह एक केतली का आकार ले लेते हैं। अवचेतन और अचेतन मन का यह क्षेत्र सभी पूर्व जन्मों के सभी अपरिवर्तित कर्मों का अभिलेख रखता है। इस अपरिवर्तित ऊर्जा के भंवर के मध्य में मनुष्य की स्वयं-विरोधी चेतना स्थित होती है, जिसका समाप्त होना ईश्वरत्व प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हम दिव्यगुरु का [[Special:MyLanguage/mantra|मंत्र]] &amp;quot;आई ऍम लाइट&amp;quot; बोलते हैं तो वे अच्छी तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं। यह मंत्र ईश्वर के ज्ञान के विकास तथा उनके श्वेत प्रकाश की बढ़ोतरी के लिए है। ये हमें यह बताने के लिए है कि ईश्वर हमारे अंदर ही बसता है। जब हम ईश्वर के करीब जाते हैं तो ईश्वर भी हमारे पास आते हैं, और फिर देवदूत भी एकत्र होकर हमारे [[Special:MyLanguage/aura|आभा]] को और प्रभावी बनाते हैं। कुथुमी ने अपनी पुस्तक &amp;quot;स्टडीज ऑफ़ ह्यूमन ऑरा&amp;quot; में &amp;quot;आई एम लाइट&amp;quot; मंत्र का उपयोग करते हुए एक त्रिगुणी अभ्यास के बारे में बताते हैं, जिसे छात्र अपनी आभा के आवरण को मजबूत करने के उद्देश्य से कर सकते हैं ताकि वे ईश्वरत्व की चेतना को बनाए रख सकें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div align=center&amp;gt;'''आई ऍम लाइट'''&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
कुथुमी का मंत्र&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;margin-left: 20%;&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, ग्लोइंग लाइट,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
रेडिएटिंग लाइट, इन्टैंसिफ़िएड लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
गॉड कंस्यूमस माय डार्कनेस,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ट्रांसम्यूटिंग ईट ईंटू लाइट।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दिस डे आई ऍम ए फोकस ऑफ़ द सेंट्रल सन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लोइंग थरु मी इस ए क्रिस्टल रिवर,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ए लिविंग फाउंटेन ऑफ़ लाइफ&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
देट कैन नेवर बे बी क्वालिफाइड&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
बाय ह्यूमन थॉट और फीलिंग।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम ऍन आउटपोस्ट ऑफ़ द डीवाइन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
सच डार्कनेस एस हैस युसड मी इस स्वालोवड उप&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
बाय द माइटी रिवर ऑफ़ लाइट विच आई ऍम।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आई ऍम, आई ऍम, आई ऍम light;&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई लिव, आई लिव, आई लिव इन लाइट।&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस फुल्लेस्ट डायमेंशन;&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
आई ऍम लाइटस प्यूरेस्ट इंटेंशन।&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
आई ऍम लाइट, लाइट, लाइट&amp;lt;br /&amp;gt;&lt;br /&gt;
फ्लडिंग द वर्ल्ड एवरीवेयर आई मूव,&amp;lt;br /&amp;gt; &lt;br /&gt;
ब्लेसिंग, स्ट्रेंग्थेनिंग एंड कन्वेयिंग&amp;lt;br /&amp;gt;    &lt;br /&gt;
द पर्पस ऑफ़ द किंगडम ऑफ़ हेवन।   &lt;br /&gt;
&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी बताते हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
... आपके जीवन के किसी भी प्रसंग का महत्वपूर्ण हिस्सा वह नहीं है जो आपने अनुभव किया है बल्कि ''उस प्रसंग पर आपकी प्रतिक्रिया'' है। आपकी प्रतिक्रिया ही आपके आगे का स्थान का निर्णय करती है। आपकी प्रतिक्रिया ही हमें यह बताती है कि आप कितने परिपक्व हैं, आपने कितना ज्ञान और विवेक अर्जित किया है, और इसी बात पर हमारे आगे के निर्णय भी निर्भर होते हैं...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर आप तत्क्षण ये संकल्प करते हैं कि आप स्वयं में सुधार लाकर श्रेष्ठता को ओर बढ़ेंगे तो न सिर्फ मैं आपकी मदद करूँगा वरन आपकी सहायतार्थ अपने दूत भी भेजूंगा। इसलिए अपने आस पास की ध्वनियों तथा सूक्ष्म और भौतिक दोनों तलों पर होने वाली घटनाओं पर ध्यान दीजिये - मैं किसी भी रूप में आपसे मिल सकता हूँ।&amp;lt;ref&amp;gt;Ibid.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Retreats&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आश्रय स्थल ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Cathedral_of_Nature&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== कैथेड्रल ऑफ़ नेचर ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Cathedral of Nature|कैथेड्रल ऑफ़ नेचर}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुथुमी कश्मीर में टेम्पल ऑफ़ इल्लुमिनाशन के अध्यक्ष हैं, इसे प्रकृति के मुख्य गिरजाघर के रूप में भी जाना जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Kuthumi’s_Retreat_at_Shigatse,_Tibet&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Kuthumi's Retreat at Shigatse, Tibet|शिगात्से, तिब्बत में कुथुमी का आश्रय स्थल}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
शिगात्से, तिब्बत में अपने आकाशीय आश्रय स्थल से कुथुमी उन लोगों के लिए दिव्य संगीत बजाते हैं जो भौतिक स्तर (पृथ्वी) से उच्च सप्तक की ओर [[Special:MyLanguage/transition|प्रस्थान]] कर रहे होते हैं अर्थात जब पृथ्वी पर उनकी &amp;quot;मृत्यु&amp;quot; हो रही होती है। उनके वाद्य यन्त्र से इतनी अद्भुत ब्रह्मांडीय ज्योति निकलती है कि जीवात्माएं [[Special:MyLanguage/astral plane|सूक्ष्म स्तर]] से निकल इस प्रकाश को ओर खींची चली आती हैं। वाद्य यन्त्र से निकलता हुआ यह दिव्य संगीत और प्रकाश इतना प्रभावी इसलिए है क्योंकि यह [[Special:MyLanguage/City Foursquare|मन मंदिर]] से जुड़ा हुआ है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार, सुनहरी पोशाक में लिपटे इस गुरु की वहज से हज़ारों लोग दिव्यगुरूओं के आश्रय स्थलों की ओर आकर्षित होते हैं। कुथुमी और ईसा मसीह की शक्लों में काफी समानता है इसलिए जो लोग मृत्यु के समय कुथुमी को देख पाते हैं उन्हें लगता है कि उन्होंने ईसा मसीह के दर्शन कर लिए हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व गुरु]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Brothers and Sisters of the Golden Robe|सुनहरे वस्त्र वाले भाई बहन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Order of Francis and Clare|फ्रांसिस और क्लेयर का वर्ग]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;For_more_information&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== अधिक जानकारी के लिए == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{CCL}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुथुमी”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{THA}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{P&amp;amp;M}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/2/hi&amp;diff=169760</id>
		<title>Translations:Kuthumi/2/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/2/hi&amp;diff=169760"/>
		<updated>2025-03-20T10:09:59Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;दिव्यगुरु कुथुमी पहले दूसरी किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चौहान]] (chohan) थे। अब ये [[Special:MyLanguage/World Teacher|विश्व शिक्षक]] (World Teacher) [[Special:MyLanguage/Jesus|ईसा मसीह]] के कार्यालय में कार्यरत हैं।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/Page_display_title/hi&amp;diff=169759</id>
		<title>Translations:Kuthumi/Page display title/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuthumi/Page_display_title/hi&amp;diff=169759"/>
		<updated>2025-03-20T10:08:08Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;कुथुमी (Kuthumi)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuan_Yin/hi&amp;diff=169758</id>
		<title>Kuan Yin/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuan_Yin/hi&amp;diff=169758"/>
		<updated>2025-03-20T10:06:21Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:20100906172053!Liao Dynasty Avalokitesvara Statue Clear.jpeg|thumb|alt=Statue of Kuan Yin, Nelson-Atkins Museum of Art, Kansas City, Missouri|मिसौरी की कैनसस सिटी के नेल्सन-एटकिंस कला संग्रहालय (Statue of Kuan Yin, Nelson-Atkins Museum of Art, Kansas City, Missouri. She is depicted here seated in her characteristic pose of royal ease) में रखी हुई कुआन यिन की मूर्ति। यहां उन्हें राजसी सहजता की अपनी विशिष्ट मुद्रा में बैठे हुए दर्शाया गया।]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''कुआन यिन''' को बौद्ध धर्म में दयालु, उदार, उद्धार करने वाली, दया की देवी बोधिसत्व के रूप में पूजा जाता है। एक माँ के रूप में वे अपने भक्तों के बहुत नज़दीक रहती हैं, और उनके क्लिष्ट मामलों मध्यस्थता भी करती हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायी कुआन यिन की तुलना पश्चिम की [[Special:MyLanguage/Mother Mary|जीसस की मां मेरी]] (Mary the mother of Jesus) से करते हैं। सुदूर पूर्व में भक्त जीवन के हर क्षेत्र में उनका मार्गदर्शन और सहायता मांगते हैं। यहाँ कुआन यिन को मंदिरों, घरों और सड़कों के किनारे बनी गुफाओं में पाया जाता हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''कुआन शिह यिन'' (Kuan Shih Yin) नाम, जैसा कि उसे अक्सर बुलाया जाता है, का अर्थ है &amp;quot;वह जो दुनिया की आवाज़ों को देखता है या सुनता है।&amp;quot; प्रसिद्ध व्यक्ति या दिग्गज के अनुसार, कुआन यिन स्वर्ग में प्रवेश करने वाली थी, लेकिन जैसे ही दुनिया की चीखें उसके कानों तक पहुंचीं, वह दहलीज पर रुक गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन महिलाओं, नाविकों, व्यापारियों, कारीगरों, संतान के इच्छुक दम्पतियों और वे लोग जिन पर कोई मुक़दमा चल रहा है, के संरक्षक के रूप में जानी जाती हैं। कुआन यिन के भक्त उनकी कृपा और उपचारात्मक शक्तियों में अथाह विश्वास रखते हैं। बहुतों का मानना ​​है कि उनका कृपा-पात्र बनने के लिए सिर्फ उनका नाम लेना ही पर्याप्त है। ''[[Special:MyLanguage/Kuan Yin’s Crystal Rosary|कुआन यिन की जपमाला]]'' (Kuan Yin’s Crystal Rosary) में उनके मंत्र शामिल हैं और यह उनकी मध्यस्थता पाने करने का एक शक्तिशाली साधन है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज कुआन यिन की पूजा ताओवादियों (Taoists) के साथ-साथ महायान बौद्धों द्वारा भी की जाती है - विशेष रूप से ताइवान (Taiwan), जापान (Japan), कोरिया (Korea) और एक बार फिर उनकी मातृभूमि चीन में, जहां सांस्कृतिक क्रांति (1966-69) के दौरान बौद्ध धर्म के अभ्यास को कम्युनिस्टों द्वारा दबा दिया गया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__TOC__&lt;br /&gt;
[[File:0001092 Kuan-Yin-willow-branch-poster-4345 600.jpeg|thumb|left|upright|alt=Old Korean painting of Kuan Yin|''विलो शाखा के साथ अवलोकितेश्वर'', लटकता हुआ सिल्क स्क्रॉल, सी.१३१०, गोरियो राजवंश (कोरिया) [Avalokitesvara with Willow Branch, hanging Silk Scroll, c. 1310, Goryeo Dynasty (Korea)]]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Traditions_in_the_East&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== पूर्व की परंपराएँ (Traditions in the East) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदियों से कुआन यिन ने [[Special:MyLanguage/bodhisattva|बोधिसत्व]] (bodhisattva) की अपनी भूमिका में महायान बौद्ध (Mahayana Buddhism) धर्म के महान आदर्शों को चित्रित किया है। बोधिसत्व यानि कि &amp;quot;आत्मज्ञान से भरपूर प्राणी&amp;quot;, जिसे [[Special:MyLanguage/Buddha|बुद्ध]] बनना था पर जिसने भगवन के बच्चों की खातिर अपने [[Special:MyLanguage/nirvana|निर्वाण]] (nirvana) का त्याग कर दिया। कुआन यिन ने पृथ्वी एवं उसके सौर मंडल के जीवों के उत्थान हेतु, उन्हें दिव्यगुरूओं द्वारा दिया गया ज्ञान देने के लिए बोधिसत्व होने के व्रत लिया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बौद्ध धर्म के प्रारम्भ से पहले चीन में कुआन यिन की पूजा की जाती थी - इन्हें [[Special:MyLanguage/Avalokitesvara|अवलोकितेश्वर]] (Avalokitesvara) [पद्मपानी(Padmapani)] का अवतार माना जाता था। ''[[Special:MyLanguage/Om mani padme hum|ओम मणि पद्मे हुम्]]'' (Om mani padme hum) मंत्र के द्वारा इनका आह्वान किया जाता है। इस मंत्र का अर्थ है &amp;quot;कमल में स्थित रत्न की जय हो!&amp;quot; या “अवलोकितेश्वर, जो भक्त के हृदय कमल के आभूषण हैं, की जय हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब प्रकाश के बुद्ध [[Special:MyLanguage/Amitabha|अमिताभ]] (Amitabha) ईश्वर में मग्न हो परमानंद की अनुभूति कर रहे थे तब उनके दाहिने नेत्र से श्वेत रौशनी की एक किरण उत्पन्न हुई, इसी किरण से अवलोकितेश्वर का जन्म हुआ। इसी कारण से अवलोकितेश्वर/ कुआन यिन को अमिताभ का &amp;quot;प्रतिबिंब&amp;quot; माना जाता है। ये ''महा करुणा'' की प्रतिमा हैं, अमिताभ भी महा करुणा का मूर्तरूप हैं। अनुयायियों का ऐसा मानना ​​है कि कुआन यिन अमिताभ की करुणा को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत तरीके से व्यक्त करती है और भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर जल्दी देती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:0000214 kuan-yin-on-a-dragon-2331AX 600.jpeg|thumb|upright|alt=Painting of Kuan Yin in Chinese style, riding a dragon in the midst of a turbulent sea|ड्रैगन की सवारी करते हुए कुआन यिन। यह छवि कुआन यिन की जल तत्व की महारत को भी दर्शाती है, ठीक उसी प्रकार जैसे मदर मैरी (Mother Mary) की जल तत्व की महारत को उनके पैरों के नीचे चंद्रमा के बना कर दर्शाया जाता है।]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बौद्ध कला में अक्सर कुआन यिन को [[Special:MyLanguage/Pure Land|शुद्ध बौद्ध भूमि]] (Pure Land) के संप्रदाय के तीन शासकों में से एक के रूप में चित्रित किया जाता है। चित्रों में प्रकाश के बुद्ध अमिताभ (चीनी लोग इन्हें अ-मी-तो फो (A-mi-t’o Fo) और जापानी लोग अमीदा (Amida) कहते हैं) को मध्य में दिखाते है, और उनके दाहिनी ओर शक्ति के बुद्ध महास्थामाप्राप्त (Mahasthamaprapta) एवं बायीं ओर करुणा की देवी कुआन यिन को दर्शाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बौद्ध धर्मशास्त्रों में कुआन यिन को कभी-कभी &amp;quot;बार्क ऑफ साल्वेशन&amp;quot; (Bark of Salvation) के कप्तान के रूप में चित्रित किया जाता है। ये जीवात्माओं को अमिताभ के पश्चिमी स्वर्ग/ शुद्ध भूमि/ आनंद की भूमि को ओर निर्देशित करती हैं। इस स्थान पर आध्यात्मिक उत्थान सम्बंधित ज्ञान के निर्देश देने के लिए जीवात्माओं का पुनर्जन्म भी हो सकता है। लकड़ी के सांचों में अक्सर कुआन यिन की कप्तानी के तहत अमिताभ के अनुयायियों से भरी नावें शुद्ध भूमि की ओर यात्रा करते दर्शायी जाती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन के प्रमुख प्रतीकों में से एक है विलो वृक्ष की शाखा (willow branch)। बौद्ध मान्यता के अनुसार कुआन यिन बीमारी को दूर भगाने के लिए और दूसरों की सहायता के लिए आने वाले सभी लोगों पर ज्ञान और करुणा का अमृत छिड़कने के लिए विलो शाखा का उपयोग करती हैं। कुछ एशियाई परंपराओं में बीमार व्यक्ति को स्वस्थ करने के लिए प्रार्थना करते वक्त उसके शरीर को विलो की शाखा से सहलाने का नियम है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन को बच्चों की दाती माना जाता है, इसलिए बहुधा उन्हें एक शिशु के साथ चित्रित किया जाता है। [[Special:MyLanguage/Taiwan|ताइवान]] (Taiwan) के लोगों का मानना है कि अपने एक अवतार में कुआन यिन माँ थीं और चित्रों में उन्हें अपने बच्चे के साथ दिखाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन (Kuan Yin) को ड्रैगन (dragon) पर खड़े हुए भी चित्रित किया जाता है। ड्रैगन चीन देश और चीन के दिव्य वंश का प्रतिनिधित्व करता है। यह [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) की संपूर्ण आत्मा का भी प्रतीक है। [[Special:MyLanguage/Book of Revelation|बुक ऑफ़ रेवेलशन]] (Book of Revelation) में ड्रैगन को जानवरों के शक्तिदाता के रूप में दिखाया गया है। इन सब बातों का निष्कर्ष यह है कि ड्रैगन महान पदक्रम का एक विचाररूप है - प्रकाश या फिर अन्धकार की शक्तियों का प्रतीक। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चीनी कथाओं में ड्रैगन और [[Special:MyLanguage/phoenix|फीनिक्स]] (phoenix) ताई ची ऊर्जा के यांग और यिन का प्रतिनिधित्व करते हैं। चित्रों में ड्रैगन पर सवार कुआन यिन दर्शाने का अर्थ है कि कुआन यिन ड्रैगन की स्वामिनी हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Miao_Shan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== मियाओ शान (Miao Shan)==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:The Tiger Carries Off Miao Shan.jpg|thumb|upright|alt=Painting in Chinese style of Miao Shan on the back of a tiger|मियाओ शान को ले जाते हुए एक बाघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन (Kuan Yin) ने छठी शताब्दी में उत्तरी चीनी साम्राज्य में चाउ राजवंश (Chou dynasty) के शासक मियाओ चुआंग वांग (Miao Chuang Wang) की तीसरी बेटी के रूप में जन्म लिया था। इस राजा ने बलपूर्वक शासन पर कब्ज़ा किया था और उसकी तीव्र इच्छा थी की उसके के पुत्र हो जो उसके वंश को आगे चलाये। लेकिन भाग्य से उसकी तीन पुत्रियां हो गयी। सबसे छोटी पुत्री, मियाओ शान (Miao Shan), एक धर्मनिष्ठ बच्ची थी जो &amp;quot;बौद्ध धर्म के सभी सिद्धांतों का ईमानदारी से पालन करती थी। सदाचारी जीवन उसके स्वभाव में निहित था&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;एडवर्ड  टी सी वर्नर, ''मिथ्स एंड  लेजेंड्स ऑफ़ चाइना (Myths and Legends of China) '' (लंदन : Harrap, १९२२ ), दसवां अध्याय. निम्न वाक्या यहीं से लिया गया है&amp;lt;/ref&amp;gt; (Edward T. C. Werner, ''Myths and Legends of China'' (London: Harrap, 1922), chapter X. The following account is adapted from that source)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्होंने धन और वैभव की नश्वरता को पहचान लिया था और वे &amp;quot;एक पर्वत पर शांति से अकेले रहना चाहती थीं&amp;quot;। उन्होंने अपनी बहनों से कहा था,  &amp;quot;अगर किसी दिन मैं अच्छाई के उच्च स्तर तक पहुँच पायी तो मैं अपने माँ-पिताजी और को बचा कर स्वर्ग ले आऊँगी; मैं पृय्वी पर दुखी और पीड़ित लोगों का उद्धार करुँगी; मैं बुरे कर्म करने वाली जीवात्माओं का मन बदलकर उन्हें भलाई के रास्ते पर चलाऊंगी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मियाओ शान (Miao Shan) के पिता उसका विवाह एक ऐसे व्यक्ति से करना चाहते थे जो एक अच्छा शासक हो। राजा ने उसे अपनी योजना के बारे में बताया और कहा की उनकी सारी आशाएं उस पर टिकी हैं। परन्तु मियाओ शान ने पिता को बताया कि वह विवाह नहीं करना चाहती क्योंकि उनका ध्येय आध्यात्मिक पथ पर चलकर बुद्धत्व प्राप्त करना है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह सुनकर पिताजी क्रोधित हो गए। उन्होंने पुछा, &amp;quot;क्या कोई राजकुमारी कभी तपस्विनि बनी है?&amp;quot; इसके बाद उन्होंने आज्ञा दी वह तुरंत किसी शिक्षाविद (academician) या सैनिक से विवाह कर ले। मियाओ शान यह जानती थीं की पिता के आदेश की अवहेलना करना कठिन होगा। उन्होंने कहा वह एक चिक्तिसक (physician) से तुरंत विवाह कर सकती हैं क्योंकि चिकित्सक से विवाह करने के बाद भी वे बुद्ध बन सकती हैं। यह सुनकर उनके पिताजी आग-बबूला हो गए और उन्होंने अपने एक अधिकारी को आदेश दिया कि वे मियाओ शान को रानी के बगीचे में छोड़ आएं ताकि वहां अत्याधिक सर्दी से उसकी मृत्यु हो जाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परन्तु इस बात से परेशान होने की अपेक्षा मियाओ शान बहुत प्रसन्न हो गयीं। उन्हें महलों की शान-शौकत के बजाय बगीचे का शांत एकांत बहुत अच्छा लगा। उनके माता-पिता, बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें बहुत समझाया परन्तु उन्होंने बुद्ध बनने के अपने स्वप्न को नहीं छोड़ा। फिर उन्होंने अपने पिता से वाइट बर्ड (White Bird) के मठ में रहने की अनुमति मांगी। राजा ने उन्हें अनुमति तो दे दी परन्तु साथ ही वहां की भिक्षुणियों को सख्त आदेश भी दिए कि वे मियाओ शान को मठ छोड़ने के लिए राज़ी करेंगी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भिक्षुणियों ने बहुत कोशिश की लेकिन वे अपने प्रयास में असफल रहीं। फिर उन्होंने मियाओ शान को रसोई का प्रभारी बनाने का फैसला किया, यह सोचकर कि अगर वे यह कार्य करने में विफल रही तो उन्हें मठ से बर्खास्त किया जा सकता था। मियाओ शान (Miao Shan) ने ख़ुशी ख़ुशी यह दायित्व स्वीकार कर लिया जिसके फलस्वरूप स्वर्ग के गुरुओं ने प्रसन्न होकर स्वर्ग की आत्माओं को मियाओ शान की सहायता करने का आदेश दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तब मठ के प्रधान ने राजा से अपनी बेटी को वापस बुलाने के लिए कहा। क्रोधित राजा ने पांच हजार सैनिकों को व्हाइट बर्ड के मठ में आग लगाने का आदेश दिया ताकि भिक्षुणियां भी उस आग में जल कर मर जाएँ। भिक्षुणियों ने ईश्वर को सहायता के लिए पुकारा और साथ ही मियाओ शान से कहा कि उनपर यह विपदा उसके कारण ही आयी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मियाओ शान ने इस बात पर अपनी सहमति जताई। उन्होंने घुटनों के बल बैठकर ईश्वर से प्रार्थना की और फिर बांस की एक सुई को अपने मुँह के ऊपरी हिस्से में चुभाया जिससे रक्त बहने लगा। उन्होंने उस रक्त को स्वर्ग की ओर थूक दिया। तुरंत ही आसमान में विशाल बादल इकट्ठे हो गए और बारिश होने लगी जिससे मठ में लगी आग बुझ गई। भिक्षुणियों ने घुटनों के बल बैठकर मियाओ शान को उनकी जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब राजा को इस इस चमत्कार के बारे में पता चला तो वे और अधिक राजा क्रोधित हो गए और उन्होंने सैनिकों के प्रमुख को तुरंत मियाओ शान का सिर काटने का आदेश दिया। परन्तु फाँसी की तैयारी करते ही आसमान में बादल छा गए और एक तेज़ रोशनी ने मियाओ शान को ढक लिया। जब जल्लाद ने मियाओ शान की गर्दन पर तलवार चलानी चाहि तो वह टूट गयी, जब उसने उन पर भाले से प्रहार करना चाहा तो भाला टुकड़े-टुकड़े होकर गिर गया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके बाद राजा ने आदेश दिया कि एक रेशमी रस्सी से मियाओ शान का गला घोंट दिया जाये। लेकिन तभी कहीं से एक बाघ वहां आ गया जिससे जल्लाद तितर-बितर हो गए। बाघ मियाओ शान के शरीर को अपनी पीठ पर ले भागा और देवदार के जंगल में गायब हो गया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Statue of Guanyin, Mt Putuo, China.jpg|thumb|left|alt=caption|माउंट पु-टू (Mount P’u-t’o) पर कुआन यिन की तैंतीस मीटर ऊँची मूर्ति है, और यह पवित्र द्वीप-पर्वत कुआन यिन की भक्ति का केंद्र बन गया है।]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके बाद मियाओ शान की जीवात्मा को निचली दुनिया, नरक, में ले जाया गया। उन्होंने वहां भी ईश्वर से प्रार्थना की और नर्क स्वर्ग में बदल गया। फिर उन्हें अपना जीवन फिर से शुरू करने के लिए पृथ्वी पर वापस भेज दिया गया। चेकियांग के तट पर चुसान द्वीपसमूह में पवित्र द्वीप-पर्वत - पू-तो शान द्वीप पर वह नौ साल तक रहीं। इस समय के दौरान उन्होंने कई बीमार लोगों को ठीक किया तथा नाविकों के जहाज़ों को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब उन्हें अपने पिता की बीमार होने का पता चला तो उन्होंने अपनी बाहों के मांस से दवा बनाकर पिता को दी जिससे उनकी जान बच गई। पिता ने कृतज्ञ भाव में आदेश दिया कि मियाओ शान के सम्मान में उनकी एक मूर्ति बनाई जाए - उन्होंने कलाकार को यह भी कहा की मूर्ति में &amp;quot;बाहें और आँखें पूरी होने चाहियें&amp;quot;। कलाकार ने कुछ और ही समझा और उसने मूर्ति में &amp;quot;हज़ार भुजाएं और आँखें&amp;quot; बना दीं। आज भी कुआन यिन को कभी-कभी &amp;quot;हज़ार भुजाओं और हज़ार आँखों&amp;quot; के साथ दिखाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि वे इन &lt;br /&gt;
हज़ार भुजाओं और आँखों से लोगों को देख पाती हैं और उनकी सहायता कर पाती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बारहवीं सदी के दौरान कुछ बौद्ध भिक्षु पू-तो शान पर रहने लगे और कुआन यिन के प्रति भक्ति पूरे उत्तरी चीन में फैल गई। यह सुरम्य द्वीप इस दयालु उद्धारकर्ता की पूजा का मुख्य केंद्र बन गया। चीन के दूरदराज इलाकों से ही नहीं वरन मंचूरिया, मंगोलिया और तिब्बत से भी तीर्थयात्री यहां आने लगे। एक समय ऐसा भी था जब इस द्वीप पर कुआन यिन के सौ से अधिक मंदिर थे, और एक हजार से अधिक भिक्षु यहां रहते थे। पु-तो द्वीप की दंतकथाओं में कुआन यिन द्वारा किए गए चमत्कारों का वर्णन है। ऐसा माना जाता है कि कुआन यिन कभी कभी यहाँ की एक गुफा में अपने भक्तों को दर्शन देती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Traditions_in_Taiwan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== ताइवान में परंपराएँ (Traditions in Taiwan) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा माना जाता है कि कुआन यिन अक्सर आसमान में या लहरों पर दिखाई देती है ताकि खतरे में पड़ने पर उसे पुकारने वालों को बचाया जा सके। उदाहरण के लिए, ताइवान में व्यक्तिगत कहानियाँ सुनी जा सकती हैं, जो बताते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापानी कब्जे वाले ताइवान पर बमबारी की, तो वह एक युवा युवती के रूप में आसमान में दिखाई दी, उसने बमों को पकड़ा और उन्हें अपने सफेद कपड़ों से ढक दिया ताकि वे फट न जाएँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार दया की देवी को समर्पित वेदियाँ हर जगह पाई जाती हैं - दुकानें, रेस्तरां, यहाँ तक कि टैक्सीकैब डैशबोर्ड भी। घर में उनकी पूजा पारंपरिक &amp;quot;पाई पाई&amp;quot; से की जाती है, जो धूपबत्ती का उपयोग करके एक प्रार्थना अनुष्ठान है, साथ ही प्रार्थना चार्ट का उपयोग भी किया जाता है - कागज़ की शीट जिस पर कुआन यिन, कमल के फूल या पगोडा की तस्वीरें बनाई जाती हैं और सैकड़ों छोटे घेरे बनाए जाते हैं। किसी रिश्तेदार, दोस्त या खुद के लिए नोवेना में पढ़ी जाने वाली प्रार्थनाओं या सूत्रों के प्रत्येक सेट के साथ, एक और घेरा भरा जाता है। इस चार्ट को &amp;quot;मोक्ष का जहाज&amp;quot; के रूप में वर्णित किया गया है, जिसके द्वारा दिवंगत आत्माओं को नरक के खतरों से बचाया जाता है और वफादारों को अमिताभ के स्वर्ग में सुरक्षित पहुँचाया जाता है। प्रार्थनाओं और प्रार्थनाओं के साथ विस्तृत सेवाओं के अलावा, कुआन यिन के प्रति भक्ति लोगों के लोकप्रिय साहित्य में कविताओं और स्तुति के भजनों में व्यक्त की जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन के सच्चे अनुयायी स्थानीय मंदिरों में अक्सर जाते हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर या जब वे किसी विशेष समस्या से जूझ रहे होते हैं तो बड़े मंदिरों की तीर्थयात्रा करते हैं। उनके सम्मान में आयोजित तीन वार्षिक त्यौहार दूसरे महीने के उन्नीसवें दिन (उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है), छठे महीने और चीनी चंद्र कैलेंडर के आधार पर नौवें महीने में होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_bodhisattva_ideal&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आदर्श बोधिसत्व ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन का मंत्रालय पर्वतों जितना प्राचीन और वास्तविक है। मानवता के साथ खड़े होने की इनका निर्णय अत्यंत पवित्र है। परन्तु कुआन यिन हमें आगाह भी करती हैं की हम ऐसी शपथ लेने से पहले समर्पित लोगों की सेवा के सभी पहलुओं पर अच्छी तरह सोच-विचार कर लें: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
समस्त जीवों के साथ एकीकार होने के कारण हम सभी प्रकार की अभिव्यक्तियों - बहुत अच्छी से बहुत बुरी - के प्रति जागरूक हैं। एक बोधिसत्व के लिए यह उसके आदर्श काम का हिस्सा है, यह उन लोगों का भी हिस्सा है जो मानवता के साथ खड़े हैं। इस ग्रह पर ऐसे लोगों की अच्छी-खासी संख्या है, हालाँकि यह संख्या उन लोगों की संख्या में बहुत कम है जो उपद्रवी जीवन जीते हैं। बोधिसत्व एक बहुत ही उच्च और पवित्र वर्ग है, और मेरा सुझाव है कि आप इसका हिस्सा बनने से पहले अच्छी तरह सोच लें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
युगों युगों तक जब आपकी हर कोशिश के बावजूद लोग ईश्वर के मार्ग से विमुख रहते हैं, तब आपके मन में ऐसा विचार आ सकता है कि काश आपने कोई दूसरा, आसान रास्ता चुना होता, जो शायद आपको ज़्यादा संतुष्टि देता। सदियां गुज़र जाने के बाद भी जब आप देखते हैं कि जिन लोगों को आपने स्वयं अपने ह्रदय की लौ से सींचा है, वे भी निम्न सांसारिक बंधनों से मुक्त नहीं हो पाए हैं, तो आप स्वयं को ईश्वर के सामने रोता हुआ पाते हैं, और कहते हैं, &amp;quot;हे ईश्वर इन पथभ्रष्ट लोगों को कब बुद्धि आएगी, कब ये अपनी दिव्यता को समझेंगे&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन “द  क्वालिटी ऑफ़ मर्सी फ़ोर द रीजेनेरशन ऑफ़ द यूंथ ऑफ़ द वर्ल्ड (The Quality of Mercy for the Regeneration of the Youth of the World),” ''पर्ल्स ऑफ़ विजडम (Pearls of Wisdom)'', १९८२ , किताब II, पृष्ठ ''१२०–२१''.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:100598M-medres.jpg|thumb|alt=Kuan Yin, seated|कुआन यिन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_mercy_flame&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== दया की लौ (The mercy flame) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन (Kuan Yin) पृथ्वी के जीवों में दया और करुणा के गुणों का प्रतिनिधित्व करतीं हैं। पृथ्वी पर बहुत से जीव ऐसे भी हैं जो गलतियां तो करते हैं पर उनका पूरा फल भोगने का सामर्थ्य उनमें नहीं होता। ऐसे जीवों की आत्मा दया की लौ का आह्वाहन करती है। दया के गुण की वजह से ही उस जीव को कर्म फल में रियायत मिलती है, और उन्हें यह रियायत तब तक मिलती है जब तक की वे अपने कर्म के फल को भोगने में समर्थ नहीं हो जाता। कुआन यिन कहती हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;... दया प्रेम प्रकट करने है तरीका है जो जीवन के कठिन रास्तों को सुगम बनाता है, जो [[Special:MyLanguage/etheric body|आकाशीय शरीर]] (etheric body) के घावों को ठीक करता है, मन और भावनाओं में पड़ी दरारों को भरता करता है, पाप को मिटाता है और संघर्ष की भावना को समाप्त करता है अन्यथा ये सब भौतिक शरीर में रोग, क्षय, विघटन और मृत्यु के रूप में प्रकट होती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन,&amp;quot;अ पीपल एंड अ टीचिंग हूज टाइम है कम (A People and a Teaching Whose Time Has Come) १८ सितंबर १९७६।&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote &amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन कहती हैं, &amp;quot;दया ब्रह्मांड की सबसे बड़ी ताकत है क्योंकि यह ईश्वर की इच्छाशक्ति है... प्रेम से परिपूर्ण दया सभी प्रकार के भय, संदेह, अवज्ञा एवं विद्रोह को मिटा देती है। न्याय-पालन में भी दया होती है - कभी-कभी यह बहुत कठोर हो जाती है परन्तु यह हमेशा धैर्यवान और सहनशील रहती है, और यह दिल में आत्मा से मिलने की इच्छा को उभरती और बढ़ती हुई देखती है।''&amp;lt;ref&amp;gt; कुआन यिन, &amp;quot;द स्वोर्ड ऑफ़ मर्सी (The Sword of Mercy),&amp;quot; १० अक्टूबर १९६९।&amp;lt;/ref&amp;gt; (Kuan Yin, “The Sword of Mercy,” October 10, 1969) &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन हमें याद दिलाती हैं, &amp;quot;याद रखिये, जब भी आपको शक्ति, रोशनी, पवित्रता और उपचार की बहुत अधिक आवश्यकता होती है तो ईश्वर आपके ऊपर दया करते है, ये सब आपको ईश्वर की दया से ही मिल सकता है। जब ईश्वर हमारे ऊपर दया करके हमें क्षमा करते हैं तो हमें उनके कानून का पालन करने का एक नया अवसर मिलता है। क्षमा के बिना उन्नति मुश्किल है।&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन  यिन, “कर्मा, मर्सी, एंड द लॉ (Karma, Mercy, and the Law),” ''पर्ल्स ऑफ़ विज़डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२, पुस्तक II, पृष्ठ ''१०६''&amp;lt;/ref&amp;gt; इसलिए, ईश्वर के साथ फिर से चलने के लिए हमें उनकी क्षमा की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_need_for_forgiveness&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== क्षमा की आवश्यकता ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब हम इसका आह्वान करते हैं, तो हमें एहसास होता है कि हमारी [[Special:MyLanguage/Christ Self|स्व चेतना]] ही हमारी मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, मंत्री, पुजारी, गुरु, मित्र - सभी कुछ है। हमें अपने दिल का बोझ उतारने प्रतिदिन इसके पास जाना चाहिए। अमेरिकी भारतीयों में ऐसा करने की परंपरा थी। वे लोग रात को आग जलाकर उसके चारों ओर बैठ जाते थे और अपनी दिनचर्या की चर्चा किया करते थे। दिन भर में जो कुछ भी उनकी पसंद का नहीं हुआ वे उसे अग्नि के सुपुर्द कर दिया करते थे। वास्तव में प्रत्येक [[Special:MyLanguage/religion|पंथ]] (religion) में यही सिखाया जाता है। अप्रिय बातों को अग्नि के सुपुर्द कर हम चैन की नींद सो सकते हैं। आजकल अधिकाँश लोग अनिद्रा के रोग से पीड़ित हैं, और इसका एकमात्र कारण दैनिक कर्म से रिहा न हो पाना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हमने ऐसा कुछ किया है जो ईश्वर के मार्ग से पृथक है, उनके कानून के अनुसार नहीं है तो हमें अपनी इस गलती को स्वीकार कर, ईश्वर को इसके बारे में बताना होगा। जब तक कि हम ऐसा करके अपनी गलतियों की क्षमा उनसे नहीं मांगते, तब तक हम अपराधबोध, भय और शर्म से ग्रसित हो ईश्वर से परे रहते हैं। सभी प्रकार की मानसिक और भावनात्मक बीमारियां, स्प्लिट पर्सनैलिटी (split personalities), माता-पिता और बच्चों के प्रति घृणा और कई अन्य समस्याएं जिनसे आधुनिक समाज आज जूझ रहा है इसी वजह से है। [[Special:MyLanguage/law of forgiveness|क्षमा]] ही अन्तर्मन के पास जाने का रास्ता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षमा का आह्वान हमें न केवल अपने लिए करना चाहिए वरन इसे हमें अपने जीवन के हर पहलू में लागू करने की आवश्यकता है - हम उन सभी को दिल से क्षमा करें जिन्होंने कभी भी हमारे साथ कुछ गलत किया है, और हम उन सभी से क्षमा मांगे जिनके साथ हमने कुछ भी गलत किया है। [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] (Saint Germain) ने हमें यह सिखाया है कि क्षमा हमें दिल से मांगनी चाहिए तथा क्षमा मांगते वक्त हमारा दिल प्रेम से सरोबार होना चाहिए। और यह बात - कि हम क्षमा करते हैं और हम क्षमा मांग रहे हैं - हमें प्रकट रूप से, अत्यंत विनम्रता से कहनी भी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब हम क्षमा मांगते हैं तो हमारा आभामंडल बैंगनी, जामुनी और गुलाबी रंग की रोशनी से भर जाता है जिससे हमारी जीवन की सारी अप्रिय स्थितियां धुल जाती हैं। बारम्बार क्षमा मांगने और क्षमा करने से यह रंग गहरे होते जाते हैं और ऐसा तब तक होता है जब तक कि पूरी दुनिया हमारे ह्रदय की ऊर्जा से सरोबार नहीं हो जाती। आप क्षमा का आह्वान करते समय किसी की भी कल्पना कर सकते हैं - आपका कोई प्रियजन, बच्चा, ऐसा व्यक्ति जिसे आप अपना शत्रु मानते हैं, कोई राजनीतिक नेता, वो शहर जहाँ आप रहते हैं, आपकी सरकार, आपका देश या फिर सम्पूर्ण पृथ्वी ग्रह। कल्पना करते वक्त आप अपने मन की आँखों में इन सभी को क्षमा की लहरों और तरंगों में डूबा हुआ देखिये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षमा के कानून द्वारा ईश्वर हमें अपनी आत्मिक चेतना को विकसित करने का अवसर देते हैं। कुआन यिन कहती हैं, &amp;quot;क्षमा के नियम में प्रशिक्षित होना आवश्यक है क्योंकि वास्तव में यही कुंभ युग (Aquarian age) की नींव है। परन्तु क्षमा से कर्मों का संतुलन नहीं होता। क्षमा को कर्म से अलग रख ईश्वर हमें आगे बढ़ने का एक अवसर देते हैं ताकि हम बिना किसी बोझ के, अपनी रचनात्मकता का प्रयोग कर चीजों को सही कर पाएं। फिर जब आप कुछ उपलब्धियां और दक्षता प्राप्त कर कर आगे बढ़ते हैं, तो क्षमा के नियम के अनुसार, जो कर्म अलग कर दिया गया था वह आपको वापस मिल जाता है क्योंकि अब आप कर्म के फल को सहने में सक्षम होते हैं। अब आप आत्म-निपुणता के उस स्तर हैं जहां आपकी चेतना उन्नत अवस्था में है और कर्म का [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपानतरण]] (transmutation) करने में सक्षम हैं।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन, &amp;quot;अ मदर्स-ऑइ व्यू ऑफ़ द वर्ल्ड (“A Mother’s-Eye View of the World),&amp;quot; ''पर्ल्स ऑफ विज्डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२ , पुस्तक २, पृष्ठ ''८७''.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पापों की क्षमा और उनका रूपांतरण दो अलग चीज़ें हैं। मान लीजिये, किसी ने आपका पर्स चुराया और बाद में आपसे ये कहा कि उसे खेद है कि उसने आपका पर्स चुराया था। आप उसे माफ कर सकते हैं, लेकिन कर्म की दृष्टि से यह मामला तब तक बंद नहीं होगा, जब तक कि वह आपका पर्स एक-एक पैसे के साथ आपको वापस नहीं कर देता; पूरी क्षतिपूर्ति नहीं करता। सो, क्षमा कर्म का संतुलन नहीं है; यह कर्मों को अलग रखना है जिससे आपको पाप के भारी बोझ के बिना चीजों को सही करने की स्वतंत्रता मिल जाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षमा ही परिपूर्ण जीवन जीने की नींव है। यह ईश्वर के प्रत्येक अंश के बीच सामंजस्य बिठाने का संकल्प है। यह स्वतंत्रता की लौ के गहन प्रेम की क्रिया है। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] की ऊर्जा, भगवान की ऊर्जा हमेशा स्पंदित होती रहती हैं, ये हमेशा चलती रहती हैं, और अवचेतन मन के अभिलेखों को रूपांतरित करती रहती है। आईज़ेयाह कहते हैं, “तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के ही क्यों न हों, क्षमा से वे बर्फ के समान श्वेत हो जाएंगे। और अगर वे लाल रंग के भी होंगे तो भी ऊन के जैसे हलके हो जाएंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;ईसा. १:१८&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:HainanSanya2-cropped.jpg|thumb|alt=caption|upright=1.2|दक्षिण चीन सागर के  हैनान द्वीप पर कुआन यिन की १०८ मीटर (३५४ फीट) ऊंची मूर्ति&lt;br /&gt;
(108-meter (354 ft) statue of Kuan Yin on the island of Hainan, in the South China Sea)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_need_to_forgive&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== क्षमा करने की आवश्यकता ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि आप स्वयं के लिए क्षमा की आशा रखते हैं, तो सर्वप्रथम आपको औरों को क्षमा करना सीखना होगा जैसा कि दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Jesus|यीशु]] ने सिखाया है। कुआन यिन कहतीं हैं, &amp;quot;मानव जाति का परीक्षण कई छोटे और बड़े तरीकों से किया जाता है, और जो धर्मांधता कुछ लोगों की चेतना में देखी जाती है, वह भी क्षमा ना कर पाने का ही एक रूप है। जो लोग दूसरों को सिर्फ इसलिए माफ नहीं कर सकते क्योंकि वे उनके जैसे नहीं सोचते या उनका पूजा करने का तरीका नहीं अपनाते वे दिल के कठोर होते हैं, इतने कठोर कि यह कठोरता उनके प्यार की लौ को भी घेर लेती है और ज्ञान के प्रवाह को भी।''&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन, &amp;quot;मर्सी: द फायर दैट ट्राइस एव्री मैन्स वर्क्स (Mercy: The Fire that Tries Every Man’s Works) &amp;quot; ''पर्ल्स ऑफ विज्डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२, पुस्तक 2, पृष्ठ ''९५''.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दया का कानून एक दो-तरफ़ा सड़क की तरह है। इसमें एक संकेत आप भगवान को भेजते हैं और दूसरा भगवान् आपको भेजता है अर्थात यह ईश्वर के साथ आपके लेन-देन को दर्शाता है। यदि आप ईश्वर से दया की आशा रखते हैं, तो आपको भी अपने जीवन में हर एक के प्रति दया करनी होगी। दया का नियम प्रत्येक जीवात्मा की मुक्ति के लिए है। जब हम क्षमा करते हैं, तो हमें भी क्षमा मिलती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमने बार-बार यह बात सुनी और पढ़ी है, &amp;quot;जो बीत गया उसे जाने दो, माफ करो और भूल जाओ!&amp;quot; यह बात बिल्कुल सत्य है। अगर आप अपने साथ हुए किसी गलत काम को याद रखते हैं तो इसका मतलब है कि वास्तव में आपने अपने साथ गलत करने वाले को माफ़ नहीं किया है। क्षमा तब ही सफल है जब आप उस कार्य से सम्बंधित सभी अभिलेख और स्मृति अपनी चेतना से मिटा दें। कुआन यिन कहती हैं कि यदि आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो आपने माफ नहीं किया है, बल्कि &amp;quot;आपने अपना दिल कठोर कर लिया है।&amp;quot; आपने अवचेतन मन की गहराई में इसे संजो कर रखा हुआ है, ठीक उसी तरह जिस तरह एक गिलहरी अपने दाने संग्रहीत करती है। आपने उसे अपने आकाशीय शरीर में संग्रहीत कर रखा है, अग्नि के सुपुर्द नहीं किया है। आप छोड़ने को तैयार नहीं हैं, और इस कारण से जिन लोगों ने आपके साथ अन्याय किया है, और जिनके साथ आपने अन्याय किया है, आप उनमें ईश्वर की अभिव्यक्ति नहीं होने देना चाहते।&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन, “अ मदर्स-ऑइ व्यू ऑफ़ द वर्ल्ड (“A Mother’s-Eye View of the World),” ''पर्ल्स ऑफ विज्डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२ , पुस्तक २, पृष्ठ ''८७''..&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानस चित्रण के साथ शब्दों के विज्ञान का प्रयोग आपको संपूर्ण रूप से &amp;quot;क्षमा करने और भूल जाने&amp;quot; में सहायता करता है। आप [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोरया]] (El Morya) द्वारा दी गई एक डिक्री कर सकते हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
::::आई ऍम फोर्गीवेनेस्स एक्टिंग हेयर  ,&lt;br /&gt;
::::कास्टिंग आउट आल डाउट एंड फियर ,&lt;br /&gt;
::::सेटिंग मेंन फॉरएवर फ्री &lt;br /&gt;
::::विद विंग्स ऑफ़ कॉस्मिक विक्ट्री&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
(I AM forgiveness acting here,&lt;br /&gt;
Casting out all doubt and fear,&lt;br /&gt;
Setting men forever free&lt;br /&gt;
With wings of cosmic victory.)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
::::आई ऍम कालिंग इन फुल पावर &lt;br /&gt;
::::फॉर फोर्गीवेनेस्स एव्री ऑवर;&lt;br /&gt;
::::टू आल लाइफ इन एव्री प्लेस &lt;br /&gt;
::::आई फ्लड फोर्थ फॉरगिविंग ग्रेस&lt;br /&gt;
(I AM calling in full power,&lt;br /&gt;
For forgiveness every hour;&lt;br /&gt;
To all life in every place,&lt;br /&gt;
I flood forth forgiving grace.)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रतिदिन यह प्रार्थना करते समय आप स्वयं को गुलाबी-बैंगनी रंग की दया की लपटों से घिरे हुए होने की कल्पना कीजिये, कल्पना कीजिये कि ये लपटें अतीत की गलतियों को समूल नष्ट कर रही हैं। जब आप अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं - उन पापों के लिए भी जो शायद आपने अपने पूर्व जन्मों में किये हैं  तब आप स्वयं को बहुत हल्का महसूस करते हैं, मानों सदियों का बोझ कन्धों से उतर गया हो। तब ही आप ईश्वर की अनुकम्पा और क्षमा को प्राप्त कर पाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बैंगनी रंग में कई विविधताएं हैं - आर्किड-गुलाबी रंग दया की लौ दर्शाता है (इसमें ईश्वर के प्रेम की गुलाबी किरण की मात्रा अधिक होती है); गहरा बैंगनी रंग ईश्वर की इच्छा को दर्शाता है (इसमें ईश्वर की इच्छा की नीली किरण की मात्रा अधिक होती है)। बैंगनी लौ में शुद्ध करने की बहुत शक्ति है, जब हम इसका प्रयोग उपचारात्मक दिव्य आदेशों के साथ करते हैं, तो हमारे [[Special:MyLanguage/four lower bodies|चार निचले शरीर]], विशेष रूप से [[Special:MyLanguage/etheric body|आकाशीय शरीर]] (स्मृति शरीर) (etheric body) अत्यंत प्रभावी ढंग से शुद्ध और स्वस्थ हो जाता है। अवचेतन मन में गहरे दबे पूर्वजन्मों के अभिलेख भी इससे शुद्ध हो जाते हैं। इस लौ का आह्वान करने के लिए, किसी भी बैंगनी-लौ के दिव्य आदेशों को गायें पर &amp;quot;बैंगनी&amp;quot; के स्थान पर &amp;quot;वायलेट&amp;quot; शब्द का प्रयोग करें। बहुदा अन्य शरीरों की अपेक्षा आकाशीय शरीर में प्रवेश करना अत्याधिक कठिन होता है - दिव्य आदेशों को छत्तीस बार दोहराना पूर्वजन्म के अभिलेखों को साफ़ और शुद्ध करने में बहुत सहायक हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:0000165_kuan-yin-by-ruth-hawkins-2108AX_600.jpeg|thumb|alt=Painting of Kuan Yin by Ruth Hawkins|[[Special:MyLanguage/Ruth Hawkins|रूथ हॉकिन्स]] (Ruth Hawkins) द्वारा बनाया गया कुआन यिन का चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Service_on_the_Karmic_Board&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कार्मिक बोर्ड पर सेवा ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दया की लौ के एक पहलू के बारे में हमें याद दिलाते हुए कुआन यिन कहती हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपमें से कई लोगों के लिए मैंने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] (Lords of Karma) से प्रार्थना की है कि नकारत्मक कर्मों की वजह से आप लोगों को कोई जन्मजात विकृति ना हो, कि आप सम्पूर्ण स्वस्थ शरीर के साथ जन्म लें, कि किसी कर्म का भुगतान आपको अपंग या अंधा ना करें। मैंने आपकी तरफ से दया की लौ से प्रार्थना की है ताकि आप स्वस्थ मन और शरीर से ईश्वर के प्रकाश का अनुसरण कर सकें। ईश्वर जिन पर दया नहीं करते वे लोग पागलखानों में पाए जाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उन्हें पता चले कि एक स्वस्थ मस्तिष्क के ना होने का क्या अर्थ होता है, उन्हें ये पता चले कि दिमाग को खराब करने का क्या अर्थ है और ये सब अनुभव कर जब वे कोई अन्य जन्म लेकर पृथ्वी पर आएं तो स्वस्थ मस्तिष्क का आदर कर पाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपको इस बात का एहसास ही नहीं है कि दया की लौ के कारण आपका जीवन में कितना संतुलन है। आपने जब जब ईश्वर को पुकारा, ईश्वर ने उत्तर दिया जिसके परिणामस्वरूप मेरे हृदय और हाथों से दया प्रवाहित हुई। मैं आपको यह बताना चाहती हूँ जब जब ईश्वर आपके ऊपर दया करते हैं तो आपका कर्त्तव्य है कि आप ईश्वर के मार्ग का अनुसरण करें और अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए ईश्वर-तुल्य कार्य करें&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन  यिन, “मर्सी: द फायर दैट ट्राइज़ एवरी मैन्स वर्क्स (Mercy: The Fire that Tries Every Man’s Works),” ''पर्ल्स ऑफ विजडम (Pearls of Wisdom)'', १९८२, पुस्तक 2, पृष्ठ ''९६''.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बोधिसत्व कुआन यिन को '''दया की देवी''' के रूप में जाना जाता है क्योंकि वह दया, करुणा और क्षमा के ईश्वरीय-गुणों को दर्शाती हैं। ये [[Special:MyLanguage/Karmic Board|&lt;br /&gt;
कार्मिक बोर्ड]] (Karmic Board) में सातवीं किरण (वायलेट किरण) का प्रतिनिधित्व करती है। [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] से पहले इन्होनें दो हजार वर्षों तक सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चोहान]] (chohan) का पद भी संभाला-संत जरमेन ने 1700 के अंतिम चरणों में यह पदभार लिया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Her_retreat&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका आकाशीय आश्रय स्थल (Her retreat) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Temple of Mercy|टेम्पल ऑफ़ मर्सी}} (Temple of Mercy)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन हजारों साल पहले पृथ्वी पर थीं। इस ग्रह को  छोड़ने के वक्त इन्होनें मोक्ष प्राप्त करने की अपेक्षा पृथ्वीवासियों की सेवा करने का व्रत लिया, इसलिए ये बोधिसत्व बन गयीं और तब तक ये ऐसे ही रहेंगी जब तक कि सारे पृथ्वीवासी मुक्त नहीं हो जाते। इनका आकाशीय आश्रय स्थल, टेंपल ऑफ मर्सी, चीन के पेकिंग (बीजिंग) में हैं। ये मनुष्यों को अपने कर्म संतुलित करना, जीवन को द्विव्य योजना के अनुसार चलाना और मानवता की सेवा करना सिखाती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन की लौ ऑर्किड (orchids) रंग की है, जो कि ईश्वरीय प्रेम के गुलाबी रंग एवं ईश्वरीय इच्छा के नीले रंग का मिश्रण है। गुलाबी-बैंगनी रंग का कमल इनका फूल है - जिसमें मध्य भाग गुलाबी और परिधि का रंग गहरा बैंगनी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Kuan Yin’s Crystal Rosary|कुआन यिन की क्रिस्टल जपमाला]] (Kuan Yin’s Crystal Rosary)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुआन यिन”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''कुआन यिन की क्रिस्टल जपमाला'' पुस्तिका, परिचय।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, १ जुलाई १९८८&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ५ जुलाई १९९६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuan_Yin/51/hi&amp;diff=169757</id>
		<title>Translations:Kuan Yin/51/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuan_Yin/51/hi&amp;diff=169757"/>
		<updated>2025-03-20T10:06:19Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;[[Special:MyLanguage/Kuan Yin’s Crystal Rosary|कुआन यिन की क्रिस्टल जपमाला]] (Kuan Yin’s Crystal Rosary)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuan_Yin/hi&amp;diff=169756</id>
		<title>Kuan Yin/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Kuan_Yin/hi&amp;diff=169756"/>
		<updated>2025-03-20T10:05:56Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&amp;lt;languages /&amp;gt;&lt;br /&gt;
[[File:20100906172053!Liao Dynasty Avalokitesvara Statue Clear.jpeg|thumb|alt=Statue of Kuan Yin, Nelson-Atkins Museum of Art, Kansas City, Missouri|मिसौरी की कैनसस सिटी के नेल्सन-एटकिंस कला संग्रहालय (Statue of Kuan Yin, Nelson-Atkins Museum of Art, Kansas City, Missouri. She is depicted here seated in her characteristic pose of royal ease) में रखी हुई कुआन यिन की मूर्ति। यहां उन्हें राजसी सहजता की अपनी विशिष्ट मुद्रा में बैठे हुए दर्शाया गया।]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''कुआन यिन''' को बौद्ध धर्म में दयालु, उदार, उद्धार करने वाली, दया की देवी बोधिसत्व के रूप में पूजा जाता है। एक माँ के रूप में वे अपने भक्तों के बहुत नज़दीक रहती हैं, और उनके क्लिष्ट मामलों मध्यस्थता भी करती हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायी कुआन यिन की तुलना पश्चिम की [[Special:MyLanguage/Mother Mary|जीसस की मां मेरी]] (Mary the mother of Jesus) से करते हैं। सुदूर पूर्व में भक्त जीवन के हर क्षेत्र में उनका मार्गदर्शन और सहायता मांगते हैं। यहाँ कुआन यिन को मंदिरों, घरों और सड़कों के किनारे बनी गुफाओं में पाया जाता हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''कुआन शिह यिन'' (Kuan Shih Yin) नाम, जैसा कि उसे अक्सर बुलाया जाता है, का अर्थ है &amp;quot;वह जो दुनिया की आवाज़ों को देखता है या सुनता है।&amp;quot; प्रसिद्ध व्यक्ति या दिग्गज के अनुसार, कुआन यिन स्वर्ग में प्रवेश करने वाली थी, लेकिन जैसे ही दुनिया की चीखें उसके कानों तक पहुंचीं, वह दहलीज पर रुक गई।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन महिलाओं, नाविकों, व्यापारियों, कारीगरों, संतान के इच्छुक दम्पतियों और वे लोग जिन पर कोई मुक़दमा चल रहा है, के संरक्षक के रूप में जानी जाती हैं। कुआन यिन के भक्त उनकी कृपा और उपचारात्मक शक्तियों में अथाह विश्वास रखते हैं। बहुतों का मानना ​​है कि उनका कृपा-पात्र बनने के लिए सिर्फ उनका नाम लेना ही पर्याप्त है। ''[[Special:MyLanguage/Kuan Yin’s Crystal Rosary|कुआन यिन की जपमाला]]'' (Kuan Yin’s Crystal Rosary) में उनके मंत्र शामिल हैं और यह उनकी मध्यस्थता पाने करने का एक शक्तिशाली साधन है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आज कुआन यिन की पूजा ताओवादियों (Taoists) के साथ-साथ महायान बौद्धों द्वारा भी की जाती है - विशेष रूप से ताइवान (Taiwan), जापान (Japan), कोरिया (Korea) और एक बार फिर उनकी मातृभूमि चीन में, जहां सांस्कृतिक क्रांति (1966-69) के दौरान बौद्ध धर्म के अभ्यास को कम्युनिस्टों द्वारा दबा दिया गया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
__TOC__&lt;br /&gt;
[[File:0001092 Kuan-Yin-willow-branch-poster-4345 600.jpeg|thumb|left|upright|alt=Old Korean painting of Kuan Yin|''विलो शाखा के साथ अवलोकितेश्वर'', लटकता हुआ सिल्क स्क्रॉल, सी.१३१०, गोरियो राजवंश (कोरिया) [Avalokitesvara with Willow Branch, hanging Silk Scroll, c. 1310, Goryeo Dynasty (Korea)]]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Traditions_in_the_East&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== पूर्व की परंपराएँ (Traditions in the East) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
सदियों से कुआन यिन ने [[Special:MyLanguage/bodhisattva|बोधिसत्व]] (bodhisattva) की अपनी भूमिका में महायान बौद्ध (Mahayana Buddhism) धर्म के महान आदर्शों को चित्रित किया है। बोधिसत्व यानि कि &amp;quot;आत्मज्ञान से भरपूर प्राणी&amp;quot;, जिसे [[Special:MyLanguage/Buddha|बुद्ध]] बनना था पर जिसने भगवन के बच्चों की खातिर अपने [[Special:MyLanguage/nirvana|निर्वाण]] (nirvana) का त्याग कर दिया। कुआन यिन ने पृथ्वी एवं उसके सौर मंडल के जीवों के उत्थान हेतु, उन्हें दिव्यगुरूओं द्वारा दिया गया ज्ञान देने के लिए बोधिसत्व होने के व्रत लिया है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बौद्ध धर्म के प्रारम्भ से पहले चीन में कुआन यिन की पूजा की जाती थी - इन्हें [[Special:MyLanguage/Avalokitesvara|अवलोकितेश्वर]] (Avalokitesvara) [पद्मपानी(Padmapani)] का अवतार माना जाता था। ''[[Special:MyLanguage/Om mani padme hum|ओम मणि पद्मे हुम्]]'' (Om mani padme hum) मंत्र के द्वारा इनका आह्वान किया जाता है। इस मंत्र का अर्थ है &amp;quot;कमल में स्थित रत्न की जय हो!&amp;quot; या “अवलोकितेश्वर, जो भक्त के हृदय कमल के आभूषण हैं, की जय हो।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब प्रकाश के बुद्ध [[Special:MyLanguage/Amitabha|अमिताभ]] (Amitabha) ईश्वर में मग्न हो परमानंद की अनुभूति कर रहे थे तब उनके दाहिने नेत्र से श्वेत रौशनी की एक किरण उत्पन्न हुई, इसी किरण से अवलोकितेश्वर का जन्म हुआ। इसी कारण से अवलोकितेश्वर/ कुआन यिन को अमिताभ का &amp;quot;प्रतिबिंब&amp;quot; माना जाता है। ये ''महा करुणा'' की प्रतिमा हैं, अमिताभ भी महा करुणा का मूर्तरूप हैं। अनुयायियों का ऐसा मानना ​​है कि कुआन यिन अमिताभ की करुणा को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत तरीके से व्यक्त करती है और भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर जल्दी देती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:0000214 kuan-yin-on-a-dragon-2331AX 600.jpeg|thumb|upright|alt=Painting of Kuan Yin in Chinese style, riding a dragon in the midst of a turbulent sea|ड्रैगन की सवारी करते हुए कुआन यिन। यह छवि कुआन यिन की जल तत्व की महारत को भी दर्शाती है, ठीक उसी प्रकार जैसे मदर मैरी (Mother Mary) की जल तत्व की महारत को उनके पैरों के नीचे चंद्रमा के बना कर दर्शाया जाता है।]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बौद्ध कला में अक्सर कुआन यिन को [[Special:MyLanguage/Pure Land|शुद्ध बौद्ध भूमि]] (Pure Land) के संप्रदाय के तीन शासकों में से एक के रूप में चित्रित किया जाता है। चित्रों में प्रकाश के बुद्ध अमिताभ (चीनी लोग इन्हें अ-मी-तो फो (A-mi-t’o Fo) और जापानी लोग अमीदा (Amida) कहते हैं) को मध्य में दिखाते है, और उनके दाहिनी ओर शक्ति के बुद्ध महास्थामाप्राप्त (Mahasthamaprapta) एवं बायीं ओर करुणा की देवी कुआन यिन को दर्शाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बौद्ध धर्मशास्त्रों में कुआन यिन को कभी-कभी &amp;quot;बार्क ऑफ साल्वेशन&amp;quot; (Bark of Salvation) के कप्तान के रूप में चित्रित किया जाता है। ये जीवात्माओं को अमिताभ के पश्चिमी स्वर्ग/ शुद्ध भूमि/ आनंद की भूमि को ओर निर्देशित करती हैं। इस स्थान पर आध्यात्मिक उत्थान सम्बंधित ज्ञान के निर्देश देने के लिए जीवात्माओं का पुनर्जन्म भी हो सकता है। लकड़ी के सांचों में अक्सर कुआन यिन की कप्तानी के तहत अमिताभ के अनुयायियों से भरी नावें शुद्ध भूमि की ओर यात्रा करते दर्शायी जाती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन के प्रमुख प्रतीकों में से एक है विलो वृक्ष की शाखा (willow branch)। बौद्ध मान्यता के अनुसार कुआन यिन बीमारी को दूर भगाने के लिए और दूसरों की सहायता के लिए आने वाले सभी लोगों पर ज्ञान और करुणा का अमृत छिड़कने के लिए विलो शाखा का उपयोग करती हैं। कुछ एशियाई परंपराओं में बीमार व्यक्ति को स्वस्थ करने के लिए प्रार्थना करते वक्त उसके शरीर को विलो की शाखा से सहलाने का नियम है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन को बच्चों की दाती माना जाता है, इसलिए बहुधा उन्हें एक शिशु के साथ चित्रित किया जाता है। [[Special:MyLanguage/Taiwan|ताइवान]] (Taiwan) के लोगों का मानना है कि अपने एक अवतार में कुआन यिन माँ थीं और चित्रों में उन्हें अपने बच्चे के साथ दिखाया जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन (Kuan Yin) को ड्रैगन (dragon) पर खड़े हुए भी चित्रित किया जाता है। ड्रैगन चीन देश और चीन के दिव्य वंश का प्रतिनिधित्व करता है। यह [[Special:MyLanguage/Great White Brotherhood|श्वेत महासंघ]] (Great White Brotherhood) की संपूर्ण आत्मा का भी प्रतीक है। [[Special:MyLanguage/Book of Revelation|बुक ऑफ़ रेवेलशन]] (Book of Revelation) में ड्रैगन को जानवरों के शक्तिदाता के रूप में दिखाया गया है। इन सब बातों का निष्कर्ष यह है कि ड्रैगन महान पदक्रम का एक विचाररूप है - प्रकाश या फिर अन्धकार की शक्तियों का प्रतीक। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
चीनी कथाओं में ड्रैगन और [[Special:MyLanguage/phoenix|फीनिक्स]] (phoenix) ताई ची ऊर्जा के यांग और यिन का प्रतिनिधित्व करते हैं। चित्रों में ड्रैगन पर सवार कुआन यिन दर्शाने का अर्थ है कि कुआन यिन ड्रैगन की स्वामिनी हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Miao_Shan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== मियाओ शान (Miao Shan)==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:The Tiger Carries Off Miao Shan.jpg|thumb|upright|alt=Painting in Chinese style of Miao Shan on the back of a tiger|मियाओ शान को ले जाते हुए एक बाघ]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन (Kuan Yin) ने छठी शताब्दी में उत्तरी चीनी साम्राज्य में चाउ राजवंश (Chou dynasty) के शासक मियाओ चुआंग वांग (Miao Chuang Wang) की तीसरी बेटी के रूप में जन्म लिया था। इस राजा ने बलपूर्वक शासन पर कब्ज़ा किया था और उसकी तीव्र इच्छा थी की उसके के पुत्र हो जो उसके वंश को आगे चलाये। लेकिन भाग्य से उसकी तीन पुत्रियां हो गयी। सबसे छोटी पुत्री, मियाओ शान (Miao Shan), एक धर्मनिष्ठ बच्ची थी जो &amp;quot;बौद्ध धर्म के सभी सिद्धांतों का ईमानदारी से पालन करती थी। सदाचारी जीवन उसके स्वभाव में निहित था&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;एडवर्ड  टी सी वर्नर, ''मिथ्स एंड  लेजेंड्स ऑफ़ चाइना (Myths and Legends of China) '' (लंदन : Harrap, १९२२ ), दसवां अध्याय. निम्न वाक्या यहीं से लिया गया है&amp;lt;/ref&amp;gt; (Edward T. C. Werner, ''Myths and Legends of China'' (London: Harrap, 1922), chapter X. The following account is adapted from that source)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उन्होंने धन और वैभव की नश्वरता को पहचान लिया था और वे &amp;quot;एक पर्वत पर शांति से अकेले रहना चाहती थीं&amp;quot;। उन्होंने अपनी बहनों से कहा था,  &amp;quot;अगर किसी दिन मैं अच्छाई के उच्च स्तर तक पहुँच पायी तो मैं अपने माँ-पिताजी और को बचा कर स्वर्ग ले आऊँगी; मैं पृय्वी पर दुखी और पीड़ित लोगों का उद्धार करुँगी; मैं बुरे कर्म करने वाली जीवात्माओं का मन बदलकर उन्हें भलाई के रास्ते पर चलाऊंगी।&amp;quot; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मियाओ शान (Miao Shan) के पिता उसका विवाह एक ऐसे व्यक्ति से करना चाहते थे जो एक अच्छा शासक हो। राजा ने उसे अपनी योजना के बारे में बताया और कहा की उनकी सारी आशाएं उस पर टिकी हैं। परन्तु मियाओ शान ने पिता को बताया कि वह विवाह नहीं करना चाहती क्योंकि उनका ध्येय आध्यात्मिक पथ पर चलकर बुद्धत्व प्राप्त करना है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यह सुनकर पिताजी क्रोधित हो गए। उन्होंने पुछा, &amp;quot;क्या कोई राजकुमारी कभी तपस्विनि बनी है?&amp;quot; इसके बाद उन्होंने आज्ञा दी वह तुरंत किसी शिक्षाविद (academician) या सैनिक से विवाह कर ले। मियाओ शान यह जानती थीं की पिता के आदेश की अवहेलना करना कठिन होगा। उन्होंने कहा वह एक चिक्तिसक (physician) से तुरंत विवाह कर सकती हैं क्योंकि चिकित्सक से विवाह करने के बाद भी वे बुद्ध बन सकती हैं। यह सुनकर उनके पिताजी आग-बबूला हो गए और उन्होंने अपने एक अधिकारी को आदेश दिया कि वे मियाओ शान को रानी के बगीचे में छोड़ आएं ताकि वहां अत्याधिक सर्दी से उसकी मृत्यु हो जाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
परन्तु इस बात से परेशान होने की अपेक्षा मियाओ शान बहुत प्रसन्न हो गयीं। उन्हें महलों की शान-शौकत के बजाय बगीचे का शांत एकांत बहुत अच्छा लगा। उनके माता-पिता, बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें बहुत समझाया परन्तु उन्होंने बुद्ध बनने के अपने स्वप्न को नहीं छोड़ा। फिर उन्होंने अपने पिता से वाइट बर्ड (White Bird) के मठ में रहने की अनुमति मांगी। राजा ने उन्हें अनुमति तो दे दी परन्तु साथ ही वहां की भिक्षुणियों को सख्त आदेश भी दिए कि वे मियाओ शान को मठ छोड़ने के लिए राज़ी करेंगी। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भिक्षुणियों ने बहुत कोशिश की लेकिन वे अपने प्रयास में असफल रहीं। फिर उन्होंने मियाओ शान को रसोई का प्रभारी बनाने का फैसला किया, यह सोचकर कि अगर वे यह कार्य करने में विफल रही तो उन्हें मठ से बर्खास्त किया जा सकता था। मियाओ शान (Miao Shan) ने ख़ुशी ख़ुशी यह दायित्व स्वीकार कर लिया जिसके फलस्वरूप स्वर्ग के गुरुओं ने प्रसन्न होकर स्वर्ग की आत्माओं को मियाओ शान की सहायता करने का आदेश दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तब मठ के प्रधान ने राजा से अपनी बेटी को वापस बुलाने के लिए कहा। क्रोधित राजा ने पांच हजार सैनिकों को व्हाइट बर्ड के मठ में आग लगाने का आदेश दिया ताकि भिक्षुणियां भी उस आग में जल कर मर जाएँ। भिक्षुणियों ने ईश्वर को सहायता के लिए पुकारा और साथ ही मियाओ शान से कहा कि उनपर यह विपदा उसके कारण ही आयी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मियाओ शान ने इस बात पर अपनी सहमति जताई। उन्होंने घुटनों के बल बैठकर ईश्वर से प्रार्थना की और फिर बांस की एक सुई को अपने मुँह के ऊपरी हिस्से में चुभाया जिससे रक्त बहने लगा। उन्होंने उस रक्त को स्वर्ग की ओर थूक दिया। तुरंत ही आसमान में विशाल बादल इकट्ठे हो गए और बारिश होने लगी जिससे मठ में लगी आग बुझ गई। भिक्षुणियों ने घुटनों के बल बैठकर मियाओ शान को उनकी जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब राजा को इस इस चमत्कार के बारे में पता चला तो वे और अधिक राजा क्रोधित हो गए और उन्होंने सैनिकों के प्रमुख को तुरंत मियाओ शान का सिर काटने का आदेश दिया। परन्तु फाँसी की तैयारी करते ही आसमान में बादल छा गए और एक तेज़ रोशनी ने मियाओ शान को ढक लिया। जब जल्लाद ने मियाओ शान की गर्दन पर तलवार चलानी चाहि तो वह टूट गयी, जब उसने उन पर भाले से प्रहार करना चाहा तो भाला टुकड़े-टुकड़े होकर गिर गया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके बाद राजा ने आदेश दिया कि एक रेशमी रस्सी से मियाओ शान का गला घोंट दिया जाये। लेकिन तभी कहीं से एक बाघ वहां आ गया जिससे जल्लाद तितर-बितर हो गए। बाघ मियाओ शान के शरीर को अपनी पीठ पर ले भागा और देवदार के जंगल में गायब हो गया। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:Statue of Guanyin, Mt Putuo, China.jpg|thumb|left|alt=caption|माउंट पु-टू (Mount P’u-t’o) पर कुआन यिन की तैंतीस मीटर ऊँची मूर्ति है, और यह पवित्र द्वीप-पर्वत कुआन यिन की भक्ति का केंद्र बन गया है।]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इसके बाद मियाओ शान की जीवात्मा को निचली दुनिया, नरक, में ले जाया गया। उन्होंने वहां भी ईश्वर से प्रार्थना की और नर्क स्वर्ग में बदल गया। फिर उन्हें अपना जीवन फिर से शुरू करने के लिए पृथ्वी पर वापस भेज दिया गया। चेकियांग के तट पर चुसान द्वीपसमूह में पवित्र द्वीप-पर्वत - पू-तो शान द्वीप पर वह नौ साल तक रहीं। इस समय के दौरान उन्होंने कई बीमार लोगों को ठीक किया तथा नाविकों के जहाज़ों को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाया।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब उन्हें अपने पिता की बीमार होने का पता चला तो उन्होंने अपनी बाहों के मांस से दवा बनाकर पिता को दी जिससे उनकी जान बच गई। पिता ने कृतज्ञ भाव में आदेश दिया कि मियाओ शान के सम्मान में उनकी एक मूर्ति बनाई जाए - उन्होंने कलाकार को यह भी कहा की मूर्ति में &amp;quot;बाहें और आँखें पूरी होने चाहियें&amp;quot;। कलाकार ने कुछ और ही समझा और उसने मूर्ति में &amp;quot;हज़ार भुजाएं और आँखें&amp;quot; बना दीं। आज भी कुआन यिन को कभी-कभी &amp;quot;हज़ार भुजाओं और हज़ार आँखों&amp;quot; के साथ दिखाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि वे इन &lt;br /&gt;
हज़ार भुजाओं और आँखों से लोगों को देख पाती हैं और उनकी सहायता कर पाती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बारहवीं सदी के दौरान कुछ बौद्ध भिक्षु पू-तो शान पर रहने लगे और कुआन यिन के प्रति भक्ति पूरे उत्तरी चीन में फैल गई। यह सुरम्य द्वीप इस दयालु उद्धारकर्ता की पूजा का मुख्य केंद्र बन गया। चीन के दूरदराज इलाकों से ही नहीं वरन मंचूरिया, मंगोलिया और तिब्बत से भी तीर्थयात्री यहां आने लगे। एक समय ऐसा भी था जब इस द्वीप पर कुआन यिन के सौ से अधिक मंदिर थे, और एक हजार से अधिक भिक्षु यहां रहते थे। पु-तो द्वीप की दंतकथाओं में कुआन यिन द्वारा किए गए चमत्कारों का वर्णन है। ऐसा माना जाता है कि कुआन यिन कभी कभी यहाँ की एक गुफा में अपने भक्तों को दर्शन देती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Traditions_in_Taiwan&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== ताइवान में परंपराएँ (Traditions in Taiwan) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ऐसा माना जाता है कि कुआन यिन अक्सर आसमान में या लहरों पर दिखाई देती है ताकि खतरे में पड़ने पर उसे पुकारने वालों को बचाया जा सके। उदाहरण के लिए, ताइवान में व्यक्तिगत कहानियाँ सुनी जा सकती हैं, जो बताते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापानी कब्जे वाले ताइवान पर बमबारी की, तो वह एक युवा युवती के रूप में आसमान में दिखाई दी, उसने बमों को पकड़ा और उन्हें अपने सफेद कपड़ों से ढक दिया ताकि वे फट न जाएँ।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
इस प्रकार दया की देवी को समर्पित वेदियाँ हर जगह पाई जाती हैं - दुकानें, रेस्तरां, यहाँ तक कि टैक्सीकैब डैशबोर्ड भी। घर में उनकी पूजा पारंपरिक &amp;quot;पाई पाई&amp;quot; से की जाती है, जो धूपबत्ती का उपयोग करके एक प्रार्थना अनुष्ठान है, साथ ही प्रार्थना चार्ट का उपयोग भी किया जाता है - कागज़ की शीट जिस पर कुआन यिन, कमल के फूल या पगोडा की तस्वीरें बनाई जाती हैं और सैकड़ों छोटे घेरे बनाए जाते हैं। किसी रिश्तेदार, दोस्त या खुद के लिए नोवेना में पढ़ी जाने वाली प्रार्थनाओं या सूत्रों के प्रत्येक सेट के साथ, एक और घेरा भरा जाता है। इस चार्ट को &amp;quot;मोक्ष का जहाज&amp;quot; के रूप में वर्णित किया गया है, जिसके द्वारा दिवंगत आत्माओं को नरक के खतरों से बचाया जाता है और वफादारों को अमिताभ के स्वर्ग में सुरक्षित पहुँचाया जाता है। प्रार्थनाओं और प्रार्थनाओं के साथ विस्तृत सेवाओं के अलावा, कुआन यिन के प्रति भक्ति लोगों के लोकप्रिय साहित्य में कविताओं और स्तुति के भजनों में व्यक्त की जाती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन के सच्चे अनुयायी स्थानीय मंदिरों में अक्सर जाते हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर या जब वे किसी विशेष समस्या से जूझ रहे होते हैं तो बड़े मंदिरों की तीर्थयात्रा करते हैं। उनके सम्मान में आयोजित तीन वार्षिक त्यौहार दूसरे महीने के उन्नीसवें दिन (उनके जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है), छठे महीने और चीनी चंद्र कैलेंडर के आधार पर नौवें महीने में होते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_bodhisattva_ideal&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== आदर्श बोधिसत्व ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन का मंत्रालय पर्वतों जितना प्राचीन और वास्तविक है। मानवता के साथ खड़े होने की इनका निर्णय अत्यंत पवित्र है। परन्तु कुआन यिन हमें आगाह भी करती हैं की हम ऐसी शपथ लेने से पहले समर्पित लोगों की सेवा के सभी पहलुओं पर अच्छी तरह सोच-विचार कर लें: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;&lt;br /&gt;
समस्त जीवों के साथ एकीकार होने के कारण हम सभी प्रकार की अभिव्यक्तियों - बहुत अच्छी से बहुत बुरी - के प्रति जागरूक हैं। एक बोधिसत्व के लिए यह उसके आदर्श काम का हिस्सा है, यह उन लोगों का भी हिस्सा है जो मानवता के साथ खड़े हैं। इस ग्रह पर ऐसे लोगों की अच्छी-खासी संख्या है, हालाँकि यह संख्या उन लोगों की संख्या में बहुत कम है जो उपद्रवी जीवन जीते हैं। बोधिसत्व एक बहुत ही उच्च और पवित्र वर्ग है, और मेरा सुझाव है कि आप इसका हिस्सा बनने से पहले अच्छी तरह सोच लें।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
युगों युगों तक जब आपकी हर कोशिश के बावजूद लोग ईश्वर के मार्ग से विमुख रहते हैं, तब आपके मन में ऐसा विचार आ सकता है कि काश आपने कोई दूसरा, आसान रास्ता चुना होता, जो शायद आपको ज़्यादा संतुष्टि देता। सदियां गुज़र जाने के बाद भी जब आप देखते हैं कि जिन लोगों को आपने स्वयं अपने ह्रदय की लौ से सींचा है, वे भी निम्न सांसारिक बंधनों से मुक्त नहीं हो पाए हैं, तो आप स्वयं को ईश्वर के सामने रोता हुआ पाते हैं, और कहते हैं, &amp;quot;हे ईश्वर इन पथभ्रष्ट लोगों को कब बुद्धि आएगी, कब ये अपनी दिव्यता को समझेंगे&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन “द  क्वालिटी ऑफ़ मर्सी फ़ोर द रीजेनेरशन ऑफ़ द यूंथ ऑफ़ द वर्ल्ड (The Quality of Mercy for the Regeneration of the Youth of the World),” ''पर्ल्स ऑफ़ विजडम (Pearls of Wisdom)'', १९८२ , किताब II, पृष्ठ ''१२०–२१''.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&amp;lt;/blockquote&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:100598M-medres.jpg|thumb|alt=Kuan Yin, seated|कुआन यिन]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_mercy_flame&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== दया की लौ (The mercy flame) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन (Kuan Yin) पृथ्वी के जीवों में दया और करुणा के गुणों का प्रतिनिधित्व करतीं हैं। पृथ्वी पर बहुत से जीव ऐसे भी हैं जो गलतियां तो करते हैं पर उनका पूरा फल भोगने का सामर्थ्य उनमें नहीं होता। ऐसे जीवों की आत्मा दया की लौ का आह्वाहन करती है। दया के गुण की वजह से ही उस जीव को कर्म फल में रियायत मिलती है, और उन्हें यह रियायत तब तक मिलती है जब तक की वे अपने कर्म के फल को भोगने में समर्थ नहीं हो जाता। कुआन यिन कहती हैं: &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;blockquote&amp;gt;... दया प्रेम प्रकट करने है तरीका है जो जीवन के कठिन रास्तों को सुगम बनाता है, जो [[Special:MyLanguage/etheric body|आकाशीय शरीर]] (etheric body) के घावों को ठीक करता है, मन और भावनाओं में पड़ी दरारों को भरता करता है, पाप को मिटाता है और संघर्ष की भावना को समाप्त करता है अन्यथा ये सब भौतिक शरीर में रोग, क्षय, विघटन और मृत्यु के रूप में प्रकट होती हैं।&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन,&amp;quot;अ पीपल एंड अ टीचिंग हूज टाइम है कम (A People and a Teaching Whose Time Has Come) १८ सितंबर १९७६।&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;/blockquote &amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन कहती हैं, &amp;quot;दया ब्रह्मांड की सबसे बड़ी ताकत है क्योंकि यह ईश्वर की इच्छाशक्ति है... प्रेम से परिपूर्ण दया सभी प्रकार के भय, संदेह, अवज्ञा एवं विद्रोह को मिटा देती है। न्याय-पालन में भी दया होती है - कभी-कभी यह बहुत कठोर हो जाती है परन्तु यह हमेशा धैर्यवान और सहनशील रहती है, और यह दिल में आत्मा से मिलने की इच्छा को उभरती और बढ़ती हुई देखती है।''&amp;lt;ref&amp;gt; कुआन यिन, &amp;quot;द स्वोर्ड ऑफ़ मर्सी (The Sword of Mercy),&amp;quot; १० अक्टूबर १९६९।&amp;lt;/ref&amp;gt; (Kuan Yin, “The Sword of Mercy,” October 10, 1969) &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन हमें याद दिलाती हैं, &amp;quot;याद रखिये, जब भी आपको शक्ति, रोशनी, पवित्रता और उपचार की बहुत अधिक आवश्यकता होती है तो ईश्वर आपके ऊपर दया करते है, ये सब आपको ईश्वर की दया से ही मिल सकता है। जब ईश्वर हमारे ऊपर दया करके हमें क्षमा करते हैं तो हमें उनके कानून का पालन करने का एक नया अवसर मिलता है। क्षमा के बिना उन्नति मुश्किल है।&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन  यिन, “कर्मा, मर्सी, एंड द लॉ (Karma, Mercy, and the Law),” ''पर्ल्स ऑफ़ विज़डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२, पुस्तक II, पृष्ठ ''१०६''&amp;lt;/ref&amp;gt; इसलिए, ईश्वर के साथ फिर से चलने के लिए हमें उनकी क्षमा की आवश्यकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_need_for_forgiveness&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== क्षमा की आवश्यकता ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब हम इसका आह्वान करते हैं, तो हमें एहसास होता है कि हमारी [[Special:MyLanguage/Christ Self|स्व चेतना]] ही हमारी मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, मंत्री, पुजारी, गुरु, मित्र - सभी कुछ है। हमें अपने दिल का बोझ उतारने प्रतिदिन इसके पास जाना चाहिए। अमेरिकी भारतीयों में ऐसा करने की परंपरा थी। वे लोग रात को आग जलाकर उसके चारों ओर बैठ जाते थे और अपनी दिनचर्या की चर्चा किया करते थे। दिन भर में जो कुछ भी उनकी पसंद का नहीं हुआ वे उसे अग्नि के सुपुर्द कर दिया करते थे। वास्तव में प्रत्येक [[Special:MyLanguage/religion|पंथ]] (religion) में यही सिखाया जाता है। अप्रिय बातों को अग्नि के सुपुर्द कर हम चैन की नींद सो सकते हैं। आजकल अधिकाँश लोग अनिद्रा के रोग से पीड़ित हैं, और इसका एकमात्र कारण दैनिक कर्म से रिहा न हो पाना है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अगर हमने ऐसा कुछ किया है जो ईश्वर के मार्ग से पृथक है, उनके कानून के अनुसार नहीं है तो हमें अपनी इस गलती को स्वीकार कर, ईश्वर को इसके बारे में बताना होगा। जब तक कि हम ऐसा करके अपनी गलतियों की क्षमा उनसे नहीं मांगते, तब तक हम अपराधबोध, भय और शर्म से ग्रसित हो ईश्वर से परे रहते हैं। सभी प्रकार की मानसिक और भावनात्मक बीमारियां, स्प्लिट पर्सनैलिटी (split personalities), माता-पिता और बच्चों के प्रति घृणा और कई अन्य समस्याएं जिनसे आधुनिक समाज आज जूझ रहा है इसी वजह से है। [[Special:MyLanguage/law of forgiveness|क्षमा]] ही अन्तर्मन के पास जाने का रास्ता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षमा का आह्वान हमें न केवल अपने लिए करना चाहिए वरन इसे हमें अपने जीवन के हर पहलू में लागू करने की आवश्यकता है - हम उन सभी को दिल से क्षमा करें जिन्होंने कभी भी हमारे साथ कुछ गलत किया है, और हम उन सभी से क्षमा मांगे जिनके साथ हमने कुछ भी गलत किया है। [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] (Saint Germain) ने हमें यह सिखाया है कि क्षमा हमें दिल से मांगनी चाहिए तथा क्षमा मांगते वक्त हमारा दिल प्रेम से सरोबार होना चाहिए। और यह बात - कि हम क्षमा करते हैं और हम क्षमा मांग रहे हैं - हमें प्रकट रूप से, अत्यंत विनम्रता से कहनी भी चाहिए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जब हम क्षमा मांगते हैं तो हमारा आभामंडल बैंगनी, जामुनी और गुलाबी रंग की रोशनी से भर जाता है जिससे हमारी जीवन की सारी अप्रिय स्थितियां धुल जाती हैं। बारम्बार क्षमा मांगने और क्षमा करने से यह रंग गहरे होते जाते हैं और ऐसा तब तक होता है जब तक कि पूरी दुनिया हमारे ह्रदय की ऊर्जा से सरोबार नहीं हो जाती। आप क्षमा का आह्वान करते समय किसी की भी कल्पना कर सकते हैं - आपका कोई प्रियजन, बच्चा, ऐसा व्यक्ति जिसे आप अपना शत्रु मानते हैं, कोई राजनीतिक नेता, वो शहर जहाँ आप रहते हैं, आपकी सरकार, आपका देश या फिर सम्पूर्ण पृथ्वी ग्रह। कल्पना करते वक्त आप अपने मन की आँखों में इन सभी को क्षमा की लहरों और तरंगों में डूबा हुआ देखिये।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षमा के कानून द्वारा ईश्वर हमें अपनी आत्मिक चेतना को विकसित करने का अवसर देते हैं। कुआन यिन कहती हैं, &amp;quot;क्षमा के नियम में प्रशिक्षित होना आवश्यक है क्योंकि वास्तव में यही कुंभ युग (Aquarian age) की नींव है। परन्तु क्षमा से कर्मों का संतुलन नहीं होता। क्षमा को कर्म से अलग रख ईश्वर हमें आगे बढ़ने का एक अवसर देते हैं ताकि हम बिना किसी बोझ के, अपनी रचनात्मकता का प्रयोग कर चीजों को सही कर पाएं। फिर जब आप कुछ उपलब्धियां और दक्षता प्राप्त कर कर आगे बढ़ते हैं, तो क्षमा के नियम के अनुसार, जो कर्म अलग कर दिया गया था वह आपको वापस मिल जाता है क्योंकि अब आप कर्म के फल को सहने में सक्षम होते हैं। अब आप आत्म-निपुणता के उस स्तर हैं जहां आपकी चेतना उन्नत अवस्था में है और कर्म का [[Special:MyLanguage/transmutation|रूपानतरण]] (transmutation) करने में सक्षम हैं।&amp;quot;&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन, &amp;quot;अ मदर्स-ऑइ व्यू ऑफ़ द वर्ल्ड (“A Mother’s-Eye View of the World),&amp;quot; ''पर्ल्स ऑफ विज्डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२ , पुस्तक २, पृष्ठ ''८७''.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
पापों की क्षमा और उनका रूपांतरण दो अलग चीज़ें हैं। मान लीजिये, किसी ने आपका पर्स चुराया और बाद में आपसे ये कहा कि उसे खेद है कि उसने आपका पर्स चुराया था। आप उसे माफ कर सकते हैं, लेकिन कर्म की दृष्टि से यह मामला तब तक बंद नहीं होगा, जब तक कि वह आपका पर्स एक-एक पैसे के साथ आपको वापस नहीं कर देता; पूरी क्षतिपूर्ति नहीं करता। सो, क्षमा कर्म का संतुलन नहीं है; यह कर्मों को अलग रखना है जिससे आपको पाप के भारी बोझ के बिना चीजों को सही करने की स्वतंत्रता मिल जाए।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
क्षमा ही परिपूर्ण जीवन जीने की नींव है। यह ईश्वर के प्रत्येक अंश के बीच सामंजस्य बिठाने का संकल्प है। यह स्वतंत्रता की लौ के गहन प्रेम की क्रिया है। [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] की ऊर्जा, भगवान की ऊर्जा हमेशा स्पंदित होती रहती हैं, ये हमेशा चलती रहती हैं, और अवचेतन मन के अभिलेखों को रूपांतरित करती रहती है। आईज़ेयाह कहते हैं, “तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के ही क्यों न हों, क्षमा से वे बर्फ के समान श्वेत हो जाएंगे। और अगर वे लाल रंग के भी होंगे तो भी ऊन के जैसे हलके हो जाएंगे।”&amp;lt;ref&amp;gt;ईसा. १:१८&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:HainanSanya2-cropped.jpg|thumb|alt=caption|upright=1.2|दक्षिण चीन सागर के  हैनान द्वीप पर कुआन यिन की १०८ मीटर (३५४ फीट) ऊंची मूर्ति&lt;br /&gt;
(108-meter (354 ft) statue of Kuan Yin on the island of Hainan, in the South China Sea)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;The_need_to_forgive&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== क्षमा करने की आवश्यकता ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यदि आप स्वयं के लिए क्षमा की आशा रखते हैं, तो सर्वप्रथम आपको औरों को क्षमा करना सीखना होगा जैसा कि दिव्यगुरु [[Special:MyLanguage/Jesus|यीशु]] ने सिखाया है। कुआन यिन कहतीं हैं, &amp;quot;मानव जाति का परीक्षण कई छोटे और बड़े तरीकों से किया जाता है, और जो धर्मांधता कुछ लोगों की चेतना में देखी जाती है, वह भी क्षमा ना कर पाने का ही एक रूप है। जो लोग दूसरों को सिर्फ इसलिए माफ नहीं कर सकते क्योंकि वे उनके जैसे नहीं सोचते या उनका पूजा करने का तरीका नहीं अपनाते वे दिल के कठोर होते हैं, इतने कठोर कि यह कठोरता उनके प्यार की लौ को भी घेर लेती है और ज्ञान के प्रवाह को भी।''&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन, &amp;quot;मर्सी: द फायर दैट ट्राइस एव्री मैन्स वर्क्स (Mercy: The Fire that Tries Every Man’s Works) &amp;quot; ''पर्ल्स ऑफ विज्डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२, पुस्तक 2, पृष्ठ ''९५''.&amp;lt;/ref&amp;gt; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दया का कानून एक दो-तरफ़ा सड़क की तरह है। इसमें एक संकेत आप भगवान को भेजते हैं और दूसरा भगवान् आपको भेजता है अर्थात यह ईश्वर के साथ आपके लेन-देन को दर्शाता है। यदि आप ईश्वर से दया की आशा रखते हैं, तो आपको भी अपने जीवन में हर एक के प्रति दया करनी होगी। दया का नियम प्रत्येक जीवात्मा की मुक्ति के लिए है। जब हम क्षमा करते हैं, तो हमें भी क्षमा मिलती है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हमने बार-बार यह बात सुनी और पढ़ी है, &amp;quot;जो बीत गया उसे जाने दो, माफ करो और भूल जाओ!&amp;quot; यह बात बिल्कुल सत्य है। अगर आप अपने साथ हुए किसी गलत काम को याद रखते हैं तो इसका मतलब है कि वास्तव में आपने अपने साथ गलत करने वाले को माफ़ नहीं किया है। क्षमा तब ही सफल है जब आप उस कार्य से सम्बंधित सभी अभिलेख और स्मृति अपनी चेतना से मिटा दें। कुआन यिन कहती हैं कि यदि आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो आपने माफ नहीं किया है, बल्कि &amp;quot;आपने अपना दिल कठोर कर लिया है।&amp;quot; आपने अवचेतन मन की गहराई में इसे संजो कर रखा हुआ है, ठीक उसी तरह जिस तरह एक गिलहरी अपने दाने संग्रहीत करती है। आपने उसे अपने आकाशीय शरीर में संग्रहीत कर रखा है, अग्नि के सुपुर्द नहीं किया है। आप छोड़ने को तैयार नहीं हैं, और इस कारण से जिन लोगों ने आपके साथ अन्याय किया है, और जिनके साथ आपने अन्याय किया है, आप उनमें ईश्वर की अभिव्यक्ति नहीं होने देना चाहते।&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन यिन, “अ मदर्स-ऑइ व्यू ऑफ़ द वर्ल्ड (“A Mother’s-Eye View of the World),” ''पर्ल्स ऑफ विज्डम (Pearls of Wisdom)'', १९८२ , पुस्तक २, पृष्ठ ''८७''..&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मानस चित्रण के साथ शब्दों के विज्ञान का प्रयोग आपको संपूर्ण रूप से &amp;quot;क्षमा करने और भूल जाने&amp;quot; में सहायता करता है। आप [[Special:MyLanguage/El Morya|एल मोरया]] (El Morya) द्वारा दी गई एक डिक्री कर सकते हैं:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
::::आई ऍम फोर्गीवेनेस्स एक्टिंग हेयर  ,&lt;br /&gt;
::::कास्टिंग आउट आल डाउट एंड फियर ,&lt;br /&gt;
::::सेटिंग मेंन फॉरएवर फ्री &lt;br /&gt;
::::विद विंग्स ऑफ़ कॉस्मिक विक्ट्री&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
(I AM forgiveness acting here,&lt;br /&gt;
Casting out all doubt and fear,&lt;br /&gt;
Setting men forever free&lt;br /&gt;
With wings of cosmic victory.)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
::::आई ऍम कालिंग इन फुल पावर &lt;br /&gt;
::::फॉर फोर्गीवेनेस्स एव्री ऑवर;&lt;br /&gt;
::::टू आल लाइफ इन एव्री प्लेस &lt;br /&gt;
::::आई फ्लड फोर्थ फॉरगिविंग ग्रेस&lt;br /&gt;
(I AM calling in full power,&lt;br /&gt;
For forgiveness every hour;&lt;br /&gt;
To all life in every place,&lt;br /&gt;
I flood forth forgiving grace.)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
प्रतिदिन यह प्रार्थना करते समय आप स्वयं को गुलाबी-बैंगनी रंग की दया की लपटों से घिरे हुए होने की कल्पना कीजिये, कल्पना कीजिये कि ये लपटें अतीत की गलतियों को समूल नष्ट कर रही हैं। जब आप अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं - उन पापों के लिए भी जो शायद आपने अपने पूर्व जन्मों में किये हैं  तब आप स्वयं को बहुत हल्का महसूस करते हैं, मानों सदियों का बोझ कन्धों से उतर गया हो। तब ही आप ईश्वर की अनुकम्पा और क्षमा को प्राप्त कर पाते हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बैंगनी रंग में कई विविधताएं हैं - आर्किड-गुलाबी रंग दया की लौ दर्शाता है (इसमें ईश्वर के प्रेम की गुलाबी किरण की मात्रा अधिक होती है); गहरा बैंगनी रंग ईश्वर की इच्छा को दर्शाता है (इसमें ईश्वर की इच्छा की नीली किरण की मात्रा अधिक होती है)। बैंगनी लौ में शुद्ध करने की बहुत शक्ति है, जब हम इसका प्रयोग उपचारात्मक दिव्य आदेशों के साथ करते हैं, तो हमारे [[Special:MyLanguage/four lower bodies|चार निचले शरीर]], विशेष रूप से [[Special:MyLanguage/etheric body|आकाशीय शरीर]] (स्मृति शरीर) (etheric body) अत्यंत प्रभावी ढंग से शुद्ध और स्वस्थ हो जाता है। अवचेतन मन में गहरे दबे पूर्वजन्मों के अभिलेख भी इससे शुद्ध हो जाते हैं। इस लौ का आह्वान करने के लिए, किसी भी बैंगनी-लौ के दिव्य आदेशों को गायें पर &amp;quot;बैंगनी&amp;quot; के स्थान पर &amp;quot;वायलेट&amp;quot; शब्द का प्रयोग करें। बहुदा अन्य शरीरों की अपेक्षा आकाशीय शरीर में प्रवेश करना अत्याधिक कठिन होता है - दिव्य आदेशों को छत्तीस बार दोहराना पूर्वजन्म के अभिलेखों को साफ़ और शुद्ध करने में बहुत सहायक हो सकता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[File:0000165_kuan-yin-by-ruth-hawkins-2108AX_600.jpeg|thumb|alt=Painting of Kuan Yin by Ruth Hawkins|[[Special:MyLanguage/Ruth Hawkins|रूथ हॉकिन्स]] (Ruth Hawkins) द्वारा बनाया गया कुआन यिन का चित्र]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Service_on_the_Karmic_Board&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== कार्मिक बोर्ड पर सेवा ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दया की लौ के एक पहलू के बारे में हमें याद दिलाते हुए कुआन यिन कहती हैं &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपमें से कई लोगों के लिए मैंने [[Special:MyLanguage/Lords of Karma|कर्म के स्वामी]] (Lords of Karma) से प्रार्थना की है कि नकारत्मक कर्मों की वजह से आप लोगों को कोई जन्मजात विकृति ना हो, कि आप सम्पूर्ण स्वस्थ शरीर के साथ जन्म लें, कि किसी कर्म का भुगतान आपको अपंग या अंधा ना करें। मैंने आपकी तरफ से दया की लौ से प्रार्थना की है ताकि आप स्वस्थ मन और शरीर से ईश्वर के प्रकाश का अनुसरण कर सकें। ईश्वर जिन पर दया नहीं करते वे लोग पागलखानों में पाए जाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उन्हें पता चले कि एक स्वस्थ मस्तिष्क के ना होने का क्या अर्थ होता है, उन्हें ये पता चले कि दिमाग को खराब करने का क्या अर्थ है और ये सब अनुभव कर जब वे कोई अन्य जन्म लेकर पृथ्वी पर आएं तो स्वस्थ मस्तिष्क का आदर कर पाएं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
आपको इस बात का एहसास ही नहीं है कि दया की लौ के कारण आपका जीवन में कितना संतुलन है। आपने जब जब ईश्वर को पुकारा, ईश्वर ने उत्तर दिया जिसके परिणामस्वरूप मेरे हृदय और हाथों से दया प्रवाहित हुई। मैं आपको यह बताना चाहती हूँ जब जब ईश्वर आपके ऊपर दया करते हैं तो आपका कर्त्तव्य है कि आप ईश्वर के मार्ग का अनुसरण करें और अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए ईश्वर-तुल्य कार्य करें&amp;lt;ref&amp;gt;कुआन  यिन, “मर्सी: द फायर दैट ट्राइज़ एवरी मैन्स वर्क्स (Mercy: The Fire that Tries Every Man’s Works),” ''पर्ल्स ऑफ विजडम (Pearls of Wisdom)'', १९८२, पुस्तक 2, पृष्ठ ''९६''.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
बोधिसत्व कुआन यिन को '''दया की देवी''' के रूप में जाना जाता है क्योंकि वह दया, करुणा और क्षमा के ईश्वरीय-गुणों को दर्शाती हैं। ये [[Special:MyLanguage/Karmic Board|&lt;br /&gt;
कार्मिक बोर्ड]] (Karmic Board) में सातवीं किरण (वायलेट किरण) का प्रतिनिधित्व करती है। [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] से पहले इन्होनें दो हजार वर्षों तक सातवीं किरण के [[Special:MyLanguage/chohan|चोहान]] (chohan) का पद भी संभाला-संत जरमेन ने 1700 के अंतिम चरणों में यह पदभार लिया था। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Her_retreat&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इनका आकाशीय आश्रय स्थल (Her retreat) ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{main-hi|Temple of Mercy|टेम्पल ऑफ़ मर्सी}} (Temple of Mercy)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन हजारों साल पहले पृथ्वी पर थीं। इस ग्रह को  छोड़ने के वक्त इन्होनें मोक्ष प्राप्त करने की अपेक्षा पृथ्वीवासियों की सेवा करने का व्रत लिया, इसलिए ये बोधिसत्व बन गयीं और तब तक ये ऐसे ही रहेंगी जब तक कि सारे पृथ्वीवासी मुक्त नहीं हो जाते। इनका आकाशीय आश्रय स्थल, टेंपल ऑफ मर्सी, चीन के पेकिंग (बीजिंग) में हैं। ये मनुष्यों को अपने कर्म संतुलित करना, जीवन को द्विव्य योजना के अनुसार चलाना और मानवता की सेवा करना सिखाती हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कुआन यिन की लौ ऑर्किड (orchids) रंग की है, जो कि ईश्वरीय प्रेम के गुलाबी रंग एवं ईश्वरीय इच्छा के नीले रंग का मिश्रण है। गुलाबी-बैंगनी रंग का कमल इनका फूल है - जिसमें मध्य भाग गुलाबी और परिधि का रंग गहरा बैंगनी है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;See_also&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== इसे भी देखिये ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Special:MyLanguage/Kuan Yin’s Crystal Rosary|कुआन यिन की क्रिस्टल जपमाला]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;span id=&amp;quot;Sources&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;/span&amp;gt;&lt;br /&gt;
== स्रोत ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{MTR}}, s.v. “कुआन यिन”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
''कुआन यिन की क्रिस्टल जपमाला'' पुस्तिका, परिचय।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, १ जुलाई १९८८&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट, ५ जुलाई १९९६&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[Category:Heavenly beings]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&amp;lt;references /&amp;gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
	<entry>
		<id>https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuan_Yin/49/hi&amp;diff=169755</id>
		<title>Translations:Kuan Yin/49/hi</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://www.ascendedmasterencyclopedia.org/w/index.php?title=Translations:Kuan_Yin/49/hi&amp;diff=169755"/>
		<updated>2025-03-20T10:05:53Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;PoonamChugh-old: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;कुआन यिन की लौ ऑर्किड (orchids) रंग की है, जो कि ईश्वरीय प्रेम के गुलाबी रंग एवं ईश्वरीय इच्छा के नीले रंग का मिश्रण है। गुलाबी-बैंगनी रंग का कमल इनका फूल है - जिसमें मध्य भाग गुलाबी और परिधि का रंग गहरा बैंगनी है।&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>PoonamChugh-old</name></author>
	</entry>
</feed>