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युगों-युगों तक मनुष्य उच्च आध्यात्मिक अवस्था में [[Special:MyLanguage/Garden of Eden|गार्डन ऑफ़ ईडन]], में ईश्वर के साथ जुड़ा हुआ था। गार्डन ऑफ़ ईडन से बाहर निकलने के बाद जैसे, जैसे समय बदलता गया, मनुष्य धीरे, धीरे अपने ईश्वरीय गुण खोता चला गया और इसके साथ ही उसके त्वचा के रंग में भी बदलाव आना शुरू हो गय। इंद्रधनुष की किरणों के शुद्ध रंग अब न ही मनुष्य की त्वचा में दिखते हैं, न ही उसके आभामंडल में। [[Special:MyLanguage/fallen one|नकारात्मक शक्तियों]] ने मनुष्यों को आपस में लड़ना सीखा दिया है। विभिन्न वर्गों के लोग अक्सर आपस में झगड़ते रहते हैं, एक दुसरे पर हुक्म चलाने की कोशिश में रहते हैं, एक दुसरे को अपना गुलाम बनाने का प्रयतन करते रहते हैं। जिसके फलस्वरूप मनुष्यों की आपसी एकता टूट गयी है और उनके बीच बहने वाली प्रेम की धारा भी बाधित हो गई है। | |||
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युगों-युगों तक मनुष्य उच्च आध्यात्मिक अवस्था में गार्डन ऑफ़ ईडन, में ईश्वर के साथ जुड़ा हुआ था। गार्डन ऑफ़ ईडन से बाहर निकलने के बाद जैसे, जैसे समय बदलता गया, मनुष्य धीरे, धीरे अपने ईश्वरीय गुण खोता चला गया और इसके साथ ही उसके त्वचा के रंग में भी बदलाव आना शुरू हो गय। इंद्रधनुष की किरणों के शुद्ध रंग अब न ही मनुष्य की त्वचा में दिखते हैं, न ही उसके आभामंडल में। नकारात्मक शक्तियों ने मनुष्यों को आपस में लड़ना सीखा दिया है। विभिन्न वर्गों के लोग अक्सर आपस में झगड़ते रहते हैं, एक दुसरे पर हुक्म चलाने की कोशिश में रहते हैं, एक दुसरे को अपना गुलाम बनाने का प्रयतन करते रहते हैं। जिसके फलस्वरूप मनुष्यों की आपसी एकता टूट गयी है और उनके बीच बहने वाली प्रेम की धारा भी बाधित हो गई है।