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ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब प्रकाश के बुद्ध [[Special:MyLanguage/Amitabha|अमिताभ]] ईश्वर में मग्न | ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब प्रकाश के बुद्ध [[Special:MyLanguage/Amitabha|अमिताभ]] (Amitabha) ईश्वर में मग्न अवस्था में परमानंद की अनुभूति कर रहे थे तब उनके दाहिने नेत्र से श्वेत रौशनी की एक किरण उत्पन्न हुई। इस किरण से अवलोकितेश्वर का जन्म हुआ। इसी कारण से अवलोकितेश्वर/ कुआन यिन को अमिताभ का "प्रतिबिंब" माना जाता है। वह ''महा करुणा'' की प्रतिमा हैं, अमिताभ भी महा करुणा का मूर्तरूप हैं। अनुयायियों का ऐसा मानना है कि कुआन यिन अमिताभ की करुणा को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत तरीके से व्यक्त करती हैं और भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर जल्दी देती हैं। | ||
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ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब प्रकाश के बुद्ध अमिताभ (Amitabha) ईश्वर में मग्न अवस्था में परमानंद की अनुभूति कर रहे थे तब उनके दाहिने नेत्र से श्वेत रौशनी की एक किरण उत्पन्न हुई। इस किरण से अवलोकितेश्वर का जन्म हुआ। इसी कारण से अवलोकितेश्वर/ कुआन यिन को अमिताभ का "प्रतिबिंब" माना जाता है। वह महा करुणा की प्रतिमा हैं, अमिताभ भी महा करुणा का मूर्तरूप हैं। अनुयायियों का ऐसा मानना है कि कुआन यिन अमिताभ की करुणा को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत तरीके से व्यक्त करती हैं और भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर जल्दी देती हैं।