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फैरो थटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान मिस्त्र के राजा (Pharaoh) और पुजारी माना जाता है। वह कला के संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। उन्होंने मध्य पूर्व (Middle East) के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शामिल कर उसका | फैरो थटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान मिस्त्र के राजा (Pharaoh) और पुजारी माना जाता है। वह कला के संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। उन्होंने मध्य पूर्व (Middle East) के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शामिल कर उसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के नजदीक के मैदान पर हुए युद्ध में उनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां वह लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए वह अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे (narrow Megiddo) के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) का चित्र लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की। | ||
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फैरो थटमोस III (१५६७ सी.बी) को सबसे महान मिस्त्र के राजा (Pharaoh) और पुजारी माना जाता है। वह कला के संरक्षक थे और मिस्र साम्राज्य के निर्माण का श्रेय भी इनको ही जाता है। उन्होंने मध्य पूर्व (Middle East) के अधिकांश हिस्से को मिस्र साम्राज्य में शामिल कर उसका विस्तार किया था। माउंट कार्मेल (Mt. Carmel) के नजदीक के मैदान पर हुए युद्ध में उनकी जीत सबसे निर्णायक जीत थी। यहां वह लगभग ३३० विद्रोही एशियाई राजकुमारों के गठबंधन को हराने के लिए वह अपनी पूरी सेना को मेगिद्दो दर्रे (narrow Megiddo) के संकीर्ण मार्ग से लेकर गए थे। यह एक साहसिक कदम था जिसका सभी उच्चाधिकारियों ने विरोध किया था। परन्तु अपनी योजना के प्रति पूर्णतया आश्वस्त थटमोस (Thutmose) सूर्य देवता अमोन-रा (Amon-Ra) का चित्र लिए आगे बढ़ते रहे, और विजयश्री प्राप्त की।