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(Created page with "प्रत्येक पारित परीक्षा हमारे चक्रों में पवित्र अग्नि का संचार करती है। इस अर्थ है की दीक्षा संचयी है। हम एक रेखा में जो कमाते हैं उसे अगली रेखा में ले जाना होता है, और इस तरह यह उस क्षे...") |
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प्रत्येक | प्रत्येक पास की गई परीक्षा हमारे चक्रों में पवित्र अग्नि का संचार करती है। इसका अर्थ है कि दीक्षा योग संचयी (cumulative) है। हम एक रेखा के गुणों में सक्षम हो कर जो सीखते हैं उन गुणों को अगली रेखा में ले जाना होता है, और इस तरह हमें उस रेखा में कुशलतापूर्वक सक्षम होने का प्रयास करना चाहिए। इसी तरह, जिस पुण्य कर्म को हम एक रेखा में नहीं सीख पाते, उसे अगली रेखा में जाकर नहीं सीखा जा सकता। इसलिए हमें तैयारी करनी चाहिए। | ||
Latest revision as of 10:33, 15 March 2024
प्रत्येक पास की गई परीक्षा हमारे चक्रों में पवित्र अग्नि का संचार करती है। इसका अर्थ है कि दीक्षा योग संचयी (cumulative) है। हम एक रेखा के गुणों में सक्षम हो कर जो सीखते हैं उन गुणों को अगली रेखा में ले जाना होता है, और इस तरह हमें उस रेखा में कुशलतापूर्वक सक्षम होने का प्रयास करना चाहिए। इसी तरह, जिस पुण्य कर्म को हम एक रेखा में नहीं सीख पाते, उसे अगली रेखा में जाकर नहीं सीखा जा सकता। इसलिए हमें तैयारी करनी चाहिए।