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(Created page with "आप सब मेरे दिल में रहते है और मैं आप सब पर पूरा विश्वास करता हूं। हम पृथ्वी पर सभी के लिए केवल स्वतंत्र और ईश्वर-तुल्य जीवन चाहते हैं। आप में से कई लोगों को पता है कि हम काफी समय से पृथ्व...") |
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आप | अब आप मेरे पास आइए, प्रिय लोगों, क्योंकि मैं आपको अपने हृदय में ले जाता हूँ और आप पर पूरी तरह से रचनात्मक तरीके से भरोसा करता हूँ। हम पृथ्वी पर सब के लिए स्वतंत्र और ईश्वर-तुल्य जीवन चाहते हैं। आप में से कई लोगों को इस बात का ज्ञान है कि हम बहुत समय से पृथ्वी पर एक ऐसी गूढ़ संगठन बनाना चाहते हैं जो हमारे सिद्धांतों को ईमानदारी से आगे बढ़ाये, जो व्यावसायीकरण से मुक्त हो पर फिर भी जिसके पास पर्याप्त धन हो ताकि वह निश्चिन्त हो कर सम्पूर्ण विश्व में कार्य कर सकें। इस संगठन को हम मानवीय राय, नेताओं के बीच असामंजस्य और मनुष्यों के तानाशाही स्तिथियों से मुक्त रखने की भी इच्छा रखते हैं - यह एक कठिन कार्य है पर हम इसके लिए प्रयासरत हैं। हम यह चाहते हैं कि यह संस्था दिव्यगुरूओं के शुद्ध ज्ञान को प्रचारित और प्रसारित करने का कार्य पूरी ईमानदारी से करे। पहले भी ऐसा कई बार हुआ है की संस्था के सदस्यों ने अपने स्वार्थ से प्रेरित होकर काम किया है। मैंने पहले भी कहा है:"मैं धर्म के प्रति समर्पित दस-हजार सामान्य महिलाओं की सहायता से आप सबको दिखाऊंगा कि ईश्वरीय सत्य से दुनिया को कैसे बदला जा सकता है!"<ref>२६ फरवरी १९७८ को सन्देश वाहक एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट ने संत जरमेन के इस वक्तव्य के बारे में कहा: उन्होंने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि यूरोप के वंडरमैन (Wonderman of Europe) के रूप में उन्होंने दिव्यगुरूओं की शिक्षा को प्रचारित करने के लिए ऐसे कई समूहों को प्रायोजित किया था पर बाद में इनमें कुछ ऐसे शक्तिशाली और अमीर लोगों ने प्रवेश किया जो इन समूहों को नियंत्रित करने की कोशिश में लगे और शिक्षा का प्रारूप निर्देशित किया। इन लोगों ने दिव्यगुरूओं की वास्तविक शिक्षाओं को गुप्त रखने का प्रयास भी किया। इसलिए संत जरमेन कहते हैं, ‘मैं लोगों के लिए खड़ा हूं।' यह दिव्य शिक्षा लोगों के लिए है, स्वार्थी लोगों के लिए नहीं। —एड.</ref> | ||
"मैं धर्म के प्रति समर्पित दस-हजार | |||
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अब आप मेरे पास आइए, प्रिय लोगों, क्योंकि मैं आपको अपने हृदय में ले जाता हूँ और आप पर पूरी तरह से रचनात्मक तरीके से भरोसा करता हूँ। हम पृथ्वी पर सब के लिए स्वतंत्र और ईश्वर-तुल्य जीवन चाहते हैं। आप में से कई लोगों को इस बात का ज्ञान है कि हम बहुत समय से पृथ्वी पर एक ऐसी गूढ़ संगठन बनाना चाहते हैं जो हमारे सिद्धांतों को ईमानदारी से आगे बढ़ाये, जो व्यावसायीकरण से मुक्त हो पर फिर भी जिसके पास पर्याप्त धन हो ताकि वह निश्चिन्त हो कर सम्पूर्ण विश्व में कार्य कर सकें। इस संगठन को हम मानवीय राय, नेताओं के बीच असामंजस्य और मनुष्यों के तानाशाही स्तिथियों से मुक्त रखने की भी इच्छा रखते हैं - यह एक कठिन कार्य है पर हम इसके लिए प्रयासरत हैं। हम यह चाहते हैं कि यह संस्था दिव्यगुरूओं के शुद्ध ज्ञान को प्रचारित और प्रसारित करने का कार्य पूरी ईमानदारी से करे। पहले भी ऐसा कई बार हुआ है की संस्था के सदस्यों ने अपने स्वार्थ से प्रेरित होकर काम किया है। मैंने पहले भी कहा है:"मैं धर्म के प्रति समर्पित दस-हजार सामान्य महिलाओं की सहायता से आप सबको दिखाऊंगा कि ईश्वरीय सत्य से दुनिया को कैसे बदला जा सकता है!"[1]
- ↑ २६ फरवरी १९७८ को सन्देश वाहक एलिज़ाबेथ क्लेयर प्रोफेट ने संत जरमेन के इस वक्तव्य के बारे में कहा: उन्होंने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि यूरोप के वंडरमैन (Wonderman of Europe) के रूप में उन्होंने दिव्यगुरूओं की शिक्षा को प्रचारित करने के लिए ऐसे कई समूहों को प्रायोजित किया था पर बाद में इनमें कुछ ऐसे शक्तिशाली और अमीर लोगों ने प्रवेश किया जो इन समूहों को नियंत्रित करने की कोशिश में लगे और शिक्षा का प्रारूप निर्देशित किया। इन लोगों ने दिव्यगुरूओं की वास्तविक शिक्षाओं को गुप्त रखने का प्रयास भी किया। इसलिए संत जरमेन कहते हैं, ‘मैं लोगों के लिए खड़ा हूं।' यह दिव्य शिक्षा लोगों के लिए है, स्वार्थी लोगों के लिए नहीं। —एड.