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सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर <ref>१ | सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर <ref>१ सैमुअल ८:५.</ref> ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”<ref>१ सैमुअल ८:७.</ref> | ||
Latest revision as of 15:03, 3 November 2025
सैमुअल ने अपना बाकी जीवन पूरे देश में न्याय करते हुए बिताया। वृद्ध हो जाने पर उन्होंने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायाधीश नियुक्त क्रर दिया परन्तु उनके पुत्र भ्रष्ट निकले। लोगों ने माँग की कि सैमुअल उन्हें एक राजा दे, जैसा कि अन्य देशों में था। इस बात से बहुत दुःखी होकर [1] ने ईश्वर से प्रार्थना की। फलस्वरूप ईश्वर ने उन्हें निर्देश दिया कि वे लोगों के आदेश का पालन करें। ईश्वर ने कहा, “लोगों ने तुम्हें नहीं, वरन मुझे अस्वीकार किया है, कि मैं उन पर राज्य न करूँ।”[2]