Translations:Antahkarana/6/hi: Difference between revisions
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इस पवित्र | इस पवित्र वस्त्र को आप पिता का दिया हुआ सुरक्षा कवच जानिये। इसे जीवन का जाल समझिये। जिस प्रकार मकड़ी का जाल मध्य से शुरू होकर सर्वत्र फैल जाता है, उसी प्रकार इंसान के अंतःकरण से उत्पन्न चेतना ब्रह्मांडीय चेतना का रूप ले लेती है। जिस प्रकार एक छोटे बालक को सर्दी से बचाने के लिए शाल से अच्छी तरह लपेटा जाता है उसी ध्यानपूर्वक अंतःकरण की भी सुरक्षा की जानी चाहिए। ऐसा आप गौतम की याद में करिये, वो गौतम जो पृथ्वी पर अहम् की [[Special:MyLanguage/sword|तलवार]] उठाने आये थे | ||
Revision as of 09:03, 30 October 2023
इस पवित्र वस्त्र को आप पिता का दिया हुआ सुरक्षा कवच जानिये। इसे जीवन का जाल समझिये। जिस प्रकार मकड़ी का जाल मध्य से शुरू होकर सर्वत्र फैल जाता है, उसी प्रकार इंसान के अंतःकरण से उत्पन्न चेतना ब्रह्मांडीय चेतना का रूप ले लेती है। जिस प्रकार एक छोटे बालक को सर्दी से बचाने के लिए शाल से अच्छी तरह लपेटा जाता है उसी ध्यानपूर्वक अंतःकरण की भी सुरक्षा की जानी चाहिए। ऐसा आप गौतम की याद में करिये, वो गौतम जो पृथ्वी पर अहम् की तलवार उठाने आये थे