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'सरमन ऑन द माउंट' (Sermon on the Mount) में ईसा मसीह कहते हैं कि कर्म का नियम गणितीय नियमों की तरह | 'सरमन ऑन द माउंट' (Sermon on the Mount) में ईसा मसीह कहते हैं कि कर्म का नियम गणितीय नियमों की तरह सूक्ष्म और स्पष्ट है: "आप जिस भाव के साथ निर्णय लेते हैं, उसी भाव के साथ आपका भी न्याय किया जाता है।"<ref>Matt ७:२.</ref> मैथ्यू ५-७ में ईसा मसीह ने धार्मिक और अधार्मिक आचरण (विचारों, भावनाओं, शब्दों और हाथों द्वारा किये गए कार्य) के परिणामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। संभवतः यह कर्म के सिद्धांत पर सबसे बड़ी शिक्षा है, इसमें उन्होंने बताया है कि अपने कर्मों के प्रति हमारी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी (accountability) होती है। | ||
Latest revision as of 11:48, 14 February 2025
'सरमन ऑन द माउंट' (Sermon on the Mount) में ईसा मसीह कहते हैं कि कर्म का नियम गणितीय नियमों की तरह सूक्ष्म और स्पष्ट है: "आप जिस भाव के साथ निर्णय लेते हैं, उसी भाव के साथ आपका भी न्याय किया जाता है।"[1] मैथ्यू ५-७ में ईसा मसीह ने धार्मिक और अधार्मिक आचरण (विचारों, भावनाओं, शब्दों और हाथों द्वारा किये गए कार्य) के परिणामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। संभवतः यह कर्म के सिद्धांत पर सबसे बड़ी शिक्षा है, इसमें उन्होंने बताया है कि अपने कर्मों के प्रति हमारी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी (accountability) होती है।
- ↑ Matt ७:२.