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इस प्रकार का पठन केवल एक आयाम की ही जानकारी देता है - वो इसलिए क्योंकि यह सिर्फ मनुष्य के भौतिक जीवन के अनुभवों को ही देखता समझता है, यह इन अनुभवों का संज्ञान जीवात्मा की [[Special:MyLanguage/Higher Self|आत्मा]] के साथ मिलन की दृष्टि से नहीं लेता अतः सिर्फ कारण के तल से प्रभाव के तल तक सीमित रहता है। इस प्रकार का पठन अंतर्मन में छुपी हुई गहरी भावनाओं को अवश्य जगाता है परन्तु यह उस उत्साह को नहीं दर्शा पाता जो आत्मा से मिलन होने पर जीवात्मा को मिलता है; यह पठन उस प्रसन्नता को नहीं प्रकट कर पाता जो जीवात्मा को एक [[Special:MyLanguage/dark night|अँधेरी रात्रि]] पर विजय प्राप्त करके मिलती है। | इस प्रकार का पठन केवल एक आयाम की ही जानकारी देता है - वो इसलिए क्योंकि यह सिर्फ मनुष्य के भौतिक जीवन के अनुभवों को ही देखता समझता है, यह इन अनुभवों का संज्ञान जीवात्मा की [[Special:MyLanguage/Higher Self|आत्मा]] के साथ मिलन की दृष्टि से नहीं लेता अतः सिर्फ कारण के तल से प्रभाव के तल तक सीमित रहता है। इस प्रकार का पठन अंतर्मन में छुपी हुई गहरी भावनाओं को अवश्य जगाता है परन्तु यह उस उत्साह को नहीं दर्शा पाता जो आत्मा से मिलन होने पर जीवात्मा को मिलता है; यह पठन उस प्रसन्नता को नहीं प्रकट कर पाता जो जीवात्मा को एक [[Special:MyLanguage/dark night|अँधेरी रात्रि]] (dark night) पर विजय प्राप्त करके मिलती है। | ||
Revision as of 08:17, 1 February 2026
इस प्रकार का पठन केवल एक आयाम की ही जानकारी देता है - वो इसलिए क्योंकि यह सिर्फ मनुष्य के भौतिक जीवन के अनुभवों को ही देखता समझता है, यह इन अनुभवों का संज्ञान जीवात्मा की आत्मा के साथ मिलन की दृष्टि से नहीं लेता अतः सिर्फ कारण के तल से प्रभाव के तल तक सीमित रहता है। इस प्रकार का पठन अंतर्मन में छुपी हुई गहरी भावनाओं को अवश्य जगाता है परन्तु यह उस उत्साह को नहीं दर्शा पाता जो आत्मा से मिलन होने पर जीवात्मा को मिलता है; यह पठन उस प्रसन्नता को नहीं प्रकट कर पाता जो जीवात्मा को एक अँधेरी रात्रि (dark night) पर विजय प्राप्त करके मिलती है।