पृथ्वी के प्रारंभिक स्वर्ण युगों के समय दिव्य गुरुओं के ये आश्रय स्थल और उनके [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालय]] पृथ्वी पर ही स्थित थे। [[Special:MyLanguage/fallen angels|पतित देवदूतों]] द्वारा [[Special:MyLanguage/Great Rebellion|महा विद्रोह]] और उनके [[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] की घटनाओं के बाद भी ये आश्रय स्थल कुछ समय तक पृथ्वी पर बने रहे। लेकिन मानव द्वारा उनके अपमान और विनाश के कारण गुरुजन उन्हें सूक्ष्म आध्यात्मिक लोक में ले गए, जहाँ वे अब अदृश्य रूप में माने जाते हैं।
पृथ्वी के प्रारंभिक स्वर्ण युगों के दौरान दिव्य गुरुओं के ये आश्रय स्थल और उनके [[Special:MyLanguage/mystery school|रहस्यवाद के विद्यालय]] पृथ्वी पर ही स्थित थे। [[Special:MyLanguage/fallen angels|पतित देवदूतों]] द्वारा [[Special:MyLanguage/Great Rebellion|महा विद्रोह]] और उनके [[Special:MyLanguage/the Fall|पतन]] के बाद भी ये आश्रय स्थल पृथ्वी पर ही रहे। लेकिन मानव द्वारा उनके अपमान और विनाश के कारण गुरुजन उन्हें सूक्ष्म आध्यात्मिक लोक में ले गए, जहाँ वे अब अदृश्य रूप में माने जाते हैं।
[[Great Rebellion]] (महान विद्रोह) और [[fallen angels]] तथा [[the Fall]] की घटनाओं के बाद भी वे कुछ समय तक पृथ्वी पर बने रहे।
लेकिन जब उनके पवित्र स्थलों (shrines) का अपमान, भ्रष्टाचार और विनाश होने लगा, तब महागुरुओं ने अपने केंद्रों और अपनी आध्यात्मिक ज्वालाओं (flames) को भौतिक जगत से हटाकर “ईथरिक” या सूक्ष्म लोक में स्थापित कर दिया।
इसी कारण इन्हें “retreat” (अर्थात् पीछे हटना या एकांत आश्रय) कहा जाता है।
सरल हिंदी में:
Revision as of 12:01, 20 May 2026
पृथ्वी के प्रारंभिक स्वर्ण युगों के दौरान दिव्य गुरुओं के ये आश्रय स्थल और उनके रहस्यवाद के विद्यालय पृथ्वी पर ही स्थित थे। पतित देवदूतों द्वारा महा विद्रोह और उनके पतन के बाद भी ये आश्रय स्थल पृथ्वी पर ही रहे। लेकिन मानव द्वारा उनके अपमान और विनाश के कारण गुरुजन उन्हें सूक्ष्म आध्यात्मिक लोक में ले गए, जहाँ वे अब अदृश्य रूप में माने जाते हैं।