Translations:Readings/7/hi
दिव्य गुरु इस प्रकार के पठन शिष्य को उसकी जिज्ञासा (curiosity) शांत करने के लिए नहीं देते, ना ही वे यह चाहते हैं की शिष्य स्वयं को बहुत महत्वपूर्ण समझे। वह उसे यह ज्ञान इसलिए देते हैं ताकि वह एकीकरण का नियम (Law of the One) से जीवात्मा के अलग होने की कीमत चुका सके, अपने कर्म को संतुलित कर सके, पुनर्जन्म (reembodiment) के चक्कर से निकल जाए, इश्वरिये जाति के लोग (I AM Race) की सेवा कर सके, अपनी समरूप जोड़ी (twin flame) के साथ मिल सके, और ईश्वर के श्री चरणों में स्थान प्राप्त कर पाए।