Translations:Gautama Buddha/25/hi
एक दिन एक ग्रामीण की बेटी सुजाता ने उन्हें चावल का दूध खिलाया - "यह भोजन इतना अद्भुत था ... कि मेरे भगवान (गौतम) को अपने अंदर शक्ति और स्फूर्ति महसूस हुई, इंतजार की रातें और उपवास के दिन मानों एक सपने की तरह बीत गए हों। "[1] (Edwin Arnold, The Light of Asia (London: Kegan Paul, Trench, Trubner & Co., 1930), p. 96.) वे फिर वहीँ पर बोधि वृक्ष (जो ज्ञानोदय को दर्शाता है) के नीचे बैठ गए और तब तक वहीँ बैठे रहे जब तक कि उन्हें पूर्ण आत्मज्ञान की प्राप्ति नहीं हो गई। इस स्थान को अब इममूवेबल स्पॉट (अचल स्थान) (Immovable Spot) के रूप में जाना जाता है।
- ↑ एडविन अर्नोल्ड, द लाइट ऑफ एशिया (लंदन: केगन पॉल, ट्रेंच, ट्रबनेर एंड कंपनी, 1930), पी. 96.