Translations:Maha Chohan/17/hi
ईश्वर प्रकृति और मनुष्य दोनों को ही जीवनदायनी ऊर्जा देते हैं इसलिए ईश्वर के प्रतिनिधि को इतना सक्षम होना चाहिए वह अपनी चेतना के माध्यम से इन सभी में प्रवेश कर पाएं और उनकी जीवन बनाए रखने वाली लौ को भी प्रज्वल्लित कर सकें।