Translations:Maha Chohan/24/hi
...प्राचीन काल के एक महान बुनकर (weaver) की तरह वह दिव्यगुरु के प्रकाश और प्रेम का एक बेजोड़ वस्त्र बुनते हैं। ईश्वर की दृष्टि मनुष्य पर केंद्रित होकर प्रकाश की उज्ज्वल किरणों के द्वारा पवित्रता और सुख के जगमगाते अंशों को पृथ्वी की ओर और ईश्वर के बच्चों के हृदयों में प्रवाहित करती है, जबकि मनुष्य की आशाएं, आकांक्षाएं, प्रार्थनाएं और सहायता के लिए आह्वान और पुकारें, उन्हें ईश्वर के ब्रह्मांडीय पवित्रता के विशाल आश्रय में ले जाती हैं...