Translations:Mary, the mother of Jesus/34/hi
पूर्वी देशों में ईश्वर को माँ के रूप में देखना कोई नई बात नहीं है। हिंदू लोग माँ का ध्यान कुंडलिनी देवी (Goddess Kundalini) के रूप में करते हैं; वे माँ को एक श्वेत प्रकाश या कुंडली मार के बैठे हुए सर्प के रूप में वर्णित करते हैं - यह सर्प मूलाधार चक्र से ऊपर उठ, प्रत्येक चक्र (आध्यात्मिक केंद्र) को सक्रीय और प्रकाशित करता हुआ सहस्रार चक्र तक जाता है। स्त्री और पुरुष दोनों का ही उद्देश्य अपने अंतरतम अस्तित्व के इस पवित्र प्रकाश को जगाना है जो अन्यथा हमारे भीतर सुप्त अवस्था में रहता है। ईश्वर के मातृ स्वरुप की आराधना ही इस ऊर्जा - कुंडलिनी - को खोलने की कुंजी है।