Translations:Rays/2/hi

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दिव्य या अदिव्य (ascended or unascended) गुरु अपनी ईश्वरीय चेतना द्वारा मनुष्यों के विभिन्न चक्रों (chakras) तथा तृतीय नेत्र (third eye) में किरणों का केन्द्रीकरण (concentration) करते हैं। इससे मनुष्य में प्रेम, सत्य, ज्ञान, तथा उपचार करने की ईश्वरीय क्षमता का विकास होता है।