भारतीय लेखक ए. पार्थसारथी कहते हैं कि कार्तिकेय उस "पूर्ण पुरुष" का दर्शाते हैं जिन्होंने परमात्मा का ज्ञान प्राप्त कर लिया है। उनका विनाशकारी भाला उन सभी नकारात्मक प्रवृत्तियों के नाश का प्रतीक है जो मनुष्य के दिव्य स्व को ढक लेती हैं।[1]
- ↑ ए. पार्थसारथी, स्य्म्बोलिस्म इन हिन्दुइस्म", पृष्ठ १५१.