Translations:Sanat Kumara and Lady Master Venus/88/hi
प्रकाश की दहलीज पर बैठे हुए, सनत कुमार अंधकार के घेरे के भीतर से प्रकाश को देखते हैं, यह अँधेरा घेरा वे पार नहीं करेंगे और ना ही वे जीवन-पर्यन्त अपना स्थान छोड़ेंगे। यह एकाकी पहरेदार क्यों सदैव अपने स्वयं के चुने हुए स्थान पर बैठे रहते हैं?... वो इसलिए क्योंकि पृथ्वीवासी अपने असली घर लौटने की प्रक्रिया में हैं, वे इस जीवन चक्र से थक चुके हैं परन्तु किसी भी क्षण वे अपने रास्ते से भटक सकते हैं, भौतिक जगत के मायाजाल में पुनः फँस सकते हैं। सनत कुमार इन सभी जीवों को रास्ता दिखाने के लिए खड़े हैं, वे चौक्कन्ने हैं कि कोई रास्ता न भटके। सनत कुमार ने मनुष्यों के लिए स्वयं का बलिदान दिया है, और कुछ गिने चुने लोगों को इस बलिदान का फायदा अवश्य हो सकता है।