Translations:Soul/22/hi
"जीवात्मा का आसन चक्र (Seat-of-the-Soul Chakra) वह स्थान है जहाँ जीवात्मा अपने वास्तविक स्वरूप (Real Self) तथा अवास्तविक या अहंकार-आधारित स्वरूप (Not-Self) के संबंध में आत्मज्ञान प्राप्त करती है।
यहीं जीवात्मा अपने समग्र व्यक्तित्व (Integral Soul-Personality) के प्रति आत्म-सचेत जागरूकता (Self-conscious Awareness) प्राप्त करती है, जो एक ओर आंशिक रूप से परमेश्वर के साथ एकीकृत (Partially Integrated in God) है और दूसरी ओर आंशिक रूप से अवास्तविक स्व (Not-Self) के साथ जुड़ा हुआ है।
ये दोनों अवस्थाएँ उन चुनावों (Choices) का परिणाम हैं, जो जीवात्मा ने अनेक जन्मों (Many Lifetimes) के दौरान किए हैं।"