Translations:Soul/28/hi
"केवल तब, जब जीवात्मा (Soul) मूलाधार चक्र (Base-of-the-Spine Chakra) से लेकर हृदय चक्र (Heart Chakra) तक के प्रत्येक चक्र-स्तर (Stations of the Chakras) पर बार-बार अपनी दीक्षाओं (Initiations) को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेती है, तभी वह कंठ चक्र (Throat Chakra), आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) और सहस्रार चक्र (Crown Chakra) में वास्तविक आत्म-प्रभुत्व (True Self-Mastery) की ओर अग्रसर हो सकती है।
हृदय चक्र के नीचे स्थित सभी चक्र 'इलेक्ट्रॉनिक बेल्ट' (Electronic Belt) से घिरे हुए हैं, जो हमारे सभी पूर्वजन्मों (Previous Lifetimes) के कर्मों (Karma) का भंडार (Repository) माना जाता है।
जीवात्मा काफी हद तक उन्हीं कर्म-अभिलेखों (Karmic Records) के केंद्र में स्थित रहती है और एक सीमा तक उन्हीं का परिणाम (Product) होती है, क्योंकि वह स्वयं उन कर्मों के निर्माण (Making of Karma) में सहभागी रही है।"