Translations:Soul/8/hi
"आरोहित आचार्यों (Ascended Masters) ने जीवात्मा (Soul) को उस बालक के रूप में संबोधित किया है जो हमारे भीतर निवास करता है। मनोवैज्ञानिकों (Psychologists) ने इसी जीवात्मा को 'अंतःस्थित बालक' (Inner Child) नाम दिया है।
जीवात्मा को चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए, वह अंततः जीवात्मा ही रहती है। और हम उसके माता-पिता भी हैं, उसके शिक्षक भी, और साथ ही उसके विद्यार्थी भी।"