Translations:Maha Chohan/30/hi: Difference between revisions

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मृत्यु के समय जब जीवात्मा का [[Special:MyLanguage/transition|पारगमन]] होता है, तब भी महा चौहान मनुष्य के साथ होते हैं । इस समय वे जीवन की लौ और पवित्र श्वास को वापिस लेने के लिए आते हैं। जीवन की लौ और [[Special:MyLanguage/etheric body|आकाशीय शरीर]] में लिपटी हुई जीवात्मा तब [[Special:MyLanguage/Holy Christ Self|पवित्र आत्मिक स्व]] में लौट जाती है। इसी प्रकार, महा चौहान जीवन के हर एक मोड़ पर हमारे साथ रहते हैं। यदि आप निर्णय लेते समय एक पल का विराम लें, ईश्वर का ध्यान करें और कहें - ईश्वर, आइये, मुझे समझाइये - तो आप उनकी मंत्रणा सुन पाएंगे।
मृत्यु के समय जब जीवात्मा का [[Special:MyLanguage/transition|पारगमन]] होता है, तब भी महा चौहान मनुष्य के साथ होते हैं । इस समय वह जीवन की लौ और पवित्र श्वास को वापिस लेने के लिए आते हैं। जीवन की लौ और [[Special:MyLanguage/etheric body|आकाशीय शरीर]] में लिपटी हुई जीवात्मा तब [[Special:MyLanguage/Holy Christ Self|पवित्र आत्मिक स्व]] में लौट जाती है। इसी प्रकार, महा चौहान जीवन के हर एक मोड़ पर हमारे साथ रहते हैं। यदि आप कोई भी निर्णय लेते समय एक पल का विराम लें, ईश्वर का ध्यान करें और कहें - ईश्वर, आइये, मुझे समझाइये - तो आप उनकी मंत्रणा सुन पाएंगे।

Latest revision as of 10:49, 16 December 2025

Information about message (contribute)
M&TR
Message definition (Maha Chohan)
The Maha Chohan also attends at the [[transition]] called death, when he comes to withdraw the flame of life and to withdraw the holy breath. The flame, or divine spark, returns to the [[Holy Christ Self]], and the soul, clothed in the [[etheric body]], also returns to the level of the Holy Christ Self. Similarly, he will minister to you at every crossroad in life, if you will but pause for a moment when making decisions, think of the Holy Spirit and simply say the mantra, “Come, Holy Spirit, enlighten me.”

मृत्यु के समय जब जीवात्मा का पारगमन होता है, तब भी महा चौहान मनुष्य के साथ होते हैं । इस समय वह जीवन की लौ और पवित्र श्वास को वापिस लेने के लिए आते हैं। जीवन की लौ और आकाशीय शरीर में लिपटी हुई जीवात्मा तब पवित्र आत्मिक स्व में लौट जाती है। इसी प्रकार, महा चौहान जीवन के हर एक मोड़ पर हमारे साथ रहते हैं। यदि आप कोई भी निर्णय लेते समय एक पल का विराम लें, ईश्वर का ध्यान करें और कहें - ईश्वर, आइये, मुझे समझाइये - तो आप उनकी मंत्रणा सुन पाएंगे।