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एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित। और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ को वापिस ले लिया तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जर्मेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था।
एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित (disbanded) और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ (sponsorship) तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को [[Special:MyLanguage/etheric plane|आकाशीय स्तर]] (etheric plane) पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों में दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों (finer bodies) को (नींद या [[Special:MyLanguage/samadhi|समाधि]] के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जरमेन]] के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था।

Latest revision as of 23:35, 22 January 2026

Information about message (contribute)
SGOA
Message definition (Mystery school)
One by one, these mystery schools were destroyed or disbanded. And wherever this happened, the ascended masters who sponsored them withdrew their flames and sacred shrines to their retreats on the [[etheric plane]]. Here their disciples are trained between embodiments and in their finer bodies (during sleep or [[samadhi]]) in order that they might attain that Divine Self-knowledge which, until [[Saint Germain]] once again advanced it in this century, has not been available to mankind en masse in the physical plane for centuries.

एक-एक करके, ये रहस्यवादी विद्यालय या तो नष्ट हो गए या विघटित (disbanded) और जहाँ जहां ऐसा हुआ, वहां उन्हें शुरू करवाने वाले दिव्यगुरुओं ने अपनी लौ (sponsorship) तथा इन पवित्र तीर्थस्थलों को आकाशीय स्तर (etheric plane) पर स्थित अपने आश्रयों स्थलों में वापस ले लिया। इन आकाशीय आश्रय स्थलों में दिव्यगुरूओं के शिष्य शिक्षा पाते हैं - प्रशिक्षण या तो दो जन्मों के बीच के समय में दिया जाता है या फिर और उनके सूक्ष्म शरीरों (finer bodies) को (नींद या समाधि के दौरान) वहाँ ले जाकर। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि शिष्य उस दिव्य आत्म-ज्ञान को प्राप्त कर सकें जो इस सदी में संत जरमेन के आने से पहले भौतिक स्तर पर उपलब्ध नहीं था।