Translations:Original sin/10/hi

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ऑगस्टीन के अनुसार, जब मसीह (Christ) पृथ्वी पर आए, तो उन्होंने लोगों को परमेश्वर की कृपा (state of grace) की स्थिति में पुनः स्थापित होने का अवसर प्रदान किया।

वे परमपिता परमेश्वर (the Father) और उसकी आज्ञा न मानने वाली सृष्टि (disobedient creation) के बीच मध्यस्थ (mediator) का कार्य करते हैं।

यद्यपि मसीह का हस्तक्षेप (intercession) लोगों को शारीरिक मृत्यु से नहीं बचाएगा, फिर भी वह उन्हें शारीरिक पुनरुत्थान (bodily resurrection) के माध्यम से फिर से शारीरिक अमरता (physical immortality) की अवस्था में लौटने का अवसर देगा।

परमेश्वर की कृपा (Grace) पृथ्वी पर उनके साथ बुरी घटनाओं को होने से नहीं रोकेगी, लेकिन मृत्यु के बाद उनकी अमरता (eternal life) की गारंटी देगी।