Translations:Original sin/36/hi

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जब तक पुरुष और स्त्री, पुत्र और पुत्री, अपने हृदय में संतुलित त्रिगुण ज्योति (balanced threefold flame) को अपनी ईश्वरीय पहचान (God-identity) के आत्मिक क्षेत्र (Spirit sphere) के केंद्र के रूप में धारण नहीं करते, तब तक वे भौतिक जगत (Matter plane) में ईश्वर के उभयलिंगी (androgynous) स्वरूप का अनुभव नहीं कर सकते।

आदम और हव्वा द्वारा भौतिक जगत में अपनी पूर्णता (wholeness) खो देने के परिणामस्वरूप यह कर्म (karma) उत्पन्न हुआ कि हव्वा की इच्छा अपने पति की ओर और आदम की इच्छा अपनी पत्नी की ओर हो गई।

इस प्रकार, भौतिक संसार में पिता-माता परमेश्वर (Father-Mother God) की संपूर्णता का अनुभव करने के लिए दो व्यक्तियों (पुरुष और स्त्री) की आवश्यकता पड़ती है।